Դ

Դ Search
Close Button
 
 

Postpartum बाल झड़ना — कब रुकेगा? आयुर्वेदिक Recovery Plan

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 14 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5048

मां बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है, लेकिन डिलीवरी के बाद शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं। इनमें से एक बदलाव जो अक्सर नई माओं को डरा देता है, वह है गुच्छों में बालों का गिरना। असल में, यह हार्मोन्स के ऊपर-नीचे होने, शरीर की अंदरूनी रिकवरी और न्यूट्रिशन की कमी का नतीजा होता है। कंघी करते ही जब मुट्ठी भर बाल हाथ में आते हैं, तो टेंशन होना लाजमी है।

लेकिन घबराइए मत! यह सिर्फ एक नॉर्मल फेज (दौर) है। जैसे-जैसे आपका शरीर वापस अपने पुराने बैलेंस में आएगा, यह समस्या खुद-ब-खुद ठीक होने लगेगी। सही देखभाल, अच्छी डाइट और शरीर को रिकवर होने का थोड़ा समय देकर आप इस परेशानी से आसानी से बाहर आ सकती हैं।

Postpartum hair fall क्या होता है? 

डिलीवरी के बाद शरीर के हार्मोन्स एकदम से बदल जाते हैं, जिसका सीधा असर हमारे बालों की ग्रोथ साइकिल पर पड़ता है। इस दौरान बाल नॉर्मल से कहीं ज्यादा तेजी से झड़ने लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में 'पोस्टपार्टम हेयर फॉल' (Postpartum hair fall) कहते हैं। नहाते समय, कंघी करते वक्त या सिर्फ बालों में हाथ फेरने पर भी ढेर सारे बाल टूटकर गिरने लगते हैं। यह देखकर मानसिक तनाव (स्ट्रेस) बहुत बढ़ जाता है। लेकिन यकीन मानिए, यह कोई पर्मानेंट बीमारी नहीं है; यह सिर्फ कुछ समय का बदलाव है। थोड़ी सी तसल्ली और सही देखभाल के साथ आपके बाल वापस पहले जैसे घने हो जाएंगे।

डिलीवरी के बाद बाल क्यों तेजी से झड़ते हैं 

डिलीवरी के बाद शरीर अंदर से बहुत बड़े बदलावों से गुजरता है। इन्हीं बदलावों का सीधा असर बालों की जड़ों पर पड़ता है, जिससे वे तेजी से झड़ने लगते हैं:

  • हार्मोन्स का खेल: डिलीवरी के तुरंत बाद शरीर में प्रेगनेंसी वाले हार्मोन्स का लेवल तेजी से गिरता है। इसी अचानक हुए बदलाव के कारण बालों की जड़ें ढीली पड़ जाती हैं।
  • प्रेगनेंसी वाले बालों का एक साथ गिरना: प्रेगनेंसी के 9 महीनों में हार्मोन्स की वजह से बाल गिरना लगभग बंद हो जाता है और वे लंबे समय तक बढ़ते रहते हैं। डिलीवरी के बाद वो सारा अटका हुआ हेयर फॉल एक साथ होने लगता है।
  • न्यूट्रिशन (पोषण) की कमी: नई मां का शरीर बच्चे को दूध पिलाने और खुद को हील करने में लगा रहता है। ऐसे में अगर डाइट में जरा भी कमी रह जाए, तो बालों तक पोषण नहीं पहुंच पाता।
  • : बच्चे के आने के बाद रातों की नींद उड़ जाती है। यह लगातार बनी रहने वाली थकान और नींद की कमी बालों के झड़ने की एक बहुत बड़ी वजह है।
  • शरीर पर भारी स्ट्रेस: डिलीवरी के दौरान शरीर पर जो भारी शारीरिक और मानसिक दबाव पड़ता है, उससे उबरने में समय लगता है, और इसका खामियाजा बालों को भुगतना पड़ता है।

शरीर का रिकवरी चरण क्या है? 

डिलीवरी के बाद आपका शरीर एक नेचुरल 'हीलिंग मोड' (रिकवरी फेज) में चला जाता है। इस समय शरीर की पूरी एनर्जी सिर्फ और सिर्फ जरूरी अंगों को रिपेयर करने और अंदरूनी कमजोरी को दूर करने में लगती है। जाहिर सी बात है, शरीर के लिए उस वक्त बालों की ग्रोथ कोई प्राथमिकता (Priority) नहीं होती। सारी ताकत अंदरूनी रिकवरी में जाने के कारण बालों की जड़ों को मिलने वाली एनर्जी कम हो जाती है। नतीजा? बालों की ग्रोथ रुक जाती है और पुराने बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। लेकिन जैसे ही शरीर अंदर से पूरी तरह हील हो जाता है, बालों का गिरना भी अपने आप रुक जाता है।

आयुर्वेद में प्रसव (Postpartum) के बाद बाल झड़ने की समझ 

आयुर्वेद के नजरिए से देखें तो डिलीवरी के बाद नई मां के शरीर में बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर की धातुओं (Tissues) में भारी कमी आ जाती है। आसान शब्दों में कहें तो शरीर में भयंकर सूखापन (रुखापन) और कमजोरी आ जाती है। इस रूखेपन और वात के बढ़ने की वजह से सिर की त्वचा (Scalp) तक सही पोषण नहीं पहुंच पाता। बालों की जड़ें सूखने और कमजोर होने लगती हैं। आयुर्वेद मानता है कि जैसे-जैसे शरीर की यह अंदरूनी कमजोरी दूर होगी और वात शांत होगा, बाल अपने आप झड़ना बंद कर देंगे।

आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण 

आयुर्वेद में हम आपके झड़ते बालों को सिर्फ एक 'ऊपरी समस्या' मानकर कोई शैम्पू या तेल नहीं पकड़ा देते। हम इसे शरीर के अंदर बिगड़े हुए वात, आई हुई कमजोरी और हार्मोन्स के क्रैश होने के रूप में गहराई से देखते हैं। हमारा इलाज आपको अंदर से मजबूत करने पर टिका होता है:

  • असली जड़ को पकड़ना: हम सिर्फ बालों पर फोकस नहीं करते, बल्कि यह देखते हैं कि डिलीवरी के बाद आपका शरीर कितना थका हुआ है, स्ट्रेस कितना है और डाइट कैसी चल रही है।
  • वात को शांत करना: सबसे पहले शरीर में बढ़े हुए उस रूखेपन और वात को कंट्रोल किया जाता है, जो बालों की जड़ों को अंदर से सुखा रहा है।
  • अंदरूनी ताकत लौटाना: मां के शरीर को अंदर से इतना न्यूट्रिशन दिया जाता है कि उसकी खाली हो चुकी 'बैटरी' फुल हो सके और बालों को पूरा पोषण मिले।
  • बालों की जड़ों में नई जान फूंकना: स्कैल्प को अंदर से मजबूत करके बालों का गिरना रोका जाता है।
  • थकान और सुस्ती को भगाना: नई मां की शरीरिक कमजोरी को दूर कर उसे दोबारा एनर्जेटिक और रिलैक्स बनाया जाता है।
  • डाइट और रूटीन: आपको ऐसा खानपान और लाइफस्टाइल बताया जाता है जो बच्चे की देखभाल के साथ-साथ आपके शरीर को भी सूट करे।
  • लंबे समय का परमानेंट आराम: हमारा मकसद सिर्फ कुछ दिन बाल रोकना नहीं, बल्कि आपको अंदर से इतना हेल्दी बनाना है कि आगे चलकर बाल हमेशा घने रहें।

प्रसव के बाद बाल झड़ने में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक औषधियां 

चूंकि यह समस्या वात के बढ़ने और शरीर के अंदर से खोखले होने की वजह से होती है, इसलिए आयुर्वेद में कुछ ऐसी खास जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर में नई जान और बालों में मजबूती भर सकें:

  • यह विटामिन सी का खजाना है। यह शरीर को डीप न्यूट्रिशन देता है और बालों की जड़ों को फौलादी बनाता है।
  • भृंगराज: आयुर्वेद में इसे बालों का राजा (केशराज) कहा जाता है। यह बालों की रुकी हुई ग्रोथ को दोबारा चालू करने और झड़ना रोकने में किसी जादू की तरह काम करता है।
  • : रातों की नींद खराब होने से जो स्ट्रेस और दिमागी थकान आती है, अश्वगंधा उसे जड़ से खत्म कर शरीर को गजब की ताकत देता है।
  • शतावरी: एक नई मां के लिए शतावरी किसी वरदान से कम नहीं। यह स्त्री के शरीर को अंदर से ताकत देती है और बिगड़े हुए हार्मोन्स को वापस सेट करती है।
  • ब्राह्मी: यह दिमाग को एकदम शांत और रिलैक्स रखती है, जिसका बहुत पॉजिटिव असर आपके झड़ते बालों पर पड़ता है।
  • तिल का तेल: सिर में शुद्ध तिल के तेल की मालिश करने से स्कैल्प का रूखापन खत्म होता है और जड़ों को भरपूर खुराक मिलती है।

प्रसव के बाद बाल झड़ने में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक थेरेपी 

इन आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी का मकसद सिर्फ बालों को झड़ना रोकना ही नहीं, बल्कि एक नई मां के शरीर को पूरी तरह से रिलैक्स करके अंदर से हील करना होता है:

  • औषधीय (हर्बल) तेलों से सिर की चंपी करने से स्कैल्प का सूखापन मिटता है, ब्लड सर्कुलेशन दौड़ता है और बढ़ा हुआ वात शांत हो जाता है।
  • शिरोधारा: जब माथे पर एक लय में जड़ी-बूटियों वाले तेल की धार गिरती है, तो नई मां का सारा दिमागी स्ट्रेस और डिप्रेशन छूमंतर हो जाता है।
  • अभ्यंग (फुल बॉडी मालिश): पूरे शरीर की हल्के गर्म तेल से मालिश करने से डिलीवरी की सारी थकावट और बदन का दर्द पल भर में दूर हो जाता है।
  • नस्य कर्म: नाक में आयुर्वेदिक तेल या घी की कुछ बूंदें डालने से दिमागी नसें शांत होती हैं और हार्मोन्स का बैलेंस सुधरता है।
  • शरीर को हल्की भाप देने से नस-नस की जकड़न खुलती है और शरीर में एक गजब का हल्कापन आ जाता है।

प्रसव के बाद बाल झड़ने में सहायक आहार

आहार का सीधा संबंध शरीर के पोषण और बालों की जड़ों की शक्ति से होता है। सही भोजन शरीर को भीतर से मजबूत करता है।

क्या खाएं?

  • ताजा और हल्का घर का बना भोजन
  • मूंग दाल और खिचड़ी जैसे सुपाच्य आहार
  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ और मौसमी फल
  • दूध और घी सीमित मात्रा में
  • सूखे मेवे (भीगे हुए)
  • पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी

क्या न खाएं?

  • बहुत तला हुआ और भारी भोजन
  • अत्यधिक मसालेदार आहार
  • पैकेट बंद और संरक्षित खाद्य पदार्थ
  • बहुत ठंडे पेय
  • बार-बार बाहर का भोजन
  • कृत्रिम स्वाद और रंग वाली चीजें

कब डॉक्टर से सलाह लें? 

प्रसव के बाद बाल झड़ना सामान्य हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है:

  • बाल बहुत तेजी से और लगातार झड़ते रहें
  • बालों में बहुत ज्यादा पतलापन दिखाई देने लगे
  • सिर की त्वचा में अत्यधिक रूखापन या खुजली हो
  • प्रसव के 6 महीने बाद भी सुधार न दिखे
  • अत्यधिक कमजोरी, चक्कर या पोषण की कमी महसूस हो
  • थायरॉयड या हार्मोन असंतुलन के संकेत मिलें
  • मानसिक तनाव और नींद की कमी लगातार बनी रहे
  • बालों की नई वृद्धि बिल्कुल न दिखाई दे

निष्कर्ष

प्रसव के बाद बाल झड़ना केवल बाहरी समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर हो रहे बड़े बदलावों का परिणाम होता है। आधुनिक चिकित्सा इसे हार्मोनल बदलाव और प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया मानती है, जबकि आयुर्वेद इसे वात दोष वृद्धि, धातु क्षय और शरीर की कमजोरी से जोड़कर देखता है।

लंबे समय तक नींद की कमी, तनाव और पोषण की कमी इस स्थिति को बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल बाल झड़ने को रोकने पर नहीं, बल्कि शरीर के अंदर संतुलन, सही आहार और पर्याप्त आराम पर ध्यान देना सबसे जरूरी माना जाता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

प्रसव के बाद बाल झड़ना कई महिलाओं में देखा जाता है लेकिन यह हर व्यक्ति में समान नहीं होता। शरीर की रिकवरी, पोषण और हार्मोन संतुलन के अनुसार इसकी तीव्रता अलग हो सकती है। कुछ महिलाओं में यह हल्का होता है जबकि कुछ में अधिक महसूस हो सकता है। यह अक्सर अस्थायी स्थिति होती है।

यह स्थिति कुछ महीनों तक रह सकती है और धीरे-धीरे शरीर के संतुलन में आने पर कम होने लगती है। समय व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और पोषण पर निर्भर करता है। सामान्य रूप से शरीर जब अपनी सामान्य अवस्था में लौटता है तो बाल झड़ना भी कम हो जाता है। यह स्थायी समस्या नहीं मानी जाती।

स्तनपान के दौरान शरीर की पोषण और ऊर्जा की जरूरत बढ़ जाती है। यदि आहार संतुलित न हो तो इसका असर बालों की मजबूती पर पड़ सकता है। हालांकि यह हर महिला में एक जैसा नहीं होता। सही पोषण से इस प्रभाव को कम किया जा सकता है।

प्रसव के बाद होने वाला बाल झड़ना आमतौर पर अस्थायी होता है। यह गंजापन का कारण नहीं बनता। जैसे जैसे शरीर संतुलन में आता है बालों की वृद्धि सामान्य हो जाती है। यदि लंबे समय तक समस्या बनी रहे तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

मानसिक तनाव शरीर के हार्मोन संतुलन और ऊर्जा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। इससे बालों की जड़ों पर भी असर पड़ सकता है। प्रसव के बाद तनाव और थकान सामान्य होती है, जो इस स्थिति को बढ़ा सकती है। इसलिए मानसिक संतुलन भी महत्वपूर्ण है।

यदि शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता तो बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं। प्रसव के बाद शरीर की जरूरतें अधिक होती हैं, इसलिए संतुलित आहार बहुत जरूरी होता है। लंबे समय तक पोषण की कमी बालों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। सही आहार से सुधार संभव है।

यह प्रक्रिया धीरे धीरे कम होती है, अचानक पूरी तरह बंद नहीं होती। शरीर जब अपने हार्मोन और पोषण के संतुलन में आता है तो बाल झड़ना भी सामान्य हो जाता है। यह एक क्रमिक सुधार प्रक्रिया होती है। समय के साथ स्थिति बेहतर होती जाती है।

बाल धोने से बाल झड़ने की समस्या सीधे नहीं बढ़ती। पहले से कमजोर और झड़ने वाले बाल धोते समय अधिक दिखाई दे सकते हैं। यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। सही देखभाल से बालों की स्थिति बेहतर हो सकती है।

हाँ, यह स्थिति दूसरी या हर डिलीवरी के बाद भी हो सकती है। हर बार शरीर एक नई रिकवरी प्रक्रिया से गुजरता है। इसकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। शरीर की स्थिति और पोषण इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संतुलित जीवनशैली से शरीर की रिकवरी बेहतर हो सकती है। सही आहार, पर्याप्त आराम और तनाव नियंत्रण से बालों की स्थिति में सुधार देखा जा सकता है। शरीर को संतुलन में आने का समय देना भी जरूरी होता है। धीरे धीरे सकारात्मक बदलाव महसूस होते हैं।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us