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Stress से Sugar क्यों बढ़ता है? Cortisol-Insulin का सीधा युद्ध

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

आजकल की भागदौड़ और टेंशन वाली जिंदगी में तनाव (स्ट्रेस) सिर्फ हमारे दिमाग तक नहीं रहता, बल्कि यह धीरे-धीरे पूरे शरीर को अंदर से खोखला करने लगता है। कई बार आपने खुद महसूस किया होगा कि जब टेंशन बहुत ज्यादा होती है, तो शरीर अजीब तरह से रिएक्ट करता है। हर वक्त की थकान, चिड़चिड़ापन, बार-बार भूख लगना या अचानक से शुगर का हाई हो जाना ये सब इसी स्ट्रेस का नतीजा हैं।

जब हम टेंशन में होते हैं, तो शरीर के अंदर कुछ ऐसे हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं जो शरीर को 'अलर्ट मोड' (सतर्क अवस्था) में डाल देते हैं। इसका सीधा असर हमारे ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। कई बार लोग बहुत सही डाइट लेते हैं, दवाइयां टाइम पर खाते हैं, फिर भी शुगर कम नहीं होती। इसकी वजह यही है कि सिर्फ मीठा खाना ही नहीं, बल्कि आपका दिमागी तनाव भी शुगर बढ़ाने का बहुत बड़ा कारण है।

आयुर्वेद टेंशन और बढ़ी हुई शुगर को दो अलग-अलग बीमारियाँ नहीं मानता। यह इन्हें शरीर, दिमाग, पाचन और वात-पित्त के बिगड़े हुए बैलेंस के रूप में गहराई से समझता है। इसलिए शुगर कंट्रोल करने के लिए एक शांत मन और सही रूटीन सबसे ज्यादा जरूरी है।

तनाव और ब्लड शुगर का अदृश्य संबंध

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि ज्यादा मीठा खाने से ही शुगर बढ़ती है। लेकिन शरीर की अंदरूनी कहानी इससे कहीं ज्यादा उलझी हुई है। कई बार बिना शक्कर खाए भी शुगर लेवल आसमान छूने लगता है, और इसका सबसे बड़ा मुजरिम है मानसिक तनाव (मेंटल स्ट्रेस)।

जब आप लगातार टेंशन में रहते हैं, तो शरीर खुद को किसी 'खतरे' से बचाने के लिए अलर्ट मोड में डाल देता है। इस दौरान शरीर के अंदर ऐसे बड़े बदलाव होते हैं जो खून में शुगर की मात्रा को सीधा बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि जब टेंशन बढ़ती है, तो लोगों की शुगर भी अचानक से हाई हो जाती है।

सच कहूं तो, कई बार टेंशन का असर आपके खाने से भी ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि यह सीधे आपके हार्मोन्स, पाचन और पूरे सिस्टम को हिला कर रख देता है।

शरीर तनाव को खतरे की तरह क्यों महसूस करता है?

जब आप टेंशन में होते हैं चाहे वो काम का प्रेशर हो, कोई पारिवारिक चिंता हो या पैसों की दिक्कत आपका शरीर इसे सिर्फ 'टेंशन' नहीं मानता। उसे लगता है कि कोई बड़ा 'खतरा' सामने खड़ा है और जान को जोखिम है।

ऐसे में दिमाग तुरंत शरीर को 'फाइट या फ्लाइट' (लड़ो या भागो) मोड में डाल देता है। शरीर को लगता है कि इस खतरे से निपटने के लिए उसे तुरंत बहुत सारी एनर्जी की जरूरत है। इसी एनर्जी को जुटाने के लिए शरीर के अंदर स्ट्रेस हार्मोन बहुत तेजी से एक्टिव होने लगते हैं।

कॉर्टिसोल क्या है और यह शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

कॉर्टिसोल को आसान भाषा में 'स्ट्रेस हार्मोन' कहा जाता है। जब भी आप टेंशन में होते हैं, शरीर इसे रिलीज करता है ताकि आपको तुरंत एनर्जी मिल सके। लेकिन अगर आप 24 घंटे ही टेंशन में रहेंगे, तो यह हार्मोन शरीर का पूरा सिस्टम बिगाड़ देता है:

  • टेंशन में सबसे ज्यादा निकलता है: जैसे ही आपको चिंता या घबराहट होती है, कॉर्टिसोल तेजी से बढ़ने लगता है।
  • अलर्ट रखना: यह हार्मोन आपको हर वक्त चौकन्ना और अलर्ट रखने का काम करता है।
  • एक्स्ट्रा एनर्जी देना: खतरे (टेंशन) से निपटने के लिए यह खून में एक्स्ट्रा शुगर घोल देता है ताकि शरीर को तुरंत एनर्जी मिले।
  • लंबे समय तक बढ़ना खतरनाक: अगर यह हार्मोन हमेशा हाई रहे, तो शरीर का नेचुरल बैलेंस पूरी तरह टूट जाता है।
  • नींद और पाचन खराब करना: यह बढ़ा हुआ स्ट्रेस हार्मोन आपकी नींद उड़ा देता है और डाइजेशन को भी बुरी तरह खराब कर देता है।

इंसुलिन की भूमिका और शुगर संतुलन

इंसुलिन हमारे शरीर का एक बहुत ही जरूरी हार्मोन है। इसका काम खून में मौजूद शुगर को शरीर के एक-एक सेल (कोशिकाओं) तक पहुंचाना है, ताकि हमें काम करने की एनर्जी मिल सके। जब इंसुलिन सही से काम करता है, तो शुगर लेवल एकदम नॉर्मल रहता है:

  • शुगर को ठिक: इंसुलिन खून में तैर रही शुगर को पकड़कर शरीर की सेल्स तक पहुंचाता है।
  • एनर्जी देना: यही शुगर जब सेल्स में पहुंचती है, तो शरीर को ताकत (एनर्जी) मिलती है।
  • बैलेंस बनाए रखना: इंसुलिन का मेन काम खून में शुगर की मात्रा को कंट्रोल में रखना है।
  • सिस्टम का मैनेजर: यह शरीर की पूरी एनर्जी व्यवस्था को संभालता है।
  • टेंशन का बुरा असर: जब आप लगातार स्ट्रेस में रहते हैं, तो इंसुलिन अपना काम ठीक से नहीं कर पाता, जिससे शुगर का बैलेंस बिगड़ जाता है।

कॉर्टिसोल और इंसुलिन के बीच शरीर का अंदरूनी संघर्ष

टेंशन के समय शरीर के अंदर इन दोनों हार्मोन्स (कॉर्टिसोल और इंसुलिन) के बीच एक जंग सी छिड़ जाती है। एक तरफ कॉर्टिसोल खून में एक्स्ट्रा शुगर घोलता है, और दूसरी तरफ इंसुलिन उस शुगर को कम करने की कोशिश करता है:

  • कॉर्टिसोल का काम: टेंशन आते ही कॉर्टिसोल शरीर को एक्स्ट्रा एनर्जी देने के लिए खून में शुगर की बाढ़ ला देता है।
  • इंसुलिन की कोशिश: इंसुलिन उस अचानक बढ़ी हुई शुगर को कंट्रोल करने के लिए पूरी ताकत लगाता है।
  • बैलेंस टूटना: जब आप हर वक्त टेंशन में रहते हैं, तो इंसुलिन थक जाता है और शरीर का बैलेंस टूट जाता है।
  • शुगर का हाई रहना: इंसुलिन के कमजोर पड़ने से खून में शुगर का लेवल हमेशा हाई रहने लगता है।
  • शरीर पर भारी असर: इस अंदरूनी जंग से शरीर हर वक्त थका हुआ, भारी और बीमार महसूस करता है।

तनाव के समय शुगर अचानक क्यों बढ़ती है?

जब शरीर टेंशन में होता है, तो उसे लगता है कि कोई इमरजेंसी आ गई है। ऐसे में लिवर (जिगर) खून में बहुत सारी एक्स्ट्रा शुगर छोड़ देता है ताकि शरीर को लड़ने के लिए तुरंत ताकत मिल सके:

  • लिवर का काम: टेंशन में लिवर अपना काम तेज कर देता है और खून में एक्स्ट्रा शुगर उड़ेल देता है।
  • इमरजेंसी मोड: शरीर खतरे से बचने के लिए खुद को तैयार करता है।
  • तुरंत एनर्जी की जरूरत: शरीर को लगता है कि उसे अभी बहुत ज्यादा ताकत चाहिए।
  • फिजिकल काम न होना: आज के समय में हम टेंशन तो खूब लेते हैं, लेकिन पसीना नहीं बहाते।
  • शुगर का जमा होना: जब यह एक्स्ट्रा शुगर खर्च नहीं होती (क्योंकि हम भाग-दौड़ नहीं रहे होते), तो यह खून में ही जमा होकर शुगर लेवल बढ़ा देती है।

तनाव और शुगर बढ़ने के कारण

टेंशन के दौरान शुगर बढ़ने का कारण सिर्फ मीठा खाना नहीं है। इसके पीछे आपका पूरा लाइफस्टाइल और शरीर के अंदर चल रही उथल-पुथल होती है:

  • लगातार टेंशन: 24 घंटे किसी न किसी बात की चिंता करना शुगर को बेकाबू कर देता है।
  • नींद न आना: रात-रात भर करवटें बदलना और नींद पूरी न होना शुगर लेवल को सीधा बढ़ाता है।
  • फिजिकल एक्टिविटी जीरो होना: बैठे-बैठे काम करना और एक्सरसाइज न करने से एक्स्ट्रा शुगर शरीर में ही पड़ी रहती है।
  • खाने का कोई टाइम न होना: बे-टाइम खाना और उल्टा-सीधा खाना शरीर के शुगर कंट्रोल सिस्टम को खराब कर देता है।
  • हार्मोन्स का लोचा: स्ट्रेस की वजह से बिगड़े हुए हार्मोन सीधा शुगर बढ़ाते हैं।

आयुर्वेद में तनाव और मधुमेह (डायबिटीज) का संबंध

आयुर्वेद में डायबिटीज (मधुमेह) को सिर्फ 'खून में शक्कर बढ़ने' की बीमारी नहीं माना जाता। हम इसे शरीर, दिमाग और पाचन के पूरी तरह से क्रैश होने का नतीजा मानते हैं। इसमें टेंशन (स्ट्रेस) आग में घी का काम करता है।

टेंशन लेने से शरीर में 'वात' और 'पित्त' दोनों भड़क जाते हैं। वात के बिगड़ने से शरीर में अस्थिरता (बेचैनी) आती है और पित्त के बिगड़ने से अंदरूनी गर्मी और पाचन खराब होता है। इसका सीधा असर आपके शुगर कंट्रोल सिस्टम पर पड़ता है।

पाचन खराब होने से शरीर में गंदगी और विषैले तत्व (जिन्हें आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं) जमा होने लगते हैं। इससे शरीर भारी हो जाता है, नसें ब्लॉक होने लगती हैं और शरीर के नॉर्मल काम रुक जाते हैं। इन सबके चलते शुगर को बैलेंस रखना नामुमकिन हो जाता है और बीमारी जड़ पकड़ लेती है।

आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

आयुर्वेद में हमारा मकसद आपको सिर्फ 'शुगर कम करने की गोली' देना नहीं है। हम आपकी टेंशन, पाचन और पूरे शरीर के बिगड़े हुए बैलेंस को गहराई से ठीक करते हैं:

  • जड़ को पकड़ना: हम सिर्फ आपकी शुगर रिपोर्ट नहीं देखते। हम ये देखते हैं कि आप टेंशन कितनी लेते हैं, आपको नींद कैसी आती है और आपका पाचन कैसा चल रहा है।
  • दिमाग को शांत करना: जब तक आपकी टेंशन और कॉर्टिसोल कम नहीं होगा, शुगर कंट्रोल नहीं होगी। इसलिए मन को रिलैक्स करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है।
  • पाचन (मेटाबॉलिज्म) सेट करना: खराब पाचन ही शुगर की सबसे बड़ी जड़ है। इसलिए पेट को साफ और डाइजेशन को मजबूत किया जाता है।
  • एनर्जी का सही इस्तेमाल: शरीर में जो शुगर बन रही है, वो सही जगह एनर्जी के रूप में इस्तेमाल हो, इस पर काम किया जाता है।
  • डाइट और रूटीन: आपको ऐसा खानपान और लाइफस्टाइल बताया जाता है जो आपके शरीर और दिमाग दोनों को शांत रख सके।

तनाव और शुगर नियंत्रण में उपयोग होने वाले सहायक औषधियां

जब स्ट्रेस की वजह से शुगर बेकाबू होने लगे, तो हमारा मेन फोकस सिर्फ शुगर घटाने पर नहीं होता। हम शरीर को रिलैक्स करने, एनर्जी वापस लाने और पाचन (पाचन) को लोहे जैसा मजबूत बनाने पर काम करते हैं:

  • : यह शरीर की फालतू गर्मी को शांत करके शुगर के बिगड़े हुए लेवल को एकदम बैलेंस करने में कमाल का काम करता है।
  • गिलोय: यह शरीर की इम्यूनिटी (बीमारियों से लड़ने की ताकत) को इतना तगड़ा कर देती है कि अंदरूनी सूजन और कमजोरी अपने आप भाग जाती है।
  • पेट साफ तो सब साफ! यह पाचन को दुरुस्त करके शरीर में जमी सारी गंदगी (टॉक्सिन्स) को बाहर निकाल फेंकता है।
  • मेथी: सुबह के समय मेथी का इस्तेमाल शुगर को कंट्रोल करने और पेट को सेट रखने का एक बेहद पुराना और असरदार नुस्खा है।
  • जामुन: खून में घुली हुई एक्स्ट्रा मिठास (शुगर) को सोखने और उसे नॉर्मल रखने में जामुन किसी रामबाण से कम नहीं है।
  • ब्राह्मी: यह दिमाग में चल रही ख्यालों की आंधी को रोककर टेंशन को जड़ से खत्म करती है और मन को एकदम रिलैक्स कर देती है।

तनाव और शुगर नियंत्रण में उपयोग होने वाली थेरेपी

इन आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी का काम आपको कोई दवा खिलाकर शुगर कम करना नहीं है। ये सीधे आपके स्ट्रेस को धो डालती हैं और शरीर को अंदर से सुकून देती हैं:

  • अभ्यंग (हर्बल मालिश): जड़ी-बूटियों वाले हल्के गर्म तेल की मालिश लेते ही नसों की जकड़न खुलती है और दिनभर की सारी टेंशन छूमंतर हो जाती है।
  • शिरोधारा: माथे के बीचों-बीच जब औषधीय तेल की धार लगातार गिरती है, तो दिमागी स्ट्रेस इस तरह धुल जाता है कि आपको एक गजब की गहरी शांति महसूस होती है।
  • औषधीय भाप लेने से शरीर की पुरानी से पुरानी जकड़न और थकान पसीने के रास्ते बाहर निकल जाती है।
  • नस्य चिकित्सा: नाक में हर्बल तेल या घी की कुछ बूंदें डालने से सीधे दिमाग की नसें रिलैक्स होती हैं और दिमागी उलझन एकदम शांत हो जाती है।

तनाव और शुगर नियंत्रण में सहायक आहार

आपका खाना ही आपकी सबसे बड़ी दवा है। हल्का और सही समय पर खाया गया खाना आपके शुगर और स्ट्रेस, दोनों को कंट्रोल में रखता है।

क्या खाएं?

  • हमेशा एकदम ताजा, गर्म और घर का बना सादा खाना ही खाएं।
  • अपनी डाइट में ढेर सारी ताजी हरी सब्जियां और मौसम वाले फल शामिल करें।
  • मूंग दाल, दलिया या खिचड़ी जैसी चीजें खाएं, जो पेट पर बिल्कुल बोझ न डालें।
  • दिनभर खूब सारा पानी पिएं और छाछ या नीबू पानी लेते रहें।
  • खाने में शुद्ध देसी घी जरूर लें (यह दिमाग को रूखेपन से बचाता है), लेकिन हिसाब से।
  • चोकर वाला आटा और फाइबर से भरपूर चीजें खाएं जो शुगर को खून में धीरे-धीरे मिलने दें।

क्या न खाएं?

  • चीनी से भरी और पैकेटबंद (प्रोसेस्ड) चीजें बिल्कुल छोड़ दें।
  • समोसे, कचौड़ी या डीप फ्राई किया हुआ कोई भी भारी खाना।
  • फ्रिज का एकदम चिल्ड पानी या कोल्ड ड्रिंक्स।
  • रोज-रोज बाहर का और मैदे वाला अनहेल्दी खाना।
  • बहुत ज्यादा चाय या कॉफी (ये सीधे आपकी नींद और टेंशन को बिगाड़ते हैं)।
  • बनावटी रंग (आर्टिफिशियल कलर्स) और प्रिजर्वेटिव्स वाले खाने-पीने के आइटम्स।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम रेनू लुंबा है और मेरी उम्र 60 वर्ष है। पिछले 25 वर्षों से मुझे डायबिटीज की समस्या थी, जो बॉर्डरलाइन पर रहती थी। लेकिन हाल ही में जब मैंने टेस्ट करवाए, तो मेरा शुगर लेवल काफी ज्यादा बढ़ा हुआ पाया गया। मैं एलोपैथिक दवाएँ लेना नहीं चाहती थी, क्योंकि ये लंबे समय तक चलती हैं। तब मेरे पति ने मुझे डॉ. प्रताप चौहान के बारे में बताया। उनसे बात करने के बाद मुझे जीवा आयुर्वेद के डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में जानकारी मिली। हम जीवा क्लिनिक गए और वहाँ से मेरा उपचार शुरू हुआ। नियमित मॉनिटरिंग, डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ मैंने डॉक्टरों की सलाह को फॉलो किया। धीरे-धीरे मेरे HbA1c लेवल में सुधार हुआ और यह 8.2 से घटकर 6.4 के स्वस्थ स्तर पर आ गया। आज मैं खुद को पहले से बेहतर और संतुलित महसूस करती हूँ। जीवा आयुर्वेद का मैं दिल से धन्यवाद करती हूँ। 

डॉक्टर से कब सलाह लें?

स्ट्रेस और शुगर के इस खेल को कभी हल्के में न लें। अगर शरीर ये अलार्म दे, तो बिना देरी किए किसी अच्छे डॉक्टर या विशेषज्ञ के पास जाएं:

  • जब तमाम कोशिशों के बाद भी शुगर का लेवल नीचे आने का नाम ही न ले।
  • हर वक्त गला सूखता रहे और प्यास लगे।
  • बिना डाइटिंग किए अचानक से वजन गिरने लगा और शरीर में जान ही न बचे।
  • बार-बार (खासकर रात में) बाथरूम भागना पड़े और हर वक्त सुस्ती छाई रहे।
  • थोड़ी सी भी टेंशन होते ही शुगर का लेवल रॉकेट की तरह ऊपर-नीचे होने लगा।
  • शरीर पर लगी कोई छोटी-सी खरोंच या घाव कई दिनों तक न भरे।
  • सारे घरेलू नुस्खे और परहेज करने के बाद भी शरीर को कोई राहत न मिले।
  • अचानक आंखों के आगे धुंधलापन आ जाए या कमजोरी से चक्कर आने लगें।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर बात यह है कि शुगर सिर्फ आपकी लैब रिपोर्ट में लिखी एक 'संख्या' (नंबर) नहीं है, और न ही इसे सिर्फ मीठा खाने से जोड़ा जा सकता है। यह आपके शरीर और दिमाग के बुरी तरह से थकने और असंतुलित होने का नतीजा है। मॉडर्न मेडिसिन (एलोपैथी) इसे सिर्फ इंसुलिन और हार्मोन्स की गड़बड़ी मानती है, जबकि आयुर्वेद इसकी तह में जाकर इसे दिमागी टेंशन, कमजोर पाचन और बिगड़े हुए लाइफस्टाइल से जोड़कर समझता है।

सालों तक टेंशन लेना, उल्टा-सीधा खाना और रातों की नींद खराब करना आपके शुगर के पूरे सिस्टम को क्रैश कर देता है। इसीलिए, समझदारी इसी में है कि सिर्फ मशीन में शुगर का नंबर कम करने के पीछे न भागें, बल्कि अपने पूरे लाइफस्टाइल, नींद और दिमाग की शांति पर काम करें। जब दिमाग रिलैक्स होगा, तो शरीर खुद-ब-खुद हील होने लगेगा।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

तनाव केवल मन तक सीमित नहीं रहता, यह पूरे शरीर पर असर डाल सकता है। लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर की ऊर्जा, नींद और पाचन प्रणाली प्रभावित हो सकती है। कई लोगों में इसके कारण थकान और शुगर में उतार-चढ़ाव महसूस होता है। इसलिए इसे केवल मानसिक स्थिति मानना सही नहीं है।

हल्का तनाव भी शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है। यदि तनाव बार बार होता है, तो शरीर धीरे धीरे असंतुलित हो सकता है। इससे शुगर नियंत्रण पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है। लगातार तनाव अधिक प्रभाव डालता है।

हाँ, शुगर की समस्या केवल मीठा खाने से नहीं होती। शरीर में हार्मोन और तनाव का असंतुलन भी इसे प्रभावित कर सकता है। कई बार सही भोजन के बावजूद शुगर बढ़ी हुई महसूस हो सकती है। इसलिए यह केवल आहार पर निर्भर नहीं है।

पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे ऊर्जा उपयोग और हार्मोन नियंत्रण प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय तक नींद की कमी रहने पर शुगर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए नींद बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कुछ लोगों में तनाव के दौरान भूख बढ़ सकती है और कुछ में कम हो सकती है। यह शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। लगातार तनाव रहने पर खाने की आदतें भी बदल सकती हैं। इससे शुगर संतुलन प्रभावित हो सकता है।

लंबे समय तक बैठकर काम करने से शरीर की गतिविधि कम हो जाती है। इससे ऊर्जा का उपयोग कम होता है और शुगर संतुलन प्रभावित हो सकता है। नियमित हलचल और गतिविधि शरीर के लिए जरूरी मानी जाती है। सक्रिय जीवनशैली मदद कर सकती है।

हर स्थिति में दवा की जरूरत नहीं होती, यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में जीवनशैली और आहार में बदलाव से सुधार देखा जा सकता है। लेकिन गंभीर स्थिति में चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है। इसलिए स्वयं निर्णय नहीं लेना चाहिए।

लगातार मानसिक थकान शरीर को असंतुलित कर सकती है। इससे तनाव बढ़ता है और शरीर की ऊर्जा प्रणाली प्रभावित होती है। कई बार इसका असर शुगर स्तर पर भी देखा जा सकता है। मानसिक और शारीरिक दोनों संतुलन जरूरी हैं।

जब तनाव कम होता है, तो शरीर अधिक संतुलित स्थिति में आ सकता है। इससे हार्मोन और ऊर्जा उपयोग बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। कई लोगों में तनाव कम होने पर शुगर भी अधिक स्थिर महसूस होती है। यह एक सहायक कारक हो सकता है।

हाँ, दोनों एक दूसरे से जुड़े हो सकते हैं इसलिए दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। केवल शुगर पर ध्यान देने से पूरी स्थिति नियंत्रित नहीं हो सकती। जीवनशैली, नींद और मानसिक स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संतुलित दृष्टिकोण बेहतर परिणाम दे सकता है।

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