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PCOS में Weight Loss रुक गया - Plateau तोड़ने का तरीका

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 26 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5047

PCOS (पीसीओएस) में वज़न कम करना सच में किसी बड़े सिरदर्द से कम नहीं है। शुरू-शुरू में तो लगता है कि चलो, थोड़ा फर्क पड़ रहा है, लेकिन कुछ दिन बाद वज़न की सूई जैसे एक ही जगह पर चिपक कर रह जाती है। आप अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही हैं बिल्कुल सही डाइट ले रही हैं, जमकर पसीना बहा रही हैं, फिर भी शरीर टस से मस नहीं होता।

आपको लगता होगा कि शायद गलती आपके खाने में है, पर ऐसा नहीं है। इसके पीछे असल वजह आपके बिगड़े हुए हार्मोन्स, सुस्त पड़ चुका पाचन, टेंशन, नींद की कमी और बिल्कुल धीमा हो चुका मेटाबॉलिज़्म है। इन सब वजहों से शरीर खुद ही वज़न घटने की स्पीड पर ब्रेक लगा देता है।

आयुर्वेद इसे सिर्फ 'मोटापे' की नज़र से नहीं देखता। आयुर्वेद के हिसाब से यह शरीर के अंदर जमा हुई गंदगी और बिगड़े हुए बैलेंस का नतीजा है। इसलिए सिर्फ खाना कम कर देने या भूखे रहने से बात नहीं बनेगी, हमें शरीर के अंदरूनी सिस्टम को वापस जगाना होगा।

PCOS क्या है और यह शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

PCOS महिलाओं के शरीर में होने वाली एक ऐसी दिक्कत है, जिसमें महिलाओं में हार्मोन्स ऊपर-नीचे हो जाते हैं। यह सिर्फ आपके पीरियड्स को ही नहीं बिगाड़ती, बल्कि पूरे शरीर को डिस्टर्ब कर देती है। अचानक से कपड़े टाइट होने लगना, चेहरे पर पिंपल्स आना, बालों का तेज़ी से झड़ना, बिना कुछ किए हर वक्त थकावट लगना और कंसीव (प्रेग्नेंट) करने में परेशानी आना ये सब इसी की देन हैं।

कई महिलाओं के पीरियड्स बिल्कुल टाइम पर आते हैं, फिर भी अंदर हार्मोन्स का पूरा खेल बिगड़ा रहता है। PCOS सीधा आपकी एनर्जी, पाचन और शुगर लेवल पर वार करता है। इससे शरीर में तेज़ी से चर्बी जमने लगती है, जिसे बाद में पिघलाना बहुत भारी पड़ता है।

PCOS और वज़न बढ़ने का गहरा संबंध

PCOS को सिर्फ माहवारी (पीरियड्स) की बीमारी समझ लेना एक बहुत बड़ी भूल है। इसका सीधा कनेक्शन आपके हार्मोन्स, शरीर के शुगर (इंसुलिन) बैलेंस और एनर्जी बनाने वाली मशीनरी से है।

इस कंडीशन में शरीर के काम करने की स्पीड इतनी सुस्त पड़ जाती है कि वज़न तेज़ी से भागने लगता है। खासकर पेट के आस-पास की ज़िद्दी चर्बी (Belly Fat) तो जाने का नाम ही नहीं लेती। सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि आम लोगों की तुलना में PCOS वाली महिलाओं के लिए वज़न घटाना कई गुना ज़्यादा मुश्किल होता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर की कैलोरी जलाने की रफ्तार एकदम कम हो जाती है। शरीर फैट को जलाने के बजाय उसे 'सेव' करके रखने लगता है। यही वजह है कि जिम में पसीना बहाने और डाइटिंग करने के बाद भी वज़न टस से मस नहीं होता।

Weight Loss Plateau क्या होता है?

आपने नोटिस किया होगा कि शुरुआत में वज़न गिरता है, लेकिन कुछ समय बाद आप चाहे जितनी मेहनत कर लें, वज़न एक ही नंबर पर आकर अटक जाता है। न तो इंच घटते हैं और न ही वज़न की मशीन पर कोई नंबर हिलता है। इसी अटके हुए वज़न को हम 'Weight Loss Plateau' (प्लेटो) कहते हैं।

यह हमारे शरीर का एक बहुत ही नॉर्मल रिएक्शन है। जब आप लंबे समय तक कम खाना खाते हैं या रोज़ एक ही तरह का वर्कआउट करते हैं, तो शरीर को उसकी आदत पड़ जाती है। ऐसे में शरीर अपनी एनर्जी बचाने के लिए कैलोरी को बर्न करना कम कर देता है। इसीलिए जो डाइट पहले गज़ब का काम कर रही थी, वो अचानक बेअसर हो जाती है।

शुरुआत में वज़न कम होकर अचानक रुक क्यों जाता है?

PCOS में अक्सर यही होता है कि पहले तो वज़न घटता है, पर फिर लाख कोशिशों के बाद भी एक जगह फ्रीज़ हो जाता है। इसके पीछे शरीर के अंदर चल रही ये बातें ज़िम्मेदार होती हैं:

  • पानी का निकलना: शुरुआत में आपको जो वज़न कम होता हुआ दिखता है, वो असल में चर्बी नहीं होती। वो शरीर में जमा पानी (Water Weight) और सूजन होती है। जैसे ही ये पानी निकलता है, वज़न तेज़ी से गिरता दिखता है।
  • मेटाबॉलिज़्म का सुस्त पड़ना: बहुत लंबे समय तक कम खाने से शरीर 'बचत मोड' में चला जाता है। वो अपनी एनर्जी बचाने के लिए कैलोरी जलाना धीमा कर देता है।
  • हार्मोन्स का वही हाल रहना: अगर आपके हार्मोन्स अभी भी पटरी पर नहीं आए हैं, तो शरीर चर्बी को कसकर पकड़ लेता है और उसे पिघलने का मौका ही नहीं देता।
  • टेंशन और नींद की कमी: बहुत ज़्यादा स्ट्रेस लेने और रात-रात भर ठीक से न सोने की वजह से शरीर का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है, जिससे वज़न अटक कर रह जाता है।
  • फिजिकल एक्टिविटी का कम होना: अगर आप वर्कआउट के अलावा दिन भर सिर्फ कुर्सी पर ही बैठे रहते हैं, तो भी वज़न कम होना रुक जाता है।

आयुर्वेद में PCOS को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद PCOS को कोई आम बीमारी नहीं मानता। उसके नज़रिए से यह शरीर में 'कफ' और 'वात' के पूरी तरह से बेकाबू होने का नतीजा है। जब शरीर का यह बैलेंस बिगड़ता है, तो उसका सीधा असर आपके वज़न, पाचन और हार्मोन्स पर पड़ता है।

आयुर्वेद कहता है कि जब कफ बढ़ता है तो शरीर एकदम भारी और सुस्त हो जाता है, और चर्बी बहुत तेज़ी से जमने लगती है। यही वजह है कि कई महिलाओं को अपना शरीर फूला-फूला (Water retention) सा लगता है और वज़न घटाना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ, जब वात बिगड़ता है, तो शरीर का सिग्नल देने वाला सिस्टम हिल जाता है, जिससे हार्मोन्स पूरी तरह उथल-पुथल मचा देते हैं।

इसके अलावा, आयुर्वेद में पेट की आग (पाचन) को सबसे अहम माना गया है। जब यह आग ठंडी पड़ जाती है, तो खाना सही से नहीं पचता और शरीर का मेटाबॉलिज्म ठप पड़ जाता है। यही कमज़ोर पाचन आपके रुके हुए वज़न की सबसे बड़ी जड़ है।

आयुर्वेद का इलाज करने का तरीका

आयुर्वेद में वज़न के अटकने को सिर्फ 'मोटापा' नहीं कहा जाता। यह खराब हाज़मे, बिगड़े हुए हार्मोन्स और शरीर की सुस्त पड़ चुकी मशीनरी का सीधा अलार्म है। इसलिए इलाज का मकसद सिर्फ मशीन पर वज़न का नंबर कम करना नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से वापस जगाना है:

  • असली जड़ पर वार: सिर्फ डाइटिंग कर लेने से काम नहीं चलेगा। आपकी नींद कैसी है, टेंशन कितनी लेते हैं, हाज़मा कैसा चल रहा है, पहले इन सब कमियों को सुधारा जाता है।
  • कफ को बैलेंस करना: कफ का सीधा सा मतलब है भारीपन और चर्बी स्टोर करने की आदत। इसे जड़ से खत्म करके शरीर को एकदम हल्का और फुर्तीला बनाने पर पूरा फोकस किया जाता है।
  • पाचन दुरुस्त करना: जब तक आपका पाचन दुरुस्त नहीं होगा, वज़न एक ग्राम भी नहीं घटेगा। इसलिए खाने को सही से पचाकर उसे एनर्जी में बदलने के तरीके अपनाए जाते हैं।
  • हार्मोन्स को सेट करना: शरीर के अंदर जो उथल-पुथल मची है, उसे शांत किया जाता है ताकि आपके पीरियड्स और वज़न, दोनों वापस लाइन पर आ जाएं।
  • लाइफस्टाइल सुधारना: रात-रात भर फोन चलाना, दिन भर एक ही जगह बैठे रहना और बिना बात का स्ट्रेस लेना जब तक आप अपनी इन आदतों को नहीं बदलेंगे, कोई भी दवा असर नहीं करेगी।

इलाज में काम आने वाली कुछ कमाल की औषधियाँ

ये देसी औषधियाँ सिर्फ वज़न कम करने के पीछे नहीं भागतीं। आप ऐसा समझ लो कि ये शरीर के पूरे अंदरूनी सिस्टम की बहुत अच्छे से 'सर्विसिंग' कर देती हैं:

  • पेट को एकदम साफ रखने और शरीर में जमा सालों की गंदगी को बाहर का रास्ता दिखाने में इसका सच में कोई मुकाबला नहीं है।
  • अश्वगंधा: ये आपके दिमाग की सारी टेंशन को सोख लेता है। जो शरीर थकान से टूट रहा होता है, यह उसकी बैटरी एकदम फुल कर देता है।
  • : शरीर में जो ज़िद्दी चर्बी बिल्कुल पत्थर की तरह जम चुकी है और आपको भारीपन दे रही है, उसे मोम की तरह पिघलाने का यह सबसे तगड़ा नुस्खा है।
  • शतावरी: महिलाओं के ऊपर-नीचे हुए हार्मोन्स को वापस लाइन पर लाने और अंदर से फौलादी ताक़त देने के लिए यह जड़ी-बूटी किसी जादू से कम नहीं है।

वज़न घटाने वाली खास आयुर्वेदिक थेरेपी 

इन पुराने और परखे हुए देसी तरीकों का बस एक ही टारगेट है शरीर के पोर-पोर से सुस्ती को निचोड़ लेना और खोई हुई एनर्जी को वापस खींच लाना:

  • जड़ी-बूटियों वाले हल्के गर्म तेल से जब शरीर की चंपी होती है, तो सारा स्ट्रेस और भारीपन मिनटों में ही छूमंतर हो जाता है।
  • उद्वर्तन (सूखे चूर्ण से रगड़ाई): इसमें देसी जड़ी-बूटियों के पाउडर से बदन की अच्छी तरह रगड़ाई की जाती है। सच मानिए, सालों से जकड़ी हुई चर्बी को तोड़ने का इससे पक्का कोई आयुर्वेदिक तरीका नहीं है।
  • हल्की गर्माहट वाली भाप लेने से स्किन के बंद पोर्स (रोमछिद्र) तुरंत खुल जाते हैं। शरीर की सारी जकड़न पिघल जाती है और इंसान खुद को एकदम हल्का फील करता है।
  • शिरोधारा: माथे के ठीक बीचों-बीच जब लगातार तेल की धार गिरती है, तो दिमाग की सारी टेंशन और की उलझनें पानी के साथ बह जाती हैं।
  • बस्तॶ: शरीर के अंदर जो वात (हवा) बेकाबू होकर परेशानी पैदा कर रहा है, उसे शांत करने और अंदर की डीप-क्लीनिंग के लिए यह सबसे बेहतरीन और असरदार इलाज है।

डाइट में क्या-क्या बदलाव करें? 

PCOS में खाना सिर्फ पेट भरने या वज़न घटाने के लिए नहीं होता, यह शरीर को बैलेंस करने की असली चाबी है:

  • ताज़ा और गर्म खाना: हमेशा ताज़ा और हल्का गर्म खाना ही खाएं। यह जल्दी पचता है और शरीर को भारी नहीं करता।
  • हरी सब्ज़ियां और सलाद: अपनी प्लेट में खूब सारी हरी सब्ज़ियां रखें। ये पेट को साफ रखती हैं और असली पोषण देती हैं।
  • मूंग दाल और हल्का खाना: पेट पर ज्यादा बोझ न डालें। मूंग दाल जैसी चीज़ें खाएं जो हाज़मे को परेशान न करें।
  • मीठा और पैकेट बंद खाना बंद: पैकेट वाले स्नैक्स और चीनी वज़न रुकने और हार्मोन्स बिगड़ने के सबसे बड़े विलेन हैं। इनसे दूर रहें।
  • गुनगुना पानी: दिन भर हल्का गुनगुना पानी पिएं। यह जमे हुए फैट को पिघलाने में बहुत मदद करता है।
  • रात को हल्का खाएं: देर रात भारी खाना खाने से हाज़मा पूरी तरह ठप पड़ जाता है।
  • भूखे न रहें: लंबे समय तक खाली पेट रहने (क्रैश डाइटिंग) से मेटाबॉलिज़्म गिर जाता है, इसलिए टाइम पर खाएं।
  • तली-भुनी चीज़ें कम करें: ज्यादा तेल और चिकनाई शरीर में सिर्फ सुस्ती लाती है और चर्बी बढ़ाती है।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? 

PCOS के इशारे हर किसी में अलग हो सकते हैं। अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो रहा है, तो बस घरेलू नुस्खों पर न टिके रहें, डॉक्टर से ज़रूर मिलें:

  • वज़न लगातार बिना किसी वजह के तेज़ी से बढ़ रहा हो।
  • पीरियड्स का कोई अता-पता न हो या बहुत ज़्यादा लेट हों।
  • चेहरे पर बड़े-बड़े पिंपल्स बार-बार निकल रहे हों।
  • बाल गुच्छों में टूट रहे हों।
  • चेहरे, ठोड़ी या शरीर पर अनचाहे बाल उगने लगें।
  • हर वक्त भयंकर थकावट और सुस्ती छाई रहे।
  • कंसीव (प्रेग्नेंट) करने में परेशानी आ रही हो।
  • लाख डाइटिंग और जिम के बाद भी वज़न टस से मस न हो रहा हो।

निष्कर्ष 

PCOS कोई सिर्फ पीरियड्स आगे-पीछे होने की बीमारी नहीं है; यह आपके हार्मोन्स, हाज़मे और मेटाबॉलिज़्म का पूरा सिस्टम हिल जाने की निशानी है। एक वक्त के बाद वज़न का अटक जाना बहुत आम है, जिसे देखकर अक्सर महिलाएं हार मान लेती हैं।

मॉडर्न साइंस इसे इंसुलिन और हार्मोन्स का खेल कहती है, जबकि आयुर्वेद इसे सुस्त हाज़मे और कफ के भड़कने का नाम देता है। अगर आपका वज़न भी अटक गया है, तो सिर्फ खाना छोड़ने से काम नहीं चलेगा। अपनी रूटीन सुधारें, अच्छी नींद लें, टेंशन छोड़ें और असली वजह (हाज़मे) पर काम करें। शरीर खुद ब खुद चर्बी गलाना शुरू कर देगा।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हाँ, कई महिलाओं में PCOS के दौरान बार-बार भूख लग सकती है। शरीर की शुगर और हार्मोन प्रक्रिया प्रभावित होने पर खाने की इच्छा बढ़ सकती है। खासकर मीठा और बाहर का खाना ज्यादा खाने का मन हो सकता है। यदि खानपान संतुलित न हो, तो वज़न तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए समय पर और संतुलित भोजन लेना ज़रूरी माना जाता है।

हाँ, कई महिलाओं को पर्याप्त नींद लेने के बाद भी थकान महसूस हो सकती है। इसका कारण शरीर की धीमी कार्यप्रणाली और हार्मोन असंतुलन माना जाता है। शरीर में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। धीरे-धीरे सुस्ती और कमज़ोरी बढ़ सकती है। सही दिनचर्या और संतुलित भोजन इसमें मदद कर सकते हैं।

हाँ, PCOS में कई महिलाओं को पेट के आसपास वज़न बढ़ता हुआ महसूस हो सकता है। शरीर की ऊर्जा संतुलन प्रक्रिया धीमी पड़ने से चर्बी जमा होने लगती है। यही कारण है कि सामान्य व्यायाम के बाद भी पेट की चर्बी कम करना कठिन लग सकता है। नियमित गतिविधि और संतुलित जीवनशैली ज़रूरी मानी जाती है।

हाँ, शरीर में पानी की कमी होने पर पाचन और शरीर की सफाई प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे भारीपन और सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती हैं। पर्याप्त पानी शरीर को संतुलित बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि बहुत ज्यादा ठंडे पेय लेने से बचना बेहतर माना जाता है। गुनगुना पानी कई लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है।

हाँ, लगातार नई और बहुत सख्त डाइट अपनाने से शरीर भ्रमित हो सकता है। इससे शरीर की कार्यप्रणाली और धीमी पड़ सकती है। शुरुआत में थोड़ा वज़न कम हो सकता है, लेकिन बाद में वज़न रुकने लगता है। इसलिए धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से बदलाव करना बेहतर माना जाता है।

हाँ, कई महिलाओं में मीठा खाने की इच्छा बार-बार हो सकती है। यह शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। ज्यादा मीठा खाने से वज़न और भारीपन बढ़ सकते हैं। इसलिए मीठी चीजों को सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है।

हाँ, लगातार तनाव शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इससे शरीर ऊर्जा बचाने की अवस्था में जा सकता है और वज़न  कम होने की गति धीमी पड़ सकती है। तनाव का असर नींद और भूख पर भी दिखाई दे सकता है। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना ज़रूरी माना जाता है।

 हाँ, कई महिलाओं को शरीर फूला हुआ या भारी महसूस हो सकता है। यह शरीर में पानी रुकने और बढ़ते कफ असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। खासकर चेहरे, पेट और हाथ-पैरों में भारीपन महसूस हो सकता है। सही भोजन और नियमित गतिविधि से इसमें सुधार महसूस हो सकता है।

बहुत तेजी से वज़न घटाने की कोशिश शरीर को कमज़ोर कर सकती है। इससे शरीर की ऊर्जा और पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कई बार वज़न कुछ समय बाद फिर तेजी से बढ़ने लगता है। इसलिए धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से वज़न कम करना बेहतर माना जाता है।

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