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Diabetes से पहले Body कौन से Silent Signals देती है — Ayurveda की नज़र से

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

डायबिटॶज रातों-रात होने वाली कोई अचानक बीमारी नहीं है। जब आपकी मेडिकल रिपोर्ट में ब्लड शुगर का स्तर पहली बार खतरे के निशान को पार करता है, तो उससे कई साल पहले से ही आपका शरीर अंदर ही अंदर एक खामोश संघर्ष कर रहा होता है।

हम अक्सर शरीर की इन शुरुआती चेतावनियों को रोज़मर्रा की थकावट, बढ़ती उम्र या मौसम का बदलाव मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। जब तक हम इन मूक अलार्म्स को समझ पाते हैं, तब तक शरीर का पूरा मेटाबॉलिज़्म (Metabolism) एक गहरे असंतुलन का शिकार हो चुका होता है।

ब्लड शुगर बढ़ने से पहले शरीर में यह खामोश बदलाव क्यों आते हैं?

जब कोशिकाएं (Cells) खून से शुगर को सोखना बंद कर देती हैं, तो शरीर को ऊर्जा नहीं मिलती और खून में शर्करा तैरने लगती है। इस खतरनाक स्थिति के पीछे शरीर के कई अंदरूनी सिस्टम्स का धीमा पड़ना ज़िम्मेदार होता है।

  • इंसुलिन का विरोध: कोशिकाओं के ऊपर ज़हरीले फैट की परत जमने के कारण शरीर इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) का शिकार हो जाता है, जिससे पैंक्रियाज़ (Pancreas) पर भारी दबाव पड़ता है।
  • लगातार रहने वाली थकावट: जब खाया हुआ भोजन ऊर्जा में नहीं बदलता, तो 8 घंटे की नींद के बाद भी इंसान क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) महसूस करता है।
  • हॉर्मोन्स का बिगड़ना: खराब दिनचर्या और तनाव के कारण एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine system) पूरी तरह कनफ्यूज़ हो जाता है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर हमेशा बढ़ा रहता है।
  • पाचन तंत्र का धीमा पड़ना: जब शरीर की प्राकृतिक पाचन की प्रक्रिया कमज़ोर होती है, तो भोजन रस के बजाय 'आम' (Toxins) बनाने लगता है।

डायबिटॶज की शुरुआत में दोषों का असंतुलन कितने प्रकार का होता है?

हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए ब्लड शुगर बिगड़ने से पहले शरीर में दिखने वाले दोषों के असंतुलन भी अलग-अलग होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इसे मुख्य रूप से इन प्रकारों में देखा जाता है:

  • कफ-प्रधान असंतुलन: यह सबसे आम प्रकार है जहाँ शरीर में भारीपन आ जाता है, सुस्ती छाई रहती है और लाख कोशिशों के बाद भी वज़न नियंत्रण (Weight management) करना असंभव सा लगने लगता है।
  • पित्त-प्रधान असंतुलन: इसमें शरीर में अत्यधिक गर्मी (Heat) और एसिडिटी बढ़ जाती है। बार-बार तेज़ भूख लगती है और पैरों के तलवों या हथेलियों में पसीने के साथ तेज़ जलन महसूस होती है।
  • वात-प्रधान असंतुलन: यह स्थिति नसों को सुखा देती है। इंसान बहुत ज़्यादा दुबला होने लगता है, शरीर में खुश्की आ जाती है और उसे लगातार मानसिक बेचैनी व घबराहट बनी रहती है।

क्या आपके शरीर में भी ब्लड शुगर बिगड़ने के ये शुरुआती संकेत नज़र आ रहे हैं?

हम अक्सर अपनी दिनचर्या में इतने व्यस्त होते हैं कि शरीर की इन चीखती हुई चेतावनियों को अनसुना कर देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): गर्दन के पीछे, बगलों (Armpits) या जांघों के आस-पास की त्वचा का अचानक मोटा और काला पड़ जाना हाई इंसुलिन का सबसे बड़ा और साइलेंट संकेत है।
  • हाथ-पैरों में चींटियाँ चलना: बिना किसी कारण के पैरों या उंगलियों में झुनझुनी (Tingling sensation) महसूस होना या सुन्नपन आना, जो नसों में शुगर के जमाव का इशारा है।
  • खाने के तुरंत बाद भयंकर नींद आना: दोपहर का भोजन करने के बाद शरीर में ऊर्जा आने के बजाय ऐसी भयंकर सुस्ती आना कि आंखें खुली रखना मुश्किल हो जाए।
  • घाव का जल्दी न भरना: छोटी सी खरोंच या कट लगने पर भी उसका कई दिनों या हफ्तों तक ठीक न होना और उसमें बार-बार इन्फेक्शन (Infection) हो जाना।

इस स्थिति में लोग क्या भारी गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएं?

इन शुरुआती संकेतों को देखकर लोग अक्सर इंटरनेट की आधी-अधूरी जानकारी के सहारे ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर के लिए धीमा ज़हर बन जाते हैं।

  • सिर्फ चीनी छोड़कर शुगर-फ्री खाना: लोग प्राकृतिक मीठा छोड़कर आर्टिफिशियल स्वीटनर्स (Artificial Sweeteners) खाने लगते हैं, जो आंतों के गुड बैक्टीरिया को मार देते हैं और इंसुलिन को और ज़्यादा भड़काते हैं।
  • खाना छोड़ देना या भूखे रहना: वज़न कम करने की जल्दबाज़ी में अचानक खाना छोड़ देने से मेटाबॉलिज़्म और धीमा हो जाता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं गंभीर रूप ले लेती हैं।
  • केवल फास्टिंग शुगर पर भरोसा करना: कई लोग खाली पेट की शुगर चेक करके खुश हो जाते हैं, जबकि असली समस्या खाने के बाद के ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar levels) के बढ़ने में छिपी होती है।
  • भविष्य की जटिलताएं: इन सिग्नल्स को इग्नोर करने का सीधा परिणाम यह होता है कि कुछ ही सालों में इंसान पूरी तरह टाइप 2 डायबिटॶज (type 2 diabetes) की चपेट में आ जाता है और उसे उम्र भर गोलियाँ खानी पड़ती हैं।

आयुर्वेद इन साइलेंट सिग्नल्स और इनके मूल कारण को कैसे देखता है?

आधुनिक चिकित्सा इन संकेतों को केवल ब्लड टेस्ट में आए नंबरों से मापती है, जबकि आयुर्वेद इसे 'प्रमेह' की शुरुआत मानता है और इसके लिए शरीर की अग्नि और धातुओं की विकृति को ज़िम्मेदार ठहराता है।

  • जठराग्नि की मंदता: आयुर्वेद मानता है कि हमारी सुविधाजनक जीवनशैली (Convenience lifestyle) के कारण जठराग्नि (पाचन की आग) कमज़ोर हो जाती है। जब खाना पचता नहीं है, तो वह 'आम' (Toxins) बनकर पूरे शरीर में फैल जाता है।
  • मेद धातु (फैट) का अत्यधिक संचय: जब जठराग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर में मेद धातु (Fat tissue) अपनी प्राकृतिक सीमा से ज़्यादा बढ़ने लगता है। यह बढ़ा हुआ ज़िद्दी फैट ही शरीर के सभी स्रोतस (Channels) को ब्लॉक कर देता है।
  • कफ और क्लेद का बढ़ना: गलत खानपान से शरीर में कफ और क्लेद (Fluid/Moisture) बहुत अधिक बढ़ जाता है, जो धीरे-धीरे यूरिन (Urine) के रास्ते बाहर निकलने लगता है और मधुमेह (Diabetes) का रूप ले लेता है।

ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने शरीर को भविष्य की इस बड़ी बीमारी से बचाने के लिए आपको अपनी रसोई को ही अपना सबसे बड़ा क्लिनिक बनाना होगा। अपनी आयुर्वेदिक डाइट में ये अनिवार्य बदलाव आज ही करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - कफ शामक और अग्नि बढ़ाने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - स्रोतस ब्लॉक करने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ (Barley), रागी, ज्वार, बाजरा, बिना पॉलिश किया हुआ ब्राउन राइस। नया चावल, वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स और पास्ता।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) करेला, परवल, लौकी, पालक, मेथी, सहजन (Drumsticks)। बहुत अधिक आलू, शकरकंद, कटहल और डिब्बाबंद सब्ज़ियाँ।
फल (Fruits) जामुन, पपीता, सेब, अमरूद, आंवला (सीमित मात्रा में)। कोल्ड-स्टोरेज के फल, अत्यधिक पके हुए मीठे आम, पैकेटबंद फलों के जूस।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी, कच्ची घानी सरसों का तेल, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा या मार्जरीन।
पेय पदार्थ (Beverages) दालचीनी और मेथी का गर्म पानी, ताज़ा मट्ठा, धनिया का पानी। कोल्ड ड्रिंक्स, डब्बा बंद मीठे शेक्स, और अत्यधिक चाय या कॉफी।

साइलेंट सिग्नल्स को रोकने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे शक्तिशाली और दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के पैंक्रियाज़ को ताकत देते हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस को जड़ से खत्म करते हैं:

  • मेथी (Fenugreek): ब्लड शुगर के स्पाइक्स को रोकने के लिए मेथी (Fenugreek seeds) एक रामबाण औषधि है। यह फाइबर से भरपूर होती है और शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स के टूटने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है।
  • गिलोय (Giloy): अगर शरीर में लगातार पुरानी थकावट और कमज़ोरी बनी रहती है, तो गिलोय (Giloy) इम्यूनिटी को रीबूट करके शरीर से सारे ज़हरीले टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देती है।
  • त्रिफला (Triphala): पेट को साफ रखने और आंतों की सुस्ती को तोड़ने के लिए रोज़ रात को हल्के गर्म पानी के साथ त्रिफला (Triphala) का सेवन करना मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करने का सबसे सुरक्षित उपाय है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): लगातार रहने वाले मानसिक तनाव (Mental stress) और कॉर्टिसोल को कम करने के लिए अश्वगंधा (Ashwagandha) नसों को फौलादी ताकत देता है और शरीर की ऊर्जा को वापस लौटाता है।

ब्लड शुगर को संतुलित करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब शरीर में फैट (मेद धातु) और 'आम' बहुत गहराई तक नसों में जम चुका हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर के चैनल्स को तुरंत खोलने का काम करती हैं:

  • उद्वर्तन (Udvartana): सूखे और गर्म हर्बल पाउडर से की जाने वाली यह तेज़ मालिश त्वचा के नीचे जमे हुए ज़िद्दी कफ और ज़हरीले फैट को तेज़ी से पिघलाती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस को तोड़ने में उद्वर्तन (Udvartana) थेरेपी एक जादुई प्रक्रिया है।
  • विरेचन (Virechana): आंतों और लिवर को गहराई से डिटॉक्स करने के लिए विरेचन थेरेपी (Virechana) की जाती है। यह जमे हुए अतिरिक्त पित्त और कचरे को मल के रास्ते बाहर निकालकर पैंक्रियाज़ पर से सारा प्रेशर हटा देती है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): शुद्ध औषधीय तेलों से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश (Abhyanga massage) शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और नसों की कमज़ोरी (Neurological issues) को जड़ से खत्म करती है।

ब्लड शुगर के पूरी तरह संतुलित होने में कितना समय लगता है?

बरसों से सुस्त पड़े मेटाबॉलिज़्म और ब्लॉक हो चुके स्रोतस को दोबारा प्राकृतिक रूप से एक्टिव करने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि मज़बूत होगी, पेट का भारीपन और कब्ज़ दूर होगी। खाने के बाद आने वाली भयंकर नींद और सुस्ती में भारी कमी आनी शुरू हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: शरीर के अंदर जमा हुआ 'आम' खत्म होने लगेगा। नसों की झुनझुनी गायब हो जाएगी, त्वचा के काले निशान हल्के पड़ने लगेंगे और ब्लड शुगर के स्पाइक्स काफी हद तक कम हो जाएंगे।
  • 5-6 महीने: आपका इंसुलिन रेजिस्टेंस टूट जाएगा और कोशिकाएं ऊर्जा सोखना शुरू कर देंगी। आपका शरीर प्राकृतिक रूप से संतुलित हो जाएगा और आप भविष्य की इस बड़ी बीमारी से सुरक्षित हो जाएंगे।

मरीज़ों के अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटॶज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटॶज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयाँ उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। 

हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटॶज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयाँ शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 

4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटॶज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

इस साइलेंट स्थिति (Pre-diabetes) को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और स्पष्ट अंतर है। आइए इसे गहराई से समझते हैं:

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य जब तक शुगर बहुत हाई न हो जाए, तब तक इंतज़ार करना और फिर जीवन भर के लिए गोलियाँ शुरू कर देना। शुरुआती सिग्नल्स दिखते ही जठराग्नि को बढ़ाना, 'आम' को बाहर निकालना और स्रोतस को तुरंत खोलना।
शरीर को देखने का नज़रिया केवल पैंक्रियाज़ और इंसुलिन के नंबरों पर पूरा फोकस रखना। पूरे शरीर को एक सिस्टम मानना जहाँ कमज़ोर पाचन (Gut) और बढ़ा हुआ फैट असल बीमारी की जड़ हैं।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट में केवल कैलोरी और चीनी कम करने पर ज़ोर, खाने की प्रकृति (तासीर) पर कोई ध्यान नहीं। व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार दोष-शामक आहार, सही कुकिंग मेथड्स और स्वस्थ दिनचर्या को ही सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ शुरू होने पर डोज़ उम्र के साथ बढ़ती चली जाती है। शरीर अंदर से इतना फौलादी हो जाता है कि वह प्राकृतिक रूप से ब्लड शुगर को सोखना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद से शरीर के इन शुरुआती सिग्नल्स को पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी है:

  • बिना कुछ किए वज़न का तेज़ी से गिरना: अगर आप अच्छी डाइट ले रहे हैं, फिर भी एक-दो महीने में ही आपका 5-8 किलो वज़न अचानक से कम हो जाए।
  • आंखों के सामने अचानक धुंधलापन आना: अगर विज़न (Vision) अचानक से ब्लर (Blurry) हो जाए और चश्मा बदलने के बाद भी साफ दिखाई न दे।
  • यूरिन में चींटियाँ लगना: अगर बार-बार टॉयलेट जाने की मजबूरी हो और यूरिन वाली जगह पर चींटियाँ नज़र आने लगें (यह बहुत अधिक शुगर पास होने का संकेत है)।
  • बार-बार त्वचा और यूरिन में इन्फेक्शन होना: अगर आपको लगातार भयंकर फंगल इन्फेक्शन हो रहा हो या महिलाओं में यूटीआई (UTI) किसी भी दवा से ठीक न हो रहा हो।

निष्कर्ष

डायबिटॶज अचानक आसमान से टपकने वाली बीमारी नहीं है। गर्दन के पीछे का कालापन, पैरों की झुनझुनी, घावों का न भरना और खाने के बाद भयंकर नींद आना, ये सब आपके शरीर की वो चीखें हैं जो आपको बता रही हैं कि आपका मेटाबॉलिज़्म और इंसुलिन सिस्टम बुरी तरह फेल हो रहा है। जब आप इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करते हैं या केवल शुगर-फ्री की गोलियों से खुद को सुरक्षित मान लेते हैं, तो आप शरीर में ज़हरीले फैट और 'आम' (Toxins) को पैंक्रियाज़ पर कब्ज़ा करने की खुली छूट दे रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें और अपने शरीर की आवाज़ सुनें। अपनी जठराग्नि को सुधारें, मैदा और जंक फूड को कूड़ेदान में डालें। मेथी, त्रिफला और गिलोय जैसी दिव्य आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं और पंचकर्म की उद्वर्तन व विरेचन थेरेपी से अपने शरीर के रोम-रोम को शुद्ध करें। अपने शरीर को डायबिटॶज की उम्र कैद से बचाने और मेटाबॉलिज़्म को स्थायी रूप से रीबूट करने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

नहीं, यह एक बहुत बड़ा मिथक है। डायबिटॶज केवल मीठा खाने से नहीं होती, बल्कि यह आपकी कमज़ोर जठराग्नि और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल का नतीजा है, जहाँ शरीर कार्बोहाइड्रेट्स को सही तरीके से ऊर्जा में नहीं बदल पाता और इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा हो जाता है।

बिल्कुल नहीं। यह कोई बाहरी गंदगी या धूप का असर नहीं है। इस कालेपन (Acanthosis Nigricans) का सीधा संबंध आपके खून में दौड़ रहे अत्यधिक इंसुलिन से है। जब आपका मेटाबॉलिज़्म सुधरेगा और इंसुलिन लेवल कम होगा, तो यह कालापन अपने आप खत्म हो जाएगा।

स्किन टैग्स त्वचा पर लटकने वाले छोटे-छोटे मांस के टुकड़े होते हैं, जो अक्सर गर्दन, अंडरआर्म्स या पलकों पर निकलते हैं। आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों मानते हैं कि बहुत अधिक स्किन टैग्स का निकलना हाई इंसुलिन और बिगड़े हुए मेटाबॉलिज़्म का एक बहुत बड़ा साइलेंट सिग्नल है।

जब आपका शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार होता है, तो खाने में मौजूद ग्लूकोज़ कोशिकाओं (Cells) के अंदर ऊर्जा नहीं बन पाता। शरीर का सारा ज़ोर उस अत्यधिक शुगर को बैलेंस करने में लग जाता है, जिससे ब्रेन को सही ऊर्जा नहीं मिलती और आपको क्रैश (भयंकर सुस्ती) महसूस होता है।

शत-प्रतिशत। रात की नींद के दौरान शरीर अपने हॉर्मोन्स और इंसुलिन की मरम्मत करता है। रोज़ाना देर रात तक जागने (Night shifts या स्क्रीन टाइम) से कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) बढ़ता है, जो सीधे तौर पर ब्लड शुगर को बढ़ा देता है।

हाँ, बाहरी रूप से वात-शामक आयुर्वेदिक तेलों (जैसे अभ्यंग मालिश) से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और नसों को आराम मिलता है। लेकिन स्थायी आराम के लिए इसके साथ-साथ अंदरूनी जठराग्नि को ठीक करके शुगर को कंट्रोल करना भी उतना ही ज़रूरी है।

जौ आयुर्वेद में प्रमेह (Diabetes) के लिए एक सर्वश्रेष्ठ अनाज माना गया है। यह रूखा (Dry) और कफ-शामक होता है। रोज़ाना जौ का पानी या जौ की रोटी खाने से शरीर का अतिरिक्त क्लेद (Fluid) बाहर निकलता है और इंसुलिन का काम आसान हो जाता है।

बिल्कुल नहीं। प्राकृतिक फलों में विटामिन्स और फाइबर होता है जो शरीर के लिए ज़रूरी है। आपको सिर्फ पैकेटबंद जूस, अत्यधिक पके हुए मीठे आम, चीकू या केले से बचना है। जामुन, सेब, पपीता और अमरूद जैसे फल सीमित मात्रा में खाना पूरी तरह सुरक्षित है।

अगर बार-बार प्यास लगने के साथ-साथ आपको बहुत अधिक यूरिन (पेशाब) भी आ रहा है और मुँह हमेशा सूखा (Dry mouth) महसूस होता है, तो यह ब्लड शुगर बढ़ने का एक बहुत क्लासिक संकेत है। इसे केवल मौसम की गर्मी मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

कच्चा मेथी दाना पचने में भारी और बहुत ज़्यादा गर्म हो सकता है, जिससे कुछ लोगों को एसिडिटी हो सकती है। इसे रात भर एक गिलास पानी में भिगोकर सुबह उस पानी को पीना और नर्म हुए दानों को चबाना सबसे सही और असरदार आयुर्वेदिक तरीका है।

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