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Piles का Operation करवाया था, 1 साल में वापस आ गया — Ayurveda से अब 2 साल ठीक

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गुदा मार्ग में होने वाली तकलीफ़ों में सबसे भयंकर और दर्दनाक अनुभव बवासीर यानी पाइल्स Piles का होता है। असहनीय दर्द, सूजन और मल त्याग के दौरान होने वाले रक्तस्राव से परेशान होकर हज़ारों लोग हर साल सर्जरी का रास्ता चुनते हैं। उन्हें लगता है कि एक बार ऑपरेशन हो गया, तो इस शर्मनाक और दर्दनाक बीमारी से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा।

लेकिन वास्तविकता यह है कि ज़्यादातर मामलों में सर्जरी के महज़ 8 से 12 महीनों के भीतर ही समस्या दोबारा उभरने लगती है। मल त्याग के समय फिर से चुभन महसूस होना और रक्त की बूँदें देखना किसी भी इंसान को हताश कर सकता है। जब तक बीमारी के मूल कारण को शरीर के भीतर से नष्ट नहीं किया जाता, तब तक कोई भी बाहरी कट या लेज़र सर्जरी आपको स्थायी राहत नहीं दे सकती।

Piles के ऑपरेशन के बाद भी यह बीमारी वापस क्यों आ जाती है?

ऑपरेशन के लिए लाखों रुपये खर्च करने और कई हफ़्तों के मुश्किल रिकवरी पीरियड से गुज़रने के बाद भी जब यह बीमारी वापस आती है, तो मरीज़ का मनोबल टूट जाता है। सर्जरी केवल एक स्थानीय उपाय Local measure है, संपूर्ण इलाज नहीं।

  • कब्ज़ का बना रहना: सर्जरी गुदा मार्ग के सूजे हुए मस्सों Hemorrhoidal mass को तो काट देती है, लेकिन आपकी कब्ज़ Constipation की उस पुरानी आदत को नहीं बदलती जो मल को कड़ा बनाती है। जब आप कड़े मल को त्यागने के लिए दोबारा ज़ोर लगाते हैं, तो वहाँ की नसें फिर से सूज जाती हैं।
  • पाचन तंत्र का कमज़ोर होना: हमारा पाचन तंत्र Digestive system अगर सही से काम नहीं कर रहा है और जठराग्नि मंद है, तो खाया हुआ भोजन पचने के बजाय पेट में सड़ता है और गैस बनाता है। यह गैस गुदा क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं Blood vessels पर अत्यधिक दबाव डालती है।
  • जीवनशैली में कोई बदलाव न करना: ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक लोग परहेज़ करते हैं, लेकिन उसके बाद वापस अपनी पुरानी और सुविधाजनक जीवनशैली में लौट आते हैं। फाइबर की कमी और जंक फूड का सेवन मस्सों को दोबारा जन्म देता है।
  • लीवर की कार्यक्षमता Liver Function: कई मामलों में, कमज़ोर लीवर के कारण पोर्टल वेन Portal vein में दबाव बढ़ जाता है, जिससे गुदा मार्ग की नसें फूलने लगती हैं। सर्जरी इस अंदरूनी दबाव को ठीक नहीं करती।

बवासीर Piles के मुख्य प्रकार क्या हैं?

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हर व्यक्ति में पाइल्स के लक्षण और उसकी गंभीरता अलग-अलग होती है। सही प्रकार को पहचाने बिना उसका सटीक इलाज संभव नहीं है।

  • अंदरूनी बवासीर Internal Hemorrhoids: यह गुदा के अंदरूनी हिस्से में होते हैं और आमतौर पर इनमें दर्द नहीं होता। मल त्याग के समय जब इनमें घर्षण होता है, तब यह फट जाते हैं और चमकीला लाल खून आता है।
  • बाहरी बवासीर External Hemorrhoids: यह गुदा के बाहरी किनारे पर होते हैं। इनमें भयंकर खुजली, दर्द और सूजन होती है। बैठने और चलने-फिरने में भी मरीज़ को भारी तकलीफ़ का सामना करना पड़ता है।
  • खूनी बवासीर Bleeding Piles: इस अवस्था में मल के साथ या मल के बाद खून की धार या बूँदें गिरती हैं। यह स्थिति शरीर में भारी कमज़ोरी और खून की कमी Anemia का कारण बन सकती है।
  • बादी बवासीर Blind Piles: इसमें खून तो नहीं आता, लेकिन मलद्वार के पास कठोर मस्से बन जाते हैं। इनमें लगातार एक चुभन और खुजली बनी रहती है, और लोअर एब्डोमिनल पेन व गैस की समस्या लगातार सताती है।

इस बीमारी के दोबारा वापस आने के शुरुआती संकेत

बीमारी रातों-रात भयानक रूप नहीं लेती। ऑपरेशन के कुछ महीनों बाद आपका शरीर आपको फिर से वही अलार्म देने लगता है, जिसे अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

  • मल त्याग के समय जलन और चुभन: टॉयलेट में बैठते ही ऐसा महसूस होना जैसे गुदा मार्ग में कांच के टुकड़े चुभ रहे हों या मलद्वार छिल गया हो।
  • गुदा के आस-पास खुजली Pruritus Ani: मल त्यागने के बाद पूरे दिन गुदा क्षेत्र में एक अजीब सी खुजली और बेचैनी बनी रहना, जो पब्लिक प्लेस में शर्मिंदगी का कारण बनती है।
  • टॉयलेट पेपर पर खून के धब्बे: मल त्यागने के बाद सफाई करते समय यदि टॉयलेट पेपर पर लाल खून के ताज़े धब्बे दिखाई दें, तो यह मस्सों के दोबारा बनने का सबसे बड़ा संकेत है।
  • पेट का अधूरा साफ होना: रोज़ टॉयलेट जाने के बाद भी ऐसा लगना कि मल पूरी तरह से बाहर नहीं आया है और मलाशय Rectum में भारीपन बना रहना।

बवासीर के मरीज़ क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

अज्ञानता और जल्दबाज़ी में मरीज़ कुछ ऐसे कदम उठा लेते हैं, जो इस समस्या को और ज़्यादा जटिल Complicate कर देते हैं और मस्सों को भयंकर रूप से सूजा देते हैं।

  • टॉयलेट में भारी ज़ोर Straining लगाना: पेट साफ न होने पर ज़बरदस्ती मल को बाहर धकेलने के लिए ज़ोर लगाना गुदा की कमज़ोर नसों पर भारी दबाव डालता है, जिससे वे सूजकर बाहर आ जाती हैं।
  • घंटों तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहना: टॉयलेट में फोन लेकर बैठना और लगातार बैठे रहने Long sitting की आदत से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर खिंचाव आता है, जो पाइल्स को सीधे तौर पर बुलावा देता है।
  • तेज़ केमिकल लैक्सेटिव्स का रोज़ाना इस्तेमाल: रात को पेट साफ करने वाली तेज़ और कृत्रिम गोलियाँ खाना आंतों को प्राकृतिक रूप से काम करना भुला देता है, जिससे आंतें मल को सुखाने लगती हैं।
  • मल के वेग को रोकना Suppressing urges: जब टॉयलेट जाने का प्राकृतिक प्रेशर आए, तब काम की व्यस्तता के कारण उसे रोक कर रखना। यह मल को आंतों में रोककर पत्थर जैसा कड़ा बना देता है।

Piles के इस चक्रव्यूह को आयुर्वेद कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान इसे केवल गुदा की नसों की सूजन Varicosity मानता है, जबकि आयुर्वेद इस समस्या को बहुत गहराई से 'अर्श' Arsha के रूप में देखता है, जो पूरे शरीर के दोषों के असंतुलन का परिणाम है।

  • जठराग्नि का मंद होना Agnimandya: पाचन और आयुर्वेद का स्पष्ट सिद्धांत है कि जब जठराग्नि Digestive fire कमज़ोर होती है, तो भोजन पचता नहीं है और 'आम' Toxins का निर्माण करता है, जो मल को भारी और दूषित कर देता है।
  • अपान वात की विकृति: मल और मूत्र को नीचे की ओर धकेलने की प्राकृतिक ज़िम्मेदारी 'अपान वात' की होती है। कब्ज़ और रूखे भोजन के कारण जब वात दोष बिगड़ जाता है, तो इसकी दिशा उल्टी हो जाती है।
  • दोषों के अनुसार अर्श: वात प्रधान पाइल्स रूखे और कड़े होते हैं, जिनमें दर्द ज़्यादा होता है। पित्त प्रधान पाइल्स में सूजन, लालिमा और रक्तस्राव Bleeding बहुत होता है, और कफ प्रधान पाइल्स आकार में बड़े, सफेद और चिकने होते हैं।
  • मांस और रक्त धातु की विकृति: लंबे समय तक अनुचित आहार के कारण जब शरीर की रक्त Blood और मांस Muscle धातु दूषित हो जाती है, तो वह गुदा मार्ग के रूप में बाहर उभरने लगती है, जिसे अर्श कहते हैं।

बवासीर को जड़ से खत्म करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने 'प्रोसेसर' को ठीक रखने के लिए आपको अपने खानपान में बदलाव करना होगा। इस डाइट को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं:

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - आंतों को चिकनाई देने वाले और मल मुलायम करने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - मल को सुखाने और ब्लीडिंग बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, जौ का दलिया। मैदा, वाइट ब्रेड, सूखे बिस्कुट, स्पाइसी नूडल्स।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी, नारियल का तेल, ऑलिव ऑयल। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड और मसालेदार खाना।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, पालक, शकरकंद उबले हुए। कच्चा और रूखा सलाद, भारी कटहल, बैंगन, हरी/लाल मिर्च।
फल Fruits पपीता, उबला हुआ सेब Stewed Apple, रात भर भीगी हुई मुनक्का, अंजीर। कच्चे या बिना मौसम के ठंडे फल, खट्टे फल जो जलन बढ़ाएं।
पेय पदार्थ Beverages गुनगुना पानी, छाछ जीरा और काले नमक के साथ, नारियल पानी। बर्फ का पानी, बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी, शराब Alcohol।

बवासीर में राहत देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे अद्भुत रसायन दिए हैं जो न केवल मल को प्राकृतिक रूप से मुलायम करते हैं, बल्कि गुदा की सूजी हुई नसों को वापस उनके सामान्य आकार में लाते हैं।

  • त्रिफला Triphala: यह कब्ज़ तोड़ने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी फॉर्मूला है। त्रिफला Triphala आंतों को कमज़ोर किए बिना मल को बल्क देता है और गुदा मार्ग के छिले हुए घावों को भरने Healing में मदद करता है।
  • बिल्व / बेल Bilva: जब आंतों में कमज़ोरी हो और मल कभी कड़ा तो कभी पतला आता हो जैसे आईबीएस IBS में, तब बिल्व Bilva आंतों की सूजन को कम करके मल को सही आकार प्रदान करता है।
  • नीम Neem: यह खून साफ करने वाली बेहतरीन औषधि है। जब पाइल्स में इन्फेक्शन, खुजली और सूजन हो, तो नीम Neem का सेवन और इसका लेप Ointment दोनों ही जादुई असर दिखाते हैं।
  • सूरन जिमीकंद / Elephant Foot Yam: आयुर्वेद में सूरन को अर्श Piles का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। यह पेट के 'आम' को सुखाता है और मस्सों के आकार को तेज़ी से सिकोड़ने का काम करता है।

Piles को ठीक करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब समस्या पुरानी हो जाए और औषधियां अकेला काम न कर पाएं, तब पंचकर्म की डीप क्लींजिंग थेरेपीज़ चमत्कारिक रूप से काम करती हैं।

  • मात्रा बस्ती Matra Basti: बड़ी आंत से भयंकर वात गैस और रूखेपन को पूरी तरह खत्म करने के लिए मेडिकेटेड ऑयल की मात्रा बस्ती Matra Basti दी जाती है, जो मल को चिकना करके बिना ज़ोर लगाए बाहर निकालती है।
  • अवगाह स्वेद Sitz Bath: इसमें मरीज़ को गर्म औषधीय काढ़े से भरे टब में कुछ देर बैठाया जाता है। यह गुदा मार्ग की मांसपेशियों के मानसिक तनाव और ऐंठन Spasm को तुरंत शांत करता है और दर्द खींच लेता है।
  • अभ्यंग मालिश Abhyanga: शुद्ध औषधीय तेलों से पेट और नाभि के आस-पास अभ्यंग मालिश Abhyanga massage करने से फँसी हुई गैस तुरंत आगे बढ़ती है और आंतों को गति मिलती है।
  • विरेचन Virechana: शरीर से दूषित पित्त गर्मी और अशुद्ध रक्त को निकालने के लिए विरेचन थेरेपी Virechana therapy दी जाती है, जो विशेष रूप से खूनी बवासीर में अत्यधिक लाभदायक है।

बवासीर के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

ऑपरेशन के बाद रातों-रात ठीक होने का भ्रम छोड़कर आयुर्वेद के स्थायी समाधान में थोड़ा समय और अनुशासन देना पड़ता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से जठराग्नि सुधरेगी। टॉयलेट के दौरान होने वाला असहनीय दर्द और ब्लीडिंग लगभग पूरी तरह रुक जाएगी और मल मुलायम हो जाएगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और हर्बल रसायनों के प्रभाव से गुदा की सूजी हुई नसें वापस सिकोड़कर अपने सामान्य आकार में आने लगेंगी। मल त्याग के बाद की चुभन खत्म हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: आपकी आंतें और पाचन तंत्र पूरी तरह रीसेट हो जाएगा। बिना किसी बाहरी सहारे के प्राकृतिक रूप से मल त्याग की आदत बन जाएगी और बवासीर का मूल कारण जड़ से मिट जाएगा।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

बवासीर Piles के इलाज को लेकर सर्जरी/आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा सर्जरी / Ointments आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य उभरे हुए मस्सों को काटकर निकाल देना या क्रीम से सुन्न कर देना। अपान वात को शांत करना, जठराग्नि को बढ़ाना और नसों की सूजन को जड़ से मिटाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल गुदा मार्ग Local की सूजी हुई नसों की एक शारीरिक समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए दोषों और खराब जीवनशैली का एक संपूर्ण सिंड्रोम अग्निमांद्य मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल भारी मात्रा में फाइबर सप्लीमेंट और पानी पीने की आम सलाह दी जाती है। खाने में 'स्नेहन' घी, सही पोश्चर, और जठराग्नि के अनुसार आहार पर ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर Long-term Impact सर्जरी के बाद भी अगर कब्ज़ बनी रही, तो मस्से 100% दोबारा वापस आ जाते हैं। शरीर की जठराग्नि इतनी मज़बूत हो जाती है कि कब्ज़ की नौबत ही नहीं आती और पाइल्स जड़ से खत्म हो जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद पाइल्स और वात की इस समस्या को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • मल में ताज़ा खून या काला मल Melena: अगर मल त्यागते समय लाल खून बहुत तेज़ी से आए या मल का रंग बिल्कुल डामर Tar जैसा काला हो जाए यह अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत है।
  • मल का आकार पेंसिल की तरह पतला होना: अगर अचानक आपका मल रिबन या पेंसिल की तरह बहुत पतला आने लगे यह आंतों में किसी रुकावट या ट्यूमर का अलार्म हो सकता है।
  • बिना वजह अचानक तेज़ी से वज़न गिरना: अगर पेट साफ न होने के साथ-साथ आपका वज़न बिना किसी कोशिश के बहुत तेज़ी से गिर रहा हो।
  • असहनीय पेट दर्द और उल्टियाँ: अगर पेट में ऐसी भयंकर मरोड़ उठे जो किसी भी पोज़िशन में लेटने पर शांत न हो और पेट पत्थर जैसा कड़ा Hard लगे।

निष्कर्ष

ऑपरेशन करवाकर मस्सों को कटवा देना बवासीर Piles का असली इलाज नहीं है; यह केवल बीमारी की टहनियों को काटना है, जबकि उसकी जड़ आपकी कमज़ोर जठराग्नि और कब्ज़ में गहराई तक धँसी है। जब तक आप अपने शरीर के बिगड़े हुए वात दोष और सूखी हुई आंतों को प्राकृतिक चिकनाई नहीं देंगे, यह समस्या बार-बार आपको सताती रहेगी। सर्जरी के दर्दनाक चक्रव्यूह से बाहर निकलें और प्रकृति की शरण में आएं। अपनी डाइट में सुधार करें, पित्त शांत करने वाले आहार को अपनाएं, और अपने क्रोनिक फटीग Chronic fatigue व पाचन को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सहारा लें। इस गंभीर तकलीफ़ और बार-बार होने वाले खर्चे से स्थायी राहत पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हाँ, सिर्फ कब्ज़ ही पाइल्स का कारण नहीं है। लंबे समय तक बैठना, भारी वजन उठाना, प्रेग्नेंसी या बार-बार दस्त होने से भी गुदा की नसों में सूजन आ सकती है।

हाँ, सर्जरी मस्से हटाती है लेकिन पाचन और कब्ज़ की समस्या को हमेशा ठीक नहीं करती। सही खान-पान और आयुर्वेदिक देखभाल दोबारा पाइल्स होने का खतरा कम कर सकती है।

हाँ, बहुत ज्यादा तीखा और तला हुआ खाना जलन और ब्लीडिंग बढ़ा सकता है। पाइल्स में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन बेहतर माना जाता है।

पपीता, भीगी हुई अंजीर, मुनक्का और उबला हुआ सेब पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। फाइबर वाले फल मल को नरम रखने में मदद करते हैं।

जब दर्द या ब्लीडिंग ज्यादा हो, तब साइकिल चलाना और भारी एक्सरसाइज करना परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे समय में हल्की वॉक और योग ज्यादा बेहतर रहते हैं।

सिट्ज़ बाथ में हल्के गर्म पानी में कुछ मिनट बैठा जाता है। इससे दर्द, जलन और खुजली में आराम मिल सकता है।

हाँ, बहुत खुरदरा टॉयलेट पेपर इस्तेमाल करने से जलन और दर्द बढ़ सकता है। सफाई के लिए पानी का इस्तेमाल ज्यादा आरामदायक माना जाता है।

हाँ, छाछ पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इससे पेट हल्का रहता है और कब्ज़ की समस्या कम हो सकती है।

कब्ज़ से बचने के लिए ज्यादा पानी पिएं, फाइबर वाला खाना खाएं और मल को ज्यादा देर तक रोककर न रखें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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