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गर्मी में जोड़ों में दर्द क्यों बढ़ जाता है? AC और Dehydration का छिपा सम्बन्ध

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 10 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप से बचने के लिए जैसे ही हम एसी (AC) वाले कमरे में बैठते हैं, तो शरीर को बड़ी राहत मिलती है। लेकिन कुछ ही देर में घुटनों, कमर या कंधों में एक अजीब सी जकड़न और दर्द शुरू हो जाता है। जब सुबह सोकर उठते हैं, तो शरीर इतना भारी और दर्द से भरा होता है कि बिस्तर से पैर नीचे रखना भी पहाड़ जैसा लगने लगता है।ऐसे में कई लोग तुरंत आराम पाने के लिए पेनकिलर गोलियाँ खाने लगते हैं या दर्द मिटाने वाली ट्यूब (ऑइंटमेंट) मलने लगते हैं। 

लेकिन क्या यह सही तरीका है? बिल्कुल नहीं। दवाइयाँ कुछ घंटों के लिए आपके दर्द को दबा ज़रूर सकती हैं, लेकिन वे बीमारी की जड़ को खत्म नहीं करतीं। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि कड़कती गर्मी के दिनों में आपके जोड़ों की चिकनाहट (ग्रीस) क्यों सूख रही है, तब तक कोई भी गोली आपको हमेशा के लिए आराम नहीं दे सकती।यह समझना बहुत ज़रूरी है कि गर्मी में बढ़ने वाला यह दर्द कोई अचानक आई बीमारी नहीं है, बल्कि चौबीसों घंटे एसी की ठंडी हवा में बैठे रहने और शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) का सीधा असर है। आपके जोड़ों के बीच जो ज़रूरी नमी और चिकनाहट होती है, एसी की सूखी हवा उसे अंदर ही अंदर सोख लेती है, जिससे आपकी हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं और दर्द भड़क उठता है। 

गर्मियों में जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ जाता है?

जोड़ों में दर्द की समस्या, जिसे अक्सर लोग सिर्फ सर्दियों की परेशानी मानते हैं, गर्मियों में एक अलग रूप ले लेती है। इसके पीछे हमारी आज की जीवनशैली, पानी कम पीने की आदत और तापमान का अचानक बदलना मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं। जब हम चिलचिलाती धूप से अचानक बहुत ठंडे AC वाले कमरे में जाते हैं, तो तापमान में आए इस  भारी बदलाव के कारण हमारी रक्त वाहिकाएँ (Blood vessels) सिकुड़ जाती हैं। 

इससे जोड़ों तक खून का दौरा धीमा पड़ जाता है। इसके अलावा, पसीने के ज़रिए शरीर से बहुत सारा पानी और ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं। अगर हम सही मात्रा में पानी नहीं पीते, तो शरीर में डिहाइड्रेशन होने लगता है, जिससे जोड़ों के बीच का फ्लूइड (चिकनाहट) सूखने लगता है। कई बार हमारी कुछ छोटी-छोटी आदतें जैसे फ्रिज का बहुत ठंडा पानी पीना, घंटों एक ही पोज़िशन में AC के सामने बैठे रहना भी जोड़ों के दर्द को हमसे जोड़ देती हैं। असल में जोड़ों का लचीलापन कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे ज़बरदस्ती लाया जा सके; यह तो शरीर में नमी का एक सहज संतुलन है।

क्या हर किसी को गर्मी में दर्द एक जैसा होता है?

जोड़ों के दर्द की परेशानी हर व्यक्ति के लिए और हर दिन एक जैसी नहीं होती। इसे मुख्य रूप से तीन तरह से देखा जा सकता है। कुछ लोगों को सुबह बिस्तर से उठते ही घुटनों और एड़ियों में भयंकर जकड़न महसूस होती है, जिसे सामान्य होने में समय लगता है। वहीं, कुछ लोगों को दिन भर कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन जब वे ऑफिस में लगातार 8-9 घंटे AC की ठंडी हवा में बैठते हैं, तो उनकी कमर और गर्दन पूरी तरह अकड़ जाती है। तीसरी स्थिति वह होती है जिसमें इंसान को सीढ़ियाँ चढ़ते या उतरते वक्त घुटनों से कट-कट की आवाज़ आती है और तेज़ चुभन होती है। इसके अलावा कुछ दिन ऐसे होते हैं जहाँ हम कम पानी पीते हैं या ज़्यादा पसीना बह जाता है, तब पिंडलियों (Calf muscles) में भयंकर ऐंठन (Cramps) आ जाती है। इसलिए अपनी परेशानी के पैटर्न को पहचानना सबसे पहला कदम है।

एसी (AC) में बैठने से जोड़ों में दर्द क्यों होने लगता है?

एसी की ठंडी हवा और जोड़ों के दर्द का बहुत ही गहरा कनेक्शन है। जब हम एसी चलाते हैं, तो वह सिर्फ कमरे को ठंडा नहीं करता, बल्कि हवा की पूरी नमी (गीलापन) को भी सोख लेता है, जिससे ये दिक्कतें होती हैं:

  • नसों और मांसपेशियों का खिंचना: तेज ठंडी हवा के सीधे आगे बैठने से शरीर की मांसपेशियां और नसें सुकड़ जाती हैं, जिससे जोड़ों पर फालतू का खिंचाव और दबाव पड़ता है।
  • खून का दौरा धीमा होना: बहुत ज़्यादा ठंडक की वजह से शरीर में खून का घूमना धीमा पड़ जाता है। जब जोड़ों तक पूरा खून और गरमाहट नहीं पहुँच पाती, तो वे एकदम जाम और कड़े हो जाते हैं।
  • तापमान का तगड़ा झटका: बाहर चिलचिलाती 40 डिग्री की धूप और कमरे के अंदर 18 डिग्री की कड़ाके की ठंड यह अचानक होने वाला बदलाव हमारे शरीर को एक ज़ोरदार झटका देता है, जिससे सोया हुआ दर्द भी अचानक जाग उठता है।
  • ठंडी हवा की सीधी मार: एसी के ब्लोअर की ठंडी हवा हमारे जिस भी जोड़ (जैसे घुटने, कंधे या गर्दन) पर सीधे लगती है, वहाँ का दर्द तुरंत भड़क जाता है।

डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) कैसे घुटनों और जोड़ों को सुखा देता है?

पानी की कमी घुटनों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। हमारे जोड़ों के बीच एक खास तरह का तरल पदार्थ होता है जिसे 'साइनोवियल फ्लूइड' (Synovial Fluid) कहते हैं। यह बिल्कुल किसी मशीन में डाले जाने वाले तेल या ग्रीस की तरह काम करता है, ताकि हड्डियाँ आपस में न टकराएँ। इस फ्लूइड और जोड़ों के कार्टिलेज (Cartilage) का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा पानी ही होता है। गर्मियों में जब पसीने से पानी बाहर निकल जाता है और हम उतना पानी नहीं पीते, तो शरीर इस पानी की कमी को पूरा करने के लिए कार्टिलेज का पानी खींचने लगता है। इससे जोड़ों की गद्दी सूख जाती है और हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं, जिससे सूजन और भयंकर दर्द होता है।

क्या गर्मी में बढ़ने वाला दर्द किसी गहरी वजह का संकेत है?

लगातार दर्द रहना सिर्फ एक मौसम का असर नहीं है; यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी उथल-पुथल का संकेत हो सकता है:

  • यूरिक एसिड का बढ़ना: डिहाइड्रेशन के कारण किडनी शरीर से यूरिक एसिड को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, जो क्रिस्टल बनकर जोड़ों में जमा होने लगता है (Gout)।
  • अर्थराइटिस की शुरुआत: यह ऑस्टियोआर्थराइटिस (हड्डियों का घिसना) या रूमेटाइड अर्थराइटिस का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
  • विटामिन डी की कमी: गर्मियों में धूप से बचने के लिए हम ज़्यादातर घर या ऑफिस में रहते हैं, जिससे विटामिन डी और कैल्शियम का स्तर तेज़ी से गिरता है।
  • कार्टिलेज का घिसना: लगातार दर्द इस बात का इशारा है कि आपके जोड़ों के बीच का कुशन (गद्दी) डैमेज हो रहा है।

आयुर्वेद के हिसाब से गर्मियों में जोड़ों के दर्द की असली वजह क्या है?

आयुर्वेद सीधे-सीधे जोड़ों के दर्द को 'संधिवात' कहता है, जिसका सीधा सा मतलब है शरीर में हवा (वात) का रास्ता भटक जाना या बिगड़ जाना। गर्मियों में ऐसा होने के पीछे ये बड़ी वजहें होती हैं:

  • एसी की ठंडी हवा: गर्मियों में एसी (AC) की हवा बहुत ठंडी और सूखी होती है, जो हमारे शरीर के अंदर की हवा (वात) को एकदम से भड़का देती है। जब बदन में यह सूखी हवा बढ़ती है, तो जोड़ों के बीच का पानी सूखने लगता है और दर्द शुरू हो जाता है।
  • जोड़ों का सूखापन: जैसे किसी चलती हुई मशीन या गाड़ी में तेल कम होने पर उसके पुर्जे आपस में रगड़ खाने लगते हैं और आवाज़ करते हैं, बिल्कुल वैसे ही शरीर में पानी और चिकनाहट कम होने से जोड़ों में सूखापन आ जाता है और वे कमज़ोर होने लगते हैं।
  • शरीर की बढ़ी हुई गर्मी: कड़कती गर्मियों में शरीर के अंदर की गर्मी (पित्त) अपने आप बढ़ने लगती है। जब यह भड़की हुई गर्मी और बिगड़ी हुई हवा आपस में मिल जाते हैं, तो जोड़ों में सिर्फ दर्द ही नहीं होता, बल्कि वहाँ तेज जलन होने लगती है और सूजन या लालपन आ जाता है।
  • उल्टी-सीधी आदतें: चिलचिलाती धूप से आकर या पसीने में पूरी तरह लथपथ होकर तुरंत ठंडे-ठंडे पानी से नहा लेना या सीधे तेज एसी (AC) के आगे बैठ जाना, हमारे शरीर की पूरी चाल को बिगाड़ कर रख देता है।

गर्मियों में जोड़ों के दर्द के लिए असरदार जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में कुछ खास जड़ी-बूटियाँ हैं जो जोड़ों के दर्द और सूजन को प्राकृतिक रूप से खींच निकालती हैं:

  • शल्लकी (Shallaki): यह जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करती है और कार्टिलेज को टूटने से बचाती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह सिर्फ तनाव कम नहीं करता, बल्कि जोड़ों के आस-पास की माँसपेशियों और नसों को अंदर से मज़बूती देता है।
  • गिलोय (Giloy): अगर दर्द यूरिक एसिड या शरीर में किसी तरह के इंफेक्शन की वजह से है, तो गिलोय बढ़े हुए वात और करके दर्द मिटाती है।
  • गुग्गुल (Guggul): यह जोड़ों में जमा हुए विषैले तत्वों (आम दोष) को बाहर निकालता है और साइनोवियल फ्लूइड (चिकनाहट) को फिर से बनाने में मदद करता है।

गर्मियों में गलत खानपान कैसे जोड़ों का दर्द बढ़ा सकता है?

आप जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर आपके जोड़ों पर पड़ता है:

  • फ्रिज का एकदम ठंडा (चिल्ड) पानी: बहुत ज़्यादा ठंडा पानी पीने से शरीर में हवा (वात) तुरंत भड़क जाती है और बदन की नसें सुकड़ जाती हैं।
  • बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स: कोल्ड कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स शरीर में पानी की कमी को पूरा नहीं करते, बल्कि ये बार-बार पेशाब लाते हैं जिससे शरीर का बचा-कुचा पानी भी बाहर निकल जाता है और जोड़ सूखने लगते हैं।
  • खट्टी चीजें: बहुत ज़्यादा अचार, नींबू या खट्टा दही खाने से जोड़ों के अंदर सूजन और दर्द अचानक बढ़ जाता है।
  • बाहर का जंक फूड: मैदे और केमिकल (प्रिजर्वेटिव्स) से बनी चीजें पेट में जाकर सड़ती हैं और अंदरूनी गंदगी बनाती हैं, जो धीरे-धीरे जोड़ों में जाकर जमा हो जाती है।

किन दूसरी बीमारियों की वजह से गर्मियों में यह दर्द ज़्यादा सताता है? 

कई बार आप पानी भी खूब पीते हैं, फिर भी शरीर के अंदर की कुछ बीमारियों के कारण जोड़ों का दर्द पीछा नहीं छोड़ता:

  • यूरिक एसिड का बढ़ना (गाउट): इसमें पैरों के अंगूठे या एड़ी में अचानक इतना तेज़ दर्द होता है कि पैर ज़मीन पर नहीं रखा जाता। यह अक्सर शरीर में पानी की भारी कमी की वजह से भड़कता है।
  • गर्दन का दर्द (सर्वाइकल): गर्दन की हड्डियों के बीच का गैप कम होना। जब एसी की ठंडी हवा सीधे गर्दन पर लगती है, तो यह दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाता है।
  • पुरानी चोट: अगर आपको पहले कभी घुटने या किसी जोड़ पर चोट लगी हो, तो मौसम बदलते ही या एसी की ठंडक मिलते ही वह पुरानी चोट फिर से हरा दर्द देने लगती है।
  • हड्डियों का खोखला होना (ऑस्टियोपोरोसिस): जब हड्डियां अंदर से कमज़ोर और पोली हो जाती हैं, तो शरीर अपना वज़न ठीक से नहीं संभाल पाता और जोड़ों में हर वक्त दर्द रहता है।

दर्द की गोलियाँ (Painkillers) कब नुकसान पहुँचा सकती हैं? 

दर्द की गोलियाँ कुछ देर के लिए आराम तो दे देती हैं, लेकिन लंबे समय तक इन्हें खाते रहने से शरीर को भारी नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ा खतरा आपकी किडनी और लिवर पर पड़ता है। धीरे-धीरे शरीर को इन गोलियों की लत पड़ जाती है और फिर इनका असर होना भी बंद हो जाता है।इसके अलावा, रोज़-रोज़ ये दवाइयां खाने से पेट में छाले (अल्सर), भयंकर एसिडिटी और हाजमा खराब होने जैसी मुसीबतें शुरू हो जाती हैं। ये गोलियाँ आपके जोड़ों की घिस चुकी ग्रीस (चिकनाहट) को वापस नहीं लातीं, बल्कि सिर्फ आपके दिमाग की नस को सुन्न कर देती हैं ताकि दर्द का पता न चले। इसलिए बिना डॉक्टर से पूछे इन्हें रोज़ चबाना बिल्कुल गलत है।

मरीज़ों का भरोसा –दर्द-मुक्त जीवन का अनुभव

मैं चेन्नई से आई हूँ, मेरा नाम कुसुम मालानी है। मुझे अपने घुटनों में बहुत ज्यादा समस्या थी। स्थिति यह थी कि मैं बिना सहारे के उठ भी नहीं पाती थी और मुझे चलने के लिए छड़ी का इस्तेमाल करना पड़ता था।एक दिन मैंने टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी का प्रोग्राम देखा। उसके बाद मैंने जीवा में फोन किया, जहाँ मेरी बात डॉक्टर संदीप से हुई। उन्होंने मुझे तुरंत पंचकर्म (Panchakarma) उपचार के लिए आने की सलाह दी।मैं तुरंत यहाँ आई और मेरा 10 दिन का पंचकर्म ट्रीटमेंट चला। इसके साथ ही पिछले एक साल से मेरी दवाइयां भी चल रही हैं। अब मैं यहाँ अपनी दूसरी ट्रिप (सेकंड ट्रिप) के लिए आई हूँ और मुझे पहले से काफी ज्यादा फायदा हुआ है। मुझे पूरी आशा है कि यहाँ के इलाज से मुझे 100% आराम मिलेगा।

बिना पेनकिलर के जोड़ों का दर्द सुधारने के प्राकृतिक तरीके

प्राकृतिक रूप से दर्द कम करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं:

  • सही हाइड्रेशन: सादे पानी के अलावा नारियल पानी, जीरे का पानी या ताज़ा छाछ पिएँ, जो शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स देते हैं।
  • गर्म सिकाई: भले ही गर्मी का मौसम हो, लेकिन अगर AC के कारण जोड़ अकड़ गए हैं, तो हल्के गर्म पानी की थैली से सिकाई करने से तुरंत आराम मिलता है।
  • हल्का स्ट्रेचिंग व्यायाम: सुबह उठकर जोड़ों को धीरे-धीरे घुमाएँ (Joint rotation) ताकि वहाँ रक्त संचार तेज़ हो।
  • AC का सही तापमान: AC का तापमान 18-20 के बजाय 24 से 26 डिग्री के बीच रखें, यह शरीर के लिए सबसे अनुकूल है।

जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें अपनाएँ?

अपनी रूटीन में ये आसान बदलाव लाएँ:

  • कपड़ों का चुनाव: अगर आप दिन भर AC ऑफिस में बैठते हैं, तो हमेशा फुल स्लीव्स के कपड़े पहनें या घुटनों को ढक कर रखें।
  • लगातार न बैठें: हर एक घंटे में अपनी सीट से उठकर 5 मिनट के लिए चलें-फिरें ताकि शरीर जाम न हो।
  • पानी घूँट-घूँट पिएँ: एक साथ बोतल खाली करने के बजाय हर आधे घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीने की आदत डालें।
  • धूप ज़रूर लें: सुबह 7 से 8 बजे की हल्की धूप कम से कम 20 मिनट के लिए ज़रूर लें ताकि विटामिन डी मिल सके।

आयुर्वेद जोड़ों के दर्द और वात दोष को कैसे देखता है?

आयुर्वेद जोड़ों को शरीर का वह हिस्सा मानता है जहाँ 'श्लेषक कफ' रहता है, जो उन्हें चिकना रखता है। जब हमारा खानपान और लाइफस्टाइल प्रकृति के खिलाफ जाता है, तो वात दोष बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ वात, जोड़ों के बीच के कफ को सुखा देता है और वहाँ 'आम' (टॉक्सिन्स) भर देता है। आयुर्वेद सिर्फ दर्द को नहीं दबाता, बल्कि यह देखता है कि आपके शरीर की प्रकृति क्या है और वात क्यों बढ़ा हुआ है। यह शरीर के शोधन और सही जड़ी-बूटियों के ज़रिए जोड़ों को अंदर से 'स्नेहन' (चिकनाहट) देकर समस्या को हमेशा के लिए दूर करने पर ज़ोर देता है।

दर्द न रुकने पर कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है:

  • लगातार सूजन और लालिमा: अगर घुटने या टखने गर्म महसूस हो रहे हों और उनमें तेज़ सूजन आ गई हो।
  • चलने में असमर्थता: दर्द इतना ज़्यादा हो कि पैर ज़मीन पर रखना या सीढ़ियाँ चढ़ना बिल्कुल असंभव हो जाए।
  • सुबह की जकड़न: अगर सोकर उठने के बाद एक घंटे से ज़्यादा समय तक शरीर अकड़ा रहता है।
  • बुखार आना: जोड़ों के दर्द के साथ अगर शरीर का तापमान भी बढ़ रहा हो, जो किसी गहरे इंफेक्शन का इशारा है।

गर्मियों में जोड़ों की चिकनाहट बनाए रखने के लिए आयुर्वेदिक सुझाव

आयुर्वेद में जोड़ों की ग्रीस वापस लाने के बेहतरीन उपाय हैं। सबसे कारगर है 'अभ्यंग' यानी तेल की मालिश। नहाने से पहले जोड़ों पर 'महानारायण तेल' या तिल के तेल से हल्की मालिश करने से वात शांत होता है और नसें खुलती हैं। डाइट में शुद्ध देसी घी का थोड़ा सा इस्तेमाल ज़रूर करें, यह शरीर को अंदर से चिकनाहट देता है। रात को सोने से पहले आधा चम्मच हल्दी वाला दूध (नॉर्मल टेम्परेचर पर) पीने से जोड़ों की सूजन तेज़ी से कम होती है। 'जानु बस्ती' (घुटनों पर औषधीय तेल रोकने की प्रक्रिया) एक बेहतरीन आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा है, जो सूखे हुए घुटनों के लिए रामबाण मानी जाती है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य दर्द कम करना, सूजन नियंत्रित करना और जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखना। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार वात संतुलन, जीवनशैली सुधार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना।
नज़रिया जोड़ों के दर्द के कारण (ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, चोट आदि) की पहचान कर उपचार किया जाता है। दर्द को शरीर के असंतुलन और जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है।
उपचार तरीका पेनकिलर्स, फिजियोथेरेपी, व्यायाम, वजन नियंत्रण, इंजेक्शन या आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। जड़ी-बूटियाँ, तेल मालिश, पंचकर्म, आहार और दिनचर्या संबंधी उपायों का उपयोग किया जाता है।
दर्द पर प्रभाव दवाएँ दर्द और सूजन कम करने में प्रभावी हो सकती हैं; वे केवल "नर्वस सिस्टम को सुन्न" नहीं करतीं, बल्कि अलग-अलग तरीकों से काम करती हैं। आयुर्वेदिक उपचार आराम और कार्यक्षमता में सुधार का प्रयास करते हैं।
जोड़ों का स्वास्थ्य आधुनिक चिकित्सा में भी व्यायाम, मांसपेशियों की मजबूती और जोड़ों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया जाता है। पारंपरिक रूप से जोड़ों के पोषण और स्नेहन पर बल दिया जाता है।
लंबी अवधि का दृष्टिकोण रोग की प्रगति को धीमा करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है। दीर्घकालिक संतुलन और जीवनशैली सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
सुरक्षा कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक होती है। आयुर्वेदिक औषधियों और उपचारों के भी संभावित जोखिम हो सकते हैं; विशेषज्ञ की सलाह महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

हमारे जोड़ शरीर के वो पहिए हैं जो हमें ज़िंदगी भर चलाते हैं। गर्मियों में AC की आदत और पानी की कमी इन पहियों का तेल सुखा देती है। दर्द होने पर पेनकिलर्स पर निर्भर होना किसी भी तरह से सही समाधान नहीं है। अपनी दिनचर्या में सुधार, सही मात्रा में पानी पीना, AC के सीधे वार से बचना और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। याद रखें, जोड़ों की सेहत एक दिन में वापस नहीं आती, इसके लिए आपको अपने शरीर को सही पोषण और धैर्य के साथ वापस सेट करना होगा। अपने शरीर के संकेतों को सुनें और एक स्वस्थ, दर्दरहित जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

AC का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखना सबसे सुरक्षित होता है, इससे शरीर का प्राकृतिक तापमान बहुत ज़्यादा नहीं बिगड़ता।

हाँ, फ्रिज का बहुत ठंडा पानी शरीर में वात दोष को अचानक बढ़ा देता है, जिससे नसें सिकुड़ती हैं और घुटनों में तेज़ दर्द हो सकता है।

हाँ, लेकिन गर्मियों में तेल बहुत ज़्यादा गर्म नहीं होना चाहिए। तिल या नारियल के तेल से हल्के हाथों से की गई मालिश फायदेमंद होती है।

नारियल पानी और ताज़ा मट्ठा (छाछ) जोड़ों के लिए बहुत अच्छे हैं क्योंकि ये इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करते हैं और हाइड्रेशन बढ़ाते हैं।

अगर पसीना ज़्यादा आ रहा है और आप उस अनुपात में पानी नहीं पी रहे हैं, तो डिहाइड्रेशन होगा जो निश्चित रूप से जोड़ों का फ्लूइड सुखा देगा।

एक स्वस्थ व्यक्ति को गर्मियों में जोड़ों और शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए कम से कम 3 से 4 लीटर पानी रोज़ाना पीना चाहिए।

हैवी वेट लिफ्टिंग या दौड़ने से बचें, लेकिन हल्की स्ट्रेचिंग, योग और पानी के अंदर की जाने वाली एक्सरसाइज़ (स्विमिंग) बहुत फायदा करती है।

हाँ, क्योंकि गर्मियों में तेज़ धूप के डर से लोग अक्सर AC वाले कमरों में बंद रहते हैं, जिससे शरीर को सूरज की रोशनी नहीं मिल पाती।

खट्टा और फ्रिज का रखा ठंडा दही खाने से वात और सूजन बढ़ सकती है। अगर खाना ही हो, तो दिन के समय बिल्कुल ताज़ा और सामान्य तापमान वाला दही खाएँ।

अपनी कुर्सी की पोज़िशन ऐसे सेट करें कि AC की हवा सीधे आपकी गर्दन या कमर पर न लगे, और हर एक घंटे में गर्दन को दाएँ-बाएँ ज़रूर स्ट्रेच करें।

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