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Hip Pain जो कमर शϤ जांघ दोनों में जाता है - Sciatica है या Hip Joint का असर?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 22 May, 2026
  • category-iconUpdated on 08 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5029

सुबह उठते ही जब आप बिस्तर से पैर नीचे रखते हैं, तो कमर से लेकर जांघ शϤ एड़ी तक एक तेज़ करंट जैसा दर्द दौड़ जाता है ऑफिस की कुर्सी पर घंटों बैठने के बाद जब आप खड़े होने की कोशिश करते हैं, तो कूल्हे (Hip) में एक अजीब सी जकड़न महसूस होती है शϤ पैर भारी लगने लगता है हम अक्सर इस दर्द को थोड़ा सा स्ट्रेच करके या कोई पेनकिलर खाकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, यह सोचकर कि शायद गलत सोने या थोड़ी थकान की वजह से ऐसा हो रहा है।

लेकिन, जब यह दर्द आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए, तो यह महज़ थकान नहीं है यह आपके शरीर के सबसे बड़े जॉइंट शϤ सबसे लंबी नस (Sciatic Nerve) की चीख है, जो लगातार गलत पोश्चर, कमज़ोर हड्डियों शϤ असंतुलित जीवनशैली के कारण कुचली जा रही है ऐसे में यह समझना बहुत ज़रूरी हो जाता है कि कमर से होकर जांघों तक जाने वाला यह दर्द क्या 'साइटिका' (Sciatica) का नर्व डैमेज है, या फिर आपके 'हिप जॉइंट' (Hip Joint) की हड्डियाँ अंदर से घिस रही हैं। आइए, इस दर्द की गहराई में उतरें शϤ जानें कि कैसे आप हमेशा के लिए इस तकलीफ से आज़ाद हो सकते हैं।

कमर शϤ जांघ में जाने वाला हिप पेन (Hip Pain) शरीर में क्या संकेत देता है?

जब दर्द कमर के निचले हिस्से (Lower Back) से शुरू होकर कूल्हे शϤ जांघों तक जाता है, तो इसके पीछे मुख्य रूप से शरीर के दो अलग-अलग सिस्टम का डैमेज ज़िम्मेदार हो सकता है:

  • साइटिका (Sciatica - Nerve Compression): हमारी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (L4-L5, S1) से शरीर की सबसे मोटी नस, साइटिक नर्व, निकलकर कूल्हे से होते हुए पैर के अंगूठे तक जाती है। जब स्लिप्ड डिस्क (Herniated Disc) या गलत पोश्चर के कारण इस नस पर दबाव पड़ता है, तो कमर से लेकर जांघ शϤ पिंडलियों तक करंट जैसा तेज़ दर्द, सुन्नपन शϤ झुनझुनी (Tingling) महसूस होती है।
  • हिप जॉइंट का घिसना (Hip Joint Degeneration/Osteoarthritis): अगर दर्द मुख्य रूप से कूल्हे के जोड़, ग्रोइन (Groin/जांघ के अंदरूनी हिस्से) शϤ जांघ के ऊपरी हिस्से में महसूस हो रहा है शϤ चलते या वज़न डालते समय बढ़ता है, तो यह हिप जॉइंट की कार्टिलेज घिसने का संकेत हो सकता है।
  • पिरिफोर्मिस सिंड्रोम (Piriformis Syndrome): हमारे कूल्हे के अंदर एक पिरिफोर्मिस नाम की मांसपेशी होती है। जब घंटों बैठे रहने से यह मांसपेशी सख्त (Tight) हो जाती है, तो यह इसके ठीक नीचे से गुज़रने वाली साइटिक नर्व को दबाने लगती है, जिससे साइटिका जैसा ही भयंकर दर्द जांघों में जाने लगता है।
  • एवैस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis - AVN): कई बार हिप जॉइंट की हड्डी तक खून का दौरा (Blood supply) रुक जाता है, जिससे कूल्हे की हड्डी अंदर ही अंदर गलने शϤ सूखने लगती है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें हिप जॉइंट में असहनीय दर्द होता है शϤ व्यक्ति लंगड़ा कर चलने पर मजबूर हो जाता है।

हिप पेन (Hip Pain) शϤ साइटिका (Sciatica) किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का शरीर शϤ दर्द का पैटर्न अलग होता है। आयुर्वेद के अनुसार, कमर शϤ जांघ का यह दर्द शरीर के त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) के बिगड़ने के आधार पर तीन मुख्य प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान दर्द (Vata Dominant): इस स्थिति में दर्द बहुत ही चुभने वाला (Shooting pain) शϤ करंट जैसा होता है। जांघों शϤ पैरों में भारी रूखापन शϤ सुन्नपन आ जाता है। ठंडी हवा में या एसी (AC) वाले कमरों में बैठने से यह वात दोष तेज़ी से भड़कता है शϤ दर्द असहनीय हो जाता है। इसमें शरीर में भयंकर जकड़न (Stiffness) महसूस होती है।
  • पित्त-प्रधान दर्द (Pitta Dominant): इसमें नस के दबने या जॉइंट के घिसने के साथ-साथ कमर, कूल्हे शϤ जांघों में भारी जलन (Burning sensation) महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे नसों में आग लग रही हो। इसमें प्रभावित हिस्से पर सूजन शϤ लाली भी आ सकती है।
  • कफ-प्रधान दर्द (Kapha Dominant): लगातार बैठे रहने शϤ धीमे मेटाबॉलिज़्म के कारण इसमें कमर शϤ जांघों में भारीपन (Heaviness) शϤ सुस्ती बनी रहती है। दर्द बहुत तीखा नहीं होता, लेकिन एक धीमा, सुस्त दर्द (Dull ache) लगातार बना रहता है। सुबह उठने पर जकड़न सबसे ज़्यादा होती है जो थोड़ा चलने-फिरने पर कम हो जाती है।

क्या आपको भी साइटिका या हिप जॉइंट की समस्या के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

नर्व डैमेज या हड्डियों का घिसना रातों-रात नहीं होता। शरीर बहुत पहले से अलार्म बजाता है जिसे हम अक्सर काम की थकावट मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • बैठकर उठने में तकलीफ: कुर्सी या ज़मीन पर बैठने के बाद जब आप खड़े होते हैं, तो कूल्हे शϤ कमर को सीधा करने में कुछ सेकंड्स तक भयंकर दर्द शϤ जकड़न होना।
  • पैरों में सुन्नपन शϤ चींटियाँ चलना: जांघ के पिछले हिस्से से लेकर एड़ी या पैरों की उँगलियों तक ऐसा महसूस होना जैसे पैर सो गया है या उसमें हज़ारों चींटियाँ रेंग रही हैं।
  • चलने के तरीके (Gait) में बदलाव आना: दर्द से बचने के लिए अनजाने में ही आपका एक पैर पर ज़्यादा वज़न डालकर लंगड़ा कर (Limping) चलना शुरू कर देना।
  • खांसने या छींकने पर तेज़ दर्द: जब आप खांसते या छींकते हैं, तो रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ने से कमर से जांघ तक बिजली के झटके (Electric shock) जैसा दर्द दौड़ जाना।

इस दर्द को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं शϤ उनकी जटिलताएँ?

साइटिका शϤ हिप पेन से तुरंत राहत पाने शϤ अपने रोज़मर्रा के काम चालू रखने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो उनकी नसों शϤ जोड़ों को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • पेनकिलर्स का रोज़ाना सेवन: दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना दर्द निवारक गोलियाँ (Painkillers) खाना आपकी किडनी शϤ लिवर को डैमेज कर देता है, लेकिन जिस जगह नस दबी है या जॉइंट घिस रहा है, वहां कोई इलाज नहीं होता।
  • गलत गद्दे (Mattress) शϤ पोश्चर: दर्द होने के बावजूद बहुत ज़्यादा मुलायम गद्दों पर सोना या गलत तरीके से झुककर भारी वज़न उठाना, जिससे रीढ़ की हड्डी की डिस्क शϤ ज़्यादा खिसक जाती है।
  • बिना सलाह के गलत एक्सरसाइज़: इंटरनेट देखकर दर्द की हालत में भारी स्ट्रेचिंग या गलत योगासन करना, जो दबी हुई नस (Compression) को शϤ ज़्यादा नुकसान पहुँचा सकता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर कमर की दबी हुई नस शϤ हिप जॉइंट को ठीक न किया जाए, तो यह 'फुट ड्रॉप' (पैर का पंजा न उठा पाना), मांसपेशियों के पूरी तरह सूख जाने (Muscle Atrophy) शϤ अंततः 'हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी' (Hip Replacement Surgery) का भयंकर रूप ले लेती है।

आयुर्वेद साइटिका शϤ हिप जॉइंट के दर्द को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे साइटिका (Sciatica) या ऑस्टियोआर्थराइटिस कहता है, आयुर्वेद उसे 'गृध्रसॶ' (Gridhrasi) शϤ 'संधिगत वात' के बहुत ही गहरे शϤ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझता है।

  • गृध्रसॶ (Gridhrasi - Sciatica): आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में वात दोष (Vata Dosha) बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो वह कमर की कंडराओं (Tendons) शϤ नसों में जाकर उन्हें सुखा देता है। इसके कारण मरीज़ गिद्ध (Vulture - Gridhra) की तरह लंगड़ा कर चलने लगता है, इसीलिए इस रोग को गृध्रसॶ कहा गया है।
  • अस्थि-मज्जा धातु का क्षय: गलत खान-पान शϤ स्क्रीन के सामने लगातार बैठे रहने से हमारा पोषण हड्डियों (Asthi) शϤ नसों (Majja) तक नहीं पहुँच पाता। इससे हिप जॉइंट की चिकनाई (Synovial fluid) सूख जाती है शϤ नसें कमज़ोर पड़ जाती हैं।
  • आम (Toxins) शϤ स्रोतस में रुकावट: कमज़ोर पाचन के कारण शरीर में बनने वाला कच्चा रस या 'आम' (Toxins) नसों शϤ जोड़ों में जाकर जम जाता है। यह कचरा नसों के चैनल (Srotas) को ब्लॉक कर देता है, जिससे वहां भयंकर सूजन शϤ दर्द पैदा होता है।

नसों शϤ जोड़ों की खुश्की मिटाने शϤ वात शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके जोड़ों को सुखा भी सकता है शϤ उन्हें दोबारा हरा-भरा भी कर सकता है। साइटिका शϤ हिप पेन से बचने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - नसों शϤ जोड़ों को चिकनाई देने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रूखापन शϤ गैस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, गेहूं, दलिया, मूंग दाल की खिचड़ी, रागी। वाइट ब्रेड, मैदा, बासी खाना, पैकेटबंद नूडल्स, रूखे बिस्कुट।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (जॉइंट्स के लिए अमृत), तिल का तेल। रिफाइंड तेल, बहुत अधिक जंक फूड, डालडा।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, सहजन (Drumsticks), लहसुन, अदरक। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, भारी कटहल, भिंडी, राजमा, छोले।
फल शϤ मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए अखरोट, बादाम, पपीता, सेब, मुनक्का। डिब्बाबंद फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स, ठंडे फल।
पेय पदार्थ (Beverages) हल्दी, लहसुन शϤ अश्वगंधा वाला दूध (रात में), जीरा-अजवाइन का पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन (कॉफी नसों को सुखाती है), कोल्ड ड्रिंक्स।

कमर शϤ हिप जॉइंट को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के कमर शϤ जांघ के दर्द को खींच लेते हैं शϤ घिस चुकी हड्डियों व नसों को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • निर्गुण्डी (Nirgundi): आयुर्वेद में इसे दर्द निवारक जड़ी-बूटियों का राजा कहा जाता है। यह साइटिका के कारण होने वाले भारी सुन्नपन शϤ तेज़ दर्द को तेज़ी से शांत करती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): नसों शϤ मांसपेशियों की कमज़ोरी दूर करने के लिए यह एक अद्भुत रसायन है। यह सूखी हुई मज्जा धातु में भारी ताकत शϤ ऊर्जा भर देता है।
  • शल्लकी (Shallaki) शϤ गुग्गुल (Guggulu): हिप जॉइंट में आई सूजन (Inflammation) को खत्म करने शϤ हड्डियों के बीच की घिस चुकी कार्टिलेज को दोबारा स्वस्थ करने के लिए ये जड़ी-बूटियां अचूक हैं।
  • रास्ना (Rasna): यह वात दोष को नष्ट करने वाली सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है, जो कमर की जकड़न को खोलकर पैरों तक जाने वाले दर्द को रोकती है।

साइटिका की नस खोलने शϤ जकड़न मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात शϤ जकड़न बहुत गहराई तक रीढ़ की हड्डी शϤ हिप जॉइंट में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी शϤ अंदरूनी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • कटि बस्तॶ (Kati Basti): कमर के निचले हिस्से (L4-L5) पर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल (जैसे सहचरादि या महानारायण तेल) रोककर रखा जाता है। यह सूखी हुई डिस्क को भारी चिकनाई देती है शϤ दबी हुई साइटिक नर्व को खोलकर दर्द तुरंत रोक देती है।
  • पत्र पोटली स्वेद (Patra Pinda Sweda): ताज़े दर्द-निवारक पत्तों (जैसे निर्गुण्डी, एरण्ड) की पोटली बनाकर गर्म तेल के साथ पूरे पैर शϤ हिप जॉइंट की सिकाई की जाती है। यह सूजन शϤ मांसपेशियों की ऐंठन को चमत्कारी रूप से खत्म करती है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): गुनगुने वात-शामक तेलों से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है शϤ नसों का ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • बस्तॶ (Basti - Enema): आयुर्वेद में साइटिका शϤ वात रोगों के लिए 'बस्तॶ' को आधा इलाज (Half treatment) माना गया है। गुदा (Rectum) के मार्ग से औषधीय काढ़े शϤ तेल दिए जाते हैं, जो शरीर में वात के मुख्य स्थान (पक्वाशय) से गैस शϤ रूखेपन को जड़ से बाहर निकाल देते हैं।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको इस सुन्नपन शϤ दर्दनाक स्थिति में अकेला नहीं छोड़ते, बल्कि एक स्वस्थ शϤ दर्द-मुक्त जीवन की ओर हर कदम पर आपका मार्गदर्शन करते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें शϤ अपने साइटिका या हिप पेन के बारे में बात करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर दर्द के कारण घर से निकलना मुश्किल है, तो आप अपने घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात कर सकते हैं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके दोषों के अनुसार खास जड़ी-बूटियाँ, दर्द निवारक तेल, पंचकर्म थेरेपी शϤ एक आयुर्वेदिक डाइट रूटीन तैयार किया जाता है।

नसों शϤ जोड़ों के पूरी तरह रिपेयर होने शϤ दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से गलत पोश्चर शϤ वात वृद्धि के कारण सूखी हुई नसों शϤ घिस चुके जॉइंट्स को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों शϤ पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। कमर की भारी जकड़न, सूजन शϤ जांघों में जाने वाले करंट जैसे दर्द में कमी आएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म शϤ रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होने लगेगा। पैरों की झुनझुनी (Tingling) शϤ सुन्नपन लगभग खत्म हो जाएगा शϤ चलने-फिरने की क्षमता (Mobility) वापस आने लगेगी।
  • 5-6 महीने: अस्थि शϤ मज्जा धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी शϤ आपका नर्वस सिस्टम शϤ हिप जॉइंट रीबूट हो जाएगा। आप बिना किसी पेनकिलर के एक सामान्य शϤ दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक शϤ आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

साइटिका शϤ हिप पेन के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा शϤ आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा शϤ बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए पेनकिलर्स, स्टेरॉयड इंजेक्शन या नसों को सुन्न करने वाली गोलियाँ देना। वात को शांत करना, 'आम' को पचाना शϤ रीढ़ की हड्डी व हिप जॉइंट को प्राकृतिक रूप से पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक स्थानीय (Local) मेकेनिकल समस्या (डिस्क का खिसकना या हड्डी घिसना) मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात शϤ अस्थि-मज्जा धातु के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम (गृध्रसॶ) मानना।
डाइट शϤ लाइफस्टाइल पेनकिलर के साथ फिजियोथेरेपी की सलाह, लेकिन जठराग्नि या खान-पान पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, कब्ज़ दूर करना शϤ औषधीय तेलों (कटि बस्तॶ) को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर दर्द तुरंत वापस आ जाता है शϤ अंततः स्पाइन सर्जरी या हिप रिप्लेसमेंट (Surgery) का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, नसें अपनी जगह वापस आती हैं शϤ इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद नसों शϤ जोड़ों की इस खुश्की को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर शϤ अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी संपर्क ज़रूरी हो जाता है:

  • मल-मूत्र पर नियंत्रण खो देना (Cauda Equina Syndrome): अगर कमर दर्द के साथ आपको अचानक पेशाब या मल रोकने में असमर्थता महसूस होने लगे।
  • पैर का पंजा न उठा पाना (Foot Drop): अगर आपके पैर का पंजा अचानक सुन्न पड़ जाए शϤ आप चलते समय उसे ज़मीन से ऊपर न उठा पाएं।
  • मांसपेशियों का सूखना (Muscle Wasting): अगर आपको लगे कि आपकी एक जांघ या पिंडलियों की मांसपेशियाँ दूसरे पैर के मुकाबले बहुत ज़्यादा सूखकर पतली होने लगी हैं।

निष्कर्ष

कमर से होकर जांघों शϤ पैरों तक जाने वाला यह तेज़ दर्द महज़ एक खिंचाव नहीं है। चाहे वह दबी हुई साइटिक नर्व की चीख हो या सूखते हुए हिप जॉइंट की पुकार, यह आपके शरीर का वह अलार्म है जो बता रहा है कि आपका वात दोष भड़क चुका है शϤ हड्डियों व नसों की प्राकृतिक चिकनाई खत्म हो रही है। जब आप इस दर्द को रोज़ाना पेनकिलर्स शϤ स्टेरॉयड से दबाते हैं, तो आप अपनी नसों को हील करने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से अपाहिज कर रहे होते हैं। इस दर्दनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने पोश्चर को सुधारें, भारी वज़न उठाने से बचें शϤ अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी शϤ अखरोट शामिल करें। अश्वगंधा, निर्गुण्डी शϤ शल्लकी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, शϤ 'कटि बस्तॶ' व 'अभ्यंग' मालिश से अपनी सूखी हुई नसों शϤ जोड़ों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। दर्द के कारण अपने कदमों को रुकने न दें, शϤ अपने शरीर व नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हिप पेन मुख्य रूप से कूल्हे के जोड़ या ग्रोइन (जांघ के अंदरूनी हिस्से) में होता है शϤ वज़न डालने या चलने पर बढ़ता है। वहीं, साइटिका का दर्द कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर कूल्हे के पीछे से होता हुआ करंट की तरह पैर की एड़ी शϤ उँगलियों तक जाता है।

बिल्कुल। घंटों तक एक ही जगह बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (Lumbar spine) पर भारी दबाव पड़ता है, जिससे डिस्क खिसक कर साइटिक नर्व को दबा सकती है। साथ ही, बैठे रहने से पिरिफोर्मिस मांसपेशी सख्त होकर भी नस को दबा देती है।

बहुत ज़्यादा मुलायम (Spongy) गद्दे साइटिका के लिए नुकसानदायक होते हैं क्योंकि वे रीढ़ की हड्डी को प्राकृतिक सपोर्ट नहीं देते। हमेशा एक फर्म (Firm) या आर्थोपेडिक गद्दे का इस्तेमाल करें, जो सोते समय आपकी कमर को सीधा रखे।

हाँ, हल्का पैदल चलना साइटिक नर्व को आराम देता है शϤ रक्त संचार (Blood circulation) बढ़ाता है। लेकिन ध्यान रहे, अगर चलने से दर्द बहुत ज़्यादा बढ़ रहा हो, तो ज़बरदस्ती न चलें शϤ पहले आराम करें व वात-शामक तेल से मालिश करें।

आयुर्वेद के अनुसार, वात रोगों (सुन्नपन, जकड़न शϤ दर्द) में हमेशा गर्म सिकाई करनी चाहिए। बर्फ लगाने से नसें शϤ ज़्यादा सिकुड़ जाएंगी शϤ वात भड़क जाएगा। महानारायण या तिल के तेल से मालिश करने के बाद ही गर्म पानी की थैली से सिकाई करें।

हाँ! आयुर्वेद में पक्वाशय (Large intestine) वात का मुख्य स्थान है। जब कब्ज़ होता है, तो अपान वात (गैस) नीचे नहीं निकल पाती शϤ उल्टी दिशा में जाकर कमर की नसों शϤ जोड़ों में भारी दबाव व दर्द पैदा करती है। इसलिए पेट साफ रखना सबसे ज़रूरी है।

अश्वगंधा एक बेहतरीन बल्य रसायन है। यह पेनकिलर की तरह दर्द को सुन्न नहीं करता, बल्कि दबी हुई शϤ डैमेज हुई नस (मज्जा धातु) को गहराई से पोषण देता है, अंदरूनी सूजन कम करता है शϤ नसों को मज़बूत बनाता है।

कटि बस्तॶ में कमर के निचले हिस्से (जहां नस दब रही है) पर गर्म औषधीय तेल रोका जाता है। यह तेल त्वचा के ज़रिए गहराई तक जाकर सूखी हुई डिस्क को चिकनाई देता है, वात को शांत करता है शϤ दबी हुई नस को खोलकर पैरों तक जाने वाले दर्द को रोक देता है।

नसों शϤ जोड़ों की खुश्की के लिए हमेशा वात-शामक तेल (जैसे महानारायण तेल, सहचरादि तेल या शुद्ध तिल का तेल) का ही इस्तेमाल करना चाहिए। तिल का तेल वात को शांत करने शϤ गहराई तक जाने में सरसों के तेल से बहुत ज़्यादा असरदार होता है।

बिल्कुल नहीं। सर्जरी (जैसे स्पाइन सर्जरी या हिप रिप्लेसमेंट) केवल अंतिम विकल्प होना चाहिए। आयुर्वेद में सही डाइट, पंचकर्म (कटि बस्तॶ, बस्तॶ, अभ्यंग) शϤ वात-शामक जड़ी-बूटियों के ज़रिए इस समस्या को प्राकृतिक रूप से जड़ से ठीक किया जा सकता है।

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