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Dry mouth और ज़्यादा प्यास लगना किस बात का संकेत है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

क्या आपने अभी पानी पिया और कुछ ही मिनटों में आपका गला फिर से सूखने लगा? रात को सोते समय अचानक प्यास के मारे आँख खुल जाना या जीभ का तालू से चिपकना बहुत बेचैनी भरा होता है। लोग सोचते हैं कि शायद गर्मी ज़्यादा है, इसलिए लगातार पानी पीते रहते हैं। लेकिन क्या सिर्फ पानी पी लेना ही सही तरीका है? बिलकुल नहीं। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि शरीर पानी को रोक क्यों नहीं पा रहा है, तब तक कोई बोतल प्यास नहीं बुझा सकती। बार-बार मुँह सूखना कोई आम बात नहीं, बल्कि शरीर की किसी अंदरूनी गड़बड़ी का संकेत है।

प्यास बुझने का नाम क्यों नहीं लेती?

मुँह सूखने की समस्या को मेडिकल भाषा में 'ज़ेरोस्टोमिया' कहते हैं। जब हमारे मुँह में मौजूद लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands) लार बनाना कम कर देती हैं, तो मुँह सूखने लगता है। इसके पीछे भागदौड़ भरी ज़िंदगी, खराब आदतें और तनाव मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं। एसी वाले कमरों में बैठे रहना और मुँह से साँस लेने की आदत शरीर की प्राकृतिक नमी को सुखा देती है। ज़्यादा चाय-कॉफी पीने से भी शरीर अंदर से सूखने लगता है। लार सिर्फ मुँह को गीला नहीं रखती, बल्कि यह पाचन और दांतों की सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।

क्या हर बार मुँह सूखने की वजह एक ही होती है?

जी नहीं, गला सूखने की परेशानी हमेशा एक जैसी नहीं होती। कुछ लोगों को सुबह उठने पर गला सूखा मिलता है, जो रात में मुँह खोलकर साँस लेने या खर्राटे लेने के कारण होता है। वहीं, कुछ लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद तेज़ प्यास लगती है, जो खराब पाचन या खाने में ज़्यादा नमक का नतीजा है। तीसरी स्थिति में इंसान को दिन-रात प्यास लगती है और कोई भी तरल संतुष्टि नहीं देता। कभी-कभी डर या घबराहट में भी गला सूख जाता है। इसलिए अपनी परेशानी के पैटर्न को पहचानना सबसे ज़रूरी है।

तनाव और एंग्जायटी का गले की नमी पर क्या असर पड़ता है?

तनाव और चिंता आपके शरीर का सारा पानी सोख लेते हैं। घबराहट में शरीर में कई बदलाव आते हैं:

  • फाइट और फ्लाइट मोड: तनाव में पाचन और लार बनने की प्रक्रिया तुरंत धीमी हो जाती है।
  • मुँह से साँस लेना: घबराहट में साँस तेज़ हो जाती हैं और मुँह से साँस लेने से लार सूख जाती है।
  • एसिडिटी का बढ़ना: चिंता से पेट में एसिड बढ़ता है, जो नमी का संतुलन बिगाड़ देता है।
  • हार्मोनल बदलाव: स्ट्रेस हार्मोन 'कॉर्टिसोल' शरीर में पानी का संतुलन डगमगा देता है।
  • गाढ़ी लार: तनाव में बनी थोड़ी बहुत लार बहुत गाढ़ी और चिपचिपी होती है।

क्या आपकी ज़्यादा प्यास किसी गहरी बीमारी का संकेत है?

लगातार प्यास लगना सिर्फ मौसम का असर नहीं है; यह अंदर पल रही किसी गंभीर बीमारी की चेतावनी हो सकता है:

  • डायबिटीज (शुगर): बहुत ज़्यादा प्यास लगना और बार-बार यूरिन आना शुगर बढ़ने का शुरुआती लक्षण है।
  • ऑटोइम्यून बीमारियाँ: 'जोग्रेन सिंड्रोम' में ही लार ग्रंथियों पर हमला कर देता है।
  • किडनी की समस्या: किडनी जब सही से फिल्टर नहीं कर पाती, तो शरीर लगातार पानी मांगता है।
  • एनीमिया (खून की कमी): खून की कमी होने पर भी प्यास का एहसास बहुत बढ़ जाता है।
  • नसों की कमज़ोरी: दिमाग लार ग्रंथियों को सही सिग्नल नहीं दे पाता, जिससे मुँह सूखता है।

आयुर्वेद में बार-बार प्यास लगने का मूल कारण क्या है?

आयुर्वेद के अनुसार, बार-बार प्यास लगने को 'तृष्णा' रोग कहा जाता है। इसके मुख्य कारण ये हैं:

  • पित्त दोष का भड़कना: शरीर में गर्मी (पित्त) बहुत ज़्यादा बढ़ने पर वह तरल पदार्थों को सुखा देती है।
  • वात दोष का बढ़ना: वात का स्वभाव रूखा होता है। इसके बढ़ने से नसों में भयंकर रूखापन आ जाता है।
  • आम (टॉक्सिन्स) का जमाव: खराब पाचन से बना 'आम' पानी ले जाने वाली नलियों को ब्लॉक कर देता है।
  • गलत आहार: बहुत मसालेदार, रूखा या बहुत गर्म खाना खाने से शरीर अंदर से सूखने लगता है।

मुँह सूखने की परेशानी दूर करने वाली असरदार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

गले को तर रखने के लिए आयुर्वेद में सबसे खास जड़ी-बूटियाँ ये हैं:

  • मुलेठी: इसका छोटा टुकड़ा चूसने से लार तुरंत बनने लगती है और गले को बहुत आराम मिलता है।
  • आंवला: यह ठंडी तासीर का होता है। इसके जूस या चूर्ण से शरीर को प्राकृतिक नमी मिलती है।
  • सौंफ: खाने के बाद सौंफ चबाने से लार ग्रंथियाँ एक्टिव होती हैं और मुँह का सूखापन दूर होता है।
  • गिलोय: गिलोय टॉक्सिन्स बाहर निकालती है और शुगर कंट्रोल करती है। अगर प्यास डायबिटीज की वजह से है, तो गिलोय रामबाण है।

रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें शरीर का पानी सोख रही हैं?

आपकी कुछ अनजाने में की गई आदतें आपके गले को रेगिस्तान बना रही हैं:

  • एसी (AC) का इस्तेमाल: एसी हवा की सारी नमी खींच लेता है, जिससे गला सूखने लगता है।
  • मुँह से साँस लेना: साइनस या जुकाम में मुँह से साँस लेने पर हवा सीधे गले में जाकर लार सुखा देती है।
  • तंबाकू और सिगरेट: स्मोकिंग लार ग्रंथियों को बुरी तरह डैमेज करती है।
  • शराब (Alcohol): शराब पेशाब के रास्ते शरीर का पानी बाहर निकाल देती है, जिससे भयंकर डिहाइड्रेशन होता है।
  • लगातार बोलना: लगातार बोलने के कारण मुँह की नमी हवा में उड़ जाती है।

गलत खानपान आपकी प्यास कैसे भड़काता है?

आप अपनी प्लेट में जो रखते हैं, उसका सीधा असर प्यास पर पड़ता है:

  • नमक की अधिकता: पैक्ड चिप्स या खाने में ज़्यादा नमक डालने से कोशिकाओं से पानी बाहर खिंचने लगता है।
  • कैफीन का सेवन: ज़्यादा चाय, कॉफी पीने से नर्वस सिस्टम उत्तेजित होता है और शरीर का पानी सूखता है।
  • मीठी चीज़ें: ज़्यादा मीठा खाने पर शरीर को खून साफ करने के लिए एक्स्ट्रा पानी की ज़रूरत पड़ती है।
  • मसालेदार खाना: ज़्यादा मिर्च-मसाले पेट में एसिडिटी पैदा करते हैं, जिसे बुझाने के लिए शरीर बार-बार पानी मांगता है।

क्या आपकी रोज़ की दवाइयाँ तो मुँह नहीं सुखा रही हैं?

कई बार आपकी रोज़ की दवाइयों के साइड इफेक्ट से मुँह सूखता है:

  • ब्लड प्रेशर की दवाएँ : बीपी की दवाइयाँ अक्सर शरीर से एक्स्ट्रा पानी बाहर निकालती हैं।
  • डिप्रेशन की दवाएँ : ये सीधे नर्वस सिस्टम पर काम करती हैं और लार बनने की प्रक्रिया को सुस्त कर देती हैं।
  • एलर्जी की दवाएँ : एंटीहिस्टामिन गोलियाँ शरीर में हर तरह के स्राव को सुखा देती हैं।
  • पेनकिलर्स: लगातार पेनकिलर खाने से पेट में गर्मी बढ़ती है और मुँह की नमी चली जाती है।
  • अस्थमा के इनहेलर: इनहेलर्स का केमिकल अक्सर मुँह और जीभ को सूखने लगता है।

प्राकृतिक तरीके से शरीर की नमी कैसे लौटाएँ?

प्राकृतिक रूप से नमी वापस लाने के लिए ये तरीके अपनाएँ:

  • ऑयल पुलिंग: सुबह मुँह में 1 चम्मच नारियल या तिल का तेल भरकर 5 मिनट घुमाएं और थूक दें।
  • नींबू-शहद का पानी: हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा सा नींबू और शहद मिलाकर घूंट-घूंट पिएं।
  • पानी वाले फल: तरबूज, खीरा और संतरे जैसे फल खाएँ, जिनमें 80-90% पानी होता है।
  • एलोवेरा जूस: यह पेट की गर्मी शांत करता है और अंदर से मॉइस्चराइज़ करता है।
  • ह्यूमिडिफायर: अगर आप एसी में सोते हैं, तो कमरे में एक कटोरी पानी रखें ताकि नमी बनी रहे।

शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए रोज़ क्या करें?

अपनी रूटीन में ये आसान बदलाव लाएँ ताकि गला कभी न सूखे:

  • घूंट-घूंट पानी: एक साथ पूरा गिलास गटकने के बजाय, दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।
  • नाक से साँस लें: हमेशा नाक से साँस लें। नाक बंद है तो भाप लेकर साफ करें।
  • मिट्टी का बर्तन: फ्रिज के बर्फीले पानी की जगह मिट्टी के घड़े का पानी पिएं।
  • खाना अच्छे से चबाएं: 32 बार चबाएं, इससे लार बनेगी और पाचन अच्छा होगा।
  • जीभ की सफाई: टंग क्लीनर से जीभ साफ करें ताकि लार ग्रंथियों के छिद्र बंद न हों।

गला सूखने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

घरेलू उपाय के बाद भी समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है:

  • यूरिन का बार-बार आना: अगर बहुत प्यास के साथ रात में पेशाब के लिए उठना पड़े।
  • धुंधला दिखना: पानी पीने के बाद भी थकान लगे और आंखों के सामने धुंधलापन छा जाए।
  • मुँह में छाले: गला सूखने के कारण मुँह के अंदर सफेद पैच या बार-बार छाले होने लगें।
  • निगलने में दिक्कत: सूखा खाना निगलने में दर्द हो या खाना गले में अटकने लगे।
  • साँस   से बदबू: ब्रश करने के बाद भी मुँह से तेज़ दुर्गंध आती हो।

गले की तरावट के लिए खास आयुर्वेदिक सुझाव

आयुर्वेद में शरीर को हाइड्रेटेड रखने के बेहतरीन उपाय हैं। सबसे कारगर है 'नाभि पूरण'। रात को सोने से पहले नाभि में 2 बूंद देसी घी या नारियल तेल लगाने से अंदरूनी खुश्की दूर होती है। तांबे के बर्तन में रात भर रखा पानी सुबह खाली पेट पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसके अलावा, हफ्ते में एक बार पूरे शरीर की तेल मालिश (अभ्यंग) करने से वात दोष कम होता है और त्वचा से लेकर गले तक प्राकृतिक नमी बनी रहती है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज में क्या फर्क है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य फंगल संक्रमण को खत्म करना और खुजली, लालिमा जैसे लक्षणों को नियंत्रित करना। शरीर के संतुलन और त्वचा के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान देना।
उपचार तरीका एंटीफंगल क्रीम, लोशन या दवाओं का उपयोग किया जाता है; स्टेरॉयड केवल कुछ विशेष स्थितियों में दिए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, आहार सुधार और पारंपरिक उपचारों का उपयोग किया जा सकता है।
असर की गति कई मामलों में संक्रमण और लक्षणों पर अपेक्षाकृत जल्दी असर दिख सकता है। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है और समग्र स्वास्थ्य सुधार पर ज़ोर रहता है।
पुनरावृत्ति (दोबारा होना) संक्रमण दोबारा हो सकता है यदि उपचार अधूरा रहे या जोखिम कारक बने रहें। जीवनशैली और आहार सुधार के माध्यम से त्वचा स्वास्थ्य को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
वैज्ञानिक प्रमाण फंगल संक्रमण के उपचार के लिए एंटीफंगल दवाओं की प्रभावशीलता के मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक उपायों पर सीमित शोध उपलब्ध है, लेकिन अधिक वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

लार हमारे शरीर का प्राकृतिक अमृत है। बार-बार पानी पीने के बाद भी प्यास न बुझना इशारा है कि अंदर कुछ सही नहीं चल रहा। मुँह सूखने पर सिर्फ पानी की बोतलों पर निर्भर होना सही समाधान नहीं है। अपनी दिनचर्या में सुधार, सही खानपान, तनाव से दूरी और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। याद रखें, आपका शरीर आपसे बात करता है; इसके संकेतों को सुनें और एक स्वस्थ, प्राकृतिक जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

References:

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

सिर्फ पानी काफी नहीं है। अगर समस्या बीमारी या दवा की वजह से है, तो मूल कारण का इलाज करना होगा।

हां, मुँह से साँस लेने पर गले की सारी नमी हवा के साथ उड़ जाती है, जिससे गला सूखा महसूस होता है।

ज़रूरी नहीं। यह तनाव, ज़्यादा नमक खाने, या दवा के साइड इफेक्ट से भी हो सकता है। पर जांच ज़रूर कराएं।

मुँह में मुलेठी या लौंग का छोटा टुकड़ा चूसें, इससे तुरंत लार बनने लगेगी और खुश्की दूर होगी।

बिल्कुल नहीं। इनमें मौजूद कैफीन शरीर से पानी बाहर निकालती है और डिहाइड्रेशन बढ़ाती है।

लार दांतों को बैक्टीरिया से बचाती है। लार कम होने पर दांतों में कीड़े लगने का खतरा बढ़ जाता है।

हां, उम्र के साथ लार ग्रंथियों की क्षमता कम हो जाती है, और बुज़ुर्गों की दवाइयाँ भी इसे बढ़ाती हैं।

शुगर-फ्री च्युइंग गम से लार ग्रंथियां एक्टिव होती हैं, लेकिन यह सिर्फ एक कुछ देर का (Temporary) उपाय है।

हां, घबराहट दूर करने के लिए डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन करने से यह परेशानी पूरी तरह ठीक हो सकती है।

नहीं, बर्फ जैसा ठंडा पानी गले की नसों को सिकोड़ देता है। हमेशा मटके का या नॉर्मल पानी ही पिएं।

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