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Mouth Taping सोते समय — Viral Trend है पर Dangerous भी हो सकता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

आजकल सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए आपने कई लोगों को रात में सोते समय अपने होंठों पर टेप लगाते हुए देखा होगा। इसे 'Mouth Taping' कहा जा रहा है और यह इंटरनेट पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। लोग दावा कर रहे हैं कि इससे खर्राटे बंद होते हैं और नींद बहुत अच्छी आती है। ऐसे में कई लोग तुरंत राहत पाने या इस नए ट्रेंड का हिस्सा बनने के लिए बिना सोचे-समझे अपने मुँह पर टेप लगाकर सोने लगे हैं। लेकिन क्या यह सही तरीका है? बिलकुल नहीं। मुँह को ज़बरदस्ती बंद कर देना किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि सोते समय आपका मुँह क्यों खुल रहा है, तब तक कोई भी टेप स्थायी आराम नहीं दे सकता। यह समझना बेहद ज़रूरी है कि सोते समय मुँह से साँस लेना कोई आदत नहीं, बल्कि शरीर की किसी अंदरूनी रुकावट का लक्षण है। आपके शरीर का रेस्पिरेटरी सिस्टम (Respiratory System) कहीं न कहीं संघर्ष कर रहा है, जिसे सही दिनचर्या और सुरक्षित तरीकों से ही ठीक किया जा सकता है।

Mouth Taping (मुँह पर टेप लगाना) आखिर क्या है?

Mouth Taping एक ऐसा चलन है जिसमें लोग सोने से पहले अपने होंठों के ऊपर एक खास तरह का सर्जिकल या मेडिकल टेप लगा लेते हैं। इसका मुख्य मकसद यह होता है कि सोते समय मुँह न खुले और इंसान पूरी रात सिर्फ अपनी नाक से ही साँस ले। इंटरनेट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का मानना है कि नाक से साँस लेना शरीर के लिए ज़्यादा फायदेमंद होता है, इसलिए मुँह को टेप से बंद कर देना एक आसान शॉर्टकट है। लेकिन असल में साँस लेने का तरीका कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे ज़बरदस्ती टेप से कंट्रोल किया जा सके; यह शरीर की एक सहज और ऑटोमैटिक प्रक्रिया है जो ज़रूरत के हिसाब से खुद बदलती है।

आयुर्वेद में सही साँस और नींद का क्या महत्व बताया गया है?

आयुर्वेद में साँस को 'प्राण वायु' कहा गया है। आयुर्वेद मानता है कि हमारी नाक दिमाग का दरवाज़ा है। जब हम नाक से साँस लेते हैं, तो यह सीधे हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करती है। मुँह से साँस लेना वात दोष को बढ़ाता है, जिससे शरीर में खुश्की और दिमाग में बेचैनी पैदा होती है। आयुर्वेद कभी भी किसी प्राकृतिक प्रक्रिया को ज़बरदस्ती रोकने (जैसे टेप लगाना) की सलाह नहीं देता। इसके बजाय यह 'जल नेति' और 'नाड़ी शोधन प्राणायाम' (अनुलोम-विलोम) जैसी प्रक्रियाओं पर ज़ोर देता है, जिससे नाक के रास्ते प्राकृतिक रूप से खुलते हैं और शरीर में प्राण वायु का सही संचार होता है।

लोग सोते समय मुँह पर टेप क्यों लगा रहे हैं?

इसके पीछे कई तरह के दावे किए जा रहे हैं जो लोगों को यह ट्रेंड फॉलो करने पर मजबूर कर रहे हैं। नाक से साँस लेने पर हवा फिल्टर होकर और हल्की-हल्की गर्म होकर फेफड़ों तक पहुँचती है। लोगों का मानना है कि मुँह बंद रखने से सुबह उठने पर गले में सूखापन नहीं होता, साँसों की बदबू कम होती है और खर्राटे आने बंद हो जाते हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक दावा करते हैं कि मुँह बंद रखने से चेहरे की बनावट (Jawline) में सुधार आता है। ये बातें सुनने में बहुत अच्छी लगती हैं, लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के इन्हें अपने ऊपर आजमाना एक बहुत बड़ी गलती साबित हो सकता है।

क्या सोते समय मुँह से साँस लेना वाकई नुकसानदायक है?

हाँ, लंबे समय तक मुँह से साँस लेना सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। जब हम नाक की बजाय मुँह से साँस लेते हैं, तो हवा बिना फिल्टर के सीधे गले में जाती है। इससे डस्ट एलर्जी, गले में खराश और मुँह सूखने की परेशानी बहुत आम हो जाती है। इसके अलावा मुँह से साँस लेने पर मसूड़ों की बीमारियाँ और दाँतों में कैविटी का खतरा भी बढ़ जाते हैं। नींद भी अक्सर टूटती है और इंसान सुबह थका हुआ उठता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप मुँह को टेप से चिपका दें, बल्कि इसका इलाज यह ढूँढना है कि आपकी नाक बंद क्यों है।

Mouth Taping के गंभीर और जानलेवा खतरे क्या हो सकते हैं?

मुँह को टेप करने का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह आपके शरीर का 'इमरजेंसी एग्जिट' बंद कर देता है। जब हम सोते हैं, तो शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं:

  • ऑक्सीजन की कमी: अगर सोते समय किसी भी वजह से नाक बंद हो जाए (जैसे ज़ुकाम या एलर्जी), तो मुँह बंद होने से शरीर में ऑक्सीजन की भारी कमी हो सकती है।
  • दम घुटना: नींद के दौरान अगर आपको अचानक खाँसी आ जाए या उल्टी जैसा महसूस हो, तो टेप लगे होने के कारण दम घुटने का पूरा खतरा रहता है।
  • घबराहट और एंग्जायटी: रात में अचानक साँस टूटने पर जब इंसान हड़बड़ा कर उठता है, तो मुँह बंद होने से पैनिक अटैक आ सकता है।
  • स्किन एलर्जी: रोज़ाना होंठों और उसके आस-पास की नाज़ुक त्वचा पर टेप लगाने से रैशेज, लालिमा और स्किन छिलने की परेशानी हो सकती है।
  • नींद का टूटना: शरीर को जब पर्याप्त हवा नहीं मिलती, तो दिमाग आपको बार-बार जगाता है, जिससे गहरी नींद कभी नहीं आ पाती।

किन लोगों को यह वायरल ट्रेंड बिल्कुल ट्राई नहीं करना चाहिए?

Mouth Taping हर किसी के लिए नहीं है और कुछ शारीरिक स्थितियों में यह बेहद खतरनाक हो सकता है:

  • स्लीप एप्निया (Sleep Apnea): जिन लोगों को सोते समय साँस रुकने की बीमारी है, उनके लिए यह जानलेवा हो सकता है।
  • अस्थमा के मरीज़: जिन्हें अस्थमा या फेफड़ों की कमज़ोरी है, उन्हें अतिरिक्त ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है, जो मुँह से भी आती है।
  • साइनस और बंद नाक: जिन्हें साइनस की दिक्कत है या सर्दी-ज़ुकाम के कारण नाक बंद है, उनका मुँह टेप करना घुटन पैदा करेगा।
  • हार्ट के मरीज़: दिल की बीमारियों में शरीर को ऑक्सीजन की लगातार सप्लाई चाहिए, जिसमें कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।
  • बच्चे और बुजुर्ग: बच्चों की साँस नली छोटी होती है और बुजुर्गों की मांसपेशियाँ कमज़ोर होती हैं, इसलिए उन पर यह ट्रेंड कभी नहीं आजमाना चाहिए।

स्लीप एप्निया (Sleep Apnea) के मरीजों के लिए यह ज़हर कैसे है?

स्लीप एप्निया एक गंभीर बीमारी है जिसमें सोते समय गले की मांसपेशियाँ रिलैक्स होकर साँस की नली को ब्लॉक कर देती हैं। ऐसे में इंसान की साँस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। इस स्थिति में शरीर तुरंत मुँह खोलकर हवा खींचने की कोशिश करता है ताकि इंसान की जान बच सके। अब सोचिए, अगर ऐसे इंसान का मुँह टेप से बंद हो, तो क्या होगा? उसका शरीर हवा के लिए तड़पेगा और ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से गिर जाएगा। इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

बंद नाक में मुँह टेप करना क्यों एक बड़ी गलती है?

ज़्यादातर लोग मुँह से साँस तभी लेते हैं जब उनकी नाक के रास्ते में कोई रुकावट होती है। यह रुकावट नाक की हड्डी का टेढ़ा होना (Deviated Septum), एलर्जी, साइनस या नाक के अंदर की सूजन की वजह से हो सकती है। आपका शरीर बहुत स्मार्ट है; जब उसे नाक से हवा नहीं मिलती, तो वह ज़िंदा रहने के लिए खुद-ब-खुद मुँह खोल देता है। अगर आप बंद नाक की समस्या को ठीक किए बिना सिर्फ मुँह पर टेप लगा लेंगे, तो शरीर को हवा कहाँ से मिलेगी? यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी पाइप के ब्लॉक होने पर आप हवा निकलने के दूसरे रास्ते को भी बंद कर दें।

बिना टेप लगाए नाक से साँस लेने की आदत कैसे डालें?

प्राकृतिक रूप से नाक से साँस लेने की आदत डालने के लिए आप इन सुरक्षित तरीकों को अपना सकते हैं:

  • नेज़ल स्ट्रिप्स (Nasal Strips): बाज़ार में नाक के ऊपर लगाने वाली स्ट्रिप्स आती हैं, जो नाक के नथुनों को हल्का सा फैला देती हैं, जिससे हवा आसानी से अंदर जाती है।
  • एलर्जी का इलाज: अगर आपको डस्ट या पोलन से एलर्जी है, तो बेडरूम की सफाई रखें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
  • सोने की सही पोज़िशन: पीठ के बल सोने से मुँह जल्दी खुलता है। करवट लेकर (खासकर बायीं करवट) सोने से नाक का रास्ता साफ रहता है।
  • स्टीम लेना: सोने से पहले गर्म पानी की भाप लेने से नाक और गले की सूजन कम होती है और साँस लेना आसान होता है।
  • नमक के पानी का स्प्रे: नेज़ल सलाइन स्प्रे नाक की अंदरूनी सफाई करता है और बलगम को हटाकर रास्ता खोलता है।

अच्छी और सही साँस के लिए रोज़मर्रा की आदतें कैसे सुधारें?

अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके आप अपनी साँस और नींद की क्वालिटी सुधार सकते हैं:

  • धूम्रपान से दूरी: सिगरेट पीने से गले और नाक की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे मुँह से साँस लेने की नौबत आती है।
  • वज़न कंट्रोल करना: गले के आस-पास ज़्यादा फैट होने से साँस की नली पर दबाव पड़ता है। सही वज़न बनाए रखने से खर्राटे और साँस की दिक्कत कम होती है।
  • बिस्तर का सिरहाना ऊँचा रखें: सोते समय सिर को थोड़ा ऊपर रखने से गुरुत्वाकर्षण के कारण साँस की नली खुली रहती है।
  • हाइड्रेशन: दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीएँ ताकि शरीर में नमी बनी रहे और रात में गला न सूखे।

सोते समय साँस की दिक्कत होने पर डॉक्टर के पास कब जाएँ?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर (ENT स्पेशलिस्ट) के पास जाना ज़रूरी है:

  • ज़ोरदार खर्राटे: अगर आपके खर्राटों की आवाज़ बहुत तेज़ है और इससे दूसरों की नींद खराब हो रही है।
  • साँस अटकना: अगर रात में सोते-सोते अचानक ऐसा लगे कि साँस रुक गई है या आप खाँसते हुए उठ जाते हैं।
  • सुबह की थकान: 8 घंटे सोने के बाद भी अगर आप सुबह थका हुआ महसूस करते हैं और दिन भर सुस्ती रहती है।
  • लगातार मुँह सूखना: अगर हर सुबह आपका गला और होंठ पूरी तरह से सूखे हुए और छिले हुए लगते हैं।
  • नाक का हमेशा बंद रहना: अगर कोई भी मौसम हो, लेकिन आपकी एक या दोनों नाक हमेशा ब्लॉक महसूस होती हैं।

गहरी नींद और खुलकर साँस लेने के घरेलू और सुरक्षित उपाय 

आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में कुछ ऐसे बेहतरीन उपाय हैं जो बिना किसी नुकसान के आपकी मदद कर सकते हैं:

  • नाक में घी या तेल डालना: रात को सोने से पहले अपनी नाक के दोनों छेदों में शुद्ध 'अणु तेल' या देसी गाय के घी की एक-एक बूँद डालने से नाक का रास्ता एकदम साफ और खुला रहता है।
  • अजवाइन की पोटली: रात को सोते समय अजवाइन की पोटली सूंघने से भी बंद नाक तुरंत खुल जाती है।
  • सोने से पहले प्राणायाम: बिस्तर पर जाने से ठीक पहले थोड़ी देर गहरी साँसें लेने से फेफड़े मज़बूत होते हैं और दिमाग शांत होता है, जिससे शरीर अपने आप ही गहरी और मीठी नींद में चला जाता है।

इंटरनेट के ट्रेंड्स और डॉक्टर के असली इलाज में क्या अंतर है? 

पहलू सोशल मीडिया ट्रेंड / स्वयं किए गए उपाय चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार
मुख्य उद्देश्य अक्सर किसी एक लक्षण को जल्दी सुधारने या कम करने का दावा करते हैं। समस्या के वास्तविक कारण की पहचान करके उसका उचित उपचार करना।
आधार व्यक्तिगत अनुभव, वायरल वीडियो या सीमित जानकारी पर आधारित हो सकते हैं। चिकित्सकीय इतिहास, जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होते हैं।
माउथ टेपिंग (Mouth Taping) का उदाहरण कुछ लोग इसे खर्राटों या मुँह खुला रहने की समस्या के लिए अपनाते हैं, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या उपयुक्त नहीं है। डॉक्टर यह जांचते हैं कि मुँह खुला रहने का कारण नाक बंद होना, एलर्जी, स्लीप एपनिया या कोई अन्य समस्या तो नहीं है।
सुरक्षा बिना विशेषज्ञ सलाह के अपनाए गए उपायों में जोखिम हो सकता है, खासकर यदि कोई छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या मौजूद हो। उपचार व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और कारण के अनुसार तय किया जाता है।
लंबी अवधि का प्रभाव लक्षणों में अस्थायी बदलाव दिख सकता है, लेकिन मूल कारण अनदेखा रह सकता है। कारण का उपचार होने पर लंबे समय तक बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
विश्वसनीयता परिणाम व्यक्ति-व्यक्ति में काफी अलग हो सकते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों और चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित निर्णय लिए जाते हैं।

निष्कर्ष

नींद हमारे शरीर के लिए एक ऐसा समय है जब हमारा हर अंग पूरी आज़ादी और सुकून के साथ खुद की थकान को दूर करता है। इस दौरान साँस लेने के कुदरती रास्ते को किसी टेप से बंद कर देना किसी भी तरह की समझदारी नहीं है।मुँह पर टेप लगाना (Mouth Taping) एक बहुत ही खतरनाक ट्रेंड साबित हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही अस्थमा या साँस की कोई दिक्कत है। अपनी रोज़ की आदतों में सुधार करके, योगासन अपनाकर और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेकर आप इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं।याद रखें, इंटरनेट के लाइक्स और व्यूज़ आपकी जान से ज़्यादा कीमती नहीं हैं। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें और हमेशा सुरक्षित तरीके ही अपनाएँ।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

जी नहीं, टेप लगाने से कुछ देर के लिए आवाज़ दब सकती है, लेकिन यह खर्राटों का स्थायी इलाज नहीं है। खर्राटे अक्सर गले या नाक की रुकावट से आते हैं।

यह इस बात का संकेत है कि आपकी नाक से पर्याप्त हवा बाहर नहीं निकल रही है। ऐसी स्थिति में तुरंत टेप हटा दें और भविष्य में इसे कभी न ट्राई करें।

बिलकुल नहीं। स्लीप एप्निया के मरीजों के लिए मुँह पर टेप लगाना बहुत खतरनाक और जानलेवा हो सकता है। इसके लिए डॉक्टर से सी-पैप (CPAP) मशीन की सलाह लें।

अगर बच्चा कभी-कभार ऐसा करता है तो ठीक है, लेकिन रोज़ ऐसा हो तो यह टॉन्सिल्स या एडेनोइड्स (Adenoids) बढ़ने का संकेत हो सकता है। डॉक्टर को दिखाएँ, टेप बिल्कुल न लगाएँ।

गर्म पानी में थोड़ी सी अजवायन या यूकेलिप्टस (Eucalyptus) ऑयल की बूँदें डालकर भाप लेना नाक खोलने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

हाँ, नेज़ल स्ट्रिप्स बाहर से नाक की त्वचा पर लगाई जाती हैं जो नथुनों को चौड़ा करती हैं। यह टेपिंग के मुकाबले पूरी तरह सुरक्षित है।

मुँह से साँस लेने पर मुँह की लार (Saliva) सूख जाती है। लार हमारे दाँतों को कैविटी और बैक्टीरिया से बचाती है।, इसके सूखने से दाँत खराब होने लगते हैं।

हाँ, पीठ के बल सीधे सोने से जीभ पीछे की तरफ गिरती है जिससे साँस का रास्ता रुकता है और मुँह खुलता है। करवट लेकर सोना सबसे अच्छा माना जाता है।

भले ही कंपनियाँ इन्हें सुरक्षित बताकर बेचें, लेकिन मेडिकल साइंस किसी भी तरह से होंठों को चिपकाने की सलाह नहीं देता।

इसका इलाज कारण पर निर्भर करता है। यह एलर्जी, साइनस या नाक की हड्डी टेढ़ी होने के कारण हो सकता है। ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से मिलकर ही इसका सही इलाज संभव है।

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