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Skin Problems का Root Gut में हो सकता है? Ayurveda Skin -Gut Connection

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

सुबह उठते ही चेहरे पर महंगे फेस वॉश का इस्तेमाल, रात को सोने से पहले एंटी-एक्ने सीरम और दिन भर स्किन को बचाने के लिए तरह-तरह की क्रीम्स की लेयरिंग। हम अपनी त्वचा को बेदाग बनाने के लिए हज़ारों रुपये और अनगिनत घंटे खर्च कर देते हैं लेकिन जब लाख कोशिशों के बाद भी मुहांसे Acne, खुजली, एक्जिमा Eczema या पिगमेंटेशन वापस लौट आते हैं, तो हम इसे अपनी त्वचा की कमी या खराब मौसम मानकर हार मान लेते हैं।

लेकिन यह महज़ स्किन की समस्या नहीं है; यह आपके पेट Gut की वह चीख है जिसे आप बाहरी क्रीम्स के नीचे दबाने की कोशिश कर रहे हैं जब पेट साफ नहीं होता, पाचन कमज़ोर हो जाता है और आंतों में गंदगी Toxins जमा होने लगती है, तो शरीर उस ज़हर को त्वचा के रास्ते बाहर फेंकने की कोशिश करता है आधुनिक विज्ञान इसे 'गट-स्किन एक्सिस' Gut-Skin Axis कहता है और आयुर्वेद हज़ारों सालों से इसे 'अग्नि और त्वचा' के सीधे संबंध के रूप में जानता है जब तक आप त्वचा की समस्याओं की इस जड़ Root Cause यानी अपने 'गट' Gut को ठीक नहीं करेंगे, तब तक कोई भी क्रीम आपको स्थायी निखार नहीं दे सकती।

त्वचा की बीमारियां शरीर में क्या संकेत देती हैं?

हम जो कुछ भी खाते हैं, हमारा गट Gut उसे पचाकर शरीर के लिए पोषण बनाता है। लेकिन खराब जीवनशैली और जंक फूड का अत्यधिक इस्तेमाल हमारे पाचन तंत्र पर ऐसा भारी दबाव डालता है, जिसके लिए हमारा गट प्राकृतिक रूप से नहीं बना है। यह दबाव सीधे त्वचा पर अपना असर दिखाता है।

  • लीकी गट Leaky Gut और आम Toxins का निर्माण: जब खाना ठीक से नहीं पचता, तो वह आंतों में सड़कर एक विषैला तत्व बनाता है जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। आंतों की परत कमज़ोर होने Leaky Gut के कारण ये टॉक्सिन्स सीधे हमारे खून Bloodstream में मिल जाते हैं।
  • रक्त अशुद्धि Blood Impurity: खून में मिले हुए ये टॉक्सिन्स शरीर में चारों ओर घूमते हैं। जब लिवर और किडनी इन्हें पूरी तरह बाहर निकालने में असमर्थ हो जाते हैं, तो शरीर का सबसे बड़ा अंग हमारी त्वचा इन टॉक्सिन्स को बाहर धकेलने का काम करती है, जो मुहांसों और रैशेज़ का रूप ले लेते हैं।
  • इम्यून सिस्टम का ओवर-रिएक्शन: गट में पनपने वाले बुरे बैक्टीरिया Bad bacteria हमारे नर्वस और इम्यून सिस्टम को लगातार ट्रिगर करते हैं। इससे शरीर में हर जगह सूजन Inflammation बढ़ जाती है, जो त्वचा पर लालिमा, सोरायसिस Psoriasis और एलर्जी के रूप में नज़र आती है।

स्किन प्रॉब्लम्स और गट डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का खान-पान और उसके शरीर की प्रकृति अलग होती है। पेट की गड़बड़ी और टॉक्सिन्स के कारण त्वचा पर पड़ने वाला यह प्रभाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान स्किन डैमेज: इस स्थिति में गट में भारी रूखापन और कब्ज़ Constipation की समस्या रहती है। इसका सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। त्वचा में भयंकर रूखापन, फटना, झुर्रियां Premature aging और एक्जिमा Eczema जैसी समस्याएं आ जाती हैं। त्वचा की चमक पूरी तरह खो जाती है और वह बेजान लगने लगती है।
  • पित्त-प्रधान स्किन डैमेज: जंक फूड और मसालों के कारण जब पेट में भारी एसिडिटी और गर्मी Heat बढ़ जाती है, तो खून में पित्त भड़क जाता है। इसके परिणामस्वरूप चेहरे पर बड़े और लाल मुहांसे Acne, रोज़ेशिया Rosacea, चकत्ते, और त्वचा में आग लगने जैसी जलन व खुजली होने लगती है।
  • कफ-प्रधान स्किन डैमेज: लगातार भारी और मीठा खाना खाने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म और गट धीमा हो जाता है। इसमें त्वचा बहुत अधिक तैलीय Oily हो जाती है। बड़े और पस वाले मुहांसे Cystic acne, ब्लैकहेड्स, फंगल इन्फेक्शन और त्वचा पर भारी सूजन Swelling इसका मुख्य लक्षण है।

क्या आपकी त्वचा और पेट भी डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिखा रहे हैं?

त्वचा की बीमारियां रातों-रात भयानक रूप नहीं लेतीं। गट और स्किन का यह कनेक्शन बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर मौसम का बदलाव या पसीना मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • कब्ज़ के साथ मुहांसों का निकलना: अगर आपने ध्यान दिया हो कि जिस दिन आपका पेट साफ नहीं होता या लगातार कब्ज़ रहती है, उसके अगले ही दिन चेहरे या पीठ पर बड़े मुहांसे निकल आते हैं।
  • एसिडिटी और त्वचा का लाल होना: खाना खाने के बाद पेट में जलन होना और साथ ही गालों या त्वचा के किसी भी हिस्से में अचानक लालिमा Redness और खुजली का बढ़ जाना।
  • महंगी क्रीम्स का बेअसर होना: महीनों से महंगे स्किनकेयर रूटीन फॉलो करने के बावजूद त्वचा का बेजान Dull रहना और पिगमेंटेशन का लगातार गहरा होते जाना।
  • लगातार ब्लोटिंग Bloating और फंगल एलर्जी: पेट हमेशा फूला हुआ महसूस होना और शरीर के फोल्ड्स जैसे जांघों या अंडरआर्म्स में बार-बार फंगल इन्फेक्शन होना।

इस गट-स्किन प्रॉब्लम को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

त्वचा की समस्याओं से तुरंत राहत पाने और खुद को शीशे में परफेक्ट देखने की चाह में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो उनके गट और स्किन दोनों को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • स्टेरॉयड क्रीम्स Steroid Creams का रोज़ाना सेवन: रैशेज़ या एक्ने को तुरंत दबाने के लिए स्टेरॉयड वाली क्रीम्स लगाना। ये क्रीम्स कुछ दिन के लिए बीमारी को अंदर दबा देती हैं, लेकिन त्वचा को इतना पतला कर देती हैं कि धूप में निकलते ही चेहरा जलने लगता है Topical Steroid Damaged/Dependent Face।
  • एंटीबायोटिक्स Antibiotics का अंधाधुंध इस्तेमाल: मुहांसों को सुखाने के लिए महीनों तक एंटीबायोटिक्स खाना। ये गोलियां मुहांसे बनाने वाले बैक्टीरिया के साथ-साथ गट के 'गुड बैक्टीरिया' Good Microbes को भी मार देती हैं, जिससे पाचन पूरी तरह बर्बाद हो जाता है और दवा छोड़ते ही मुहांसे दोगुने वेग से वापस आते हैं।
  • गलत डाइट को नज़रअंदाज़ करना: चेहरे पर सीरम लगाना लेकिन डाइट में रोज़ाना पिज़्ज़ा, मैदे और चीनी का सेवन जारी रखना, जो आंतों में सूजन पैदा कर रहा है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर पेट में बन रहे इस 'आम' Toxins को बाहर न निकाला जाए, तो यह समस्या सोरायसिस Psoriasis, क्रोनिक अर्टिकेरिया Chronic Urticaria और गंभीर ऑटोइम्यून स्किन बीमारियों का भयंकर रूप ले लेती है, जिनका इलाज फिर बहुत मुश्किल हो जाता है।

आयुर्वेद स्किन-गट कनेक्शन और टॉक्सिन्स को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे 'गट माइक्रोबायोम इम्बैलेंस' Gut microbiome imbalance या लीकी गट कहता है, आयुर्वेद उसे 'अग्निमांद्य', 'आम' और 'रक्त धातु दृष्टि' के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • जठराग्नि Digestive Fire का कमज़ोर होना: आयुर्वेद के अनुसार सभी रोगों की जड़ जठराग्नि का कमज़ोर होना है। जब अग्नि मंद Weak पड़ जाती है, तो खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है।
  • रक्त धातु Blood Tissue का प्रदूषित होना: आयुर्वेद में त्वचा को 'रस' और 'रक्त' धातु का दर्पण माना गया है। पेट में बना हुआ विषैला 'आम' जब रक्त खून में प्रवेश करता है, तो रक्त दूषित हो जाता है Rakta Dushti। यही दूषित रक्त त्वचा की परतों में जाकर एक्ने, पिगमेंटेशन और एक्जिमा पैदा करता है।
  • पित्त का प्रकोप Aggravation of Pitta: त्वचा का सीधा संबंध भ्राजक पित्त Bhrajaka Pitta से होता है। गट में जब गर्मी बढ़ती है, तो यह भ्राजक पित्त असंतुलित होकर त्वचा का रंग बिगाड़ देता है और इन्फ्लेमेशन पैदा करता है।
  • गट को साफ करने और त्वचा को चमकदार बनाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके गट को सड़ा भी सकता है और उसे दोबारा स्वस्थ भी कर सकता है। स्किन-गट कनेक्शन को सुधारने और निखरी त्वचा पाने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - गट को साफ और खून को शुद्ध करने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - टॉक्सिन्स और एसिडिटी बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल, जौ, ज्वार। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, बासी रोटी।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी गट की हीलिंग के लिए अमृत, नारियल का तेल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक मेयोनीज़।
सब्ज़ियाँ Vegetables करेला, लौकी, परवल, पालक, कद्दू, तोरी आसानी से पचने वाली। कच्चा और भारी सलाद, अत्यधिक बैंगन, कटहल, बहुत तीखी मिर्च।
फल और मेवे Fruits & Nuts अनार, सेब, रात भर भीगी हुई किशमिश मुनक्का, पपीता, आंवला। डिब्बाबंद जूस, बिना मौसम के फल, बाज़ार के अत्यधिक नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ Beverages ताज़ा मट्ठा छाछ जीरे के साथ, पुदीने की चाय, सौंफ का पानी, जीरा पानी। बहुत ज़्यादा कॉफी, शराब Alcohol, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेटबंद जूस।

त्वचा और पेट को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो गट के इन्फेक्शन को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी त्वचा को दोबारा नई जैसी बना देते हैं:

  • नीम Neem: यह दुनिया का सबसे बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर Blood purifier है। नीम पेट के कीड़ों और बुरे बैक्टीरिया को मारता है और खून को साफ करके भयंकर से भयंकर मुहांसों को सुखा देता है।
  • मंजिष्ठा Manjistha: आयुर्वेद में इसे 'वर्ण्य' रंग निखारने वाली जड़ी-बूटी कहा गया है। यह खून की गर्मी पित्त को शांत करती है, पिगमेंटेशन को हटाती है और गट से टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।
  • त्रिफला Triphala: पेट की सफाई के लिए त्रिफला से बेहतर कुछ नहीं। रोज़ रात को इसका सेवन करने से आंतों की परत साफ होती है, कब्ज़ टूटती है और गट-स्किन एक्सिस पूरी तरह हील हो जाता है।
  • गिलोय Giloy: शरीर के अंदरूनी 'आम' और सूजन Inflammation को जड़ से खत्म करने के लिए और त्वचा की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए गिलोय एक जादुई रसायन है।
  • खदिर Khadir: आयुर्वेद में कहा गया है कि त्वचा रोगों के लिए खदिर Khadir से बेहतर कोई औषधि नहीं है। यह एक्जिमा और सोरायसिस में गट और स्किन दोनों को बेहतरीन तरीके से रिपेयर करता है।

गट को साफ करने और स्किन प्रॉब्लम्स मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब टॉक्सिन्स आम बहुत गहराई तक खून और गट में जम चुके हों, तो पंचकर्म की ये बाहरी और अंदरूनी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत डिटॉक्स कर देती हैं:

  • विरेचन Virechana: यह त्वचा रोगों विशेषकर पित्त के लिए सबसे अचूक पंचकर्म थेरेपी है। इसमें औषधियों के माध्यम से पेट आंतों की गहरी सफाई की जाती है। सारा टॉक्सिक पित्त और 'आम' मल के रास्ते बाहर निकल जाता है, जिससे एक्ने और रैशेज़ में जादुई आराम मिलता है।
  • रक्तमोक्षण Raktamokshana: एक्जिमा, गंभीर सोरायसिस और न ठीक होने वाले मुहांसों में लीच Leech थेरेपी या शिरावेध के ज़रिए शरीर के दूषित खून को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। इससे त्वचा को तुरंत नई ऑक्सीजन मिलती है।
  • वमन Vamana: कफ-प्रधान त्वचा रोगों जैसे सिस्टिक एक्ने या फंगल इन्फेक्शन में औषधीय उल्टी के ज़रिए छाती और आमाशय में जमे कफ और टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जाता है।
  • उद्वर्तन Udvartana: औषधीय हर्बल पाउडर से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। यह त्वचा के रोमछिद्रों Pores को खोलती है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और त्वचा के नीचे जमे हुए टॉक्सिन्स को गला देती है।

गट के रिपेयर होने और स्किन प्रॉब्लम्स खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से जंक फूड और स्टेरॉयड क्रीम्स के कारण खराब हो चुके गट और स्किन को प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से आपका पेट साफ होने लगेगा। कब्ज़ और एसिडिटी खत्म होगी। चेहरे पर नए मुहांसे निकलने की रफ़्तार में भारी कमी आएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से खून पूरी तरह साफ होने लगेगा Rakta Shodhan। पुरानी झाइयां Pigmentation, एक्जिमा के निशान और मुहांसों के गहरे दाग हल्के पड़ने लगेंगे।
  • 5-6 महीने: गट पूरी तरह रिपेयर हो जाएगा और लीकी गट की समस्या खत्म हो जाएगी। आपकी त्वचा में प्राकृतिक चमक Glow वापस आ जाएगी और आप बिना किसी स्टेरॉयड क्रीम के एक बेदाग और कॉन्फिडेंट जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

त्वचा और गट के रोगों के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य इन्फेक्शन और रैश को दबाने के लिए स्टेरॉयड क्रीम्स, एंटीबायोटिक्स और सैलिसिलिक एसिड का इस्तेमाल। जठराग्नि को ठीक करना, 'आम' को पचाना और खून को प्राकृतिक रूप से साफ करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल त्वचा की बाहरी Local समस्या मानना। इसे कमज़ोर गट, बिगड़े हुए पित्त और रक्त धातु में अशुद्धि का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल महंगी क्रीम्स और फेस वाश पर ज़ोर, लेकिन जठराग्नि या पेट की सफाई पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। पित्त-शामक डाइट, सही पाचन, कब्ज़ दूर करना और औषधीय डिटॉक्स को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर क्रीम्स और दवाइयाँ छोड़ने पर एक्ने और रैशेज़ तुरंत वापस आ जाते हैं। गट अंदर से मज़बूत होता है और त्वचा खुद को हील कर लेती है, जिससे इंसान स्थायी रूप से बेदाग रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद गट को रिपेयर करके त्वचा को पूरी तरह हील कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • त्वचा से पस या खून आना: अगर मुहांसों या एक्जिमा के घावों में बहुत भारी मात्रा में मवाद Pus भर गया हो और लगातार खून रिस रहा हो।
  • अचानक पूरी त्वचा पर दाने और बुखार: अगर शरीर पर बहुत तेज़ी से कोई रैश फैल रहा हो और उसके साथ तेज़ बुखार, साँस लेने में दिक्कत या होंठों पर सूजन आ जाए Severe Allergic Reaction।
  • त्वचा का रंग तेज़ी से बदलना: अगर त्वचा का कोई हिस्सा अचानक बिल्कुल सुन्न पड़ जाए, काला पड़ने लगे या बहुत तेज़ी से फैलने वाला फंगल इन्फेक्शन हो जाए।

निष्कर्ष

चमकदार त्वचा पाने के लिए बाहरी क्रीम्स लगाना एक तात्कालिक उपाय हो सकता है, लेकिन त्वचा की कोई भी गंभीर समस्या बिना 'गट' पेट के इन्वॉल्वमेंट के नहीं होती। चेहरे पर निकलने वाला वह मुहांसा या हाथों पर होने वाली वह खुजली आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं है। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका पाचन तंत्र कमज़ोर हो चुका है, आंतों में टॉक्सिन्स आम भर चुके हैं और आपका खून प्रदूषित हो रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना एंटीबायोटिक्स और स्टेरॉयड्स की कृत्रिम परतों से दबाते हैं, तो आप अपनी त्वचा को हील करने के बजाय गट को स्थायी रूप से अपाहिज कर रहे होते हैं। इस केमिकल चक्र से बाहर निकलें। अपने पाचन को सुधारें, जंक फूड से ब्रेक लें और अपनी डाइट में छाछ, देसी घी और मुनक्का शामिल करें। नीम, मंजिष्ठा और त्रिफला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और विरेचन जैसी पंचकर्म थेरेपी से अपने पेट और खून को प्राकृतिक सफाई देकर नया जीवन दें। बाहरी दिखावे के लिए अपने आंतरिक स्वास्थ्य को कमज़ोर न पड़ने दें, और अपने गट व त्वचा को स्थायी रूप से बेदाग बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

बिल्कुल। जब गट में खाना पचता नहीं है, तो वह टॉक्सिन्स (आम) बनाता है। ये टॉक्सिन्स खून में मिलकर त्वचा की सिबेशियस ग्लैंड्स (Sebaceous glands) को उत्तेजित करते हैं, जिससे सीबम (तेल) का उत्पादन बढ़ता है और मुहांसे निकलने लगते हैं।

यह आंतों (Gut) और त्वचा (Skin) के बीच का एक सीधा बायोलॉजिकल संबंध है। आपके गट के माइक्रोबायोम (बैक्टीरिया) सीधे आपके इम्यून सिस्टम से बात करते हैं। अगर गट में बुरे बैक्टीरिया बढ़ जाएँ, तो इसका सीधा असर त्वचा पर सूजन और रैशेज़ के रूप में दिखाई देता है।

नहीं। स्किनकेयर प्रोडक्ट्स केवल त्वचा की ऊपरी परत (Epidermis) पर काम करते हैं। अगर मुहांसों का कारण पेट की एसिडिटी या कब्ज़ है, तो आप कितनी भी महंगी क्रीम लगा लें, मुहांसे बार-बार लौट कर आएंगे। स्थायी इलाज अंदर से ही संभव है।

हाँ, कुछ मामलों में। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि भारी डेयरी प्रोडक्ट्स (खासकर बाज़ार का पैकेटबंद दूध) पचने में भारी होते हैं। यह शरीर में कफ दोष और हॉर्मोनल इम्बैलेंस बढ़ाते हैं, जिससे सिस्टिक एक्ने तेज़ी से ट्रिगर हो सकता है

त्वचा का रूखापन शरीर में बढ़े हुए वात दोष का लक्षण है। जब गट में रूखापन बढ़ जाता है और कब्ज़ रहने लगती है, तो शरीर ज़रूरी फैट्स और न्यूट्रिएंट्स को सोख (Absorb) नहीं पाता। इसके कारण त्वचा को अंदरूनी नमी (Hydration) नहीं मिलती और वह फटने लगती है।

जी हाँ। मानसिक तनाव शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) हॉर्मोन बढ़ाता है। यह हॉर्मोन सीधे गट के माइक्रोबायोम को डैमेज करता है, पाचन धीमा करता है और त्वचा के कोलेजन (Collagen) को तोड़ता है, जिससे झुर्रियां और मुहांसे बहुत तेज़ी से आते हैं।

त्रिफला पेट की सफाई के लिए एक जादुई रसायन है। यह आंतों में जमे पुराने मल और आम को बाहर निकालता है। जब पेट की सफाई रोज़ाना अच्छे से होती है, तो खून में टॉक्सिन्स नहीं जाते, जिससे त्वचा अपने आप प्राकृतिक रूप से ग्लो करने लगती है।

मुहांसे और खुजली मुख्य रूप से रक्त में घुले अतिरिक्त पित्त (गर्मी) के कारण होते हैं। विरेचन थेरेपी में औषधीय घी और जड़ी-बूटियों के ज़रिए शरीर की सारी एक्स्ट्रा गर्मी और टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे त्वचा को तुरंत ठंडक मिलती है।

लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स लेना गट के लिए बेहद नुकसानदायक है। वे मुहांसों वाले बैक्टीरिया के साथ गट के अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देते हैं। इससे लीकी गट (Leaky Gut) की समस्या पैदा होती है और दवा छोड़ने के बाद एक्ने और भी भयंकर रूप में वापस आते हैं।

आप रोज़ सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में थोड़ा सा आंवला या एलोवेरा (Kumari) का रस मिलाकर पी सकते हैं। 

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