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त्रिफला - बवासॶर खत्म करने की गुणकारी औषधि

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

बवासॶर रोग गुदा क्षेत्र में जलन पैदा करता है। दर्द, खून का आना और खुजली इसके सामान्य लक्षण है। यह एक आम बीमारी है और अक्सर पाचन तंत्र के अनुचित तरीके से काम करने, गर्भावस्था, मोटापे या अत्यधिक वजन उठाने से होती है।

बवासॶर (Piles या Haemorrhoids) एक आम लेकिन कष्टप्रद समस्या है जो गुदा क्षेत्र में जलन, दर्द और रक्तस्राव पैदा करती है। यह समस्या अक्सर कब्ज (Constipation), गलत आहार, अधिक वजन उठाने, गर्भावस्था या जीवनशैली में गड़बड़ी के कारण होती है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह रक्तहीनता (Anaemia) और गंभीर मामलों में कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है।

आयुर्वेद में बवासॶर का इलाज प्राकृतिक और दीर्घकालिक लाभ देने वाला माना जाता है। इसमें त्रिफला चूरन (Triphala Powder) को सबसे प्रभावशाली औषधि माना गया है। यह न केवल बवासॶर के दर्द और सूजन को कम करता है, बल्कि कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को भी सुधारता है।

बवासॶर के लक्षण

बवासॶर के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग हो सकते हैं। सामान्यत: ये लक्षण शामिल हैं:

  • मलत्याग के दौरान रक्तस्राव (Bleeding during bowel movement)
  • मलत्याग में कठिनाई और दर्द (Painful bowel movements)
  • गुदा क्षेत्र में जलन और खुजली (Burning sensation and itching)
  • कब्ज और पेट की गड़बड़ी (Constipation)
  • बवासॶर के लंबे समय तक untreated रहने पर रक्तहीनता (Anaemia)

बवासॶर आंतरिक (Internal) या बाहरी (External) हो सकता है। आंतरिक बवासॶर गुदा के अंदर होता है और अक्सर रक्तस्राव के रूप में दिखाई देता है, जबकि बाहरी बवासॶर गुदा क्षेत्र के बाहर सूजन और दर्द पैदा करता है।

बवासॶर के मुख्य कारण

बवासॶर के लिए मुख्य कारण हैं:

  1. कब्ज और पाचन दोष – पाचन सही न होने से मल कड़ा हो जाता है, जिससे गुदा में दबाव बढ़ता है।
  2. गलत खान-पान – तैलीय, मसालेदार, processed और जंक फूड कब्ज और बवासॶर को बढ़ावा देता है।
  3. अत्यधिक बैठना या भारी वजन उठाना – लंबे समय तक बैठने या भारी वजन उठाने से गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव पड़ता है।
  4. गर्भावस्था – गर्भावस्था में बढ़े हुए दबाव और हार्मोनल बदलाव के कारण बवासॶर आम है।
  5. तनाव और जीवनशैली – अधिक तनाव, नींद की कमी और व्यायाम का अभाव पाचन को कमजोर करता है।

त्रिफला – पाइल्स में क्यों है गुणकारी

त्रिफला (Triphala) आयुर्वेद की एक बहुपयोगी जड़ी-बूटी है, जिसमें तीन मुख्य फलों का मिश्रण होता है:

  1. हरितकी (Haritaki)
  2. बिभीतकी (Bibhitaki)
  3. आंवला (Amla)

त्रिफला का पाउडर कब्ज, सूजन और बवासॶर के दर्द में बेहद प्रभावशाली है। इसके लाभ इस प्रकार हैं:

  • मल को नरम बनाना – कब्ज कम होती है और मल आसानी से बाहर आता है, जिससे जलन और दर्द कम होता है।
  • रक्त जमाव कम करना – नसों में खून का असामान्य जमाव घटाता है।
  • नसों को लचीला बनाना – गुदा और गुदाशय की नसों को मजबूत और लचीला बनाता है, जिससे रक्तस्राव नियंत्रित होता है।
  • मल संचार नियमित करना – नियमित मलत्याग से बवासॶर की समस्या कम होती है।
  • अनवांछित आदत नहीं डालना – इसे इस्तेमाल करने के बाद शरीर इसकी आदत में नहीं पड़ता।

त्रिफला चूरन अन्य लैक्सेटिव की तुलना में सुरक्षित है और लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

त्रिफला का इस्तेमाल कैसे करें

  • दैनिक सेवन: 1–2 चम्मच त्रिफला चूरन को गुनगुने पानी या दूध में मिलाकर सोने से पहले लें।
  • सावधानॶ: गर्भवती महिलाएं और मधुमेह रोगी इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • समय और नियमितता: इसे नियमित रूप से लेना आवश्यक है ताकि मल नरम रहे और बवासॶर में राहत मिल सके।

आयुर्वेदिक तरीके से बवासॶर का इलाज

  1. पाचन सुधारें – हल्का और easily digestible भोजन लें, जैसे खिचड़ी, दलिया, और उबली सब्जियाँ।
  2. हर्बल चाय और जूस – अदरक की चाय, नींबू पानी और एलोवेरा जूस पाचन शक्ति बढ़ाते हैं।
  3. सिट्ज़ बाथ – गुनगुने पानी में 10–15 मिनट बैठना जलन और दर्द को कम करता है।
  4. योग और हल्की एक्सरसाइज – हल्की कसरत और योग नसों में रक्त संचार बढ़ाते हैं।
  5. अवश्यक जड़ी-बूटियाँ – Triphala, Neem, Aloe Vera और Amla।

बवासॶर से बचने के टिप्स

  • समय पर भोजन करें और over-eating से बचें।
  • जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक मसालेदार भोजन से बचें।
  • अधिक पानी पिएँ और उच्च फाइबर वाले आहार का सेवन करें।
  • नियमित व्यायाम और योग करें।
  • लंबे समय तक बैठने या भारी वजन उठाने से बचें।

References

FAQs

  1. बवासॶर क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?
    बवासॶर गुदा क्षेत्र में सूजन और नसों के फैलने से होता है। इसके लक्षण हैं जलन, दर्द और मलत्याग में रक्तस्राव।
  2. त्रिफला बवासॶर में कैसे मदद करता है?
    यह मल को नरम करता है, रक्तस्राव कम करता है और नसों को लचीला बनाता है।
  3. बवासॶर के कितने प्रकार होते हैं?
    यह आंतरिक (Internal) और बाहरी (External) दोनों प्रकार का हो सकता है।
  4. त्रिफला का इस्तेमाल कैसे करें?
    रात को सोने से पहले 1–2 चम्मच त्रिफला चूरन गुनगुने पानी या दूध में मिलाकर लें।
  5. बवासॶर होने पर क्या खाएं और क्या न खाएं?
    हल्का, easily digestible भोजन खाएं; ठंडा, जंक और processed food न खाएं।
  6. कब्ज और बवासॶर में क्या संबंध है?
    कब्ज के कारण मल कड़ा हो जाता है और गुदा में दबाव बढ़ता है, जिससे बवासॶर की संभावना बढ़ती है।
  7. सिट्ज़ बाथ कितना प्रभावी है?
    गुनगुने पानी में बैठने से जलन और दर्द कम होता है और सूजन घटती है।
  8. बवासॶर में योग कैसे मदद करता है?
    हल्की एक्सरसाइज और योग रक्त संचार बढ़ाते हैं और नसों को मजबूत बनाते हैं।
  9. क्या त्रिफला का लंबे समय तक इस्तेमाल सुरक्षित है?
    हाँ, यह आयुर्वेदिक रूप से सुरक्षित है और लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
  10. गर्भवती महिलाएं त्रिफला ले सकती हैं?
    गर्भवती महिलाएं इसे लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

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