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PCOS में Insulin Resistance - Metformin से ज़्यादा बेहतर आयुर्वेदिक तरीका

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 03 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 03 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5014

क्या आपको भी डॉक्टर ने PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) या PMOS (पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम) होने पर मेटफॉर्मिन नाम की टैबलेट लिख दी है? क्या आपके मन में भी यह सवाल आया है कि "मुझे डायबिटीज तो नहीं है, फिर मुझे शुगर की दवा क्यों दी जा रही है?"

अगर हाँ, तो आप अकेली नहीं हैं। आज देश की हर 5 में से 1 महिला PCOS से जूझ रही है। और अक्सर जब वो डॉक्टर के पास जाती हैं, तो उन्हें बिना पूरी बात समझाए मेटफॉर्मिन थमा दी जाती है। लेकिन क्या यह इस बीमारी का असली और परमानेंट इलाज है? बिल्कुल नहीं।

PCOS क्या है? 

PCOS या PMOS महिलाओं में होने वाली एक ऐसी समस्या है, जिसमें शरीर का प्राकृतिक संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ने लगता है। इसमें मासिक धर्म समय पर नहीं आता, वज़न बढ़ने लगता है, चेहरे पर बाल आ सकते हैं और कई बार त्वचा पर मुंहासे भी बढ़ जाते हैं। असल में, जब शरीर के अंदर हार्मोन का संतुलन गड़बड़ा जाता है, तब शरीर की "अंदरूनी घड़ी" सही तरीके से काम नहीं कर पाती। इसका असर सबसे पहले पीरियड्स, वज़न और ऊर्जा पर दिखाई देने लगता है।

कई महिलाओं को लंबे समय तक समझ ही नहीं आती कि उनके शरीर में क्या बदल रहा है। कभी पीरियड्स देर से आते हैं, कभी अचानक वज़न बढ़ता है, तो कभी हर समय थकान महसूस होती है। धीरे-धीरे यही बदलाव PCOS का रूप ले सकते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, कम नींद, बाहर का खाना और घंटों बैठे रहना भी इस समस्या को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

PCOS और इंसुलिन रेजिस्टेंस का क्या कनेक्शन है?  

इंसुलिन हमारे शरीर की एक 'चाबी' है, और हमारी कोशिकाएं (cells) एक 'कमरा'। जब हम खाना खाते हैं, तो वो ग्लूकोज (शुगर) में बदलता है। इंसुलिन उस चाबी से कोशिकाओं का दरवाजा खोलता है ताकि ग्लूकोज अंदर जा सके और हमें एनर्जी (ताकत) मिल सके।

लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस में क्या होता है? यहाँ कोशिकाएं बहुत जिद्दी हो जाती हैं। वो इस चाबी को स्वीकार करना बंद कर देती हैं और अपना दरवाजा नहीं खोलतीं। अब पैनक्रियाज (वो अंग जो इंसुलिन बनाता है) को लगता है कि शायद चाबी कम पड़ गई है, इसलिए वो और ज़्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। नतीजा यह होता है कि आपके खून में शुगर और इंसुलिन दोनों का लेवल बहुत बढ़ जाता है।

यह बढ़ा हुआ इंसुलिन PCOS कैसे पैदा करता है? 

जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा बहुत ज़्यादा हो जाती है, तो यह हमारी ओवरीज (अंडाशय) को ट्रिगर करता है। ओवरीज इस दबाव में आकर महिलाओं के शरीर में पुरुषों वाला हार्मोन, जिसे एण्ड्रोजन (Androgen) या टेस्टोस्टेरोन कहते हैं, ज़्यादा बनाने लगती हैं। इसी वजह से:

  • पीरियड्स समय पर नहीं आते या मिस हो जाते हैं।
  • चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल (Hirsutism) आने लगते हैं।
  • वजन तेजी से बढ़ता है, खासकर पेट के आस-पास, और उसे घटाना नामुमकिन सा लगने लगता है।
  • चेहरे पर जिद्दी मुंहासे (Acne) हो जाते हैं।

मेटफॉर्मिन क्या है और यह पक्का इलाज क्यों नहीं है? 

जब आप डॉक्टर के पास जाती हैं, तो वो इंसुलिन को कंट्रोल करने के लिए मेटफॉर्मिन देते हैं। यह दवा मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए है। यह शरीर को जबरदस्ती इंसुलिन का इस्तेमाल करने पर मजबूर करती है।

लेकिन आपको यह समझना होगा कि मेटफॉर्मिन कोई जादू की छड़ी नहीं है। इसके साथ कुछ बड़ी दिक्कतें हैं:

  • सिर्फ लक्षणों को दबाना: यह दवा बीमारी की जड़ पर काम नहीं करती। यह सिर्फ तब तक काम करती है जब तक आप इसे खा रही हैं। जैसे ही आप इसे छोड़ेंगी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और PCOS की समस्या जस की तस वापस आ जाएगी।
  • रोजमर्रा के साइड इफेक्ट्स: इसे खाने के बाद कई महिलाओं को लगातार मतली (जी मिचलाना), पेट में मरोड़, गैस, दस्त और हर वक्त कमजोरी महसूस होने जैसी शिकायतें रहती हैं।
  • विटामिन की कमी: लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने से शरीर में विटामिन B12 की भारी कमी हो जाती है, जिससे नसों में कमजोरी और थकान रहने लगती है।

मेटफॉर्मिन से बेहतर है आयुर्वेदिक तरीका?

आयुर्वेद किसी बीमारी को मैनेज करने में नहीं, उसे जड़ से खत्म करने में विश्वास रखता है। आयुर्वेद के अनुसार, PCOS शरीर में कफ और वात दोष के बिगड़ने और अग्नि के धीमा होने से होता है। जब हमारी पाचन अग्नि मंद पड़ जाती है, तो शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स या गंदगी) बनने लगती है। यही 'आम' इंसुलिन रेजिस्टेंस का असली कारण है।

विशेषता मेटफॉर्मिन (एलोपैथी) आयुर्वेदिक तरीका
काम करने का तरीका जबरदस्ती इंसुलिन लेवल को दबाना। पाचन अग्नि को ठीक करके सेल्स को स्वाभाविक रूप से एक्टिव करना।
अवधि अक्सर सालों-साल या पूरी जिंदगी खानी पड़ती है। कुछ महीने का कोर्स, जो बीमारी को जड़ से खत्म करता है।
साइड इफेक्ट्स पेट खराब, कमजोरी, विटामिन की कमी। पूरी तरह सुरक्षित, शरीर को अंदर से मजबूती मिलती है।
अप्रोच सबके लिए एक ही दवा। हर महिला की बॉडी टाइप के हिसाब से कस्टमाइज्ड इलाज।

PCOS और इंसुलिन रेज़िस्टेंस में खानपान — सबसे ज़रूरी हिस्सा 

दवा अपनी जगह है, लेकिन PCOS में खानपान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि आप जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर इंसुलिन और हार्मोन के संतुलन पर पड़ सकता है।

क्या खाएँ?

  • ताज़ा, गर्म और हल्का भोजन
  • हर भोजन में प्रोटीन  दाल, पनीर, अंडे, मूँगफली
  • रेशे वाली सब्ज़ियाँ  लौकी, पालक, मेथी
  • जौ, रागी और ज्वार जैसे अनाज
  • सीमित मात्रा में अच्छे वसा बादाम, अखरोट, अलसी

क्या कम करें?

  • मैदा, बिस्किट और पैकेट वाला खाना
  • बहुत ज़्यादा मीठा और ठंडे पेय पदार्थ
  • देर रात भारी भोजन
  • लंबे समय तक खाली पेट रहना
  • बहुत ज़्यादा चाय, कॉफ़ी और तली हुई चीज़ें

पीसीओएस में कौन-सी जीवनशैली आदतें मदद कर सकती हैं?

पीसीओएस को संभालने में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की कुछ अच्छी आदतें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सही दिनचर्या अपनाने से शरीर का संतुलन बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है और कई परेशानियों को कम करने में सहयोग मिल सकता है।

  • भोजन हमेशा तय समय पर करने की कोशिश करें।
  • तले-भुने, बहुत मीठे और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
  • अपने भोजन में ताज़ी सब्ज़ियाँ, फल और घर का बना हल्का भोजन शामिल करें।
  • रोज़ कम से कम 30 से 45 मिनट तक पैदल चलें या नियमित रूप से योग करें।
  • रात में समय पर सोएँ और पर्याप्त नींद लें।
  • लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचें।
  • तनाव कम करने के लिए ध्यान, प्राणायाम या मनपसंद गतिविधियों का सहारा लें।
  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

छोटे-छोटे बदलाव शुरुआत में साधारण लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नियमित रूप से अपनाने पर शरीर को बेहतर ढंग से काम करने में मदद मिल सकती है। पीसीओएस में स्वस्थ जीवनशैली अक्सर उपचार के साथ मिलकर अधिक अच्छे परिणाम देने में सहायक हो सकती है।

क्या पीसीओएस और बढ़ता वजन आपस में जुड़े हैं?

हाँ, कई मामलों में पीसीओएस और बढ़ते वजन के बीच गहरा संबंध देखा जाता है। दोनों एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं और कई बार समस्याओं का एक चक्र बना देते हैं।

  • हार्मोन का असंतुलन: पीसीओएस में शरीर के हार्मोन संतुलित नहीं रह पाते, जिससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है।
  • पेट के आसपास चर्बी जमा होना: पीसीओएस से प्रभावित महिलाओं में अक्सर कमर और पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है।
  • वजन कम करने में कठिनाई: नियमित प्रयासों के बावजूद कई महिलाओं को वजन घटाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • माहवारी पर असर: बढ़ता वजन माहवारी को और अधिक अनियमित बना सकता है, जिससे पीसीओएस के लक्षण बढ़ सकते हैं।
  • गर्भधारण में परेशानी: अधिक वजन होने पर अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।
  • अन्य लक्षण बढ़ सकते हैं: बढ़ता वजन चेहरे पर मुहाँसे, अनचाहे बाल और थकान जैसी समस्याओं को भी बढ़ा सकता है।
  • स्वस्थ जीवनशैली का महत्व: संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और अच्छी दिनचर्या अपनाने से वजन को नियंत्रित रखने और पीसीओएस के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

लंबे समय तक इस स्थिति को नज़रअंदाज़ करने से क्या हो सकता है?

यदि पीसीओएस और शरीर में शर्करा के असंतुलन की समस्या पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह केवल माहवारी तक सीमित नहीं रहती। धीरे-धीरे इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ सकता है।

  • माहवारी अधिक अनियमित हो सकती है: समय के साथ माहवारी का चक्र और अधिक प्रभावित हो सकता है तथा कई महीनों तक माहवारी न आने की समस्या भी हो सकती है।
  • गर्भधारण में कठिनाई बढ़ सकती है: अंडोत्सर्ग नियमित रूप से न होने के कारण गर्भधारण करने में परेशानी आ सकती है।
  • वजन लगातार बढ़ सकता है: विशेषकर पेट और कमर के आसपास चर्बी बढ़ने की संभावना अधिक हो सकती है।
  • रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ सकता है: लंबे समय तक असंतुलन बने रहने पर आगे चलकर मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है।
  • हृदय स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है: उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और हृदय से जुड़ी समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है।
  • मुहाँसे और अनचाहे बाल बढ़ सकते हैं: हार्मोन के असंतुलन के कारण त्वचा और बालों से जुड़ी समस्याएँ अधिक दिखाई दे सकती हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है: लगातार चलने वाली स्वास्थ्य समस्याएँ तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकती हैं।
  • जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है: थकान, कमजोरी और बार-बार होने वाली परेशानियाँ दैनिक जीवन और कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए पीसीओएस के शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ करने के बजाय समय पर उचित सलाह और जीवनशैली में सुधार करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

पीसीओएस में लाभकारी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ 

आयुर्वेद में पीसीओएस की देखभाल के लिए कुछ जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। इनका चयन व्यक्ति की प्रकृति, लक्षणों और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है।

  • शतावरी: महिलाओं के स्वास्थ्य और हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।
  • अशोक: मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों में पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण औषधि है।
  • लोध्र: महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को सहारा देने और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मददगार मानी जाती है।
  • गुडूची (गिलोय): शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने और समग्र स्वास्थ्य को सहारा देने में उपयोग की जाती है।
  • मेथी: शरीर में शर्करा के संतुलन और वजन प्रबंधन के प्रयासों में सहायक मानी जाती है।
  • दालचॶनी: चयापचय क्रिया को बेहतर बनाने और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकती है।

शरीर के संतुलन को बेहतर बनाने वाली आयुर्वेदिक थेरेपी 

आयुर्वेद में केवल औषधियों पर ही नहीं, बल्कि शरीर के संपूर्ण संतुलन को बेहतर बनाने वाले उपचारों पर भी ध्यान दिया जाता है।

  • पंचकर्म: शरीर से संचित दोषों को बाहर निकालने और संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाने वाला आयुर्वेदिक उपचार है।
  • उद्वर्तन: औषधीय चूर्ण से की जाने वाली विशेष मालिश, जो वजन प्रबंधन और शरीर की सक्रियता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
  • अभ्यंग: औषधीय तेलों से की जाने वाली मालिश, जो शरीर को पोषण देने और तनाव कम करने में मदद कर सकती है।
  • स्वेदन: शरीर को नियंत्रित रूप से गर्माहट देकर पसीना लाने की प्रक्रिया, जो शरीर को हल्का महसूस कराने में सहायक हो सकती है।
  • शिरोधारा: माथे पर औषधीय द्रव की लगातार धारा डालने की प्रक्रिया, जिसका उपयोग मानसिक तनाव और बेचैनी को कम करने के लिए किया जाता है।
  • योग और प्राणायाम: नियमित अभ्यास से वजन नियंत्रित रखने, मानसिक तनाव कम करने और महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम साक्षी खट्टर है और मैं नोएडा से हूँ। मुझे 2006 से PCOD की समस्या थी, जिसके लिए मैंने कई सालों तक एलोपैथिक और होम्योपैथिक इलाज लिया, लेकिन कोई खास फायदा नहीं मिला। फिर मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेद का विज्ञापन देखा और जीवा आयुर्वेद की नोएडा ब्रांच में डॉ. अभिलाषा तिवारी से मिली। उन्होंने मेरी समस्या को अच्छे से समझकर मेरा इलाज शुरू किया।

मैंने 2017 में इलाज शुरू किया और लगभग ढाई साल के उपचार के बाद मुझे PCOD में बहुत अच्छा आराम मिला। इसके बाद मैंने infertility का इलाज शुरू किया और आज मेरा एक छोटा बेटा है। इसके लिए मैं डॉ. अभिलाषा तिवारी, जीवा आयुर्वेद और पूरी जीवा फैमिली का दिल से धन्यवाद करती हूँ।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर ये लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी माना जाता है:

  • 3 महीने से ज़्यादा समय तक मासिक धर्म न आना या बहुत अनियमित होना
  • खाना खाने के बाद बहुत ज़्यादा थकान महसूस होना
  • बिना कारण पेट के आसपास तेज़ी से वज़न बढ़ना
  • ठुड्डी, जबड़े या पेट के आसपास बाल बढ़ना
  • बहुत ज़्यादा बाल झड़ना या बाल पतले होना

निष्कर्ष

PCOS को केवल "मासिक धर्म की समस्या" समझना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। कई बार इसकी जड़ शरीर के अंदर मौजूद इंसुलिन रेज़िस्टेंस और हार्मोन असंतुलन से जुड़ी होती है। जब तक इस जड़ कारण पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक कभी मासिक धर्म ठीक लगता है, कभी फिर बिगड़ जाता है। कभी वज़न कम होता है, फिर वापस बढ़ने लगता है। यानी समस्या बार-बार लौट सकती है।

शुरुआत बहुत छोटी चीज़ों से भी हो सकती है सुबह गुनगुना पानी पीना, हर भोजन में थोड़ा प्रोटीन जोड़ना, देर रात खाना कम करना और शरीर को नियमित दिनचर्या देना और अगर लगता है कि केवल दवा से पूरी राहत महसूस नहीं हो रही, तो आयुर्वेद शरीर को अंदर से संतुलित करने की दिशा में एक सहयोगी तरीक़ा माना जाता है। इसका उद्देश्य केवल लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि शरीर को लंबे समय तक स्थिर और संतुलित बनाए रखने पर काम करना होता है।

FAQs

हाँ, कई महिलाओं में पीसीओएस के साथ शरीर द्वारा शर्करा का सही उपयोग न कर पाने की समस्या भी देखी जाती है। यह हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती है और पीसीओएस के लक्षणों को बढ़ा सकती है।

पीसीओएस में हार्मोन और शरीर की चयापचय क्रिया प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि कई महिलाओं को सामान्य प्रयासों के बावजूद वजन कम करने में कठिनाई महसूस होती है।

नहीं, हर महिला की स्थिति अलग होती है। कुछ महिलाओं में यह समस्या हो सकती है, जबकि कुछ में इसके बिना भी पीसीओएस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

वजन नियंत्रित रखने से कई लक्षणों में सुधार आ सकता है, लेकिन पीसीओएस एक जटिल स्थिति है। इसके लिए संतुलित खानपान, जीवनशैली और उचित उपचार भी महत्वपूर्ण होते हैं।

अनियमित माहवारी, तेजी से बढ़ता वजन, चेहरे पर मुहाँसे, अनचाहे बाल और गर्भधारण में कठिनाई जैसे लक्षणों पर समय रहते ध्यान देना चाहिए।

आयुर्वेद शरीर के समग्र संतुलन पर ध्यान देता है। उचित आहार, दिनचर्या, औषधियों और थेरेपी की मदद से पीसीओएस के प्रबंधन में सहयोग मिल सकता है।

नियमित समय पर भोजन करना, रोज़ाना शारीरिक गतिविधि करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना लाभकारी माना जाता है।

हाँ, पीसीओएस होने के बावजूद कई महिलाएँ सफलतापूर्वक गर्भधारण करती हैं। इसके लिए सही उपचार, स्वस्थ जीवनशैली और विशेषज्ञ की सलाह महत्वपूर्ण होती है।

नहीं, किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन स्वयं से शुरू नहीं करना चाहिए। सही उपचार के लिए योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

सबसे महत्वपूर्ण है समस्या को समझना और नियमित रूप से स्वस्थ आदतें अपनाना। संतुलित खानपान, सक्रिय जीवनशैली और समय पर उचित मार्गदर्शन लंबे समय तक बेहतर परिणाम देने में मदद कर सकते हैं।

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