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Spinal Stenosis – चलते वक्त पैर भारी हो जाते हैं, बैठने पर ठीक — क्या इलाज है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 14 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5037

क्या आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है कि आप सुबह की सैर के लिए निकलते हैं या बाज़ार तक पैदल जाते हैं, और कुछ ही दूर चलने पर आपके पैर इतने भारी हो जाते हैं मानो उनमें कई किलो वज़न बांध दिया गया हो? पिंडलियों में दर्द, जांघों में ऐंठन और पैरों का सुन्न पड़ जाना आपको मजबूर कर देता है कि आप वहीं किसी बेंच या सीढ़ी पर बैठ जाएँ। और सबसे हैरानी की बात यह है कि बैठते ही या आगे की तरफ झुकते ही यह सारा दर्द कुछ ही मिनटों में जादू की तरह गायब हो जाता है।

आप इसे बढ़ती उम्र का असर, कैल्शियम की कमी या सामान्य थकावट मानकर दर्द निवारक गोलियों Painkillers से टालने की कोशिश करते हैं। लेकिन यह साधारण कमज़ोरी नहीं है; यह आपकी रीढ़ की हड्डी के भीतर हो रहे एक खतरनाक बदलाव का सीधा संकेत है। जब आपके पैरों की नसें रीढ़ की हड्डी के सिकुड़ते हुए रास्तों में कुचली जाने लगें और आपका चलना-फिरना एक सज़ा बन जाए, तो समझ लीजिए कि आप 'स्पाइनल स्टेनोसिस' Spinal Stenosis की गंभीर चपेट में आ चुके हैं। इसे नज़रअंदाज़ करने का मतलब है भविष्य में अपने पैरों की ताक़त को हमेशा के लिए खो देना और व्हीलचेयर तक पहुँचने का जोखिम उठाना।

स्पाइनल स्टेनोसिस Spinal Stenosis और पैरों का भारीपन शरीर में क्या संकेत देता है?

हमारी रीढ़ की हड्डी Spine के बीच में एक खोखली नली Spinal Canal होती है, जहाँ से स्पाइनल कॉर्ड और पैरों तक जाने वाली मुख्य नसें गुज़रती हैं। उम्र, गलत पोश्चर या हड्डियों के घिसने के कारण जब यह नली सिकुड़ने लगती है, तो वहां से गुज़रने वाली नसों पर भयंकर दबाव पड़ने लगता है।

  • न्यूरोजेनिक क्लॉडिकेशन Neurogenic Claudication: जब आप खड़े होते हैं या चलते हैं, तो सिकुड़ी हुई स्पाइनल कैनाल नसों को पूरी तरह दबा देती है। ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और पैरों में भारीपन, दर्द और सुन्नपन छा जाता है।
  • बैठने पर तुरंत आराम: जब आप बैठते हैं या आगे की तरफ कुर्सी या शॉपिंग कार्ट पर झुकते हैं, तो रीढ़ की हड्डी का कैनाल थोड़ा खुल जाता है, नसों पर से दबाव हटता है और खून का दौरा वापस शुरू होने से दर्द गायब हो जाता है।
  • साइटिका Sciatica का भयंकर रूप: स्टेनोसिस के कारण जब कमर के निचले हिस्से Lumbar region की नसें दबती हैं, तो यह दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों और पैरों की उँगलियों तक करंट की तरह दौड़ता है।
  • नसों का सूखना और कमज़ोरी: लगातार दबने और खून की सप्लाई रुकने से नसें अंदर से सूखने लगती हैं, जिससे पैरों की मांसपेशियाँ अपना लचीलापन और ताक़त खो देती हैं।

स्पाइनल स्टेनोसिस और नसों का डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, इसलिए नसों पर पड़ने वाला यह दबाव शरीर के दोषों के आधार पर तीन मुख्य प्रकारों में लक्षण दिखाता है:

  • वात-प्रधान नर्व डैमेज: इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी और पैरों में भयंकर रूखापन आ जाता है। चलते समय पैरों में ऐसा लगता है जैसे सुइयाँ चुभ रही हों। दर्द बहुत तेज़ और चुभने वाला होता है। वात Vata dosha बढ़ने से पैर ठंडे पड़ने लगते हैं और सुन्नपन असहनीय हो जाता है।
  • पित्त-प्रधान नर्व डैमेज: इसमें नसों के दबने के साथ-साथ पिंडलियों और तलवों में आग लगने जैसी जलन होती है। मरीज़ को ऐसा लगता है जैसे उसके पैरों से बहुत ज़्यादा गर्मी Heat निकल रही है और दर्द के साथ-साथ भारी बेचैनी बनी रहती है।
  • कफ-प्रधान नर्व डैमेज: इसमें दर्द से ज़्यादा पैरों में 'पत्थर जैसा भारीपन' महसूस होता है। थोड़ा सा चलने पर भी लगता है जैसे पैर ज़मीन से उठ ही नहीं रहे हैं। जांघों और टखनों के पास हल्की सूजन आ जाती है और शरीर में हर वक्त भारी सुस्ती छाई रहती है।

क्या आपके पैरों में भी नसों के डैमेज Spinal Stenosis के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

स्पाइनल स्टेनोसिस रातों-रात आपकी रीढ़ की हड्डी को ब्लॉक नहीं करता। यह बहुत पहले से अलार्म बजाता है। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • चलने की क्षमता में लगातार कमी: पहले आप बिना रुके 2 किलोमीटर चल लेते थे, लेकिन अब 200 मीटर चलने पर भी आपको बैठने की सख्त ज़रूरत महसूस होती है।
  • शॉपिंग कार्ट का सहारा लेना: बाज़ार में चलते समय अगर आपको अनजाने में ही आगे की तरफ झुककर या किसी चीज़ जैसे शॉपिंग कार्ट का सहारा लेकर चलने में आराम मिलता है।
  • पैर के पंजों में सुन्नपन: रात को सोते समय या सुबह उठते ही पैरों के तलवों या पंजों में भारी सुन्नपन महसूस होना, जैसे पैर सो गए हों।
  • संतुलन बिगड़ना: चलते-चलते अचानक पैरों का लड़खड़ा जाना या ऐसा महसूस होना कि पैरों ने वज़न उठाना बंद कर दिया है।

इस भारीपन को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस दर्द और भारीपन से तुरंत राहत पाने के लिए मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो रीढ़ की हड्डी को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • पेनकिलर्स का अंधाधुंध सेवन: दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना पेनकिलर्स खाना किडनी को तबाह कर देता है, लेकिन जिस जगह नस दबी है Compression, वहां इसका कोई असर नहीं होता।
  • लगातार बेल्ट Lumbosacral Belt बांधना: कमर के दर्द के लिए 24 घंटे कसकर बेल्ट बांधे रखने से कमर और पेट की मांसपेशियाँ पूरी तरह कमज़ोर Muscle Wasting हो जाती हैं और रीढ़ की हड्डी का सहारा ही खत्म हो जाता है।
  • सिर्फ कैल्शियम की गोलियों पर निर्भर रहना: यह हड्डियों के भुरभुरेपन से ज़्यादा नसों के कुचले जाने की बीमारी है। सिर्फ कैल्शियम खाने से स्पाइनल कैनाल का रास्ता नहीं खुलता।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इसे ठीक न किया जाए, तो यह 'कौडा इक्विना सिंड्रोम' Cauda Equina Syndrome का रूप ले सकता है, जहाँ इंसान अपने मल-मूत्र पर नियंत्रण खो देता है और पैरों में स्थायी लकवा Paralysis मार सकता है।

आयुर्वेद स्पाइनल स्टेनोसिस और नसों के दबने को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे स्पाइनल स्टेनोसिस Spinal Stenosis कहता है, आयुर्वेद उसे 'कटी ग्रह', 'गृध्रसी' Sciatica और 'अस्थि-मज्जा धातु क्षय' के विज्ञान से गहराई से समझता है।

  • अस्थि और मज्जा धातु का सूखना: बढ़ती उम्र और गलत जीवनशैली के कारण शरीर में जब वात भड़कता है, तो वह हड्डियों Asthi और नसों Majja की चिकनाई को सुखा देता है। चिकनाई खत्म होने से रीढ़ की हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं और उनके बीच का गैप कम हो जाता है।
  • स्रोतस में रुकावट Srotorodha: आयुर्वेद में कमर कटी प्रदेश वात का मुख्य स्थान है। जब यहां बढ़ा हुआ वात नसों के रास्तों चैनल्स को ब्लॉक कर देता है, तो पैरों तक प्राण वायु और रक्त का संचार रुक जाता है, जिससे चलते वक्त भारीपन आता है।
  • आम Toxins का संचय: कमज़ोर पाचन के कारण बना हुआ 'आम' टॉक्सिन्स जब कमर के जोड़ों और स्पाइनल कैनाल में जमा हो जाता है, तो वहां भारी सूजन Inflammation पैदा कर देता है जो नसों को और ज़्यादा दबाती है।
  • स्पाइनल स्टेनोसिस में नसों की खुश्की मिटाने और वात शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपकी रीढ़ की हड्डी को सुखा भी सकता है और उसे दोबारा लचीला भी बना सकता है। नसों को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - नसों को चिकनाई देने वाले और वात शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन और गैस बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, रागी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, रूखे बिस्कुट।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी नसों के लिए अमृत, तिल का तेल, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, बहुत अधिक मक्खन, डालडा।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद सभी अच्छी तरह पकी हुई। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, भारी कटहल, बैंगन, राजमा।
फल और मेवे Fruits & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, पपीता, सेब। डिब्बाबंद और बिना मौसम के फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ Beverages हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध रात में, ताज़ा मट्ठा, जीरा पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन कॉफी नसों को सुखाती है, कोल्ड ड्रिंक्स।

रीढ़ की हड्डी और नसों को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के नसों के दर्द को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी स्पाइन को दोबारा हील करते हैं:

  • अश्वगंधा Ashwagandha: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने और पैरों में वापस ताक़त भरने के लिए यह एक अद्भुत रसायन है। यह सूखी हुई नसों में भारी ऊर्जा भर देता है।
  • गुग्गुल Guggulu: आयुर्वेद में योगराज गुग्गुल जैसी औषधियाँ रीढ़ की हड्डी की सूजन Inflammation को चमत्कारिक रूप से कम करती हैं और दबी हुई नसों को खोलती हैं।
  • रास्ना Rasna: यह जड़ी-बूटी वात रोगों और नसों के दर्द को जड़ से खत्म करने के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। यह कमर से पैरों तक जाने वाले दर्द साइटिका में तुरंत राहत देती है।
  • शल्लकी Shallaki: रीढ़ की हड्डी के घिसते हुए जोड़ों और हड्डियों की रगड़ को रोकने के लिए शल्लकी अचूक मानी जाती है। यह प्राकृतिक पेनकिलर का काम करती है।
  • त्रिफला Triphala: पेट में बनने वाली गैस अपान वात सीधे कमर के दर्द को बढ़ाती है। इसे शरीर से बाहर निकालने के लिए रोज़ रात को त्रिफला का सेवन स्पाइन के मरीज़ों के लिए बहुत ज़रूरी है।

नसों को खोलने और सुन्नपन मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और जकड़न बहुत गहराई तक रीढ़ की हड्डी की नसों में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • कटी बस्ती Kati Basti: कमर के निचले हिस्से Lumbar पर आटे का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल जैसे सहचरादि या क्षीरबला तेल रोककर यह थेरेपी की जाती है। यह सूखी हुई स्पाइनल डिस्क को भारी चिकनाई देती है, जिससे पैरों में जाने वाला सुन्नपन और भारीपन तुरंत रुक जाता है।
  • अभ्यंग Abhyanga: गुनगुने वात-शामक तेलों से की जाने वाली यह मालिश कमर और पैरों की मांसपेशियों की जकड़न को खत्म करती है और ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • पत्र पोटली स्वेदन Patra Potali Sweda: औषधीय पत्तों की पोटली बनाकर उसे गर्म तेल में डुबोकर कमर की सिकाई की जाती है। यह नसों की सूजन को खींच लेती है और दर्द से जादुई राहत देती है।
  • बस्ती Basti/Enema Therapy: आयुर्वेद में बस्ती को 'अर्ध-चिकित्सा' आधी बीमारी का इलाज कहा गया है। हर्बल तेलों और काढ़ों से दिया जाने वाला यह एनीमा शरीर के मुख्य स्थान पक्वाशय से वात को जड़ से उखाड़ फेंकता है।

नसों के पूरी तरह रिपेयर होने और पैरों का भारीपन खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से हड्डियों के घिसने और गलत पोश्चर के कारण सूखी हुई रीढ़ की हड्डी को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। कमर की भारी जकड़न और पैरों में करंट जैसे दौड़ने वाले दर्द में भारी कमी आएगी। आपके लगातार चलने की क्षमता Walking distance थोड़ी बढ़ने लगेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से स्पाइनल कैनाल में सूजन कम होने लगेगी। पिंडलियों का भारीपन Heaviness और सुन्नपन लगभग खत्म हो जाएगा और पैरों में वापस ताक़त आने लगेगी।
  • 5-6 महीने: अस्थि और मज्जा धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी। आप बिना आगे झुके या बिना किसी पेनकिलर के एक सामान्य, ऊर्जावान और लंबी दूरी की सैर का आनंद ले सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

स्पाइनल स्टेनोसिस और नसों के डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए स्टेरॉयड इंजेक्शन Epidural और पेनकिलर्स देना। वात को शांत करना, स्पाइन की सूजन घटाना और अस्थि-मज्जा को प्राकृतिक पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल रीढ़ की हड्डी के एक हिस्से के सिकुड़ने की मैकेनिकल समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और धातुओं के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल बेल्ट बांधने और फिजियोथेरेपी की सलाह, लेकिन जठराग्नि या वात को कंट्रोल करने पर कोई खास ज़ोर नहीं। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, कब्ज़ दूर करना और औषधीय तेलों कटी बस्ती को मुख्य आधार मानना।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर सुन्नपन वापस आता है और अंत में सर्जरी Laminectomy ही विकल्प बचता है। रीढ़ की हड्डी अंदर से मज़बूत होती है और शरीर खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद नसों की इस खुश्की और दबाव को बहुत अच्छे से मैनेज कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल एमरजेंसी की ज़रूरत होती है:

  • मल-मूत्र पर नियंत्रण खोना: अगर आपको अचानक यह पता ही न चले कि आपका यूरिन या मोशन पास हो गया है |
  • फुट ड्रॉप Foot Drop: अगर चलते समय आपके पैर का पंजा अचानक लटक जाए और आप उसे ऊपर न उठा पाएं।
  • सैडल एनेस्थीसिया Saddle Anesthesia: पैरों के बीच के हिस्से जहाँ आप साइकिल की सीट पर बैठते हैं में पूरी तरह से सुन्नपन आ जाना।
  • अचानक पैरों का लकवाग्रस्त होना: अगर पैरों की ताक़त अचानक इतनी खत्म हो जाए कि आप अपने पैरों पर खड़े ही न हो सकें।

निष्कर्ष

उम्र के साथ थोड़ा बहुत हड्डियों का कमज़ोर होना एक बात है, लेकिन स्पाइनल स्टेनोसिस के कारण थोड़ा सा चलने पर पैरों का पत्थर की तरह भारी हो जाना और बैठते ही ठीक हो जाना, आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपकी रीढ़ की हड्डी में वात दोष भड़क चुका है और आपकी नसें भारी दबाव में दम तोड़ रही हैं। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स और स्टेरॉयड इंजेक्शन से दबाते हैं, तो आप अपनी नसों को हील करने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से अपाहिज कर रहे होते हैं और खुद को एक जटिल स्पाइन सर्जरी की तरफ धकेल रहे होते हैं। इस दर्दनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने पाचन को सुधारें, डाइट में शुद्ध गाय का घी और वात-शामक भोजन शामिल करें। अश्वगंधा, गुग्गुल और शल्लकी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और कटी बस्ती व अभ्यंग मालिश से अपनी सूखी हुई स्पाइनल डिस्क को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। अपने पैरों की ताक़त को कमज़ोर न पड़ने दें, और अपनी रीढ़ की हड्डी को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

स्लिप डिस्क आमतौर पर अचानक झटके या वज़न उठाने से होती है जिसमें डिस्क बाहर निकलकर नस को दबाती है (अक्सर युवाओं में)। जबकि स्पाइनल स्टेनोसिस उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी के रास्तों के धीरे-धीरे सिकुड़ने की प्रक्रिया है, जिसमें चलते समय पैरों में भारीपन आता है और बैठने पर आराम मिलता है।

जब आप आगे की तरफ झुकते हैं, तो रीढ़ की हड्डी की स्पाइनल कैनाल (नली) थोड़ी चौड़ी हो जाती है। इससे नसों पर पड़ा हुआ दबाव तुरंत हट जाता है और पैरों में ब्लड सर्कुलेशन वापस चालू होने से दर्द और भारीपन गायब हो जाता है

बिल्कुल नहीं। चलना बंद करने से मांसपेशियाँ और कमज़ोर हो जाएंगी। आपको अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा-थोड़ा चलना चाहिए। अगर दर्द हो, तो थोड़ी देर बैठ जाएं और फिर चलें। आयुर्वेद में सही औषधियों के साथ चलने की क्षमता (Walking tolerance) धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है।

हाँ, ज़्यादातर मरीज़ों के लिए स्टेशनरी साइकिल चलाना (Stationary Cycling) पैदल चलने से ज़्यादा आसान और सुरक्षित होता है। क्योंकि साइकिल चलाते समय आपकी कमर थोड़ी आगे की तरफ झुकी होती है, जिससे नसों पर दबाव नहीं पड़ता।

बिल्कुल। आयुर्वेद के अनुसार कब्ज़ के कारण पेट में जमा अपान वात (गैस) सीधा कमर के निचले हिस्से पर दबाव डालता है। यह स्पाइनल स्टेनोसिस के दर्द और पैरों की झुनझुनी को तुरंत ट्रिगर करके कई गुना बढ़ा देता है

कटी बस्ती में कमर पर विशेष जड़ी-बूटियों से सिद्ध गर्म तेल को रोका जाता है। यह तेल त्वचा के छिद्रों से अंदर जाकर सूखी हुई स्पाइनल डिस्क को चिकनाई (Lubrication) देता है, सूजन को खींचता है और दबी हुई नसों को खोलता है।

नहीं। आधुनिक चिकित्सा में सर्जरी (Laminectomy) अंतिम विकल्प बताया जाता है, लेकिन इसके अपने जोखिम होते हैं। आयुर्वेद में बिना किसी चीर-फाड़ के पंचकर्म, कटी बस्ती और वात-शामक औषधियों से नसों का दबाव प्राकृतिक रूप से कम किया जा सकता है और सर्जरी से बचा जा सकता है।

नहीं। आधुनिक चिकित्सा में सर्जरी (Laminectomy) अंतिम विकल्प बताया जाता है, लेकिन इसके अपने जोखिम होते हैं। आयुर्वेद में बिना किसी चीर-फाड़ के पंचकर्म, कटी बस्ती और वात-शामक औषधियों से नसों का दबाव प्राकृतिक रूप से कम किया जा सकता है और सर्जरी से बचा जा सकता है।

लंबे समय तक लगातार बेल्ट पहनने से आपकी कमर की मांसपेशियाँ (Core muscles) काम करना बंद कर देती हैं और कमज़ोर हो जाती हैं। बेल्ट का इस्तेमाल केवल सफर करते समय या भारी काम करते समय ही करना चाहिए, पूरे दिन नहीं।

स्पाइनल स्टेनोसिस मुख्य रूप से वात (रूखेपन और सिकुड़न) का रोग है। बर्फ लगाने से नसें और मांसपेशियाँ और ज़्यादा सिकुड़ जाएंगी। कमर और पैरों के दर्द के लिए हमेशा गर्म वात-शामक तेल (जैसे महानारायण तेल) की मालिश करके गर्म सिकाई (Hot fomentation) ही करनी चाहिए।

हाँ। अगर नसों पर दबाव बहुत लंबे समय तक बना रहे, तो पैरों तक खून और न्यूट्रिशन नहीं पहुँच पाता। इसके कारण पैरों और पिंडलियों की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे सिकुड़ने और पतली होने (Atrophy) लगती हैं, जो एक गंभीर स्थिति है।

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