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Thyroid Nodule — Cancer का डर कब? FNAC से पहले समझ लें

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

सुबह शीशे के सामने खड़े होकर कंघी करते हुए अचानक आपकी नज़र गले के पास एक छोटे से उभार पर पड़ती है। आप उँगलियों से उसे छूते हैं एक सख्त सी गाँठ। पानी निगलते समय वह गाँठ ऊपर-नीचे होती है। उसी पल आपके दिमाग में एक भयानक शब्द गूँजने लगता है ‘कैंसर’। आप घबराकर तुरंत डॉक्टर के पास भागते हैं, जहाँ कुछ टेस्ट्स के बाद आपको बताया जाता है कि यह 'थायरॉइड नोड्यूल' Thyroid Nodule है और इसके लिए FNAC Fine Needle Aspiration Cytology टेस्ट या फिर सीधे सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।इस भारी मेडिकल शब्दावली और सर्जरी के डर के बीच मरीज़ की रातों की नींद उड़ जाती है। लेकिन क्या गले में उभरी हर गाँठ कैंसर होती है? विज्ञान कहता है कि 90 से 95 प्रतिशत थायरॉइड नोड्यूल्स पूरी तरह से हानिरहित Benign होते हैं। यह गाँठ आपके शरीर का कोई दुश्मन नहीं है, बल्कि यह आपके बिगड़े हुए मेटाबॉलिज़्म, असंतुलित हार्मोन्स और शरीर में जमा हो रहे 'आम' Toxins की एक पुकार है।

FNAC की सुई गले में चुभने से पहले, यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आखिर यह गाँठ बनी क्यों और क्या बिना काटे-छीले इसे प्राकृतिक रूप से घोला जा सकता है? आइए, इस डर के जाल से बाहर निकलें और समझें कि आयुर्वेद की गहराई इस समस्या का क्या स्थायी समाधान देती है।

गले में यह गाँठ Thyroid Nodule शरीर में क्या संकेत देती है?

थायरॉइड ग्रंथि हमारे गले के निचले हिस्से में तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज़्म को नियंत्रित करती है। जब इस ग्रंथि की कुछ कोशिकाएँ Cells असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और एक जगह इकट्ठा होकर एक गुच्छा या गाँठ बना लेती हैं, तो उसे थायरॉइड नोड्यूल कहते हैं।

यह कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है। यह शरीर के भीतर चल रही कई गड़बड़ियों का परिणाम है:

  • आयोडीन का असंतुलन: शरीर में आयोडीन की भारी कमी या अचानक बहुत अधिक मात्रा थायरॉइड ग्रंथि को ओवरवर्क करने पर मजबूर कर देती है, जिससे गाँठें बन जाती हैं।
  • ऑटोइम्यून कंडीशन्स Hashimoto’s: जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करने लगती है, तो ग्रंथि में भारी सूजन और नोड्यूल्स पनपने लगते हैं।
  • मेटाबॉलिक कचरा Toxins: खराब जीवनशैली और जंक फूड के कारण जब शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, तो शरीर के टॉक्सिन्स गले के हिस्से में जमा होने लगते हैं।
  • मानसिक तनाव का ज़हर: क्रोनिक स्ट्रेस और एंग्ज़ायटी सीधा आपके एंडोक्राइन Endocrine सिस्टम पर वार करते हैं, जिससे हार्मोनल असंतुलन होता है और ग्रंथियों में सूजन आ जाती है।

थायरॉइड नोड्यूल किन प्रकारों में सामने आता है?

हर इंसान का शरीर और उसके त्रिदोष वात, पित्त, कफ अलग होते हैं। इसीलिए थायरॉइड नोड्यूल भी हर किसी में एक जैसा नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार इसे मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान नोड्यूल: इस स्थिति में गाँठ बहुत सख्त Hard, खुरदरी और छूने पर दर्द करने वाली होती है। मरीज़ को गले में रूखापन और आवाज़ में भारीपन Hoarseness महसूस होता है।
  • पित्त-प्रधान नोड्यूल: इसमें गाँठ तेज़ी से बढ़ती है। गले के आसपास लालिमा, जलन और गर्माहट महसूस होती है। इसके साथ ही मरीज़ को अत्यधिक पसीना आना, घबराहट और वज़न तेज़ी से गिरने Hyperthyroidism जैसे लक्षण दिखते हैं।
  • कफ-प्रधान नोड्यूल: यह गाँठ छूने में बहुत मुलायम, ठंडी और बिना दर्द वाली Painless होती है। यह बहुत धीरे-धीरे बढ़ती है। इसके साथ मरीज़ को भारी सुस्ती, वज़न बढ़ना, और शरीर में भारीपन Hypothyroidism जैसे कफ के लक्षण घेर लेते हैं।

क्या आपको भी थायरॉइड नोड्यूल के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

थायरॉइड की गाँठ रातों-रात इतनी बड़ी नहीं होती कि वह बाहर से दिखने लगे। यह बहुत पहले से शरीर में छोटे-छोटे संकेत देती है, जिन्हें हम अक्सर मौसम का बदलाव या सामान्य खराश मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर आपको ये संकेत दिख रहे हैं, तो सतर्क हो जाएँ:

  • निगलने में अड़चन Dysphagia: खाना खाते समय या केवल थूक निगलते समय गले में एक अजीब सा अटकाव या भारीपन महसूस होना।
  • आवाज़ में अचानक बदलाव: बिना किसी सर्दी-ज़ुकाम के आपकी प्राकृतिक आवाज़ का भारी, फटी हुई या खुरदरी Husky voice हो जाना।
  • गले में जकड़न और दर्द: गर्दन के निचले हिस्से में लगातार एक हल्का दर्द बने रहना जो कभी-कभी कानों और जबड़े तक पहुँच जाता है।
  • साँस लेने में परेशानी: जब गाँठ का आकार बढ़ने लगता है, तो वह साँस की नली Windpipe पर दबाव डालती है, जिससे पीठ के बल लेटने पर साँस फूलने लगती है।

नोड्यूल को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

गाँठ का पता चलने के बाद घबराहट में या फिर लापरवाही में मरीज़ अक्सर ऐसे कदम उठा लेते हैं, जो समस्या को सुलझाने के बजाय और उलझा देते हैं:

  • सर्जरी की जल्दबाज़ी: केवल गाँठ देखकर बिना कारण जाने सीधे सर्जरी से थायरॉइड का हिस्सा निकलवा देना। इससे इंसान जीवन भर के लिए थायरॉइड की गोलियों का मोहताज़ हो जाता है।
  • 'कुछ नहीं होगा' वाली सोच: गाँठ को पूरी तरह अनदेखा करना और लाइफस्टाइल में कोई बदलाव न करना। इससे गाँठ का आकार बढ़ता रहता है और वह साँस की नली को चोक Choke कर सकती है।
  • डाइट पर ध्यान न देना: दवाइयाँ खाते रहना लेकिन साथ में गोभी, सोया और जंक फूड जैसी चीज़ें खाते रहना, जो थायरॉइड ग्रंथि को लगातार नुकसान पहुँचाते हैं।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो यह साधारण ग्रंथि Benign Nodule भविष्य में टॉक्सिक मल्टीनोड्यूलर गोइटर Toxic multinodular goiter में बदल सकती है, जो हार्ट के लिए बहुत खतरनाक स्थिति पैदा कर देता है।

आयुर्वेद थायरॉइड नोड्यूल और 'कैंसर के डर' को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे थायरॉइड नोड्यूल या ट्यूमर कहता है, आयुर्वेद उसे 'गलगण्ड' Galaganda या 'ग्रंथि रोग' के बहुत स्पष्ट विज्ञान से समझता है।

  • कफ और मेद धातु का दूषित होना: आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में कफ दोष बहुत अधिक बढ़ जाता है और वह वात के साथ मिलकर शरीर की चर्बी मेद धातु और मांसपेशियों मांस धातु को दूषित कर देता है, तो गले के हिस्से में एक अवरोध Blockage पैदा होता है, जो गाँठ का रूप ले लेता है।
  • जठराग्नि और धात्वाग्नि की कमज़ोरी: जब आपका पाचन तंत्र जठराग्नि कमज़ोर होता है, तो भोजन सही से पचने के बजाय 'आम' Toxins में बदल जाता है। यह आम जब थायरॉइड ग्रंथि की अपनी अग्नि धात्वाग्नि को बुझा देता है, तो वहाँ की कोशिकाएँ अनियंत्रित होकर गाँठ बनाने लगती हैं।
  • कैंसर का भ्रम: आयुर्वेद स्पष्ट करता है कि हर 'ग्रंथि' Lump 'अर्बुद' Cancer/Malignant tumor नहीं होती। जब तक गाँठ के अंदर बहुत भयंकर दोषों का प्रकोप न हो और शरीर का ओज Immunity पूरी तरह नष्ट न हो जाए, तब तक गाँठ कैंसर में नहीं बदलती।

नोड्यूल को सिकोड़ने और मेटाबॉलिज़्म सुधारने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका आहार थायरॉइड की गाँठ को या तो पत्थर की तरह सख्त बना सकता है, या फिर उसे पिघलाने में जड़ी-बूटियों की मदद कर सकता है। इस आयुर्वेदिक डाइट को तुरंत अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ:

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - गाँठ को पिघलाने और अग्नि बढ़ाने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - कफ और टॉक्सिन्स बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, जौ Yava - गाँठ पिघलाने के लिए सर्वश्रेष्ठ, मूंग दाल, ज्वार। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद बेकरी प्रोडक्ट्स, भारी और नया चावल।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी, कच्ची घानी का सरसों का तेल सीमित मात्रा में। रिफाइंड ऑयल, बहुत अधिक क्रीम, डालडा, मेयोनीज़।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, परवल, कद्दू, सहजन Drumsticks - सूजन कम करने के लिए। पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, शलजम ये Goitrogens हैं जो नोड्यूल बढ़ाते हैं।
फल और मेवे Fruits & Nuts सेब, पपीता, अनार, रात भर भीगे हुए अखरोट, चिया सीड्स। डिब्बाबंद जूस, बहुत अधिक केले या अत्यधिक मीठे और भारी फल।
पेय पदार्थ Beverages धनिया के बीजों का पानी थायरॉइड के लिए अचूक, गर्म पानी, ताज़ा मट्ठा। कोल्ड ड्रिंक्स, बहुत ज़्यादा कैफीन, सोया मिल्क Soy milk सख्त मना है।

ग्रंथि Nodule को पिघलाने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें कुछ ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो शरीर के किसी भी हिस्से में बनी गाँठ को भेदने तोड़ने की जादुई क्षमता रखते हैं:

  • कांचनार Kanchanar: आयुर्वेद में गले की गाँठ गलगण्ड को घोलने के लिए कांचनार से बड़ी कोई औषधि नहीं है। यह विशेष रूप से कफ और मेद Fat को काटकर थायरॉइड ग्रंथि की सूजन को खत्म करती है।
  • गुग्गुलु Guggulu: इसमें 'लेखन' Scraping का गुण होता है। यह शरीर की पुरानी से पुरानी और सख्त गाँठ को खुरच-खुरच कर पिघला देता है और शरीर से बाहर निकालता है।
  • वरुण Varuna: यह जड़ी-बूटी शरीर के लिंफेटिक Lymphatic सिस्टम की सफाई करती है और गले के आसपास जमे हुए ज़हरीले तत्वों को साफ करती है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: स्ट्रेस के कारण बिगड़े हुए हार्मोन्स को वापस संतुलन में लाने और शरीर की प्राकृतिक इम्यूनिटी ओज बढ़ाने के लिए यह एक शानदार एडाप्टोजेन है।
  • त्रिकटु Trikatu: सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली का यह मिश्रण जठराग्नि को भड़काता है, जिससे शरीर का धीमा पड़ा हुआ मेटाबॉलिज़्म रॉकेट की तरह काम करने लगता है।

गाँठ को घोलने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब गाँठ पुरानी और सख्त हो जाती है, तो केवल दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये विशेष थेरेपीज़ ग्रंथि पर सीधा वार करती हैं:

  • उद्वर्तन Udwarthana: विशेष सूखी जड़ी-बूटियों के पाउडर से शरीर की उल्टी दिशा में मालिश की जाती है। यह सीधे कफ दोष और मेद चर्बी को काटती है और मेटाबॉलिज़्म बढ़ाती है।
  • ग्रीवा लेपम Greeva Lepam: गले के हिस्से पर कांचनार और दशांग लेप जैसे खास औषधीय लेप लगाए जाते हैं। यह लेप बाहर से गाँठ की सूजन और जकड़न को खींच लेता है।
  • नस्य Nasya: नाक के ज़रिए औषधीय तेल या घी जैसे षड्बिंदु तेल डाला जाता है। नाक मस्तिष्क का दरवाज़ा है, और यह थेरेपी सीधे पिट्यूटरी ग्रंथि और थायरॉइड ग्रंथि के रिसेप्टर्स को जगाकर हार्मोनल संतुलन बनाती है।
  • विरेचन Virechana: शरीर के अंदर जमे हुए पित्त और टॉक्सिन्स को औषधीय दस्त के ज़रिए बाहर निकाला जाता है, जिससे पूरा एंडोक्राइन सिस्टम डिटॉक्स हो जाता है।

थायरॉइड नोड्यूल के रिपेयर होने और सिकुड़ने में कितना समय लगता है?

गाँठ एक दिन में नहीं बनती, इसलिए उसे सुरक्षित रूप से पिघलाने में भी शरीर को एक अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से सबसे पहले आपका पाचन अग्नि सुधरेगा। गले का भारीपन, निगलने में होने वाली अड़चन और दर्द में काफी राहत मिलेगी। शरीर की सुस्ती टूटेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और कांचनार गुग्गुलु जैसे रसायनों के प्रभाव से नोड्यूल का बढ़ना पूरी तरह रुक जाएगा और वह छूने पर नरम Soft महसूस होने लगेगी। हार्मोन्स बैलेंस होना शुरू हो जाएंगे।
  • 5-6 महीने: ग्रंथि के आकार में भारी कमी Reduction in size दर्ज की जाएगी। आपका एंडोक्राइन सिस्टम प्राकृतिक रूप से काम करने लगेगा और आपको सर्जरी के डर से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गले की इस गाँठ को देखने और इसके इलाज के नज़रिए में आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के बीच एक ज़मीन-आसमान का अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic & Surgical care आयुर्वेद Holistic & Lekhana care
इलाज का मुख्य लक्ष्य वेट एंड वॉच' करना। अगर गाँठ बढ़े तो FNAC करना और फिर सीधे सर्जरी से ग्रंथि निकाल देना। वेट' नहीं करना। अग्नि को सुधारना और 'लेखन' खुरचने वाली औषधियों से गाँठ को पिघलाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल थायरॉइड ग्लैंड का एक लोकलाइज़्ड Localised टिश्यू ग्रोथ मानना और कैंसर के डर से देखना। इसे जठराग्नि की कमज़ोरी, कफ-मेद की विकृति और 'गलगण्ड' Galaganda का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल सिंथेटिक हार्मोन पिल्स दी जाती हैं, लेकिन खानपान या तनाव प्रबंधन पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-कफ शामक डाइट, गोइट्रोजेन्स Goitrogens का परहेज़, योग और नस्य थेरेपी को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर सर्जरी के बाद जीवन भर के लिए सिंथेटिक थायरॉइड हार्मोन Thyroxine की गोलियों पर निर्भर होना पड़ता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, गाँठ प्राकृतिक रूप से घुलती है और ग्रंथि खुद अपने हार्मोन्स बनाने लगती है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

यद्यपि 95% थायरॉइड नोड्यूल्स कैंसर नहीं होते और आयुर्वेद उन्हें शानदार तरीके से पिघला सकता है, लेकिन अगर आपको अपने गले में ये कुछ गंभीर और तेज़ बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच अल्ट्रासाउंड/FNAC ज़रूरी हो जाती है:

  • गाँठ का अचानक तेज़ी से बढ़ना: अगर कुछ ही हफ्तों में गाँठ का आकार दोगुना हो जाए और वह बाहर से बहुत बड़ी दिखने लगे।
  • साँस लेने में भयंकर रुकावट: अगर लेटते समय ऐसा लगे कि कोई आपका गला दबा रहा है और साँस बिल्कुल अंदर नहीं जा रही है।
  • गाँठ का पत्थर जैसा सख्त होना: अगर गाँठ छूने पर बिल्कुल भी हिले-डुले नहीं और किसी हड्डी या पत्थर की तरह गले में फिक्स Fixed महसूस हो।
  • निगलने में पूरी तरह असमर्थता: अगर पानी का एक घूंट निगलना भी दर्दनाक और असंभव सा लगने लगे।

निष्कर्ष

गले में उभरने वाली थायरॉइड की गाँठ आपके जीवन का अंत या 'कैंसर' का फाइनल सर्टिफिकेट नहीं है। यह महज़ आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका कफ और मेद दोष भड़क चुका है, आपका मेटाबॉलिज़्म सो गया है और आपकी एंडोक्राइन ग्रंथियाँ भारी दबाव में हैं। जब आप इस अलार्म को सुनकर डर जाते हैं और बिना सोचे-समझे सर्जरी के लिए अपनी ग्रंथि कटवाने पहुँच जाते हैं, तो आप शरीर की एक प्राकृतिक मशीन को हमेशा के लिए खो देते हैं। इस 'सर्जरी के डर' के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपनी डाइट को सुधारें, गोभी-सोया जैसी चीज़ों से दूर रहें और अपनी थाली में धनिया, पुराना चावल और घी शामिल करें। कांचनार, गुग्गुलु और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और उद्वर्तन व नस्य थेरेपी से अपनी इस गाँठ को प्राकृतिक रूप से पिघलने दें। अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को कटने न दें, और अपने नर्वस व एंडोक्राइन सिस्टम को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

FNAC (Fine Needle Aspiration Cytology) एक टेस्ट है जिसमें डॉक्टर गले की गाँठ में एक बहुत पतली सुई डालकर कुछ कोशिकाएँ निकालते हैं और माइक्रोस्कोप में चेक करते हैं कि कहीं वे कैंसर वाली तो नहीं हैं। अगर गाँठ बहुत सख्त है, तेज़ी से बढ़ रही है या अल्ट्रासाउंड में उसका शेप संदिग्ध (Suspicious) है, तभी यह टेस्ट ज़रूरी होता है।

गोइटर में पूरी की पूरी थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है और पूरा गला सूजा हुआ दिखता है। जबकि नोड्यूल में पूरी ग्रंथि नहीं सूजती, बल्कि ग्रंथि के किसी एक हिस्से में मटर या चने के दाने जैसी एक अलग गाँठ बन जाती है।

हाँ, बिल्कुल। अगर गाँठ नॉन-कैंसरस (Benign) है, तो आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु जैसी लेखनीय (Scraping) औषधियों और पंचकर्म के माध्यम से इसे बिना किसी कट-चीरे के पूरी तरह से सुखाया और पिघलाया जा सकता है।

इन सब्ज़ियों को गोइट्रोजेन्स (Goitrogens) कहा जाता है। कच्ची या कम पकी हुई गोभी, ब्रोकली और सोयाबीन थायरॉइड ग्रंथि को आयोडीन सोखने से रोकते हैं, जिससे ग्रंथि को ज़्यादा काम करना पड़ता है और गाँठ का आकार और तेज़ी से बढ़ने लगता है।

कैंसर को लेकर यह एक बहुत बड़ा मिथक है। ज़्यादातर सामान्य (Benign) गाँठों में भी कोई दर्द नहीं होता। दर्द न होना कैंसर का पक्का लक्षण नहीं है। इसलिए घबराएं नहीं, सही जाँच और आयुर्वेदिक इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है।

नहीं। हालांकि कांचनार गुग्गुलु गाँठ पिघलाने में अचूक है, लेकिन आपकी गाँठ वातज है, पित्तज या कफज—इसके आधार पर डॉक्टर इसके साथ अनुपान (जैसे त्रिफला जल या गर्म पानी) और डोज़ तय करते हैं। गलत डोज़ से शरीर में अत्यधिक खुश्की (Dryness) आ सकती है।

बिल्कुल। अत्यधिक तनाव से शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन बढ़ता है, जो सीधे आपकी थायरॉइड ग्रंथि के कामकाज को बिगाड़ देता है। इस हार्मोनल उथल-पुथल (Vitiation of Vata) के कारण ही ग्रंथियों में गांठें (Granthi) बनने लगती हैं।

नहीं। एलोपैथिक थायरॉइड की गोली एकदम से बंद करने से आपके शरीर में भयंकर हार्मोनल क्रैश आ सकता है। आयुर्वेदिक औषधियाँ शुरू करने के साथ डॉक्टर की निगरानी में धीरे-धीरे (Tapering off) एलोपैथिक डोज़ को कम किया जाता है।

कभी-कभी पानी या लिक्विड से भरी गाँठ (Cystic nodule) अपने आप सिकुड़ सकती है, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है। अगर मेटाबॉलिज़्म नहीं सुधारा गया, तो वह गाँठ वहीं बनी रहती है या आकार में बड़ी होने लगती है। आयुर्वेद इसे प्राकृतिक रूप से सिकुड़ने में तेज़ी लाता है।

आमतौर पर डॉक्टर शुरुआत में हर 6 से 12 महीने में एक बार थायरॉइड अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं, ताकि यह मॉनिटर किया जा सके कि आयुर्वेदिक इलाज से गाँठ के आकार में कितनी कमी आ रही है।

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