योग शरीर और मन को स्वस्थ रखने का एक अत्यंत प्राचीन और बेहतरीन माध्यम है लेकिन कई बार फिटनेस के जुनून में या अनजाने में हम कुछ ऐसे कठिन आसनों का अभ्यास करने लगते हैं, जो फायदा पहुँचाने के बजाय हमारे शरीर के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर देते हैं
खासतौर पर जब कोई व्यक्ति पहले से ही घुटनों,कमर या गर्दन की समस्या से जूझ रहा हो, तो गलत तरीके से किया गया कोई भी खिंचाव स्थिति को गंभीर बना सकता है इसलिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि कौन से आसन शरीर के किस हिस्से पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं और उनसे कैसे बचा जाए।
जोड़ों के दर्द Joint Pain में योग करते समय शरीर के साथ क्या होता है?
जब आप पहले से मौजूद दर्द के बावजूद ज़बरदस्ती योग का अभ्यास करते हैं, तो शरीर के भीतर कई बायोमैकेनिकल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जो समस्या को और बढ़ा सकते हैं-
कार्टिलेज का घिसना- जब जोड़ों पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर पड़ता है, तो उनके बीच की प्राकृतिक कुशनिंग (गद्दी) डैमेज होने लगती है। इसका नतीजा ये होता है कि हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं और दर्द काफी बढ़ जाता है।
लिगामेंट्स पर एक्स्ट्रा खिंचाव- कसरत करते समय ज़बरदस्ती शरीर को मोड़ने या ज़्यादा झुकने से लिगामेंट्स पर उनकी लिमिट से ज़्यादा दबाव पड़ता है। इससे उनमें हल्की अंदरूनी चोट (माइक्रो-टियर्स) आ सकती है।
वात दोष का बढ़ना- आयुर्वेद के मुताबिक, गलत तरीके से या हद से ज्यादा वर्कआउट करने से शरीर में रूखापन आ जाता है। यह रूखापन धीरे-धीरे जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई को पूरी तरह से खत्म कर देता है।
नसों का दबना- गलत पॉश्चर की वजह से गर्दन और रीढ़ की हड्डी की नसों पर बेवजह का दबाव पड़ता है। इस वजह से दर्द सिर्फ जोड़ों तक ही नहीं रुकता, बल्कि झनझनाहट के साथ हाथों और पैरों तक भी फैलने लगता है।
कैसे पहचानें कि कोई योगासन जोड़ों को नुकसान पहुँचा रहा है?
हमारा शरीर हमेशा किसी भी खतरे या अंदरूनी टूट-फूट से पहले संकेत देता है। योग के दौरान या उसके तुरंत बाद इन अलार्मिंग लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ न करें-
- तीखा और अचानक उठने वाला दर्द- आसन करते समय अगर किसी जोड़ में अचानक पॉप की आवाज़ आए या तीखी सुई चुभने जैसा दर्द उठे।
- लंबे समय तक रहने वाली अकड़न- अभ्यास के अगले दिन सुबह पीठ में अकड़न या घुटनों में भयंकर कड़ापन महसूस होना, जो आसानी से खत्म न हो।
- सूजन और लालिमा का उभरना- जिस जोड़ पर सबसे ज़्यादा ज़ोर पड़ा हो, वहाँ गर्माहट महसूस होना और सूजन का साफ तौर पर उभर आना।
- कमज़ोरी और अस्थिरता- योग के बाद सीढ़ियाँ चढ़ते या उतरते समय घुटनों में ऐसा लगना जैसे वे शरीर का वज़न नहीं सह पाएंगे और क्या जोड़ हमेशा के लिए खराब हो गए हैं? जैसा गहरा डर मन में बैठना।
- अत्यधिक थकान- योग से ऊर्जा मिलनी चाहिए, लेकिन अगर अभ्यास के बाद आपको भारी क्रोनिक फटीग महसूस होती है, तो यह ओवर-स्ट्रेनिंग का संकेत है।
योग के दौरान लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?
फिटनेस और लचीलापन पाने के उत्साह में लोग अक्सर अपनी शारीरिक सीमाओं को लांघने की गलती कर बैठते हैं, जिसके गंभीर परिणाम उनके मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम Musculoskeletal system को भुगतने पड़ते हैं।
- ज़बरदस्ती पोज़ होल्ड करना- दर्द होने के बावजूद यह सोचकर आसन में बने रहना कि "नो पेन, नो गेन" No pain, no gain एक बहुत बड़ी गलती है।
- वार्मअप की कमी-सूखी और जकड़ी हुई मांसपेशियों के साथ बिना सूक्ष्म व्यायाम के अचानक कठिन आसन शुरू कर देना।
- गलत एलाइनमेंट - कंप्यूटर के सामने बैठने से ऑफिस का पोस्चर खराब होने के बावजूद, बिना किसी प्रशिक्षित गुरु के मार्गदर्शन के कठिन आसनों का अभ्यास करना।
- लिगामेंट का टूटना - यह गलत योग की सबसे बड़ी जटिलता है, जिसे ठीक होने में कई महीने लग सकते हैं।
- हड्डियों का कमज़ोर होना- गलत दबाव लगातार पड़ने से उन लोगों में हेयरलाइन फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है जो पहले से ही हड्डियों की कमज़ोरी के शिकार हैं।
आयुर्वेद जोड़ों के दर्द और गलत योगासनों के इस विज्ञान को कैसे समझता है?
आयुर्वेद के अनुसार, योग शरीर के लिए एक बेहतरीन औषधि है, लेकिन अगर इसे शरीर के दोषों और शारीरिक प्रकृति के विपरीत किया जाए, तो यह भयंकर बीमारियों का कारण बन सकता है-
- वात दोष का अत्यधिक भड़कना- जोड़ों में प्राकृतिक रूप से श्लेषक कफ Lubricant मौजूद होता है। जब हम अपनी क्षमता से अधिक ज़ोर लगाकर आसन करते हैं, तो शरीर में वात दोष भड़क जाता है और जोड़ों की चिकनाई को सुखा देता है।
- धातु क्षय- ज़बरदस्ती किए गए आसनों से रस और रक्त धातु का पोषण मांसपेशियों तक नहीं पहुँच पाता, जिससे हड्डियों अस्थि धातु का क्षय होने लगता है और वे कमज़ोर पड़ जाती हैं।
- पाचन और अग्नि का प्रभाव- यदि आपकी जठराग्नि कमज़ोर है, तो शरीर में आम टॉक्सिन्स बनता है। गलत योग इस आम को शरीर के विभिन्न हिस्सों में धकेल कर दर्द पैदा करता है, इसलिए पाचन तंत्र का मजबूत होना योग के लिए पहली शर्त है।
जोड़ों को अंदर से मजबूत और लचीला बनाने वाली आयुर्वेदिक डाइट
अपने जोड़ों को योगासनों के लिए तैयार करने और क्षतिग्रस्त कार्टिलेज को रिपेयर करने के लिए आपको अपने खानपान में बदलाव करना होगा और इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनाना होगा-
| आहार की श्रेणी | क्या खाएं फायदेमंद - जोड़ों को चिकनाई देने वाले | क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - वात और रूखापन बढ़ाने वाले |
| अनाज Grains | पुराना चावल, गेहूं, ओट्स दूध/घी के साथ, मूंग दाल की खिचड़ी। | मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, रूखे और सूखे बिस्कुट। |
| वसा Fats | देसी गाय का शुद्ध घी जोड़ों के लिए सबसे बड़ा अमृत, तिल का तेल। | रिफाइंड ऑयल, डालडा, बहुत ज़्यादा रूखा और बिना तेल-घी का खाना। |
| सब्ज़ियाँ Vegetables | लौकी, तरोई, परवल, कद्दू सभी अच्छी तरह पकी और घी में छौंकी हुई। | कच्चा सलाद विशेषकर रात में, भारी कटहल, बैंगन, अरबी। |
| फल Fruits | पपीता, उबला हुआ सेब Stewed Apple, रात भर भीगी हुई मुनक्का। | कच्चे या बिना मौसम के ठंडे फल, बहुत ज़्यादा खट्टे फल। |
| पेय पदार्थ Beverages | गुनगुना पानी, हल्दी वाला दूध रात में, अदरक का पानी। | बर्फ का ठंडा पानी पाचन के लिए ज़हर है, बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी। |
जोड़ों की सूजन और दर्द को दूर करने के लिए जड़ी-बूटियाँ
प्रकृति ने हमें कुछ ऐसे नायाब रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट या लत के क्षतिग्रस्त जोड़ों को प्राकृतिक ताक़त प्रदान करते हैं और नसों की सूजन को खींच लेते हैं-
- अश्वगंधा Ashwagandha- यह केवल शरीर की कमज़ोरी दूर नहीं करता, बल्कि अश्वगंधा नसों और मांसपेशियों की जकड़न को खोलकर जोड़ों को लचीला और मजबूत बनाता है।
- गिलोय Giloy- शरीर में सूजन और किसी भी तरह के टॉक्सिन्स को कम करने के लिए गिलोय एक बेहतरीन औषधि है। यह वात-रक्त विकारों को शांत कर कार्टिलेज को घिसने से बचाता है।
- शल्लकी Shallaki- यह एक बेहद शक्तिशाली और प्राकृतिक दर्द निवारक है, जो जोड़ों के बीच रक्त संचार को सुधारता है और घुटनों व कमर की सूजन को तेजी से घटाता है।
- निर्गुंडी Nirgundi- इसके पत्तों का लेप या तेल जोड़ों के तीखे दर्द, विशेषकर जब गलत आसन के कारण कोई मस्कुलर चोट लगी हो, उसे शांत करने के लिए जादू की तरह काम करता है।
क्षतिग्रस्त जोड़ों और नसों को रिपेयर करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़
जब योग के दौरान किसी गलत खिंचाव के कारण दर्द और वात शरीर में बहुत गहराई तक बैठ जाए, तो पंचकर्म की ये एक्सटर्नल थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रिबूट कर देती हैं-
- अभ्यंग मालिश Abhyanga- शुद्ध वातनाशक औषधीय तेलों से संपूर्ण शरीर की अभ्यंग मालिश करने से जकड़ी हुई मांसपेशियां पूरी तरह रिलैक्स होती हैं और फँसी हुई गैस व दर्द दूर होता है।
- स्वेदन थेरेपी Swedana- तेल मालिश के तुरंत बाद दी जाने वाली हर्बल भाप Steam यानी स्वेदन थेरेपी नसों के गहरे ब्लॉकेज को खोलती है और दर्द पैदा करने वाले जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।
- कटि बस्ती Kati Basti- यदि गलत झुकने वाले आसन के कारण कमर में गहरी चोट लगी है, तो कमर पर हल्का गुनगुना औषधीय तेल रोकने की यह कटि बस्ती थेरेपी स्लिप डिस्क में अद्भुत लाभ देती है।
- ग्रीवा बस्ती Greeva Basti- शीर्षासन के गलत अभ्यास से यदि गर्दन में अकड़न आ गई है, तो गर्दन का दर्द जड़ से शांत करने के लिए ग्रीवा बस्ती सबसे अचूक उपाय है।
- मात्रा बस्ती Matra Basti- बड़ी आंत से वात को पूरी तरह खत्म करने के लिए तेल की मात्रा बस्ती दी जाती है, जो पूरे शरीर के जोड़ों को भीतर से चिकनाई देती है।
क्षतिग्रस्त जोड़ों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?
गलत योगाभ्यास और ज़बरदस्ती किए गए खिंचाव से कमज़ोर हुए लिगामेंट्स और कार्टिलेज को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है-
- शुरुआती 1-2 महीने- सही औषधियों और घी युक्त सात्विक खानपान के सेवन से आपकी सूजन कम होगी और जोड़ों में उठने वाला तीखा दर्द शांत होने लगेगा।
- 3-4 महीने- पंचकर्म चिकित्सा और आयुर्वेदिक रसायनों के निरंतर प्रभाव से जोड़ों का रूखापन खत्म होने लगेगा और चलने-फिरने या योग के बेसिक आसन करने में आत्मविश्वास लौटेगा।
- 5-6 महीने- आपका मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम Musculoskeletal system पूरी तरह पोषित हो जाएगा और आप बिना किसी दर्द या मानसिक तनाव के अपनी सामान्य व एक्टिव दिनचर्या में लौट पाएंगे।
आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर
गलत योगाभ्यास से हुए जॉइंट पेन के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।
| श्रेणी | आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care | आयुर्वेद Holistic care |
| इलाज का मुख्य लक्ष्य | दर्द को महसूस होने से रोकने के लिए पेनकिलर्स या मांसपेशियों को रिलैक्स करने वाली कृत्रिम दवाएं देना। | बढ़े हुए वात को शांत करना, जठराग्नि को बढ़ाना और जोड़ों में प्राकृतिक रूप से 'श्लेषक कफ' चिकनाई पैदा करना। |
| बीमारी को देखने का नज़रिया | इसे केवल एक स्थानीय Local मस्कुलर या हड्डियों की इंजरी मानना। | इसे बिगड़े हुए वात दोष, धातु क्षय और असंतुलित जीवनशैली का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना। |
| डाइट और लाइफस्टाइल | अक्सर डाइट को लेकर कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं होते, केवल आराम करने की सलाह दी जाती है। | खाने में 'स्नेहन' घी/तेल, वातशामक आहार, और शारीरिक प्रकृति के अनुसार सुरक्षित व्यायाम पर ज़ोर दिया जाता है। |
| लंबा असर | गोलियाँ छोड़ने पर दर्द वापस आ जाता है और लगातार दवाओं से कार्टिलेज कमज़ोर पड़ने लगता है। | शरीर की जठराग्नि और लिगामेंट्स अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे प्राकृतिक रूप से हील करना सीख जाते हैं। |
डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?
हालांकि आयुर्वेद इस वात और दर्द को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको योग के दौरान या बाद में अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है-
- अचानक सुन्नपन या लकवा मार जाना- अगर आसन करने के बाद हाथ या पैर में अचानक भयंकर सुन्नपन आ जाए या वे पूरी तरह काम करना बंद कर दें यह नसों के गंभीर रूप से दबने का संकेत है।
- जोड़ का अपनी जगह से खिसक जाना Dislocation- अगर अत्यधिक खिंचाव से कंधा या घुटने की कटोरी Patella अपनी जगह से खिसकती हुई महसूस हो और जोड़ का आकार विकृत दिखने लगे।
- असहनीय दर्द जो लेटने पर भी कम न हो- अगर कमर या गर्दन में ऐसा भयंकर दर्द उठे जो किसी भी पोज़िशन में लेटने या आराम करने पर शांत न हो।
- जोड़ों में अत्यधिक गर्माहट और बुखार- दर्द के साथ-साथ अगर जोड़ बहुत ज़्यादा लाल हो जाए, वहाँ गर्माहट हो और शरीर में तेज़ बुखार आने लगे यह अंदरूनी इन्फेक्शन या गंभीर चोट का अलार्म हो सकता है।
निष्कर्ष
योग एक संजीवनी है, लेकिन इसे बिना किसी मार्गदर्शक के और शरीर की क्षमता से बाहर जाकर करना इसे ज़हर भी बना सकता है। अपने शरीर और जोड़ों को एक जीवन भर साथ निभाने वाली संपत्ति मानें। यदि आप पहले से ही दर्द में हैं, तो ज़बरदस्ती आगे झुकने, घुटने मोड़ने या गर्दन पर भार डालने वाले आसनों को अपनी दिनचर्या से हटा दें। दर्द में योग करके शरीर के अलार्म को नज़रअंदाज़ करना कोई बहादुरी नहीं है; यह एक संकेत है कि आपका वात दोष भड़क चुका है और कार्टिलेज अपनी चिकनाई खो चुका है। दर्द निवारक गोलियों और स्टेरॉयड्स के चक्रव्यूह से बाहर निकलें। अपने जोड़ों को शुद्ध घी, अश्वगंधा और गिलोय का पोषण दें और पंचकर्म की कटि व ग्रीवा बस्ती थेरेपी से अपनी नसों को नया जीवन दें। गलत आसनों के इस बोझ को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें, और अपने जोड़ों को स्थायी रूप से मज़बूत बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।






























































































