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Travelling में पेट खराब क्यों? Travel -IBS का आयुर्वेदिक उपाय

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

कई लोगों के लिए यात्रा (Travel) का नाम सुनते ही रोमांच, नई जगहें, नए अनुभव और खूबसूरत यादें दिमाग में आने लगती हैं। लेकिन, हम में से कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए सफर पर निकलने का मतलब होता है पेट दर्द, गैस, दस्त, कब्ज़ या बार-बार वॉशरूम जाने का डर!

दिलचस्प बात यह है कि अक्सर यात्रा शुरू होते ही, या टिकट बुक करने के बाद से ही, हमारे पाचन तंत्र का संतुलन बिगड़ने लगता है। ज़्यादातर लोग इसे "रास्ते का कुछ उल्टा-सीधा खा लिया होगा" मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। जबकि इसके पीछे आपके शरीर और मन, दोनों की बहुत गहरी भूमिका होती है। मेडिकल और आयुर्वेद की भाषा में कई बार इस स्थिति को Travel-IBS के रूप में देखा जाता है।

Travel-IBS क्या है?

Travel-IBS उस स्थिति को कहते हैं जब यात्रा के दौरान या उसके तुरंत बाद पेट में अचानक गड़बड़ी शुरू हो जाती है। दर्द, ऐंठन, बार-बार शौच जाना या कब्ज  यह सब उन लोगों में भी हो सकता है जिनका पाचन तंत्र आमतौर पर बिल्कुल ठीक रहता है। दरअसल यात्रा के दौरान खानपान बदलना, नींद का अनियमित होना, तनाव और शरीर की दिनचर्या का बिगड़ना पाचन तंत्र को सीधे प्रभावित करता है। 

इसमें व्यक्ति को कुछ इस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं:

कुछ लोगों में ये लक्षण केवल ट्रिप के दौरान रहते हैं, जबकि कुछ में घर वापस आने के कई दिनों बाद तक बने रहते हैं।

यात्रा के दौरान पेट क्यों बिगड़ जाता है?

सफर आपके शरीर के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव (Change) है। आपका शरीर अपनी एक फिक्स और नियमित दिनचर्या के आदी होता है। जब अचानक जगह, माहौल और रूटीन बदलता है, तो आपका पाचन तंत्र सबसे पहले शॉक में आता है। इसके मुख्य कारण हैं:

  • भोजन करने के समय में अचानक बदलाव।
  • अलग-अलग जगहों के पानी का स्रोत बदलना।
  • सफर के दौरान नींद पूरी न हो पाना
  • ट्रेन या फ्लाइट पकड़ने का तनाव (Stress)।
  • कार या बस में घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना।
  • घर के सादे खाने की जगह बाहर का तला-भुना खाना।

इन सभी चीज़ों का सीधा और तुरंत असर हमारी आंतों (Intestines) की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।

Stress और Gut Connection: दिमाग का पेट पर असर

आधुनिक विज्ञान अब यह पूरी तरह स्वीकार करता है कि हमारे दिमाग और हमारी आंतों के बीच एक सीधा 'हाईवे' है, जिसे 'Gut-Brain Axis' कहा जाता है। जब आप यात्रा को लेकर तनाव में होते हैं (जैसे फ्लाइट छूटने का डर, पैकिंग की टेंशन या नई जगह का प्रेशर), तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन तेज़ी से बढ़ जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप या तो आंतों की गति बहुत तेज़ हो जाती है (जिससे दस्त लग जाते हैं), या गति बिल्कुल धीमी पड़ जाती है (जिससे हो जाती है)। इसीलिए कई लोगों का पेट सफर शुरू होने से पहले ही खराब हो जाता है।

बदलता भोजन और पानी की चुनौती

अक्सर लोग कहते हैं कि "मुझे वहां का पानी सूट नहीं किया।" इस बात में सौ प्रतिशत सच्चाई है। अलग-अलग शहरों या जगहों पर पानी की मिनरल बनावट और बैक्टीरिया का वातावरण अलग होता है। संवेदनशील पेट वाले लोगों में पानी बदलते ही गैस, दस्त और पेट दर्द शुरू हो जाता है।

इसके अलावा, सफर में हम अक्सर पैकेट वाले स्नैक्स, फास्ट फूड और ज़्यादा मसालेदार खाना खाते हैं। ये चीज़ें पेट की 'पाचन अग्नि' पर भारी दबाव डालती हैं। जब अग्नि कमज़ोर होती है, तो खाना पचता नहीं है और पेट में 'आम' (Toxins/ज़हर) बनने लगता है।

आयुर्वेद की नज़र में Travel-IBS और वात दोष

आयुर्वेद के अनुसार यात्रा शरीर में वात दोष को सबसे ज़्यादा बढ़ाती है। वात का स्वभाव ही गति, सूखापन और अस्थिरता है। जब हम लंबे समय तक गाड़ी, ट्रेन या हवाई जहाज़ में बैठे रहते हैं तो शरीर को लगातार हिलना-डुलना झेलना पड़ता है जिससे वात भड़क जाता है। जब वात बढ़ता है तो आँतों की नमी सूखने लगती है और पाचन तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है। इसी वजह से यात्रा के दौरान या बाद में पेट में गैस, फुलाव, गुड़गुड़ाहट, कब्ज़ और बेचैनी जैसी तकलीफें शुरू हो जाती हैं। इसीलिए आयुर्वेद में यात्रा के दौरान वात को शांत रखने पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है। जब वात संतुलित रहेगा तो पाचन तंत्र भी सही काम करेगा और यात्रा की तकलीफें कम होंगी।

यात्रा के दौरान पेट को शांत रखने वाले आयुर्वेदिक उपाय

अपने सफर के बैग में यह छोटी-छोटी चीज़ें ज़रूर रखें। यह किसी भी दवाई से ज़्यादा असरदार हैं और पूरी तरह प्राकृतिक भी हैं।

  • सौंफ: सफर में खाना खाने के बाद आधा चम्मच सौंफ ज़रूर चबाएँ। यह गैस कम करती है, पेट को ठंडक देती है और पाचन को दुरुस्त रखती है।
  • अगर सफर में उल्टी या मतली महसूस हो तो अदरक का एक छोटा टुकड़ा मुँह में रखकर चूसते रहें। यह पाचन को मज़बूत रखता है और जी मिचलाने की तकलीफ तुरंत कम करता है।
  • जीरा और अजवाइन: पेट में भारीपन या दर्द होने पर थोड़ा सा भुना जीरा और अजवाइन गुनगुने पानी के साथ लें। यह फँसी हुई गैस को तुरंत बाहर निकाल देता है और पेट को हल्का करता है।
  • हींग: सफर के दौरान पेट में ऐंठन या गुड़गुड़ाहट हो तो थोड़ी सी हींग गुनगुने पानी में मिलाकर पिएँ। यह वात को तुरंत शांत करती है और पेट दर्द में बहुत जल्दी राहत देती है।

पेट की तकलीफ के लिए आयुर्वेदिक औषधियाँ

यात्रा के दौरान पेट की गड़बड़ी से बचने के लिए कुछ आयुर्वेदिक औषधियाँ हैं जो छोटी और आसानी से साथ ले जाने वाली हैं। इन्हें अपने सफर के बैग में ज़रूर रखें लेकिन किसी भी औषधि को लेने से पहले एक बार आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

  • हिंग्वाष्टक चूर्ण: यात्रा के दौरान गैस, पेट फूलना और पेट दर्द में यह सबसे असरदार चूर्ण माना जाता है। खाने से पहले थोड़ा सा घी में मिलाकर लेने से पाचन अग्नि तुरंत जागती है और वात शांत होता है।
  • त्रिफला चूर्ण: यात्रा के दौरान कब्ज़ की समस्या बहुत आम है। रात को गर्म पानी के साथ त्रिफला लेने से आँतें साफ रहती हैं और पाचन दुरुस्त बना रहता है।
  • अविपत्तिकर चूर्ण: यात्रा के दौरान बाहर का खाना खाने से एसिडिटी और जलन की समस्या हो जाती है। यह चूर्ण पित्त को शांत करता है और पेट की जलन में तुरंत राहत देता है।
  • लवण भास्कर चूर्ण: पेट में भारीपन, अपच और खाना न पचने की समस्या में यह बहुत असरदार है। यह पाचन अग्नि को मज़बूत करता है और खाने को सही तरह पचाने में मदद करता है।

यात्रा से पहले और बाद में अपनाएँ यह आयुर्वेदिक थेरेपीज़

अगर आप अक्सर यात्रा करते हैं और हर बार पेट की गड़बड़ी से परेशान होते हैं तो आयुर्वेद की कुछ थेरेपीज़ आपके पाचन तंत्र को अंदर से मज़बूत बना सकती हैं। यह थेरेपीज़ शरीर में वात को संतुलित करती हैं और पाचन अग्नि को दुरुस्त रखती हैं।

  • अभ्यंग (गुनगुने तेल की मालिश): सफर पर निकलने से ठीक पहले, अपने पूरे शरीर पर हल्के गुनगुने तिल के तेल से मालिश करें। यह कोई आम मालिश नहीं है; यह आपके शरीर में भड़कने वाले वात को पहले ही शांत कर देती है। इससे आपका शरीर यात्रा के झटकों के लिए तैयार हो जाता है और आपका पेट रास्ते भर एकदम सेट रहता है। लंबी ट्रिप पर जाने से पहले इसे आज़माकर ज़रूर देखें।
  • स्वेदन (हर्बल स्टीम बाथ): ट्रिप से लौटकर शरीर ऐसा लगता है जैसे टूट गया हो। इस भयंकर थकान और शरीर में भर चुकी एक्स्ट्रा हवा (वात) को बाहर निकालने के लिए जड़ी-बूटियों वाली हल्की भाप (हर्बल स्टीम) से बेहतर कुछ नहीं है। यह शरीर की जकड़न को खोलकर उसे एकदम हल्का कर देती है और आपके सुस्त पड़े पाचन तंत्र को दोबारा जगा देती है।
  • विरेचन (बॉडी डिटॉक्स/शोधन): सफर में हम सब बाहर का उल्टा-सीधा, तला-भुना और अनहेल्दी खाना खा ही लेते हैं। ऐसे में आंतों में गंदगी (Toxins) जमा हो जाना आम बात है। ट्रिप के बाद विरेचन थेरेपी शरीर की एक डीप-क्लीनिंग (अंदरूनी सफाई) का काम करती है। यह आपकी पाचन अग्नि को फिर से मज़बूत बनाती है और पेट से जुड़ी तमाम तकलीफों को जड़ से उखाड़ फेंकती है।

सफर में क्या खाएं और क्या न खाएं? (Travel Diet)

क्या खाएं (पेट को शांत रखने वाले) क्या न खाएं (वात और गैस बढ़ाने वाले)
मूंग की दाल और हल्की खिचड़ी। अत्यधिक तला-भुना और मसालेदार खाना।
ताज़े केले (दस्त रोकने और एनर्जी के लिए)। कोल्ड ड्रिंक्स और कार्बोनेटेड पानी।
सादा दही या ताज़ी छाछ। बहुत अधिक कॉफी या कड़क चाय।
नारियल पानी और हल्का गुनगुना पानी। अत्यधिक पैकेज्ड स्नैक्स (चिप्स, नमकीन)।
अच्छे से पका हुआ, गर्म और हल्का भोजन। कच्चा या खुला रखा हुआ भारी भोजन।

यात्रा के दौरान Hydration का महत्व

यात्रा के दौरान पानी की कमी कब्ज़ और पाचन की तकलीफों को कई गुना बढ़ा देती है। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता तो आँतें सूखने लगती हैं और वात और भी ज़्यादा बढ़ जाता है। इसीलिए सफर में प्यास लगने का इंतज़ार न करें बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। गुनगुना या सामान्य पानी ठंडे पानी से ज़्यादा फायदेमंद है।

सादे पानी के साथ-साथ नारियल पानी या भुने जीरे वाली छाछ पीने से शरीर को ज़रूरी खनिज मिलते हैं और पाचन दुरुस्त रहता है। वहीं बार-बार चाय और कॉफी पीने से बचें क्योंकि यह शरीर को अंदर से सुखा देती हैं और वात को और भड़का देती हैं। बाज़ार के ठंडे मीठे पेय और सोडा भी पाचन बिगाड़ते हैं, इसलिए इनसे दूरी बनाना ही बेहतर है।

निष्कर्ष

यात्रा के दौरान पेट का खराब होना महज़ कोई इत्तेफाक नहीं है। यह आपकी बदलती दिनचर्या, तनाव, बाहर के पानी-भोजन और नींद की कमी का सीधा रिएक्शन है। आयुर्वेद इसे मुख्य रूप से बढ़े हुए 'वात दोष' और कमज़ोर 'पाचन अग्नि' से जोड़कर देखता है। 

अगर आप ट्रिप पर जाने से पहले अपनी नींद पूरी करते हैं, सफर में हल्का व सुपाच्य भोजन लेते हैं, शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं और वात को शांत रखने वाले आयुर्वेदिक नुस्खे (जैसे अजवाइन, सौंफ) अपनाते हैं, तो आप Travel-IBS जैसी परेशानी से काफी हद तक बच सकते हैं। याद रखिए, जब आपका पाचन खुश रहता है, तो आपकी यात्रा का आनंद अपने आप कई गुना बढ़ जाता है!

References

 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

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