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Stress शϤ Blood Sugar का सीधा सम्बन्ध — आयुर्वेद क्या कहता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

आप रोज़ाना सही समय पर उठते हैं, चीनी बिल्कुल नहीं खाते, बाहर का जंक फूड भी बंद कर चुके हैं शϤ हर दिन 45 मिनट टहलते भी हैं। एक दिन आप अपना रूटीन ब्लड टेस्ट करवाते हैं शϤ रिपोर्ट देखकर हैरान रह जाते हैं, आपका ब्लड शुगर लेवल (HbA1c) ख़तरे के निशान को पार कर चुका है! आप अपने डॉक्टर से पूछते हैं कि जब मैं सब कुछ 'हेल्दी' कर रहा हूँ, तो मुझे डायबिटॶज़ कैसे हो सकती है?

अक्सर हम सोचते हैं कि डायबिटॶज़ केवल ज़्यादा मीठा खाने या मोटापा बढ़ने से होती है। लेकिन हम उस सबसे बड़े शϤ खामोश हत्यारे को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो हमारे शरीर के अंदर 24 घंटे एक ज़हर की तरह काम कर रहा है, शϤ वह है क्रोनिक स्ट्रेस (Chronic Stress)

आज के 'हसल कल्चर', ऑफिस के टारगेट्स, ईएमआई (EMI) की चिंता शϤ पारिवारिक दबाव ने हमारे दिमाग को हर समय एक 'अलार्म स्टेट' में डाल दिया है। जब दिमाग शांत नहीं होता, तो शरीर का मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह क्रैश हो जाता है। आप चाहें कितनी भी उबली हुई सब्ज़ियाँ खा लें, अगर आपका दिमाग़ तनाव में है, तो आपका शरीर उस खाने को भी ज़हर (शुगर) में बदल देगा। 

तनाव (Stress) आपके ब्लड शुगर को कैसे बढ़ाता है?

जब आप तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर यह नहीं समझ पाता कि यह तनाव ऑफिस के काम का है या आपके पीछे कोई शेर पड़ा है। वह इसे एक 'खतरा' (Threat) मान लेता है शϤ 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में चला जाता है।

  • कॉर्टिसोल (Cortisol) का भयंकर स्त्राव: स्ट्रेस के समय शरीर की एड्रेनल ग्रंथियाँ (Adrenal glands) 'कॉर्टिसोल' शϤ 'एड्रेनालाईन' नाम के स्ट्रेस हार्मोन छोड़ती हैं।
  • लिवर द्वारा शुगर डंप करना: खतरे से लड़ने के लिए शरीर को तुरंत ऊर्जा (Energy) चाहिए होती है। कॉर्टिसोल हार्मोन आपके लिवर को आदेश देता है कि वह शरीर में जमा सारे ग्लूकोज़ को तुरंत खून में छोड़ दे (डंप कर दे)।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): कॉर्टिसोल केवल शुगर नहीं बढ़ाता, बल्कि वह आपकी कोशिकाओं (Cells) को उस शुगर का इस्तेमाल करने से भी रोक देता है। कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति 'रेजिस्टेंट' हो जाती हैं। नतीजतन, खून में शुगर का स्तर तेज़ी से बढ़ जाता है शϤ वहाँ फँस जाता है।

आयुर्वेद स्ट्रेस-इंड्यूस्ड डायबिटॶज़ को कैसे समझता है?

आयुर्वेद में हज़ारों साल पहले ही शरीर शϤ मन (Body-Mind) के इस गहरे संबंध को स्पष्ट कर दिया गया था। आयुर्वेद डायबिटॶज़ को 'प्रमेह' (Prameha) कहता है शϤ तनाव को इसका एक बहुत बड़ा कारण मानता है।

  • वात दोष का भड़कना: तनाव, चिंता, डर शϤ अत्यधिक सोचना शरीर में 'वात दोष' (Vata Dosha) को बहुत तेज़ी से भड़काता है। वात का स्वभाव चंचल शϤ रूखा है। जब यह भड़कता है, तो यह पूरे नर्वस सिस्टम को अस्थिर कर देता है।
  • अग्निमांद्य (मेटाबॉलिज़्म का गिरना): बढ़ा हुआ वात जब पेट की 'पाचन अग्नि' (Jatharagni) को डिस्टर्ब करता है, तो खाना पचने के बजाय सड़ने लगता है। इससे 'आम' (Toxins) बनता है जो पैंक्रियाज़ शϤ नसों को ब्लॉक कर देता है।
  • ओजस (Ojas) का सूखना: लगातार स्ट्रेस लेने से शरीर का 'ओजस' (इम्युनिटी शϤ वाइटेलिटी) सूखने लगता है। ओजस के कमज़ोर होने से शरीर की कोशिकाओं की ताकत खत्म हो जाती है शϤ वे शुगर को पचा नहीं पातीं, जिसे आयुर्वेद में 'ओजोमेह' (मधुमेह की अंतिम अवस्था) कहा गया है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

आधुनिक चिकित्सा अक्सर स्ट्रेस-इंड्यूस्ड शुगर के लिए सिर्फ एंटी-डायबिटिक गोलियाँ देती है। लेकिन जब तक स्ट्रेस (कारण) मौजूद है, शुगर (लक्षण) कैसे ठीक हो सकती है? हम जीवा आयुर्वेद में दोनों पर एक साथ काम करते हैं।

  • नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करना: सबसे पहले वात-शामक चिकित्सा से आपके भड़के हुए दिमाग शϤ नर्वस सिस्टम को शांत किया जाता है ताकि 'कॉर्टिसोल' का लेवल नीचे आए।
  • अग्नि दीपन शϤ डिटॉक्स: पेट में जमा 'आम' (टॉक्सिन्स) को साफ करने के लिए पाचन अग्नि को जगाया जाता है ताकि इंसुलिन रिसेप्टर्स दोबारा काम कर सकें।
  • पैंक्रियाज़ का कायाकल्प (Rejuvenation): रसायन औषधियों के ज़रिए थके हुए पैंक्रियाज़ को ताक़त दी जाती है ताकि वह सही मात्रा में प्राकृतिक इंसुलिन बना सके।

स्ट्रेस शϤ शुगर को एक साथ कंट्रोल करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी जादुई औषधियाँ दी हैं जो दिमाग को शांत करने के साथ-साथ शुगर को भी कंट्रोल करती हैं:

  • अश्वगंधा: यह आयुर्वेद का सबसे बेहतरीन 'अडैप्टोजेन' (Adaptogen) है। यह नर्वस सिस्टम को ताक़त देता है, कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) को तेज़ी से गिराता है शϤ इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है। स्ट्रेस वाली डायबिटॶज़ में यह किसी अमृत से कम नहीं है।
  • ब्राह्मी: यह मेध्य रसायन है जो 'ब्रेन फॉग', एंग्जायटी शϤ ओवरथिंकिंग को रोककर दिमाग को गहरी शांति देता है।
  • गुड़मार: इसका तो नाम ही 'गुड़ (Sugar) को मारने वाला' है। यह ब्लड शुगर के स्पाइक को रोकता है शϤ मीठा खाने की लालसा (Craving) को खत्म करता है।
  • निशा-आमलकी : हल्दी शϤ आंवला का यह मिश्रण प्रमेह (डायबिटॶज़) की सबसे शक्तिशाली शϤ सुरक्षित आयुर्वेदिक दवा है जो पैंक्रियाज़ को डैमेज से बचाती है।

पंचकर्म थेरेपी: स्ट्रेस शϤ शुगर की डीप क्लीनिंग

जब दिमाग पूरी तरह 'बर्नआउट' (Burnout) हो चुका हो शϤ गोलियाँ असर न कर रही हों, तो पंचकर्म शरीर को 'हार्ड रिसेट' (Hard Reset) करता है।

  • शिरोधारा (Shirodhara): तनाव से जन्मी डायबिटॶज़ का यह सबसे बड़ा शϤ अचूक इलाज है। माथे पर औषधीय तेल या मट्ठे (तक्रधारा) की लगातार धारा गिराकर दिमाग के गहरे तनाव को खींचा जाता है। यह कॉर्टिसोल को कम करके आपको गहरी शϤ प्राकृतिक नींद देता है।
  • अभ्यंग शϤ स्वेदन (Abhyanga & Swedana): वात को शांत करने के लिए औषधीय तेलों की मालिश शϤ भाप दी जाती है, जिससे पूरे शरीर की जकड़ी हुई नसें ढीली पड़ जाती हैं।
  • विरेचन (Virechana): स्ट्रेस शϤ खराब खान-पान से लिवर में जमा हुए पित्त शϤ टॉक्सिन्स को दस्त के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे मेटाबॉलिज़्म बिल्कुल नया हो जाता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप शुगर बढ़ने की रिपोर्ट लेकर आते हैं, तो हम केवल ग्लूकोमीटर की रीडिंग नहीं देखते, हम आपके दिमाग शϤ नाड़ी को पढ़ते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि क्या यह शुगर ज़्यादा मीठा खाने से (कफ प्रकोप) है या भयंकर तनाव शϤ एंग्जायटी (वात प्रकोप) के कारण है।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आप दिन में कितने घंटे स्क्रीन देखते हैं, आपकी रातों की नींद कैसी है, शϤ आप कितना सोचते हैं—इन सबका बहुत बारीकी से विश्लेषण किया जाता है।
  • पाचन का विश्लेषण: यह जाँचना कि तनाव के कारण आपकी 'पाचन अग्नि' कितनी कमज़ोर हो चुकी है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसा होता है?

हम आपके ऑफिस शϤ पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के दबाव को समझते हैं। हमारा लक्ष्य आपको एक शांत शϤ स्वस्थ जीवन देना है।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बहुत प्यार शϤ धैर्य से बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: काम के दबाव के कारण बाहर जाना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके स्ट्रेस लेवल शϤ वात प्रकृति के अनुसार खास जड़ी-बूटियाँ, नर्व-रिलैक्सिंग रसायन शϤ एक पूरा वात-शामक डाइट प्लान तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद केवल ब्लड शुगर के नंबर को नीचे नहीं गिराता, बल्कि उस इंजन (मेटाबॉलिज़्म) को ठीक करता है जो शुगर बना रहा है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: शिरोधारा शϤ अश्वगंधा के प्रभाव से आपको रात को गहरी नींद आनी शुरू होगी। दिमागी चिड़चिड़ापन शϤ थकावट कम होंगे।
  • 1 से 3 महीने तक: आपके शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स सुधरेगा। ब्लड शुगर में आने वाले अचानक स्पाइक्स (Spikes) स्थिर होने लगेंगे।
  • 3 से 6 महीने तक: आपकी इम्युनिटी (ओजस) वापस आएगी। आपका पैंक्रियाज़ शϤ लिवर तनाव-मुक्त होकर नॉर्मल तरीके से काम करने लगेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक शϤ निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा शϤ परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति शϤ गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक शϤ व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों शϤ समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन शϤ पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर शϤ दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको ज़िंदगी भर शुगर की गोलियों शϤ एंटी-डिप्रेसेंट (Anti-depressant) का गुलाम बनाकर नहीं रखते।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ ब्लड रिपोर्ट के नंबरों को नीचे नहीं लाते। हम आपके नर्वस सिस्टम को शांत करके उस कॉर्टिसोल को रोकते हैं जो शुगर बढ़ा रहा है।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का बहुत ही शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों ऐसे केस देखे हैं जहाँ सिर्फ स्ट्रेस मैनेजमेंट से डायबिटॶज़ पूरी तरह रिवर्स हो गई।
  • कस्टमाइज्ड केयर: हर इंसान का तनाव शϤ प्रकृति अलग होती है। हमारा इलाज बिल्कुल आपकी नाड़ी शϤ आपकी समस्या की जड़ के अनुसार होता है।
  • प्राकृतिक शϤ सुरक्षित: हमारी जड़ी-बूटियाँ पूरी तरह प्राकृतिक हैं। ये आपके शरीर को बिना कोई नुकसान (साइड इफेक्ट) पहुँचाए अंदर से हील करती हैं।

आधुनिक शϤ आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य ब्लड शुगर को गोलियों (जैसे मेटफॉर्मिन) से ज़बरदस्ती नीचे लाना। स्ट्रेस (कॉर्टिसोल) को कम करके शϤ पाचन (अग्नि) को सुधारकर शुगर को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करना।
शरीर को देखने का नज़रिया केवल एक मेटाबॉलिक या पैंक्रियाज़ की बीमारी मानता है। माइंड-बॉडी' कनेक्शन को मानता है, जहाँ मानसिक तनाव (वात) शारीरिक बीमारी (प्रमेह) का कारण बनता है।
डाइट शϤ जीवनशैली की भूमिका केवल मीठा छोड़ने की सलाह। तनाव प्रबंधन पर कम ज़ोर। वात-शामक डाइट, गहरी नींद शϤ 'शिरोधारा' जैसी रिलैक्सिंग थेरेपी को इलाज का मुख्य हिस्सा मानता है।
लंबा असर दवा की डोज़ उम्र के साथ बढ़ती जाती है। नर्वस सिस्टम के रिलैक्स होने से इंसान बीमारी के चंगुल से हमेशा के लिए बाहर आ जाता है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

स्ट्रेस वाली डायबिटॶज़ कभी-कभी बहुत तेज़ी से खतरनाक रूप ले सकती है। अगर आपको तनाव के साथ ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • अगर आपको अचानक बहुत ज़्यादा प्यास लगने लगे शϤ गला सूखने लगे।
  • अगर रात में नींद टूटकर बार-बार यूरिन (पेशाब) के लिए जाना पड़े।
  • अगर आँखों के सामने अचानक धुंधलापन (Blurry vision) आ जाए।
  • अगर बिना किसी कारण या डाइटिंग के आपका वज़न तेज़ी से कम होने लगे शϤ भयंकर कमज़ोरी आ जाए।

निष्कर्ष

"तनाव एक साइलेंट किलर है, जो आपके ही शरीर को आपके खिलाफ कर देता है।" जब हम सफलता, करियर शϤ पैसे की अंधी दौड़ में अपने दिमाग को आराम देना भूल जाते हैं, तो शरीर कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) के प्रभाव में आकर हर खाए हुए निवाले को 'खतरे' से निपटने के लिए शुगर में बदल देता है। आप सिर्फ मीठा खाना छोड़कर इस 'स्ट्रेस-इंड्यूस्ड डायबिटॶज़' को नहीं हरा सकते। जब तक आपका दिमाग शांत नहीं होगा, आपका ब्लड शुगर नॉर्मल नहीं होगा। इन लक्षणों को केवल गोलियों से दबाकर आप असली समस्या (Problem) को बढ़ा रहे हैं। आयुर्वेद आपको इस दलदल से बाहर निकलने का सबसे तार्किक शϤ प्राकृतिक रास्ता दिखाता है। अपने शरीर शϤ दिमाग के कनेक्शन को समझें। अश्वगंधा, ब्राह्मी शϤ शंखपुष्पी जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, पंचकर्म की 'शिरोधारा' से अपने दिमाग के तारों को रिलैक्स करें शϤ एक अनुशासित, वात-शामक जीवनशैली अपनाएं। अपने दिमाग को शांत करें, शϤ जीवा आयुर्वेद के साथ डायबिटॶज़-मुक्त एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

तनाव के समय शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है शϤ एड्रेनल ग्रंथि से कॉर्टिसोल हार्मोन निकलता है। यह हार्मोन लिवर को आदेश देता है कि वह शरीर में जमा ग्लूकोज़ को खून में छोड़ दे, ताकि शरीर को लड़ने के लिए ऊर्जा मिले। इससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाता है।

जी हाँ, बिल्कुल। अगर आप बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव में हैं, ठीक से सो नहीं रहे हैं, तो आपका शरीर कॉर्टिसोल के प्रभाव में आकर खुद-ब-खुद शुगर (ग्लूकोज़) बनाने लगता है, जिससे बिना मीठा खाए भी आपको टाइप-2 डायबिटॶज़ हो सकती है।

आयुर्वेद में डायबिटॶज़ को प्रमेह (Prameha) शϤ इसके गंभीर रूप को मधुमेह (Madhumeha) कहा जाता है। आयुर्वेद इसे वात, पित्त शϤ कफ के असंतुलन शϤ पाचन अग्नि के कमज़ोर होने का परिणाम मानता है।

अश्वगंधा सीधे शुगर को नहीं घटाता, बल्कि वह शरीर के स्ट्रेस रिस्पॉन्स को शांत करता है। यह कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) के लेवल को नीचे लाता है, जिससे शरीर में ग्लूकोज़ का डंप होना रुक जाता है शϤ इंसुलिन अपना काम सही से कर पाता है।

बिल्कुल। नींद न पूरी होने से शरीर इसे एक बड़ा तनाव (Stress) मान लेता है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस तेज़ी से बढ़ता है। एक रात की खराब नींद भी अगले दिन आपके फास्टिंग शुगर लेवल को भयंकर रूप से बढ़ा सकती है।

शिरोधारा में माथे पर औषधीय तेल की लगातार धारा गिराई जाती है। यह नर्वस सिस्टम को तुरंत रिलैक्स करती है, एंग्जायटी को खत्म करती है शϤ कॉर्टिसोल हार्मोन को बंद कर देती है। दिमाग शांत होते ही लिवर शुगर छोड़ना बंद कर देता है।

हाँ, 100% रिवर्स हो सकती है। अगर आप आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (जैसे ब्राह्मी, गुड़मार) का सेवन करें, योगाभ्यास करें शϤ अपने तनाव को मैनेज करना सीख लें, तो यह समस्या जड़ से खत्म हो सकती है।

वात शरीर की वह ऊर्जा है जो गति (Movement) शϤ नर्वस सिस्टम को कंट्रोल करती है। जब तनाव बढ़ता है, तो वात भड़क जाता है शϤ पूरे शरीर के मेटाबॉलिज़्म शϤ हॉर्मोन्स को डिसबैलेंस कर देता है, जिससे शुगर मेटाबॉलिज़्म क्रैश हो जाता है।

नहीं। आयुर्वेदिक इलाज शुरू करते ही एलोपैथिक दवाइयाँ एकदम से बंद नहीं करनी चाहिए। जैसे-जैसे आयुर्वेद से आपकी इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरेगी शϤ शुगर लेवल नॉर्मल होगा, आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से एलोपैथिक डोज़ धीरे-धीरे कम की जाती है।

सुबह उठकर स्क्रीन (मोबाइल) देखने से बचें। सबसे पहले 15-20 मिनट गहरी साँसें (अनुलोम-विलोम शϤ भ्रामरी प्राणायाम) लें ताकि नर्वस सिस्टम शांत हो। इसके बाद हल्का गुनगुना पानी पिएं शϤ 30 मिनट तक सैर (Walking) ज़रूर करें।

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