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PKD (Polycystic Kidney) - Genetic है, क्या आयुर्वेद से Slow होता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल पॉलीसिस्टिक किडनॶ डिज़ीज़ (PKD) की शिकायत बहुत आम हो गई है। लोग अक्सर इस बात को लेकर भयंकर उलझन में रहते हैं कि यह जेनेटिक (Genetic) है तो क्या इसका कोई इलाज नहीं है। इस गलतफहमी में वे इंटरनेट देखकर गलत डाइट अपनाते हैं या दर्द होने पर गलत पेनकिलर्स (Painkillers) खाते रहते हैं, जिससे किडनॶ की नसें और भड़क जाती हैं। एलोपैथी में इस बीमारी को दबाने के लिए अक्सर बीपी की भारी गोलियाँ या सीधे डायलिसिस (Dialysis) और किडनॶ ट्रांसप्लांट की सलाह दे दी जाती है। ये चीजें कुछ समय के लिए लक्षणों को सुन्न ज़रूर कर देती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से शरीर अंदर से कमज़ोर हो जाता है और किडनॶ सूखने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या 'वात-कफ' दोष के भड़कने और मूत्रवह स्रोतस में 'ग्रंथि' (Cysts) बनने से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से आपकी बीमारी के असली कारण को पकड़कर इस भयंकर खतरे को जड़ से मिटाता है और सिस्ट की ग्रोथ को धीमा (Slow) करता है ताकि आप बिना डरे अपनी ज़िंदगी जी सकें।

PKD में 'असली पहचान' क्या है?

पॉलीसिस्टिक किडनॶ डिज़ीज़ एक जेनेटिक बीमारी है जिसमें किडनॶ के अंदर पानी से भरी ढेरों गाँठें (Cysts) बन जाती हैं। जैसे-जैसे ये गाँठें बड़ी होती हैं, किडनॶ का असली आकार भयंकर रूप से सूज जाता है। लेकिन यह बीमारी किस प्रकार से बढ़ रही है, यही असली पहचान है:

  • ADPKD (बड़ों में): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें माता या पिता में से किसी एक से जेनेटिक म्यूटेशन आता है। इसके भयंकर लक्षण अक्सर 30 या 40 की उम्र के बाद दिखाई देते हैं, जब किडनॶ में ढेरों गाँठें बन जाती हैं और बीपी बढ़ने लगता है।
  • ARPKD (बच्चों में): यह बहुत दुर्लभ और भयंकर प्रकार है, जो बचपन या जन्म से ही किडनॶ और लिवर को डैमेज कर देता है।

बीपी की गोलियों का इस्तेमाल सिर्फ बाहरी इलाज है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर किडनॶ में जमा हो रहे तरल पदार्थ और वात के भयंकर प्रकोप में चल रही होती है।

किडनॶ  सिस्ट के भयंकर प्रकार

किडनॶ में सिस्ट बनने और डैमेज को मुख्य रूप से इस तरह बाँटा जा सकता है:

  • एक्यूट सिस्ट रप्चर (Acute Cyst Rupture): अचानक भारी वज़न उठाने या चोट लगने पर किडनॶ की गाँठ का भयंकर रूप से फट जाना, जिससे पेशाब में खून आ जाता है और असहनीय दर्द होता है।
  • क्रोनिक किडनॶ डैमेज (CKD): सालों तक वात और सिस्ट बढ़ने से किडनॶ के फिल्टर का सूख जाना, जिससे शरीर में हर समय भयंकर कमज़ोरी और झुनझुनाहट बनी रहती है।
  • मल्टीपल ऑर्गन सिस्ट (Multiple Organ Cysts): जब यह बीमारी भयंकर रूप ले लेती है, तो सिस्ट सिर्फ किडनॶ में नहीं, बल्कि लिवर और पैंक्रियास तक में फैल जाते हैं।

किडनॶ के डैमेज होने के  शारीरिक संकेत

शरीर द्वारा दिए जाने वाले डरावने लक्षण इस प्रकार हैं:

  • कमर और पेट में भयंकर दर्द: कमर के निचले हिस्से (Flank pain) या पेट में ऐसा भयंकर दर्द होना जैसे कोई सुई चुभ रही हो।
  • पेशाब में खून और झाग आना: पेशाब का रंग लाल हो जाना या उसमें भयंकर झाग बनना, जो प्रोटीन लीक होने का संकेत है।
  • हाई बीपी (High BP): कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर का बेकाबू हो जाना और दवाइयों से भी नॉर्मल न होना।
  • पैरों में भयंकर सूजन: किडनॶ के फिल्टर खराब होने से शरीर का सारा पानी पैरों और चेहरे पर भयंकर सूजन के रूप में जमा हो जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत पेनकिलर्स रोकें और अपनी जाँच कराएँ।

PKD को बुलाने वाले असली और छिपे हुए कारण

इस भयंकर बीमारी के पीछे जेनेटिक्स के अलावा गहरे अंदरूनी कारण ये होते हैं:

  • जेनेटिक म्यूटेशन (Genetic Mutation): माता या पिता से मिले खराब जीन के कारण किडनॶ की नलियों (Tubules) का भयंकर रूप से फैलकर गाँठ बन जाना।
  • वात दोष का भयंकर प्रकोप: गलत खानपान और रूखा भोजन खाने से शरीर में वात (हवा) भड़क जाती है, जो इन गाँठों के आकार को तेज़ी से बढ़ा देती है।
  • जठराग्नि की कमज़ोरी (आम): पाचन खराब होने से शरीर में भयंकर 'आम' (गंदगी) बनता है, जो किडनॶ में जाकर सिस्ट के अंदर पानी और ज़हर भर देता है।
  • भारी तनाव और कैफीन: चाय, कॉफी और भयंकर तनाव कॉर्टिसोल को बढ़ाते हैं, जो किडनॶ की नसों पर भयंकर दबाव डालता है।

इन 'Hidden Risks' को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस स्थिति को अगर सिर्फ 'सामान्य दर्द' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • किडनॶ फेलियर (ESRD): किडनॶ के पूरी तरह डैमेज होने से इंसान को जीवन भर डायलिसिस (Dialysis) या ट्रांसप्लांट के सहारे रहना पड़ता है।
  • ब्रेन एन्यूरिज्म (Brain Aneurysm): भयंकर बीपी के कारण दिमाग की नसें फूलकर फट सकती हैं, जिससे लकवा मार सकता है।
  • लिवर डैमेज: किडनॶ के साथ-साथ लिवर में भी भयंकर गाँठें बन जाती हैं, जिससे लिवर काम करना बंद कर देता है।

किडनॶ के सिस्ट पर आयुर्वेद का क्या चमत्कारी नज़रिया है?

आयुर्वेद में PKD को 'ग्रंथि रोग' (Tumor/Cyst) और 'मूत्रवह स्रोतस दृष्टि' (Kidney channels damage) कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, कफ दोष के कारण गाँठें बनती हैं और वात दोष के भयंकर प्रकोप से ये गाँठें बड़ी होकर किडनॶ को सुखा देती हैं। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि दर्द सिस्ट के फटने से आ रहा है या किडनॶ के सिकुड़ने से। आयुर्वेद में बस सिस्ट के दर्द को सुन्न करना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि नसों को अंदरूनी चिकनाहट मिले, सूजन खत्म हो और वात-कफ हमेशा के लिए शांत हो ताकि सिस्ट का बढ़ना धीमा (Slow) हो जाए।

जीवा आयुर्वेद किडनॶ को सुरक्षित रखने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को होने वाले दर्द की जगह, पेशाब की जलन और सूजन की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ की अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) रिपोर्ट और ली जा रही भारी बीपी की गोलियों का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात-कफ दोष को पकड़ने के बाद ही किडनॶ की अंदरूनी सूजन कम करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

किडनॶ को प्राकृतिक रूप से हील करने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में किडनॶ को ताकत देने, सूजन कम करने और सिस्ट को सिकोड़ने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • पुनर्नवा (Punarnava): यह किडनॶ के लिए आयुर्वेद का सबसे बड़ा प्राकृतिक चमत्कारी वरदान है। यह नई कोशिकाएँ बनाती है और सिस्ट के भयंकर दर्द व सूजन को तुरंत खत्म करती है।
  • कचनार गुग्गुल (Kanchanar Guggulu): यह शरीर की किसी भी 'ग्रंथि' (गाँठ) को पिघलाने और उसके आकार को धीमा करने की सबसे अचूक दवा है।
  • गोक्षुर (Gokshura): यह किडनॶ के फिल्टर को साफ करता है और पेशाब के रास्ते जमे भयंकर 'आम' को बाहर निकालता है।
  • वरुण (Varuna): यह मूत्रवह स्रोतस की भयंकर ऐंठन को खोलता है और किडनॶ की कमज़ोर हो चुकी नसों को फौलाद जैसी ताकत देता है।

किडनॶ को ताकत देने वाली पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, किडनॶ को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • बस्ती (Basti/Enema): यह बढ़े हुए वात दोष को जड़ से खत्म करने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। औषधीय काढ़े का एनीमा देने से किडनॶ और आंतों को सीधा पोषण मिलता है।
  • विरेचन (Virechana): शरीर से पुराने ज़हर और भयंकर पित्त को निकालने के लिए यह एक अचूक चिकित्सा है, जिससे किडनॶ पर दबाव कम होता है।
  • स्वेदन (Swedana): औषधीय भाप से शरीर के पसीने के ज़रिए भयंकर टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जाता है, जिससे किडनॶ का बोझ कम होता है।

वात-कफ को शांत करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस भयंकर बीमारी में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • गाय का शुद्ध घी: रोज़ाना अपने खाने में गाय का शुद्ध घी पिएँ। यह वात को शांत कर किडनॶ की सूखी नसों को चिकनाहट (Lubrication) देता है।
  • गर्म और सुपाच्य भोजन: मूंग दाल, लौकी और ताज़ा बना गर्म भोजन लें, जो पचने में हल्का हो।
  • धनिया का पानी: सुबह खाली पेट धनिया के बीजों का पानी पीने से भयंकर पित्त और यूरिन इन्फेक्शन तुरंत शांत होता है।

क्या न खाएँ?

  • एनिमल प्रोटीन और भारी दालें: मांस, अंडे, राजमा और छोले शरीर में भयंकर यूरिक एसिड बनाते हैं, जो सीधे किडनॶ के फिल्टर को डैमेज करता है।
  • ठंडी और बासी चीजें: फ्रिज का ठंडा पानी, दही, आइसक्रीम और बासी खाना वात भड़काते हैं, इन्हें तुरंत बंद कर दें।
  • ज़्यादा नमक और कैफीन: नमक और कॉफी किडनॶ के सिस्ट में पानी भरते हैं जिससे उनका आकार भयंकर रूप से बढ़ जाता है।

जीवा आयुर्वेद में रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर की समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, दर्द की रफ्तार और यूरिन में बदलाव को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा अनुभव किए गए दर्द के बढ़ने के समय और बीपी की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, पानी पीने की आदत और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर जमे 'आम' और वात-कफ दोष के भयंकर स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

सिस्ट को Slow होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में PKD का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर कमर में भारीपन अभी शुरू हुआ है, तो पुनर्नवा और सही आहार से 3 से 4 हफ्तों में ही भयंकर दर्द खत्म हो जाता है और बीपी नॉर्मल आने लगता है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर किडनॶ में सिस्ट बड़े हो चुके हैं, तो पंचकर्म और जड़ी-बूटियों से उनके बढ़ने की रफ़्तार को 'रीसेट' (Slow down) करने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और शुद्ध आहार का कड़ाई से पालन करता है, तो डायलिसिस का भयंकर खतरा कई सालों तक टल जाता है और जीवनस्तर बेहतर हो जाता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या बड़ा अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य किडनॶ फंक्शन को सुरक्षित रखना, दर्द और जटिलताओं को नियंत्रित करना शरीर के संतुलन, किडनॶ सपोर्ट और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना
नज़रिया समस्या को जेनेटिक या संरचनात्मक किडनॶ रोग के रूप में देखना इसे वात असंतुलन, सूजन और शरीर की समग्र कमजोरी से जोड़कर देखना
उपचार तरीका ब्लड प्रेशर कंट्रोल, दवाएँ, मॉनिटरिंग और आवश्यकता अनुसार डायलिसिस/अन्य प्रक्रियाएँ पुनर्नवा, कचनार गुग्गुल, आयुर्वेदिक सपोर्ट, योग और जीवनशैली सुधार
डाइट और लाइफस्टाइल नमक नियंत्रण, पर्याप्त पानी, नियमित जाँच और किडनॶ-फ्रेंडली डाइट की सलाह संतुलित आहार, वात-शामक दिनचर्या, हल्का भोजन और नियमित दिनचर्या पर ज़ोर
लंबा असर रोग की प्रगति को धीमा करने के लिए लगातार निगरानी आवश्यक हो सकती है समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली संतुलन के माध्यम से बेहतर गुणवत्ता वाली जीवनशैली पर ध्यान

डॉक्टर की सलाह कब लें?

किडनॶ के दर्द में अगर ये भयंकर संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • पेशाब पूरी तरह से रुक जाए या उसमें बहुत भयंकर गाढ़ा खून आने लगे।
  • कमर से लेकर पेट तक ऐसा दर्द उठे कि उल्टी होने लगे और चक्कर आ जाएँ।
  • साँस लेने में भयंकर तकलीफ हो और छाती में भारीपन महसूस हो (फेफड़ों में पानी भरने का संकेत)।
  • चेहरे और पैरों पर इतनी सूजन आ जाए कि उंगली दबाने पर गड्ढा बन जाए।

निष्कर्ष

निष्कर्ष के तौर पर, पॉलीसिस्टिक किडनॶ डिज़ीज़ (PKD) भले ही जेनेटिक हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप हाथ पर हाथ रखकर डायलिसिस का इंतज़ार करें। यह शरीर में वात-कफ दोष के भड़कने और 'आम' जमा होने का डरावना परिणाम है। सिर्फ पेनकिलर या बीपी की गोलियाँ खाकर लक्षणों को सुन्न करना आपकी किडनॶ को हमेशा के लिए कमज़ोर कर सकता है। असली पहचान करके शरीर को अंदर से पोषण देना, पंचकर्म जैसी चमत्कारी थेरेपी लेना, पुनर्नवा-कचनार गुग्गुल जैसी अचूक जड़ी-बूटियाँ अपनाना और गाय के घी का शुद्ध वात-नाशक आहार ही इसका सबसे सुरक्षित इलाज है। जीवा आयुर्वेद आपकी किडनॶ को प्राकृतिक रूप से इतना ताकतवर बना देता है कि सिस्ट का बढ़ना भयंकर रूप से धीमा हो जाता है और आप बिना किसी डर के अपनी ज़िंदगी मज़े से जी सकें।

FAQs

नॉर्मल सिस्ट उम्र के साथ बनते हैं और नुकसान नहीं करते। जबकि PKD जेनेटिक है, जिसमें किडनॶ के अंदर अनगिनत गाँठें बनकर किडनॶ को भयंकर रूप से बड़ा और डैमेज कर देती हैं।

हाँ। आयुर्वेद जेनेटिक म्यूटेशन को बदल नहीं सकता, लेकिन वह शरीर के वात और कफ दोष को संतुलित कर सिस्ट के बढ़ने की रफ़्तार को बहुत धीमा (Slow down) कर सकता है, जिससे डायलिसिस से बचा जा सकता है।

पानी पीना ज़रूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा में पानी (ओवरहाइड्रेशन) से किडनॶ पर भयंकर दबाव पड़ता है। अपने आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही पानी की सही मात्रा तय करें।

जी हाँ। एनिमल प्रोटीन पचने में भारी होता है और शरीर में यूरिक एसिड बढ़ाता है। यह कमज़ोर किडनॶ के फिल्टर पर भयंकर दबाव डालता है, जिससे डैमेज तेज़ी से बढ़ता है।

बिल्कुल। पुनर्नवा किडनॶ के लिए सबसे चमत्कारी जड़ी-बूटी है। यह एक्स्ट्रा पानी और भयंकर सूजन को पेशाब के ज़रिए बाहर निकालती है और नई कोशिकाओं का निर्माण करती है।

कचनार गुग्गुल वात और कफ को शांत करने वाली सबसे प्राकृतिक औषधि है। यह शरीर की किसी भी तरह की 'ग्रंथि' (सिस्ट) को पिघलाने और उसके आकार को बढ़ने से रोकने में अचूक है।

हाँ। कैफीन किडनॶ के अंदर मौजूद सिस्ट को भयंकर रूप से उत्तेजित करता है, जिससे उनमें और ज्यादा तरल पदार्थ भर जाता है और उनका आकार तेज़ी से बढ़ता है।

हाँ। PKD के मरीज़ अक्सर भयंकर तनाव में रहते हैं। अश्वगंधा नसों को फौलाद जैसी ताकत देता है और कॉर्टिसोल को कम कर ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से कंट्रोल करता है।

बिल्कुल नहीं। NSAIDs जैसी एलोपैथिक पेनकिलर्स किडनॶ के फिल्टर को भयंकर रूप से डैमेज करती हैं और बची हुई किडनॶ को भी सुखा देती हैं।

जी हाँ। अगर समय रहते आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (पुनर्नवा, गोक्षुर), पंचकर्म और शुद्ध वात-नाशक डाइट को अपना लिया जाए, तो सिस्ट की ग्रोथ भयंकर रूप से धीमी हो जाती है और इंसान सालों तक बिना डायलिसिस के स्वस्थ रह सकता है।

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