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Steroids वाले Joint Injection — Long Term में क्या नुकसान करते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 12 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5043

घुटनों या कंधों के असहनीय दर्द से तड़पते हुए जब आप डॉक्टर के क्लिनिक पहुँचते हैं और वह आपको स्टेरॉयड का एक छोटा सा इंजेक्शन (Corticosteroid Injection) लगवाने की सलाह देते हैं, तो वह किसी चमत्कार जैसा लगता है। सुई चुभने के कुछ ही घंटों बाद महीनों पुराना दर्द बिल्कुल गायब हो जाता है। आप फिर से सीढ़ियाँ चढ़ने लगते हैं और आपको लगता है कि आपकी बीमारी पूरी तरह ठीक हो गई है।

लेकिन यह चमत्कार एक बहुत बड़ा धोखा है। जो इंजेक्शन आपको दर्द से तुरंत आज़ादी दे रहा है, असल में वह आपके जोड़ों के अंदर एक साइलेंट किलर (Silent Killer) की तरह काम कर रहा है। वह आपके दर्द को तो सुन्न कर देता है, लेकिन साथ ही आपके घुटने की प्राकृतिक गद्दी (Cartilage) को अंदर ही अंदर तेज़ी से गलाने लगता है। जब कुछ महीनों बाद इस इंजेक्शन का असर खत्म होता है, तो आपका दर्द पहले से 10 गुना ज़्यादा भयंकर होकर लौटता है, क्योंकि तब तक आपके जोड़ अंदर से पूरी तरह खोखले हो चुके होते हैं।

स्टेरॉयड इंजेक्शन (Steroid Injections) जोड़ों को अंदर से कैसे डैमेज करते हैं?

स्टेरॉयड कोई असली ग्रीस (Lubricant) या पोषण नहीं है। यह एक भयंकर शक्तिशाली केमिकल है जो आपके शरीर के अलार्म सिस्टम और इम्यून रिस्पॉन्स को ज़बरदस्ती बंद कर देता है। लंबे समय में यह आपके जोड़ों को इस तरह तबाह करता है:

  • कार्टिलेज का गलना (Chondrotoxicity): स्टेरॉयड का केमिकल जोड़ों के बीच की नाज़ुक गद्दी (Cartilage) की कोशिकाओं को सीधा मारता है। लगातार इंजेक्शन लगवाने से कार्टिलेज इतनी तेज़ी से घिसता है कि हड्डियाँ आपस में टकराने लगती हैं (Bone-on-Bone)।
  • लिगामेंट्स और टेंडन्स का सड़ना: स्टेरॉयड आपके जोड़ों को सहारा देने वाले लिगामेंट्स (Ligaments) और टेंडन्स को कमज़ोर कर देता है। इससे उनके अचानक टूटने (Tear) या फटने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • बीमारी को छिपाना (Masking the Pain): क्योंकि आपको दर्द महसूस नहीं होता, आप अपने कमज़ोर जोड़ों पर क्षमता से ज़्यादा वज़न डाल देते हैं (Overexertion)। इससे अंदर की हड्डियाँ बिना किसी चेतावनी के चकनाचूर होने लगती हैं।
  • हड्डियों की मौत (Avascular Necrosis): गंभीर मामलों में, स्टेरॉयड के कारण हड्डियों तक खून का पहुँचना (Blood supply) बंद हो जाता है, जिससे हड्डी का वह हिस्सा सचमुच में मर जाता है और गलने लगता है।

दोषों के अनुसार जोड़ों का दर्द और डैमेज के प्रकार

हर इंसान के जोड़ों का दर्द एक जैसा नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के बिगड़े हुए दोषों के आधार पर यह डैमेज तीन मुख्य प्रकारों में शरीर पर हावी होता है:

  • वात-प्रधान दर्द (सूखते जोड़): इसमें जोड़ बिल्कुल सूखे और कड़े हो जाते हैं। उठते-बैठते भयंकर कट-कट (Crepitus) की आवाज़ आती है। चलते समय घुटने का दर्द सुई चुभने जैसा होता है। स्टेरॉयड इस वात (रूखेपन) को और भड़का देता है।
  • पित्त-प्रधान दर्द (जलते जोड़): जब यूरिक एसिड या खून की गर्मी बढ़ती है, तो जोड़ लाल हो जाते हैं और छूने पर गर्म लगते हैं। इसमें दर्द के साथ-साथ भयंकर जलन (Burning sensation) होती है।
  • कफ-प्रधान दर्द (जाम जोड़): सुस्त मेटाबॉलिज़्म के कारण जोड़ों में पानी भर जाता है (Swelling)। इसमें दर्द से ज़्यादा भारीपन और जकड़न महसूस होती है, जिससे पैर मोड़ना असंभव हो जाता है।

क्या आपके जोड़ भी स्थायी डैमेज (Permanent Damage) के ये अलार्म बजा रहे हैं?

स्टेरॉयड इंजेक्शन के असर के पीछे छिपे हुए असली डैमेज को पहचानना बहुत ज़रूरी है। अगर आपके शरीर में ये खामोश संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • दर्द का ज़्यादा भयंकर होकर लौटना: इंजेक्शन का असर खत्म होते ही (3-4 महीने बाद) दर्द का पहले से कई गुना ज़्यादा ताकत के साथ वापस आना।
  • जोड़ों का मुड़ जाना (Buckling): चलते समय अचानक ऐसा महसूस होना कि घुटने या टखने में वज़न सहने की ताकत ही नहीं बची है और पैर धोखा दे रहे हैं।
  • जोड़ का लॉक हो जाना (Joint Locking): चलते-चलते अचानक जोड़ का एक ही पोज़िशन में अटक जाना और उसे सीधा करने में भयंकर दर्द होना (यह टूटे हुए कार्टिलेज के फँसने का संकेत है)।
  • बार-बार इन्फेक्शन होना: स्टेरॉयड आपकी लोकल इम्युनिटी को खत्म कर देते हैं, जिससे जोड़ों के अंदर लालिमा, बुखार और पस (Septic Arthritis) बनने का खतरा रहता है।

दर्द से तुरंत राहत पाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

इंजेक्शन के जादुई असर से धोखा खाकर मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो जोड़ों को हमेशा के लिए सर्जरी की तरफ धकेल देते हैं:

  • बार-बार इंजेक्शन लगवाना: पहला इंजेक्शन फेल होने पर हर 4-6 महीने में फिर से स्टेरॉयड का इंजेक्शन लगवाना। साल में 3 से ज़्यादा इंजेक्शन लगवाना कार्टिलेज को हमेशा के लिए खत्म कर देता है।
  • दर्द गायब होते ही भारी काम करना: इंजेक्शन के बाद दर्द सुन्न होते ही लोग जॉगिंग, भारी वज़न उठाना या सीढ़ियाँ चढ़ना शुरू कर देते हैं, जिससे कमज़ोर जोड़ पूरी तरह क्रैश कर जाते हैं।
  • केवल कैल्शियम की गोलियों पर अंधी निर्भरता: बिना अपनी जठराग्नि सुधारे कृत्रिम कैल्शियम खाते रहना, जो जोड़ों तक पहुँचने के बजाय केवल लगातार रहने वाली कब्ज़ पैदा करता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएं: अगर इस स्थिति को प्राकृतिक रूप से न संभाला जाए, तो यह जोड़ों के स्थायी डैमेज का रूप ले लेता है, जिसके बाद जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी (Joint Replacement) ही एकमात्र विकल्प बचता है।

आयुर्वेद स्टेरॉयड के डैमेज और जोड़ों के दर्द को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जहाँ केवल हड्डियों के बीच के गैप (Joint Space) और सूजन को सुन्न करने पर काम करता है, वहीं आयुर्वेद इसे संधिगत वात और शरीर के कमज़ोर धातु पोषण के रूप में समझता है।

  • श्लेषक कफ (Synovial Fluid) का सूखना: जोड़ों के बीच प्राकृतिक चिकनाई देने वाले कफ को श्लेषक कफ कहते हैं। स्टेरॉयड और वात दोष इस प्राकृतिक कफ को पूरी तरह सुखा देते हैं।
  • अस्थि धातु (Bone Tissue) का कमज़ोर होना: जब पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो खाये गए भोजन से पोषण अस्थि धातु तक नहीं पहुँच पाता, जिससे हड्डियाँ अंदर से खोखली (Osteoporosis) होने लगती हैं।
  • आम (Toxins) का जोड़ों में जमना: कमज़ोर पाचन के कारण पेट में बनने वाला ज़हरीला आम रक्त के ज़रिए जोड़ों में जाकर जम जाता है। यह आम सूजन पैदा करता है और किसी भी बाहरी दवा को टिकने नहीं देता।

हड्डियों को फौलादी बनाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके जोड़ों का असली ल्यूब्रिकेंट (Lubricant) है। कृत्रिम इंजेक्शन के बजाय अपनी डाइट में इन चीज़ों को शामिल करके अपने जोड़ों को बचाएं।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - अस्थि पोषक और वात शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रूखापन और यूरिक एसिड बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) रागी (कैल्शियम का खजाना), पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, रूखे बिस्कुट।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (जोड़ों के लिए प्राकृतिक ग्रीस), तिल का तेल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक मेयोनेज़।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद (सभी अच्छी तरह पकी हुई)। कच्चा सलाद (विशेषकर रात में), भारी बैंगन, शिमला मिर्च, टमाटर के बीज।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए अखरोट, बादाम, अंजीर, पपीता, सेब। डिब्बाबंद और बिना मौसम के ठंडे फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ (Beverages) अस्थिशृंखला (Hadjod) का काढ़ा, हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध। फ्रिज का बर्फ वाला पानी, बहुत ज़्यादा कोल्ड ड्रिंक्स, डार्क कॉफी।

कार्टिलेज रिपेयर करने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के जोड़ों की सूजन को खत्म करते हैं और डैमेज हो चुके कार्टिलेज को दोबारा हील (Heal) करते हैं:

  • अस्थिशृंखला (Hadjod): जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह कमज़ोर हड्डियों को जोड़ने और अस्थि धातु का घनत्व (Bone density) बढ़ाने के लिए आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटी है।
  • शल्लकी (Shallaki / Boswellia): जोड़ों की जकड़न, सूजन और कट-कट की आवाज़ को तेज़ी से घटाने व डैमेज कार्टिलेज को प्राकृतिक रूप से रिपेयर करने के लिए यह बहुत अचूक औषधि है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): जोड़ों के आस-पास की सूखती हुई मांसपेशियों को फौलादी ताकत देने के लिए अश्वगंधा (Ashwagandha) एक बेहतरीन बल्य रसायन है।
  • योगराज गुग्गुलु (Yogaraj Guggulu): जोड़ों के बीच फँसे हुए ज़िद्दी वात को निकालने और जकड़न को तुरंत खोलने के लिए यह एक सबसे क्लासिकल आयुर्वेदिक मिश्रण है।
  • निर्गुण्डी (Nirgundi): स्टेरॉयड के बिना भयंकर दर्द और मांसपेशियों की ऐंठन को शांत करने में निर्गुण्डी का तेल या काढ़ा बहुत जादुई असर करता है।

जोड़ों को प्राकृतिक ग्रीस (Lubrication) देने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब स्टेरॉयड के कारण जोड़ अंदर से सूख चुके हों, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ जोड़ों को तुरंत नया जीवन देती हैं:

  • जानु / ग्रीवा बस्ती: दर्द वाली जगह (घुटने या गर्दन) पर उड़द दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय वात-शामक तेल (जैसे महानारायण तेल) भरा जाता है। यह त्वचा के रास्ते गहराई तक जाकर सूखे हुए जोड़ों को प्राकृतिक चिकनाई देता है।
  • पत्र पिंड स्वेद (Patra Pinda Sweda): ताज़े औषधीय पत्तों को तेल में भूनकर बनाई गई पोटली से जोड़ों की सिकाई की जाती है। यह थेरेपी अकड़ी हुई मांसपेशियों को तुरंत खोल देती है और दर्द खींच लेती है।
  • अभ्यंग मालिश (Abhyanga): गुनगुने औषधीय तेलों से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश (Abhyanga massage) शरीर की जकड़न को खत्म करती है और नसों में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • मात्रा बस्ती (Matra Basti): आंतों से वात (गैस) को पूरी तरह खत्म करने के लिए मेडिकेटेड ऑयल की बस्ती थेरेपी दी जाती है, जो जोड़ों को प्राकृतिक रूप से अंदर से रिपेयर करने का काम करती है।

जोड़ों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

बरसों के डैमेज और रसायनों (Steroids) से जले हुए कार्टिलेज को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित और लगातार समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। जोड़ों की भारी सूजन, गर्माहट व दर्द में कमी आएगी। सुबह उठने पर होने वाली जकड़न शांत होने लगेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होने लगेगा। उठते-बैठते आने वाली कट-कट की आवाज़ें कम हो जाएंगी और आपकी मूवमेंट बिल्कुल फ्री हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: अस्थि धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी। शरीर प्राकृतिक रूप से अपना श्लेषक कफ बनाने लगेगा और आप बिना किसी बाहरी इंजेक्शन या पेनकिलर के एक ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक (Steroids) और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

जोड़ों के कार्टिलेज डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने और लोकल सूजन को दबाने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroids) इंजेक्शन लगाना। वात को शांत करना, 'आम' को पचाना और अस्थि धातु को प्राकृतिक रूप से पोषण देकर अपना 'श्लेषक कफ' खुद बनाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल दो हड्डियों के बीच के कार्टिलेज के घिसने की एक स्थानीय (Local) समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और अस्थि धातु के सूखने का एक संपूर्ण शारीरिक सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल वज़न कम करने की आम सलाह दी जाती है। वात-शामक डाइट, सोंठ का पानी, सही पोश्चर, और तेल की मालिश व बस्ती को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर इंजेक्शन का असर कुछ महीनों में खत्म हो जाता है, कार्टिलेज डैमेज होता है, और सर्जरी (Surgery) ही विकल्प बचती है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और घुटने की मांसपेशियाँ प्राकृतिक रूप से खुद को हील कर लेती हैं, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद कार्टिलेज के डैमेज को काफी हद तक रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको स्टेरॉयड इंजेक्शन लेने के बाद अपने जोड़ में ये गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • जोड़ का पूरी तरह लाल और भयंकर गर्म हो जाना: अगर इंजेक्शन के कुछ दिनों बाद जोड़ अचानक सूज जाए, आग जैसा गर्म लगे और साथ में तेज़ बुखार आ जाए (यह Septic Arthritis का भयंकर संकेत है)।
  • चलने पर अचानक जोड़ का मुड़ जाना (Giving way): अगर पैर ज़मीन पर रखते ही घुटना बिल्कुल वज़न न ले पाए और आप गिर पड़ें (यह लिगामेंट/टेंडन के पूरी तरह टूटने का इशारा है)।
  • आसपास की नसों का सुन्न पड़ना: अगर दर्द वाले जोड़ के साथ-साथ पैर के निचले हिस्से या उँगलियों में लकवे जैसी सुन्नता (Numbness) आ जाए।
  • असहनीय फटने वाला दर्द: अगर रात के समय आराम करते हुए भी हड्डी के अंदर ऐसा भयंकर दर्द हो जो किसी भी पेनकिलर से शांत न हो रहा हो (यह Avascular Necrosis या हड्डी के मरने का संकेत हो सकता है)।

निष्कर्ष

अपने जोड़ों के दर्द से घबराकर उनमें स्टेरॉयड (Steroids) का इंजेक्शन लगवाना बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी गाड़ी के इंजन में खराबी आने पर उसके चेतावनी वाले अलार्म की तार ही काट देना। अलार्म बंद होने से आपको लगता है कि गाड़ी ठीक हो गई, लेकिन अंदर ही अंदर इंजन पूरी तरह से सीज़ (Seize) हो रहा होता है। यह स्टेरॉयड कोई दवा नहीं है; यह एक ऐसा केमिकल है जो आपके कार्टिलेज को जलाता है, लिगामेंट्स को कमज़ोर करता है और आपकी हड्डियों को समय से पहले मौत (Necrosis) की तरफ धकेलता है। जब आप इस क्विक फिक्स (Quick Fix) के लालच में पड़ते हैं, तो आप अपनी हड्डियों को हमेशा के लिए सर्जरी के बिस्तर पर लिटा रहे होते हैं।

इस जानलेवा चक्र से बाहर निकलें। अपने शरीर को बाय इट फॉर लाइफ (Buy It For Life) संपत्ति मानें। अपनी डाइट में रागी, तिल और शुद्ध गाय का घी शामिल करें। अस्थिशृंखला, शल्लकी और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की जानु बस्ती व पत्र पिंड स्वेद थेरेपी से अपने सूखे हुए जोड़ों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। कृत्रिम रसायनों के धोखे से बचें, और अपने जोड़ों को स्थायी रूप से ताकतवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

इंजेक्शन आपके दर्द को सुन्न कर देता है, जिससे आप अपने डैमेज्ड जोड़ पर क्षमता से ज़्यादा वज़न डाल देते हैं। अंदर ही अंदर कार्टिलेज और ज़्यादा घिस चुका होता है। जब स्टेरॉयड का असर खत्म होता है, तो हड्डियाँ बहुत बुरी तरह आपस में रगड़ खाती हैं और दर्द 10 गुना भयंकर हो जाता है।

बिल्कुल नहीं। डॉक्टर भी साल में 3-4 से ज़्यादा इंजेक्शन लगाने से मना करते हैं। बार-बार सुई चुभने और स्टेरॉयड जाने से कार्टिलेज गल जाता है (Degrade), हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ही एकमात्र रास्ता बचता है।

शत-प्रतिशत। स्टेरॉयड शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बहुत तेज़ी से बढ़ाते हैं। अगर आपको डायबिटीज़ (Diabetes) है या आप प्री-डायबिटिक हैं, तो जॉइंट में लगा स्टेरॉयड इंजेक्शन आपकी शुगर को खतरनाक स्तर तक स्पाइक (Spike) कर सकता है।

बिल्कुल। आयुर्वेद जोड़ों में बाहर से कोई केमिकल नहीं डालता, बल्कि शरीर की जठराग्नि को सुधारकर और वात को शांत करके शरीर को इस लायक बनाता है कि वह अपना प्राकृतिक श्लेषक कफ खुद उत्पन्न करे। घी, तिल का तेल और बस्ती थेरेपी इसी प्रक्रिया में मदद करते हैं।

हाँ। कैफीन शरीर में वात (रूखापन) को भड़काता है और शरीर से पानी सोख (Diuretic) लेता है, जिससे जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई सूख जाती है और कट-कट की आवाज़ व दर्द बढ़ जाता है।

इंजेक्शन एक सुई के ज़रिए कृत्रिम रसायन जोड़ में डालता है जो कार्टिलेज को डैमेज करता है। बस्ती थेरेपी में दर्द वाले जोड़ के ऊपर गर्म औषधीय तेल रोका जाता है। यह तेल त्वचा के छिद्रों से अवशोषित होकर प्राकृतिक रूप से वात को शांत करता है, बिना किसी साइड इफेक्ट के सूजन घटाता है और नसों को हील (Heal) करता है।

रागी कैल्शियम का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। स्टेरॉयड और वात के कारण अस्थि धातु (Bones) कमज़ोर हो जाती है। रागी को रोटी या चीले के रूप में खाने से शरीर को प्राकृतिक कैल्शियम मिलता है जो आसानी से पच जाता है और हड्डियों को फौलादी बनाता है।

अगर जोड़ में वात-प्रधान दर्द (केवल खुश्की, कड़कपन और दर्द) है, तो बर्फ लगाने से नसें सिकुड़ जाएंगी और दर्द बढ़ जाएगा, ऐसे में गर्म सिकाई (Hot Fomentation) करें। लेकिन अगर घुटना या कंधा लाल है, आग जैसा गर्म है और सूजा हुआ (पित्त-प्रधान) है, तो वहां बर्फ की हल्की सिकाई आराम देती है।

बिल्कुल। तिल का तेल (Sesame oil) वात दोष का सबसे बड़ा दुश्मन है। नसों की गहराई तक जाकर वात को शांत करने और पोषण देने के लिए तिल का तेल या उस पर आधारित आयुर्वेदिक तेल (जैसे महानारायण तेल) सबसे श्रेष्ठ होते हैं। मालिश हमेशा बहुत हल्के हाथों से करनी चाहिए।

पूर्ण आराम (Complete Bed Rest) जोड़ों के लिए ज़हर है। चलना बंद कर देने से जोड़ को सपोर्ट करने वाली मांसपेशियाँ सूख (Atrophy) जाती हैं और जोड़ हमेशा के लिए जाम हो जाता है। दर्द कम होने पर हल्की मूवमेंट और स्ट्रेचिंग बेहद ज़रूरी है ताकि ब्लड सर्कुलेशन बना रहे।

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