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Trigeminal Neuralgia – चेहरे का तेज़ दर्द जो दवा से नहीं रुकता

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठकर दाँत ब्रश करना, चेहरे पर पानी की कुछ बूंदें डालना, या अपनों को देखकर मुस्कुरा देना ये हमारे जीवन के वो साधारण पल हैं जिन्हें हम बिना सोचे-समझे जीते हैं। लेकिन ज़रा कल्पना कीजिए, क्या हो अगर मुस्कुराते ही या हवा का एक झोंका चेहरे पर लगते ही आपको ऐसा महसूस हो जैसे किसी ने आपके गाल या जबड़े में 440 वोल्ट के बिजली का नंगा तार छुआ दिया हो?

यह कोई साधारण सिरदर्द या दाँत का दर्द नहीं है। चेहरे के एक हिस्से में अचानक उठने वाला यह भयंकर, सुन्न कर देने वाला और चीरने वाला दर्द ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया Trigeminal Neuralgia कहलाता है। अक्सर लोग इसे दाँत की समस्या समझकर अपने अच्छे-भले दाँत उखड़वा लेते हैं, लेकिन दर्द जस का तस रहता है। जब यह दर्द रोज़ की आदत बन जाए और हेवी पेनकिलर्स भी बेअसर होने लगें, तो समझ लीजिए कि आपके चेहरे की मुख्य नस Trigeminal Nerve भारी दबाव और डैमेज की चपेट में आ चुकी है, जिसे नज़रअंदाज़ करना आपको सामान्य जीवन जीने से हमेशा के लिए वंचित कर सकता है।

चेहरे का यह दर्द शरीर में क्या संकेत देता है?

हमारे चेहरे पर संवेदना Sensation महसूस कराने की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से पाँचवीं कपाल तंत्रिका 5th Cranial Nerve, जिसे ट्राइजेमिनल नर्व कहते हैं, की होती है ,जब इस नस पर दिमाग के निचले हिस्से में मौजूद किसी रक्त वाहिका Blood vessel का भारी दबाव पड़ने लगता है, तो नस की ऊपरी सुरक्षा परत Myelin sheath घिसने या सूखने लगती है। यह दबाव शरीर में क्या संकेत देता है:

  • नस की सुरक्षा परत का खिसकना Demyelination: लगातार पड़ने वाले दबाव या बढ़ती उम्र के कारण नस के ऊपर की कोटिंग सूख जाती है। इसके हटने से नस के फाइबर्स आपस में टकराते हैं और शॉर्ट-सर्किट की तरह चेहरे पर करंट Electric Shock पैदा करते हैं।
  • मस्तिष्क और नसों का मिसफायर Misfiring: नस के डैमेज होने के कारण एक हल्का सा स्पर्श, जैसे चेहरे पर हवा का लगना या रुई का छूना भी, दिमाग तक एक भयंकर दर्द के सिग्नल के रूप में पहुँचता है।
  • नसों का रूखापन और ब्लड सर्कुलेशन की कमी: शरीर में वात रूखापन बढ़ने से चेहरे की नसों में रक्त संचार बाधित होता है। खून और पोषण न पहुँचने से नसें अंदर से सूखने लगती हैं, जो नसों की अत्यधिक संवेदनशीलता का सबसे बड़ा कारण बनता है।
  • मानसिक तनाव का प्रभाव: इस भयंकर दर्द के डर से पैदा होने वाला लगातार मानसिक तनाव शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ाता है, जो नर्वस सिस्टम को भारी नुकसान पहुँचाता है और दर्द के अटैक्स को और तेज़ कर देता है।

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया Trigeminal Neuralgia और नसों का डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का शरीर और उसके दोषों की प्रकृति अलग होती है। ट्राइजेमिनल नर्व पर पड़ने वाला यह दबाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान नर्व डैमेज: इस स्थिति में दर्द बहुत ही तीखा, चुभने वाला और करंट जैसा होता है। ठंडी हवा के संपर्क में आने से, तेज़ पंखे के नीचे सोने से या ठंडे मौसम में यह वात दोष Vata dosha और अधिक भड़क जाता है और दर्द असहनीय हो जाता है। दर्द चंद सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक रहता है और अचानक गायब हो जाता है।
  • पित्त-प्रधान नर्व डैमेज: इसमें चेहरे पर करंट के साथ-साथ भयंकर आग लगने जैसी जलन Burning sensation होती है। चेहरे का वह हिस्सा लाल हो सकता है और ऐसा महसूस होता है जैसे त्वचा के अंदर तेज़ एसिड बह रहा हो। मसालेदार खाना खाने या धूप में जाने से यह दर्द ट्रिगर हो जाता है।
  • कफ-प्रधान नर्व डैमेज: इसमें दर्द बहुत तीखा न होकर एक लगातार बना रहने वाला भारीपन और मीठा-मीठा दर्द Dull, aching pain होता है। चेहरे पर हल्की सूजन आ सकती है और मरीज़ को हमेशा ऐसा लगता है जैसे उसका जबड़ा या गाल सुन्न पड़ा हुआ है।

क्या आपके चेहरे पर भी नसों के डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया रातों-रात नहीं होता। यह बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर दाँत या मसूड़ों का दर्द मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ

  • ट्रिगर पॉइंट्स पर संवेदनशीलता: चेहरे के कुछ खास हिस्सों जैसे नाक के पास, होंठ के ऊपर या गाल पर हल्का सा छूने पर भी अचानक तेज़ दर्द का उठना।
  • रोज़मर्रा के कामों में भयंकर दर्द: दाँत ब्रश करते समय, खाना चबाते समय, बात करते समय, यहाँ तक कि चेहरे पर मेकअप या क्रीम लगाते समय भी बिजली के झटके जैसा दर्द महसूस होना।
  • चेहरे का सुन्न पड़ना: दर्द के दौरे Attack के बाद गालों या जबड़े के हिस्से में ऐसा सुन्नपन आना जैसे एनेस्थीसिया Anesthesia दिया गया हो।
  • दर्द के डर से खाना-पीना छोड़ देना: दर्द का खौफ इतना बढ़ जाना कि मरीज़ खाना चबाना, पानी पीना और बोलना तक कम कर दे, जिसके कारण वज़न तेज़ी से गिरने लगे।

आयुर्वेद ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया और नसों के दर्द को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया कहता है, आयुर्वेद उसे अनंतवात Anantavata और वात दोष के मज्जा धातु क्षय Nervous tissue depletion के गंभीर प्रकोप से जोड़कर बहुत गहराई से समझता है।

  • मज्जा धातु Nervous Tissue का सूखना: गलत आहार-विहार, बहुत ज़्यादा ठंडा खाना, और अत्यधिक तनाव सीधे हमारी मज्जा धातु को सुखा देते हैं। मज्जा के सूखने से चेहरे की नसों के ऊपर की प्राकृतिक चिकनाई नष्ट हो जाती है।
  • वात का नसों Siras में प्रवेश: आयुर्वेद के अनुसार जब कुपित वात दोष गर्दन मन्या और सिर के पिछले हिस्से से होता हुआ चेहरे की नसों में प्रवेश करता है, तो वह भयंकर दर्द शूल पैदा करता है।
  • जठराग्नि की अनदेखी: जब कमज़ोर पाचन के कारण शरीर में आम Toxins बनता है, तो वह नसों के सूक्ष्म चैनलों Srotas को ब्लॉक कर देता है। इस रुकावट के कारण वात की गति उल्टी हो जाती है और वह नसों पर दबाव डालकर दर्द पैदा करता है।

नसों की खुश्की मिटाने और वात शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपकी नसों को सुखा भी सकता है और उन्हें दोबारा हरा-भरा भी कर सकता है। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के भयानक दर्द से बचने और नसों को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - नसों को चिकनाई देने वाले और वात शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रूखापन और गैस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, रागी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, रूखे बिस्कुट।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (नसों के लिए अमृत), तिल का तेल, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, बहुत अधिक मक्खन, डालडा।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद (सभी अच्छी तरह पकी और मुलायम)। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, कटहल, बैंगन, बहुत ठंडी चीज़ें।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, पपीता, सेब, एवोकाडो। डिब्बाबंद और ठंडे फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स, खट्टे फल।
पेय पदार्थ (Beverages) हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध (रात में), गुनगुना पानी, जीरा पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन (कॉफी नसों को सुखाती है), बर्फ वाला पानी, कोल्ड ड्रिंक्स।

नसों को ताकत देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना लिवर-किडनी को नुकसान पहुँचाए नसों के भयंकर दर्द को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी मायलिन शीथ Myelin sheath को रिपेयर करते हैं:

  • अश्वगंधा Ashwagandha: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने और तनाव को गिराने के लिए अश्वगंधा एक अद्भुत रसायन है। यह सूखी हुई नसों में भारी ताकत और ऊर्जा भर देता है।
  • जटामांसी Jatamansi: यह दिमाग और नसों की हाइपर-एक्टिविटी को तुरंत शांत करती है। यह नसों को ठंडक देकर करंट वाले दर्द Shooting pain के दौरों को कम करने में जादुई काम करती है।
  • ब्राह्मी Brahmi: जब दिमाग की नसें दर्द के कारण भारी और सुन्न होने लगती हैं, तो ब्राह्मी नर्वस सिस्टम को जादुई शांति और फौलादी मज़बूती प्रदान करती है।
  • शल्लकी Shallaki: शरीर के अंदरूनी सूजन Inflammation को जड़ से खत्म करने के लिए शल्लकी बेहतरीन काम करती है, जिससे दबी हुई नस पर दबाव घटता है।
  • दशमूल Dashamoola: वात दोष को शरीर से बाहर निकालने और नसों की खुश्की को तुरंत मिटाने के लिए दशमूल का काढ़ा ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के मरीज़ों के लिए अमृत समान है।

नसों को खोलने और दर्द मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और जकड़न बहुत गहराई तक चेहरे और सिर की नसों में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • नस्य Nasya: आयुर्वेद में नासा हि शिरसो द्वारम् नाक सिर का दरवाज़ा है कहा गया है। नाक के ज़रिए वात-शामक औषधीय तेल डालने की यह नस्य थेरेपी सीधे दिमाग और ट्राइजेमिनल नस तक पहुँचकर रुकावट खोलती है और दर्द के झटकों को तुरंत रोकती है।
  • शिरोधारा Shirodhara: माथे पर लगातार गुनगुने औषधीय तेल की धारा गिराने से नर्वस सिस्टम का सारा तनाव छूमंतर हो जाता है। यह मज्जा धातु को गहराई से पोषण देती है।
  • मुखाभ्यंग Mukhabhyanga: चेहरे पर हल्के हाथों से क्षीरबला या महानारायण तेल की मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ता है और चेहरे की सूखी नसें दोबारा चिकनी होने लगती हैं।
  • ग्रीवा बस्ती Greeva Basti: गर्दन के पीछे गर्म औषधीय तेल रोककर की जाने वाली यह थेरेपी गर्दन से सिर की तरफ जाने वाली नसों की जकड़न को खत्म करती है।

नसों के पूरी तरह रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

लंबे समय से डैमेज हो रही ट्राइजेमिनल नस को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और नस्य से आपका वात दोष शांत होने लगेगा। दर्द के दौरों Attacks की तीव्रता और फ्रीक्वेंसी Frequency में कमी आएगी। आप आराम से सो पाएंगे।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होने लगेगा। चेहरे पर करंट लगने जैसा अहसास काफी हद तक खत्म हो जाएगा और आप बिना डरे खाना चबा सकेंगे।
  • 5-6 महीने: मज्जा धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी और आपका नर्वस सिस्टम रीबूट हो जाएगा। आप बिना किसी मिर्गी की दवा या पेनकिलर के एक सामान्य, ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया और नसों के डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दिमाग तक जाने वाले दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए मिर्गी की गोलियाँ (जैसे Carbamazepine) देना। वात को शांत करना, जठराग्नि सुधारना और दिमाग व नसों को प्राकृतिक रूप से पोषण (Lubrication) देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक नस (Trigeminal) के डैमेज की स्थानीय (Local) समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और 'मज्जा धातु' के सूखने का एक संपूर्ण न्यूरोलॉजिकल सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल दवाओं के साथ सर्जरी (MVD) की सलाह, लेकिन वात-पित्त संतुलन या पाचन पर कोई खास ज़ोर नहीं। वात-शामक डाइट, ठंडी हवा से बचाव, कब्ज़ दूर करना और नस्य/शिरोधारा को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर करंट जैसा दर्द तुरंत वापस आ जाता है और सर्जरी के बाद चेहरे के लकवे का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और नर्वस सिस्टम खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद नसों की इस खुश्की और दर्द को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • चेहरे का लकवाग्रस्त होना: अगर दर्द के साथ आपका चेहरा एक तरफ टेढ़ा होने लगे या आँख बंद करने में असमर्थता महसूस हो।
  • अत्यधिक वज़न घटना: दर्द के डर से जब आप कई दिनों तक खाना-पीना पूरी तरह छोड़ दें और डिहाइड्रेशन या कमज़ोरी बहुत बढ़ जाए।
  • आँखों की रोशनी पर असर: अगर दर्द के साथ-साथ आपको धुंधला दिखाई देने लगे या आँखों के पीछे भयंकर दबाव महसूस हो।
  • गहरे डिप्रेशन के लक्षण: दर्द बर्दाश्त से बाहर होने पर अगर मन में लगातार नकारात्मक या आत्महत्या जैसे विचार आने लगें।

निष्कर्ष

मुस्कुराना, बात करना या खाना चबाना कोई सज़ा नहीं है, लेकिन ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया इन खूबसूरत पलों को एक खौफनाक दर्द में बदल देता है। चेहरे पर होने वाला यह करंट जैसा दर्द महज़ एक इत्तेफाक नहीं है; यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका वात दोष भड़क चुका है, मज्जा धातु सूख रही है और आपकी सबसे नाज़ुक नस भारी दबाव में दम तोड़ रही है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना भारी पेनकिलर्स और मिर्गी की कृत्रिम गोलियों से दबाते हैं, तो आप अपनी नसों को हील करने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से कमज़ोर कर रहे होते हैं। दर्द के इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने खान-पान को सुधारें, ठंडी हवाओं से चेहरे को बचाएं और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी शामिल करें। अश्वगंधा, जटामांसी और ब्राह्मी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और नस्य व शिरोधारा से अपनी सूखी हुई नसों को प्राकृतिक रूप से नया जीवन दें। इस दर्द के कारण अपनी मुस्कान न खोएं, अपने नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

दाँत का दर्द लगातार बना रहता है और आमतौर पर मीठा या चुभने वाला होता है। इसके विपरीत, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का दर्द अचानक बिजली के झटके (Electric shock) जैसा आता है, कुछ सेकंड या मिनट रहता है और चला जाता है। यह अक्सर चेहरा धोने या हवा लगने से ट्रिगर होता है।

जी हाँ। आयुर्वेद के अनुसार अगर बीमारी के मूल कारण (वात दोष और मज्जा धातु का सूखना) पर सही औषधियों, नस्य और आयुर्वेदिक डाइट के माध्यम से काम किया जाए, तो बिना ब्रेन सर्जरी के भी इस दर्द को स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।

बिल्कुल। ठंडी हवा और एसी शरीर में वात दोष (रूखेपन) को तुरंत भड़काते हैं। यह चेहरे की नसों को सिकोड़ देता है, जिससे ट्राइजेमिनल नस में रक्त संचार कम होता है और दर्द का अटैक तुरंत आ सकता है।

कभी नहीं! यह सबसे आम गलती है जो मरीज़ करते हैं। दर्द जबड़े में महसूस होता है लेकिन इसका कारण दाँत नहीं बल्कि ट्राइजेमिनल नस का डैमेज होना है। स्वस्थ दाँत उखड़वाने से दर्द में कोई आराम नहीं मिलेगा।

नाक को आयुर्वेद में सिर का प्रवेश द्वार माना गया है। नस्य थेरेपी में नाक के ज़रिए औषधीय तेल डाला जाता है जो सीधे दिमाग और ट्राइजेमिनल नर्व तक पहुँचकर वात को शांत करता है, नस की खुश्की दूर करता है और नसों के फाइबर्स का आपस में टकराना रोकता है।

हाँ, मानसिक तनाव सीधे आपके नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है और शरीर में वात दोष बढ़ाता है। तनाव के कारण नसें और ज़्यादा संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे दर्द के झटके ज़्यादा और तेज़ आते हैं।

आपको वात-शामक, गर्म, ताज़ा और आसानी से पचने वाला भोजन खाना चाहिए। सूखी, ठंडी, बासी और बहुत मसालेदार चीज़ों से बचें। भोजन में शुद्ध गाय का घी ज़रूर शामिल करें, यह नसों को प्राकृतिक चिकनाई देता है।

अश्वगंधा पेनकिलर की तरह दर्द को सुन्न नहीं करता। यह एक बल्य और रसायन है, जो सूखी हुई नसों को गहराई से पोषण देता है, अंदरूनी सूजन कम करता है और नसों को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाकर दर्द को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।

अगर मालिश करने से दर्द ट्रिगर नहीं हो रहा है, तो आप वात-शामक तेल (जैसे क्षीरबला तेल) से बहुत ही हल्के हाथों से चेहरे की मालिश कर सकते हैं। लेकिन अगर छूने मात्र से दर्द होता है, तो मालिश से बचें और डॉक्टर की सलाह से नस्य या शिरोधारा लें।

आधुनिक चिकित्सा में दी जाने वाली एंटी-कन्वल्सेंट (Anti-convulsants) दवाइयाँ नसों को सुन्न करती हैं। लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से चक्कर आना, सुस्ती, लिवर की कमज़ोरी, याददाश्त में कमी और सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

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