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Teachers में Voice Loss, Varicose Veins — Long Standing का असर

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

कक्षा में बच्चों को शांत कराना, लगातार ब्लैकबोर्ड के पास खड़े रहकर समझाना और ज़ोर-ज़ोर से बोलना एक शिक्षक की दिनचर्या सुनने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन शरीर पर इसका प्रभाव बेहद गहरा होता है हर दिन घंटों तक एक ही स्थिति में खड़े रहने और बिना रुके बोलने से शरीर का संतुलन  बिगड़ने लगता है

शाम तक पैरों में नीली-हरी नसों का उभरना, भारीपन और गले से आवाज़ का न निकलना केवल दिन भर की थकान नहीं है। यह शरीर की उन नाड़ियों और मांसपेशियों का अलार्म है जो लगातार पड़ने वाले अत्यधिक दबाव के कारण अपनी ताकत खो रही हैं

लगातार खड़े रहने और बोलने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं?

एक शिक्षक के रूप में आपकी नौकरी शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर अत्यधिक ऊर्जा की मांग करती है जब आप लगातार बैठे रहने की बजाय पूरे दिन सिर्फ खड़े रहते हैं और ज़ोर से बोलते हैं, तो शरीर इन समस्याओं का शिकार होने लगता है

  • गुरुत्वाकर्षण के कारण पैरों की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे रक्त को वापस हृदय तक ले जाने वाले वाल्व कमज़ोर हो जाते हैं
  • ज़ोर से और बिना रुके बोलने से वोकल कॉर्ड्स पर भयंकर घर्षण होता है, जिससे गले की नसें सूखने लगती हैं और सूखी खाँसी की समस्या पैदा होती है
  • घंटों तक एक ही जगह खड़े रहने से शरीर का वात दोष असंतुलित हो जाता है, जो पिंडलियों में दर्द और पैरों में ऐंठन Cramps का कारण बनता है
  • काम के मानसिक तनाव और शारीरिक थकान के कारण शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा ओजस तेज़ी से घटने लगती है, जिससे आपको शाम तक क्रोनिक फटीग महसूस होती है

शिक्षकों में होने वाली ये परेशानियाँ किन प्रकारों की हो सकती हैं?

लगातार खड़े रहने और आवाज़ का अत्यधिक इस्तेमाल करने से होने वाली परेशानियां हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होतीं। दबाव और शरीर की प्रकृति के आधार पर इन्हें मुख्य रूप से इन श्रेणियों में देखा जा सकता है-

  • Varicose Veins- पैरों में मुड़ी हुई, नीली या बैंगनी रंग की नसें जो त्वचा की सतह पर साफ दिखाई देती हैं और जिनमें अक्सर सूजन रहती है
  • वोकल नोड्यूल्स Vocal Nodules- वोकल कॉर्ड्स पर लगातार दबाव के कारण छोटे-छोटे दाने या छाले बन जाना, जिससे आवाज़ हमेशा के लिए भारी या बैठ जाती है
  • लैरिंगाइटिस Laryngitis- गले के वॉयस बॉक्स  में सूजन आ जाना, जिसके कारण बोलते समय गले में भयंकर दर्द और गले में खराश  होती है।
  • प्लांटर फैसिआइटिस Plantar Fasciitis- लंबे समय तक खड़े रहने से एड़ी और तलवे के बीच मौजूद ऊतकों में सूजन आ जाना, जिससे सुबह उठते ही पैरों में तेज़ दर्द होता है।

कैसे पहचानें कि आपको वैरिकोज़ वेन्स या वॉइस लॉस की गंभीर समस्या हो रही है?

शुरुआत में ये लक्षण केवल रोज़मर्रा की थकान लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ शरीर स्पष्ट संकेत देने लगता है। अगर आप रोज़ाना इन संकेतों का अनुभव कर रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है-

  • शाम होते-होते पैरों और टखनों में असहनीय भारीपन और सूजन महसूस होना।
  • पैरों की त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसी नीली या लाल नसें उभर आना, जिनमें कभी-कभी खुजली या जलन होती है।
  • कक्षा में थोड़ी देर बोलने के बाद ही गले में दर्द होना या आवाज़ का फुसफुसाहट में बदल जाना।
  • रात को सोते समय पिंडलियों में अचानक से मांसपेशियों में ऐंठन आना, जिसके कारण आपकी नींद टूट जाती है।

इस परेशानी में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

थकान और समय की कमी के कारण अक्सर लोग ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर के लिए आगे चलकर बड़ी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और नसों की हमेशा के लिए कमज़ोरी का कारण बनते हैं-

  • पैरों में कसकर पट्टी या क्रैप बैंडेज बांधना- बिना डॉक्टरी सलाह के बहुत टाइट बैंडेज बांधने से रक्त संचार और भी ज़्यादा बाधित हो जाता है
  • गले की खराश के लिए बार-बार कफ सिरप पीना- कैमिकल युक्त सिरप केवल लक्षणों को दबाते हैं, जबकि वोकल कॉर्ड्स का रूखापन जस का तस रहता है।
  • दर्द कम करने के लिए रोज़ पेनकिलर्स लेना- हर शाम पैरों के दर्द के लिए गोलियां खाने से लिवर पर बुरा असर पड़ता है और शरीर की पाचन शक्ति Digestion कमज़ोर हो जाती है।
  • लगातार नज़रअंदाज़ करना- वैरिकोज़ वेन्स का सही इलाज न होने पर नसों में खून के थक्के Blood clots बन सकते हैं और वोकल नोड्यूल्स के बिगड़ने पर सर्जरी की नौबत आ सकती है।

आयुर्वेद इस लॉन्ग स्टैंडिंग और आवाज़ खोने के विज्ञान को कैसे समझता है?

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के निचले हिस्से और गले में होने वाली ये समस्याएं केवल नसों या मांसपेशियों का थकना नहीं हैं, बल्कि यह वात दोष Vata Dosha और विशेषकर उदान वात की भयंकर विकृति का परिणाम है-

  • व्यान वात की रुकावट- पूरे शरीर में रक्त का संचार व्यान वात करता है। लगातार खड़े रहने से पैरों में यह वात ब्लॉक हो जाता है, जिससे पैरों में झनझनाहट Tingling sensation होती है और नसें फूलने लगती हैं।
  • उदान वात का क्षय- गले और छाती की ऊर्जा को उदान वात कहते हैं। अत्यधिक बोलने से यह वात अपनी ताक़त खो देता है, जिससे कंठ सूख जाता है और आवाज़ बैठ जाती है।
  • रक्त धातु का दूषित होना- पैरों में रुका हुआ खून जब वापस हृदय तक नहीं जा पाता, तो वह दूषित होकर नसों को फुला देता है और वैरिकोज़ वेन्स का रूप ले लेता है।
  • कफ का सूखना- गले में आवाज़ को सुचारू रखने के लिए तर्पक कफ प्राकृतिक चिकनाई की ज़रूरत होती है। अत्यधिक वात बढ़ने से यह कफ सूख जाता है।

नसों और गले को प्राकृतिक रूप से साफ करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने शरीर को अंदर से रिपेयर करने के लिए आपको अपने खानपान में ऐसे बदलाव करने होंगे जो वात को शांत करें और नसों में रक्त प्रवाह को आसान बनाएं। इस डाइट को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं-

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - नसों को ताक़त देने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - वात बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, जौ। मैदा, वाइट ब्रेड, सूखे बिस्कुट, पैकेटबंद नमकीन।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी गले और नसों के लिए सबसे बड़ा अमृत, ऑलिव ऑयल। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा रूखा और बिना तेल-घी का खाना।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, पालक सभी अच्छी तरह पकी और घी में छौंकी हुई। कच्चा सलाद विशेषकर रात में, कटहल, बैंगन, बहुत अधिक आलू।
फल Fruits मुनक्का, पपीता, अनार, उबला हुआ सेब Stewed Apple। कच्चे या ठंडे फल, बर्फ में रखे तरबूज़ या खरबूज़े।
पेय पदार्थ Beverages गुनगुना पानी, मुलेठी की चाय, रात को हल्दी वाला दूध घी के साथ। बर्फ का ठंडा पानी, बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स।

नसों को रीबूट करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वैरिकोज़ वेन्स और गले की जकड़न बहुत पुरानी हो जाए, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत आराम पहुँचाती हैं और रक्त संचार को सुधारती हैं-

  • अभ्यंग मालिश Abhyanga Massage- औषधीय तेलों जैसे महानारायण तेल या क्षीरबला तेल से हल्के हाथों से पैरों की ऊपर की ओर मालिश करने से ब्लॉक हुआ रक्त वापस हृदय की ओर जाने लगता है और दर्द तुरंत खत्म होता है।
  • नस्य ट्रीटमेंट Nasya Treatment- गले की आवाज़ वापस लाने के लिए नाक के ज़रिए औषधीय तेल या घी की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यह सीधे वोकल कॉर्ड्स और गले की नसों को चिकनाई देकर आवाज़ को मधुर बनाता है।
  • सिरा वेध Raktamokshana- वैरिकोज़ वेन्स की अत्यंत गंभीर स्थिति में, जहाँ अशुद्ध खून जमा हो गया हो, वहां विशेष जोंक या सिरा वेध के माध्यम से उस जमे हुए दूषित रक्त को निकाला जाता है।
  • शिरोधारा थेरेपी Shirodhara Therapy- दिन भर बच्चों की चिल्ल-पों और मानसिक थकान से नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने के लिए माथे पर गुनगुने तेल की धारा गिराई जाती है, जो तनाव को पल भर में दूर कर देती है।

प्राकृतिक रूप से शरीर के रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

लगातार खड़े रहने से डैमेज हुई नसों और वोकल कॉर्ड्स को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है-

  • शुरुआती 1-2 महीने- औषधियों और सही डाइट से गले की खराश कम होगी, आवाज़ में सुधार आएगा और शाम को पैरों में होने वाले भारीपन में काफी हद तक राहत मिलेगी।
  • 3-4 महीने- पंचकर्म थेरेपी, रसायनों के प्रभाव और सही फुटवियर/पोश्चर से वैरिकोज़ वेन्स की सूजन और नीलापन कम होने लगेगा।
  • 5-6 महीने- आपका सर्कुलेटरी सिस्टम और वोकल कॉर्ड्स पूरी तरह पोषित हो जाएंगे। आप बिना थके दिन भर अपना काम कर सकेंगे और दर्द आपकी दिनचर्या का हिस्सा नहीं रहेगा।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

वैरिकोज़ वेन्स और गले की समस्याओं के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द कम करने के लिए पेनकिलर्स और गंभीर स्थिति में नसों की सर्जरी Laser/Stripping। वात दोष को शांत करना, दूषित रक्त को साफ करना और नसों को अंदर से मज़बूत बनाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल नसों के वाल्व खराब होने या गले के स्थानीय इन्फेक्शन के रूप में देखना। इसे कमज़ोर रक्त धातु, बिगड़े हुए वात और अत्यधिक शारीरिक थकान का परिणाम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर केवल आराम करने और कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स Compression stockings पहनने की सलाह दी जाती है। खाने में 'स्नेहन' घी/तेल, सही पोश्चर, और वात-शामक आहार पर गहरा ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर सर्जरी के बाद भी अन्य नसों में समस्या वापस आ सकती है। शरीर की नसें अंदर से इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि वे प्राकृतिक रूप से रक्त संचार करना सीख जाती हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इन समस्याओं को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है-

  • पैरों में अचानक भयंकर दर्द और लालिमा- अगर वैरिकोज़ वेन्स वाली जगह अचानक बहुत गर्म, लाल और दर्दनाक हो जाए यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस या DVT का संकेत हो सकता है।
  • नसों से खून आना- अगर पैरों की किसी उभरी हुई नस में हल्की सी भी खरोंच लग जाए और वहां से तेज़ी से खून बहने लगे जो रुक न रहा हो।
  • आवाज़ का पूरी तरह गायब होना- अगर 2-3 हफ्तों तक गले से आवाज़ बिल्कुल न निकले और थूक निगलने में भी तेज़ दर्द हो।
  • खांसी में खून आना- अगर आवाज़ बैठने के साथ-साथ भयंकर सूखी खांसी हो और बलगम में खून दिखाई देने लगे।

निष्कर्ष

अपने शरीर और अपनी आवाज़ को एक ग्रांटेड संपत्ति मानना बंद करें। रोज़ाना बच्चों को पढ़ाने के लिए आपका घंटों खड़े रहना और बोलना समाज के लिए एक महान कार्य है, लेकिन इसके बदले शरीर को मिलने वाली वैरिकोज़ वेन्स और वॉइस लॉस को अपनी किस्मत न मानें। जब नसें नीली पड़ने लगें और गला सूखने लगे, तो यह एक अलार्म है कि आपका शरीर अंदर से पोषण मांग रहा है। रोज़ पेनकिलर्स खाकर और गले में स्प्रे डालकर इस समस्या को और गंभीर न बनाएं। सही पोश्चर, आयुर्वेदिक डाइट, मुलेठी और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों की मदद से अपनी कमज़ोर नसों को नया जीवन दें। इससे राहत पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हाँ, बिल्कुल सपाट चप्पल पहनने से एड़ी और तलवे (आर्क) को सही सपोर्ट नहीं मिलता, जिससे प्लांटर फैसिआइटिस और पिंडलियों में दर्द की समस्या काफी बढ़ जाती है। थोड़ा कुशन वाला जूता हमेशा बेहतर होता है।

लगातार बोलने के बीच में हल्का गुनगुना पानी घूंट-घूंट करके पीना चाहिए। इसमें आप थोड़ा सा मुलेठी का पाउडर या शहद मिला सकते हैं, जो वोकल कॉर्ड्स को तुरंत चिकनाई देता है।

भारी वज़न उठाना या बहुत तेज़ दौड़ना वैरिकोज़ वेन्स को और बिगाड़ सकता है। इसके बजाय हल्की वॉकिंग, स्विमिंग या साइकिलिंग करना ज़्यादा फायदेमंद है क्योंकि इससे पैरों की नसों में रक्त संचार सुधरता है।

हाँ, लेकिन सादे पानी के बजाय गुनगुने पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक और चुटकी भर हल्दी डालकर गरारे करने से वोकल कॉर्ड्स की सूजन कम होती है और फंसा हुआ कफ बाहर निकल जाता है।

वैरिकोज़ वेन्स में मालिश हमेशा नीचे से ऊपर (हृदय की ओर) की जानी चाहिए। इससे पैरों में जमा हुआ अशुद्ध रक्त वापस सही दिशा में जाने लगता है। मालिश करते समय नसों पर ज़्यादा दबाव (Pressure) न डालें।

जी हाँ, अगर आप बिना ब्रेक लिए लगातार ऊँची आवाज़ में बोलते हैं, तो वोकल कॉर्ड्स पर छाले (नोड्यूल्स) बन सकते हैं, जिन्हें अगर नज़रअंदाज़ किया गया तो आवाज़ हमेशा के लिए भारी और कर्कश हो सकती है।

सोते समय पैरों के नीचे एक या दो तकिए रखकर उन्हें दिल के स्तर से थोड़ा ऊपर रखने पर गुरुत्वाकर्षण के कारण पैरों में जमा खून आसानी से वापस लौटता है, जिससे सुबह सूजन और भारीपन नहीं होता

बिल्कुल। कैफीन एक ड्यूरेटिक (Diuretic) है जो शरीर से पानी बाहर निकालता है। इससे वोकल कॉर्ड्स की प्राकृतिक नमी सूख जाती है और बोलते समय घर्षण या खराश ज़्यादा होती है।

लगातार खड़े रहने से शरीर का पूरा वज़न घुटनों के जोड़ों पर पड़ता है। समय के साथ इससे कार्टिलेज घिसने लगता है और जोड़ों के बीच की चिकनाई कम हो जाती है, जो भविष्य में गठिया का कारण बन सकता है।

हाँ, जब आप बार-बार हाथ ऊपर उठाकर ब्लैकबोर्ड पर लिखते हैं, तो कंधों और गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। अगर यह दर्द हाथों में झनझनाहट के साथ नीचे की ओर आ रहा है, तो यह सर्वाइकल की शुरुआत हो सकती है।

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