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Periods Regular हैं फिर भी PCOD है? हाँ, possible है — जानिए कैसे

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 26 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5037

कई लोगों को लगता है कि अगर पीरियड्स टाइम पर आ रहे हैं, तो उन्हें PCOD नहीं हो सकता। लेकिन सच तो यह है कि हमेशा ऐसा नहीं होता। PCOD सिर्फ पीरियड्स के आगे-पीछे होने की बीमारी नहीं है। इसका सीधा कनेक्शन आपके हार्मोन्स, वजन, स्किन और बालों से है। कई महिलाओं में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि सालों तक उन्हें इस बीमारी का पता ही नहीं चलता। पीरियड्स नॉर्मल रहने की वजह से वे डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत ही नहीं समझतीं। इसलिए, शरीर के बाकी इशारों को समझना बहुत ज़रूरी है।

PCOD क्या है और यह क्यों होता है? 

आसान भाषा में समझें तो PCOD एक ऐसी स्थिति है जहां महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ने लगता है। इसकी वजह से ओवरी (अंडाशय) अपना काम ठीक से नहीं कर पाती। इसे सिर्फ माहवारी की दिक्कत समझना गलत होगा। यह असल में आपके शरीर की एनर्जी, वजन और शुगर लेवल से जुड़ी एक गहरी समस्या है। अगर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर यह स्किन, बालों और यहां तक कि कंसीव (प्रेग्नेंट) करने की क्षमता पर भी बुरा असर डाल सकती है।

शुरू में शरीर बहुत छोटे-छोटे वॉर्निंग साइन देता है जैसे अचानक वजन बढ़ना, पिंपल्स आना, तेजी से बाल झड़ना या हर वक्त थका-थका लगना। दिक्कत यह है कि अक्सर महिलाएं इन्हें आम बातें समझकर इग्नोर कर देती हैं।

क्या केवल अनियमित पीरियड्स ही PCOD का संकेत हैं? 

ज़्यादातर लोगों के दिमाग में यही बैठा है कि PCOD का मतलब है पीरियड्स का लेट होना। लेकिन यह पूरा सच नहीं है। कई महिलाओं की डेट एकदम फिक्स होती है, फिर भी अंदर ही अंदर हार्मोन्स उथल-पुथल मचा रहे होते हैं। PCOD के कई ऐसे लक्षण हैं जिनका पीरियड्स से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। इसलिए शरीर में हो रहे इन बदलावों पर नज़र रखना बहुत ज़रूरी है:

  • अचानक वज़न बढ़ना: बिना डाइट बदले या ज्यादा खाए बिना भी वजन बढ़ने लगता है, खासकर पेट के आसपास।
  • चेहरे पर मुंहासे (Pimples): हार्मोन्स के बिगड़ने से चेहरे पर बार-बार बड़े और दर्द वाले पिंपल्स निकलने लगते हैं।
  • बाल झड़ना: सिर के बाल तेजी से पतले होने लगते हैं या गुच्छों में टूटने लगते हैं।
  • अनचाहे बाल: चेहरे, ठुड्डी (चिन) या शरीर के बाकी हिस्सों पर मर्दों की तरह बाल उगने लगते हैं।
  • हर वक्त की थकान: बिना कोई भारी काम किए भी शरीर की बैटरी हमेशा डाउन रहती है।
  • मूड स्विंग्स: बिना बात के चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन या अचानक रोने का मन करना भी बिगड़े हुए हार्मोन्स का ही नतीजा है।

नियमित पीरियड्स होने के बावजूद PCOD कैसे हो सकता है? 

जब पीरियड्स हर महीने कैलेंडर के हिसाब से आते हैं, तो कोई भी यही सोचेगा कि अंदर सब चकाचक है। लेकिन शरीर का अंदरूनी सिस्टम इतना सीधा नहीं होता। कई बार हर महीने ब्लीडिंग तो होती है, लेकिन ओवरी में अंडा सही से बनता या रिलीज नहीं हो पाता। यानी बाहर से सब नॉर्मल दिख रहा है, लेकिन अंदर हार्मोन्स का खेल बिगड़ा हुआ है।

ऐसी स्थिति में चूंकि कोई बड़ी तकलीफ नहीं होती, इसलिए महिलाओं को बीमारी का पता बहुत लेट चलता है। अक्सर किसी और वजह से जब अल्ट्रासाउंड होता है, तब जाकर पता चलता है कि ओवरी में पानी की छोटी-छोटी गांठें (cysts) बन गई हैं।

Silent PCOD क्या होता है? 

'साइलेंट PCOD' जैसा कि नाम से ही साफ है यह बीमारी शरीर में चुपचाप बैठी रहती है और कोई बड़े लक्षण नहीं दिखाती। इसी वजह से लड़कियां इसे लाइफस्टाइल का हिस्सा मानकर इग्नोर करती रहती हैं। इसमें आपके पीरियड्स बिल्कुल टाइम पर आ सकते हैं, जिससे आपको शक करने की कोई वजह ही नहीं मिलती। लेकिन अंदर ही अंदर हार्मोन्स का बैलेंस लगातार बिगड़ रहा होता है।

ऐसे में शरीर कुछ हल्के इशारे ज़रूर देता है, जैसे:

  • चेहरे पर बार-बार पिंपल्स का आना-जाना।
  • ठुड्डी या होंठों के ऊपर अनचाहे बाल दिखना।
  • अच्छी नींद लेने के बाद भी थकावट दूर न होना।
  • बात-बात पर मूड खराब होना।
  • लाख कोशिशों के बाद भी वजन कम न होना।

यही वजह है कि साइलेंट PCOD को पकड़ना थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरू में बहुत ही आम से लगते हैं।

जांच में PCOD दिखना लेकिन पीरियड्स का सामान्य रहना 

कई बार आप पेट दर्द या किसी और वजह से अल्ट्रासाउंड कराते हैं और रिपोर्ट में ओवरी के अंदर मोतियों की माला जैसी छोटी-छोटी गांठें (cysts) दिख जाती हैं। डॉक्टर इसे PCOD का पैटर्न कहते हैं। यह देखकर लड़कियां घबरा जाती हैं, क्योंकि उनके पीरियड्स तो बिल्कुल नॉर्मल चल रहे होते हैं।

लेकिन आपको बता दें, सिर्फ एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर डॉक्टर यह तय नहीं करते कि आपको PCOD है ही। इसके लिए डॉक्टर आपके शरीर के बाकी लक्षणों (वजन, स्किन, बालों) को देखते हैं और हार्मोन्स का ब्लड टेस्ट कराते हैं। इन सब चीज़ों को मिलाकर ही सही नतीजा निकाला जाता है। इसलिए सिर्फ एक स्कैन रिपोर्ट देखकर परेशान होने के बजाय, अपने शरीर के बाकी संकेतों पर ध्यान देना ज़्यादा ज़रूरी है।

आयुर्वेद PCOD को किस नज़र से देखता है?

आयुर्वेद PCOD को सिर्फ बच्चेदानी (ओवरी) की कोई अकेली बीमारी नहीं मानता। हम इसे शरीर के अंदर बढ़ते हुए एक बहुत बड़े असंतुलन (इम्बैलेंस) की तरह देखते हैं। आयुर्वेद के नजरिए से यह कफ और वात दोष के भड़कने, पेट की आग (पाचन शक्ति) के बुझने और शरीर में जमे हुए आधे-अधूरे पचे कचरे (टॉक्सिन्स) का नतीजा है।

जब शरीर में 'कफ' बढ़ता है, तो आपको बहुत ज़्यादा भारीपन लगता है, तेज़ी से वज़न बढ़ता है और शरीर की मशीनरी सुस्त पड़ जाती है। वहीं जब 'वात' बिगड़ता है, तो पीरियड्स आगे-पीछे होने लगते हैं, दिमाग में बेचैनी रहती है और शरीर की कुदरती घड़ी खराब हो जाती है।

आयुर्वेद साफ कहता है कि जब आपका पाचन सुस्त पड़ने लगता है, तब शरीर में एक ऐसा जहरीला कचरा जमा होने लगता है जो धीरे-धीरे हार्मोन्स का बैलेंस और शरीर के बाकी कामों को ठप्प कर देता है। इसलिए आयुर्वेद में इसका इलाज सिर्फ किसी एक अंग को ठीक करना नहीं है, बल्कि आपके पूरे शरीर को अंदर से साफ करके वापस अपनी असली ताकत में लाना है।

आयुर्वेद में PCOD के इलाज का असली तरीका

देखिए, आयुर्वेद में PCOD का मतलब सिर्फ 'माहवारी की दिक्कत' नहीं है। असल में यह आपके हार्मोन्स, सुस्त पड़े पाचन और गलत लाइफस्टाइल का मिला-जुला नतीजा है। इसीलिए यहाँ सिर्फ गोलियां देकर दर्द नहीं दबाया जाता, बल्कि पूरी बॉडी की अंदर से सर्विसिंग होती है:

  • दोषों को शांत करना: आपकी तासीर समझकर शरीर में भड़के हुए वात और कफ को बैलेंस किया जाता है।
  • पाचन सेट करना: पेट की आग तेज़ की जाती है ताकि अंदर जमा सारा कचरा (गंदगी) बाहर निकल सके।
  • पीरियड्स की साइकिल: शरीर की उस कुदरती घड़ी को फिर से सेट करते हैं जो पूरी तरह बिगड़ चुकी है।
  • मोटापा और थकान: बेवजह बढ़ रहे वज़न और दिनभर छाई रहने वाली सुस्ती को खत्म करने पर पूरा फोकस रहता है।
  • टेंशन फ्री लाइफ: स्ट्रेस को कम किए बिना ये बीमारी नहीं जाती, इसलिए दिमागी सुकून बहुत जरूरी है।

PCOD के लिए असरदार आयुर्वेदिक दवाई

इस परेशानी को काटने के लिए कुछ कुदरती औषधियां अचूक काम करती हैं (लेकिन इन्हें हमेशा वैद्य जी से पूछकर ही लें):

  • औरतों के शरीर के लिए यह एक वरदान है, जो अंदर से खोखले हो रहे शरीर में वापस जान फूंक देती है।
  • अशोक: अगर पीरियड्स रुक गए हैं या टाइम पर नहीं आ रहे, तो उन्हें वापस पटरी पर लाने में इसका कोई सानी नहीं।
  • लोध्र: यह शरीर में बढ़े हुए भारीपन और कफ को बड़ी तेज़ी से काटता है।
  • अश्वगंधा: बात-बात पर होने वाली दिमागी टेंशन और शरीर की टूटन को सोखने में यह माहिर है।
  • त्रिफला और गिलोय: त्रिफला जहाँ आपके पेट की गंदगी साफ करता है, वहीं गिलोय इम्युनिटी को फौलादी बना देती है।

असरदार आयुर्वेदिक थेरेपी

सिर्फ दवा खाने से बात नहीं बनती। शरीर को रिलैक्स करने के लिए कुछ खास तरीके अपनाए जाते हैं:

  • तेल मालिश और भाप: गर्म औषधीय तेलों की मालिश और हर्बल भाप (स्वेदन) से बंद नसें खुलती हैं और पसीने के रास्ते सारी गंदगी बाहर आ जाती है।
  • जड़ी-बूटियों के सूखे चूर्ण से रगड़कर मालिश होती है, जो एक्स्ट्रा चर्बी और सुस्ती को पिघला देती है।
  • शिरोधारा: जब माथे पर लगातार तेल की धार गिरती है, तो महीनों का स्ट्रेस और बेचैनी एकदम शांत हो जाती है।
  • पंचकर्म: अगर बीमारी बहुत ज़्यादा पुरानी हो, तो शरीर की डीप क्लीनिंग के लिए इसे अपनाया जाता है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम वैजयंती है और मैं फरीदाबाद की रहने वाली हूँ। मुझे PCOD की समस्या थी, जिसके कारण कभी मेरे पीरियड्स अनियमित हो जाते थे और कभी बहुत अधिक ब्लीडिंग होती थी। इस वजह से मैं काफी दर्द और तनाव में रहता था। एलोपैथिक परामर्श में मुझे सर्जरी की सलाह दी गई, जिससे मैं बहुत चिंतित हो गई। तभी मेरी एक सहेली, जो जीवा आयुर्वेद की पूर्व मरीज़ थी, ने मुझे नज़दीकी जीवा क्लिनिक जाने की सलाह दी। मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री समझकर इलाज शुरू किया। चूँकि PCOD मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्या है, इसलिए मुझे आयुर्वेदिक उपचार दिया गया। धीरे-धीरे मेरी पीरियड्स नियमित होने लगे, तनाव कम हुआ और मुझे काफी राहत महसूस हुई।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

PCOD के संकेत हमेशा बहुत स्पष्ट नहीं होते, इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। कुछ स्थितियों में सही जांच और सलाह लेना ज़रूरी माना जाता है।

  • यदि चेहरे पर बार-बार मुंहासे आने लगें
  • यदि अचानक वज़न बढ़ने लगे
  • यदि बाल बहुत ज्यादा झड़ने लगें
  • यदि चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल बढ़ने लगें
  • यदि बहुत ज्यादा थकान महसूस हो
  • यदि गर्भधारण में परेशानी हो रही हो
  • यदि बार-बार मन बदलना या चिड़चिड़ापन महसूस हो
  • यदि जांच में अंडाशय में बदलाव दिखाई दें

ऐसी स्थिति में समय रहते सही सलाह और जांच करवाना बेहतर माना जाता है।

निष्कर्ष

PCOD केवल अनियमित पीरियड्स की समस्या नहीं है। कई महिलाओं में पीरियड्स समय पर आने के बावजूद भी शरीर के अंदर हार्मोन का असंतुलन मौजूद हो सकता है। इसलिए केवल मासिक धर्म को ही शरीर की पूरी सेहत का संकेत मानना सही नहीं माना जाता।

चेहरे पर मुंहासे, वज़न बढ़ना, बाल झड़ना, थकान और शरीर में दूसरे बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। समय रहते सही जीवनशैली, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और सही देखभाल अपनाने से शरीर के संतुलन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हाँ, PCOD केवल वज़न बढ़ने से जुड़ी समस्या नहीं मानी जाती। कई पतली महिलाओं में भी हार्मोन का असंतुलन देखा जा सकता है। ऐसे मामलों में पीरियड्स भी सामान्य रह सकते हैं, इसलिए समस्या जल्दी समझ में नहीं आती। शरीर के दूसरे संकेतों पर ध्यान देना ज़रूरी होता है। सही जांच से स्थिति को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

 हाँ, कई महिलाओं में PCOD का असर त्वचा पर दिखाई देता है। चेहरे पर बार-बार मुंहासे आना या त्वचा का ज्यादा तैलीय होना इसका संकेत हो सकता है। कुछ महिलाओं में गर्दन या बगल के आसपास त्वचा का रंग भी गहरा पड़ सकता है। यह शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन से जुड़ा माना जाता है।

अनियमित नींद और देर रात तक जागना शरीर के हार्मोन पर असर डाल सकता है। इससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ने लगता है। लगातार कम नींद लेने से थकान और वज़न बढ़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए नियमित और पर्याप्त नींद ज़रूरी मानी जाती है।

 हाँ, लगातार तनाव शरीर के हार्मोन को प्रभावित कर सकता है। मानसिक दबाव बढ़ने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और कई महिलाओं में PCOD के लक्षण बढ़ सकते हैं। तनाव का असर नींद, भूख और ऊर्जा पर भी पड़ता है। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना ज़रूरी माना जाता है।

हाँ, कई महिलाओं में बाल पतले होने लगते हैं या ज्यादा टूटने लगते हैं। कुछ मामलों में बालों की चमक भी कम महसूस हो सकती है। यह शरीर में हार्मोन के बदलाव से जुड़ा माना जाता है। समय रहते सही देखभाल करने से स्थिति को बेहतर संभाला जा सकता है।

 कुछ महिलाओं में शादी के बाद जीवनशैली, तनाव और दिनचर्या बदलने से शरीर में बदलाव अधिक महसूस हो सकते हैं। वज़न बढ़ना, थकान या त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि यह हर महिला में अलग हो सकता है। इसलिए शरीर के संकेतों को समझना ज़रूरी होता है।

 हाँ, बहुत कम शारीरिक गतिविधि शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक बैठे रहने से वज़न बढ़ने और शरीर में सुस्ती महसूस होने की संभावना बढ़ सकती है। हल्की नियमित गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। इसलिए रोज थोड़ा चलना और सक्रिय रहना फायदेमंद माना जाता है।

कुछ महिलाओं में बार-बार भूख लगना या मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है। यह शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। गलत खान-पान इस स्थिति को और बढ़ा सकता है। संतुलित और समय पर भोजन लेना बेहतर माना जाता है।

 हाँ, चेहरे पर बदलाव, वज़न बढ़ना या बाल झड़ने जैसी समस्याएं कई महिलाओं को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकती हैं। इससे आत्मविश्वास कम महसूस हो सकता है। लगातार तनाव और चिंता भी बढ़ सकती है। इसलिए शारीरिक के साथ मानसिक देखभाल भी ज़रूरी मानी जाती है।

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