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PCOD में सिर्फ periods ठीक करने पर ध्यान दिया — fertility पर क्या असर हुआ?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 15 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5044

बहुत सी महिलाओं के मन में यह एक बहुत बड़ा भ्रम होता है। जैसे ही उनकी मेंस्ट्रुअल साइकिल (पीरियड्स) रेगुलर हो जाती है, उन्हें लगता है कि उनकी फर्टिलिटॶ (मां बनने की क्षमता) भी अब बिल्कुल ठीक हो गई होगी।

लेकिन कड़वा सच यह है कि हमारे शरीर का संतुलन सिर्फ पीरियड्स के आने या न आने तक ही सीमित नहीं होता। कई बार अंदरूनी समस्या वैसी की वैसी बनी रहती है, जो आपकी फर्टिलिटॶ पर सीधा असर डाल सकती है।

कहने का मतलब यह है कि बाहर से भले ही सब कुछ नॉर्मल लगे, लेकिन अंदर अभी भी सुधार की बहुत गुंजाइश हो सकती है। और यही वो जगह है जहाँ हमें अपनी बॉडी को थोड़ी और गहराई से समझने की ज़रूरत पड़ती है।

PCOD आखिर है क्या?

PCOD (Polycystic Ovarian Disease) एक ऐसी परेशानी है जहाँ हार्मोन्स के बिगड़ने की वजह से ओवरी (अंडाशय) में छोटे-छोटे पानी के बुलबुले (सिस्ट) बन जाते हैं। इसका सीधा असर आपके पीरियड्स, वज़न और यहां तक कि चेहरे (स्किन) पर भी देखने को मिलता है।

लेकिन अगर आप इसे सिर्फ “ओवरी की एक बीमारी” मानकर चल रही हैं, तो यह सही नहीं है। असल में यह आपके पूरे हार्मोन सिस्टम (Endocrine System) का बैलेंस बिगड़ने की कहानी है। यानी, यह सिर्फ एक अंग की परेशानी नहीं है, बल्कि इसका असर आपके पूरे शरीर पर पड़ता है।

फर्टिलिटॶ (Fertility) का असली मतलब क्या है?

फर्टिलिटॶ का मतलब सिर्फ हर महीने पीरियड्स आना नहीं है। यह आपके शरीर की वो कुदरती ताकत है जहाँ सही समय पर एक अच्छा अंडा बनता है, सही तरह से बाहर आता है और आपका शरीर अंदर से गर्भ (प्रेगनेंसी) को ठहराने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है।

यह कोई एक काम नहीं है; इसमें कई चीजों का तालमेल जरूरी है हार्मोन्स का एकदम सही होना, ओव्यूलेशन का ठीक समय पर होना और बच्चेदानी (गर्भाशय) के अंदर का माहौल अच्छा होना। अगर इस पूरी चेन का एक भी हिस्सा कमज़ोर पड़ जाए, तो आपकी पूरी फर्टिलिटॶ पर असर आ सकता है।

PCOD में फर्टिलिटॶ कमज़ोर होने की असली वजहें

PCOD में सिर्फ पीरियड्स का ऊपर-नीचे होना ही इकलौती टेंशन नहीं है। इसके पीछे कई ऐसे कारण हैं जो सीधा आपकी मां बनने की क्षमता पर चोट करते हैं:

  • हार्मोन्स का बिगड़ना: जब शरीर के हार्मोन्स ऊपर-नीचे होते हैं, तो अंडा बनने और बाहर निकलने का पूरा सिस्टम हिल जाता है।
  • अंडे का न बनना या बाहर न आना: ओवरी में अंडे (फॉलिकल्स) तो बनते हैं, लेकिन वो पक (mature) नहीं पाते, इसलिए ओव्यूलेशन ही नहीं हो पाता।
  • अंडे की क्वालिटी खराब होना: कई बार अंडा बन भी जाता है, लेकिन वो अंदर से इतना कमज़ोर होता है कि प्रेगनेंसी में मदद नहीं कर पाता।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब आपका शरीर शुगर का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो इसका सीधा असर आपके हार्मोन्स पर पड़ता है और PCOD बढ़ने लगता है।
  • वज़न और धीमा मेटाबॉलिज्म: शरीर का वज़न बढ़ना और मेटाबॉलिज्म का सुस्त पड़ना भी आपकी फर्टिलिटॶ को कमज़ोर कर सकता है।
  • टेंशन और खराब लाइफस्टाइल: हर वक्त का स्ट्रेस, अधूरी नींद और उल्टा-सीधा खाना आपके शरीर के बैलेंस को बुरी तरह बिगाड़ देते हैं।
  • बच्चेदानी का तैयार न होना: अगर प्रेगनेंसी रुकने के लिए अंदर का माहौल ही सही न हो, तो भी बहुत दिक्कत आती है।

PCOD में जब फर्टिलिटॶ पर असर होता है, तो क्या लक्षण दिखते हैं?

कई बार ये लक्षण एकदम साफ दिखते हैं, और कभी-कभी इतने हल्के होते हैं कि हम इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं:

सिर्फ पीरियड्स रेगुलर होना ही इलाज क्यों नहीं है?

पीरियड्स का टाइम पर आना अच्छी बात है, लेकिन यह मंजिल नहीं है। कई बार दवाइयों (जैसे पिल्स) की मदद से ब्लीडिंग तो हर महीने होने लगती है, लेकिन अंदर का सिस्टम अभी भी सोया हुआ होता है।

हो सकता है कि साइकिल ठीक दिख रही हो, लेकिन न तो अंडा सही समय पर बन रहा हो और न ही बाहर आ रहा हो। यानी शरीर बाहर से तो 'पास' हो गया, लेकिन अंदर का जरूरी काम 'फेल' हो गया। इसलिए, सिर्फ पीरियड्स का आना पूरा इलाज नहीं है। असली फोकस इस बात पर होना चाहिए कि क्या शरीर अंदर से पूरी तरह अपना काम कर रहा है?

PCOD में अंडा बनने का प्रोसेस कैसे अटक जाता है?

PCOD में अंडा बनने की तैयारी शुरू तो होती है, लेकिन मंजिल तक नहीं पहुंच पाती। यही वजह है कि बाहर से सब नॉर्मल लगता है, पर अंदर गड़बड़ चल रही होती है:

  • हर महीने ओवरी कई छोटे-छोटे 'फॉलिकल्स' (sacs) बनाती है। इन्हीं में से किसी एक में अंडा तैयार होना होता है।
  • PCOD में ये फॉलिकल्स बीच रास्ते में ही अटक जाते हैं, जिससे एक मजबूत और हेल्दी अंडा नहीं बन पाता।
  • जब फॉलिकल पकता नहीं है, तो अंडा बाहर भी नहीं निकलता। (और यही कंसीव करने का सबसे जरूरी स्टेप है)।
  • जो फॉलिकल्स पक नहीं पाए, वे ओवरी में ही रुक जाते हैं और धीरे-धीरे पानी की गांठ (सिस्ट) बन जाते हैं।
  • कुल मिलाकर, काम शुरू तो होता है, लेकिन कभी खत्म नहीं होता और यही फर्टिलिटॶ को गिरा देता है।

जब हम सिर्फ 'ब्लीडिंग' पर फोकस करते हैं, तो क्या छूट जाता है?

जब हमारा सारा ध्यान सिर्फ "कैसे भी करके पीरियड्स आ जाएं" पर होता है, तो हम फर्टिलिटॶ की असली चाबियों को अनदेखा कर देते हैं:

  • अंडा बन रहा है या नहीं: सिर्फ खून आने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि अंडा भी बन रहा है और रिलीज हो रहा है।
  • अंडे की क्वालिटी: अगर अंडा बन भी गया हो, तो उसका हेल्दी होना बहुत जरूरी है। इस पर अक्सर कोई ध्यान नहीं देता।
  • बच्चेदानी (गर्भाशय) की तैयारी: प्रेगनेंसी ठहरने के लिए बच्चेदानी का भी एक खास माहौल चाहिए होता है, जिसे हम भूल जाते हैं।
  • हार्मोन्स का अंदरूनी बैलेंस: बाहर से पीरियड्स रेगुलर दिख सकते हैं, लेकिन अंदर हार्मोन्स का तूफान वैसा ही रह सकता है।

आयुर्वेद PCOD को कैसे देखता है? (दोष, अग्नि और फर्टिलिटॶ का कनेक्शन)

आयुर्वेद PCOD को सिर्फ ओवरी की एक छोटी सी बीमारी नहीं मानता। हम इसे 'आर्तव विकार' और शरीर में 'कफ-वात' के बहुत बड़े असंतुलन से जोड़कर देखते हैं। मतलब, खराबी सिर्फ एक जगह नहीं है, बल्कि पूरे शरीर की लय (रिदम) बिगड़ चुकी है।

इसे दोषों के नजरिए से समझें:

  • बढ़ा हुआ कफ: जब कफ बढ़ता है, तो वह ओवरी में ब्लॉकेज और चीजों को इकट्ठा (जमा) करने लगता है, जिससे वो छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं।
  • वात की गड़बड़ी: वात हमारे शरीर के हर मूवमेंट (गति) को कंट्रोल करता है। जब यह बिगड़ता है, तो अंडा बनने और उसे ओवरी से बाहर धकेलने का पूरा प्रोसेस ही रुक जाता है।
  • पित्त का असर: अगर शरीर में पित्त (गर्मी) बढ़ जाए, तो अंदरूनी सूजन और गर्माहट बढ़ जाती है, जो पूरे बैलेंस को तहस-नहस कर देती है।

अग्नि (हाजमे) का क्या रोल है? 

जब आपकी पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता। इससे शरीर की धातुएं, खासकर 'शुक्र धातु' (जिससे फर्टिलिटॶ तय होती है), अंदर से खोखली और कमज़ोर रह जाती हैं।

यहीं से मां बनने की क्षमता की नींव कमज़ोर पड़ जाती है। इसीलिए, आयुर्वेद का मकसद सिर्फ आपके लक्षणों को कुछ दिन के लिए दबाना नहीं है, बल्कि आपके शरीर को अंदर से इतना मजबूत बनाना है कि वह अपना काम खुद कर सके।

PCOD और फर्टिलिटॶ: जानिए आयुर्वेद इसे जड़ से कैसे ठीक करता है

अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि PCOD का मतलब बस पीरियड्स का लेट होना है, और अगर गोलियां खाकर वो टाइम पर आ गए तो सब ठीक हो गया। लेकिन, आयुर्वेद का नजरिया इससे एकदम अलग है। 

आयुर्वेद में इसका इलाज कैसे होता है? 

  • दोषों को बैलेंस करना (खासकर कफ और वात): शरीर में जब कफ हद से ज़्यादा बढ़ता है, तो वो रुकावटें पैदा करने लगता है। और वात बिगड़ जाए तो शरीर का रूटीन खराब हो जाता है। सबसे पहले हम इन्हीं दोनों को शांत करते हैं, ताकि आपकी ओवरी खुलकर अपना काम कर सके और अंडा सही से बन पाए।
  • पाचन (पेट की आग) को तेज़ करना: सीधी सी बात है, अगर आपका पाचन ठीक नहीं है, तो आप दुनिया का सबसे अच्छा खाना भी खा लें, वो शरीर को लगेगा ही नहीं। पेट दुरुस्त होने से शरीर को असली पोषण मिलता है, जिससे फर्टिलिटॶ वाला हिस्सा (प्रजनन धातु) अंदर से मजबूत बनता है।
  • जड़ी-बूटियों का कमाल (हर्बल सपोर्ट): शतावरी, अश्वगंधा और लोधरा जैसी कुदरती औषधियां हम इसलिए देते हैं क्योंकि ये सिर्फ हार्मोन्स को ही नहीं छेड़तीं, बल्कि आपके पूरे रिप्रोडक्टिव सिस्टम को एक नया सपोर्ट देती हैं।
  • शरीर की डीप क्लीनिंग (पंचकर्म): बरसों से शरीर में जो गंदगी और कचरा (टॉक्सिन्स) जमा हो गया है, उन्हें बाहर निकालना बहुत जरूरी है। पंचकर्म से शरीर का पूरा सिस्टम एकदम साफ और हल्का हो जाता है।
  • ओव्यूलेशन (अंडा बनने का प्रोसेस): कंसीव करने के लिए सबसे ज़्यादा जरूरी है एक हेल्दी अंडे का बनना और उसका सही वक्त पर रिलीज होना। हमारी सारी कोशिश इसी प्रोसेस को वापस पटरी पर लाने की होती है।
  • लाइफस्टाइल में बदलाव: देखिए, सिर्फ दवाइयां कोई जादू नहीं कर सकती हैं। सही खाना, चैन की नींद, थोड़ा सा योग और टेंशन से दूरी ये सब चीजें मिलकर शरीर को नेचुरली हील करती हैं।

PCOD और फर्टिलिटॶ के लिए कुछ बेहद असरदार आयुर्वेदिक औषधियां

आयुर्वेद में हमारा मकसद आपको हर महीने ब्लीडिंग लाने वाली कोई 'क्विक फिक्स' गोलियां देना नहीं है। हम चाहते हैं कि हार्मोन्स खुद-ब-खुद बैलेंस हों, अंडे की क्वालिटी सुधरे और शरीर को भरपूर ताकत मिले। इसके लिए हम इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं:

  • शतावरी: इसे तो महिलाओं की सबसे पक्की सहेली कह लीजिए। यह न सिर्फ आपके हार्मोन्स को एकदम सेट रखती है, बल्कि शरीर को प्रेगनेंसी (गर्भधारण) के लिए अंदर से तैयार करती है।
  • अश्वगंधा: जब हम बहुत ज़्यादा टेंशन लेते हैं, तो हार्मोन्स का पूरा सिस्टम हिल जाता है। अश्वगंधा इसी स्ट्रेस को छूमंतर कर देती है। इसका सीधा और बहुत प्यारा असर आपके ओव्यूलेशन पर दिखता है।
  • गुडूची (गिलोय): यह शरीर की इम्युनिटी को जबरदस्त तरीके से बढ़ाती है और अंदर चल रही किसी भी तरह की टूट-फूट या सूजन को शांत करती है।
  • कुमारी (एलोवेरा): यह आपके पेट को एकदम साफ रखती है और हार्मोन्स की सेटिंग बिठाने में बहुत बड़ा रोल निभाती है।
  • त्रिफला: कहावत है न 'पेट साफ तो हर रोग दफा'! त्रिफला आपके हाजमे को फर्स्ट क्लास करके शरीर की सारी गंदगी को बाहर का रास्ता दिखा देती है।

PCOD और फर्टिलिटॶ के लिए शरीर को सुकून देने वाली आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जैसा कि मैंने कहा, आयुर्वेद में सिर्फ गोलियां फांकने से काम नहीं चलता। हम कुछ ऐसी खास पंचकर्म थेरेपीज़ की मदद लेते हैं, जो ओवरी में आई रुकावट को खोलती हैं और अंडा बनने के पूरे प्रोसेस में तेज़ी लाती हैं:

  • वमन: यह शरीर से जमे हुए कफ (जो असल में एक रुकावट है) को बाहर निकालने का एक बहुत ही खास तरीका है। इससे ओवरी में फंसा सारा कचरा धीरे-धीरे साफ होने लगता है।
  • बस्ती (एनिमा थेरेपी): वात दोष को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए बस्ती का कोई मुकाबला ही नहीं है। फर्टिलिटॶ के मामलों में तो यह सच में किसी चमत्कार की तरह काम करती है।
  • उद्वर्तन (पाउडर मसाज): अगर PCOD की वजह से आपका वज़न बहुत ज़्यादा बढ़ गया है, तो सूखे जड़ी-बूटियों के पाउडर से की जाने वाली यह मालिश शरीर की जिद्दी चर्बी और कफ को बहुत तेज़ी से काटती है।
  • नस्य: इसमें नाक के जरिए कुछ खास हर्बल तेल की बूंदें डाली जाती हैं। ये सीधा आपके दिमाग और हार्मोनल सिस्टम पर असर करती हैं और स्ट्रेस को एकदम कम कर देती हैं।
  • स्वेदन (भाप थेरेपी): हल्की-हल्की भाप लेने से शरीर के सारे बंद रास्ते खुल जाते हैं। पसीने के जरिए गंदगी बाहर आती है और जो दवाइयां आप खा रही हैं, उनका असर कई गुना बढ़ जाता है।

PCOD और फर्टिलिटॶ के लिए सही डाइट: क्या खाएं, क्या न खाएं?

अगर आपको PCOD है, तो यकीन मानिए आपकी रसोई ही आपका सबसे बड़ा क्लिनिक है। अगर आपने सही खाना खाना शुरू कर दिया, तो वज़न, हार्मोन्स और पाचन तीनों एक साथ ठीक होने लगते हैं।

आपको क्या खाना चाहिए?

  • घर का सादा खाना: कोशिश करें कि हमेशा वो खाना खाएं जो हल्का हो, ताजा बना हो और आसानी से पच जाए। कई दिनों का बासी या फ्रिज में रखा खाना बिल्कुल न खाएं।
  • हरी सब्जियां और मौसमी फल: ये कुदरती विटामिन्स का खजाना होते हैं। इन्हें खाने से शरीर अंदर से मजबूत और एकदम फ्रेश रहता है।
  • प्रोटीन से भरपूर चीजें: मूंग दाल और चने जैसी चीजें शरीर को गजब की ताकत देती हैं और हार्मोन्स को बेवजह बिगड़ने नहीं देतीं।
  • थोड़ा सा देसी घी: अपनी डाइट में थोड़ा सा शुद्ध देसी घी जरूर शामिल करें। यह शरीर को अंदर से चिकनाई देता है और फर्टिलिटॶ को बहुत अच्छे से सपोर्ट करता है।
  • गुनगुना पानी: दिनभर हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत डाल लें। यह पेट को हमेशा साफ रखता है और टॉक्सिन्स को शरीर में टिकने नहीं देता।

किन चीजों से सख्त परहेज करें?

  • बहुत ज़्यादा मीठा, हद से ज़्यादा तला-भुना और पैकेटबंद (Processed) जंक फूड तो आज ही से खाना छोड़ दें।
  • फ्रिज का एकदम चिल्ड पानी या ठंडी तासीर वाली चीजें खाने से बचें।
  • बिना भूख के बार-बार कुछ न कुछ चबाते रहने (Snacking) या बेवक्त खाने की आदत को तुरंत बदल दें।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम वैजयंती है और मैं फरीदाबाद की रहने वाली हूँ। मुझे PCOD की समस्या थी, जिसके कारण कभी मेरे पीरियड्स अनियमित हो जाते थे और कभी बहुत अधिक ब्लीडिंग होती थी। इस वजह से मैं काफी दर्द और तनाव में रहता था। एलोपैथिक परामर्श में मुझे सर्जरी की सलाह दी गई, जिससे मैं बहुत चिंतित हो गई। तभी मेरी एक सहेली, जो जीवा आयुर्वेद की पूर्व मरीज थी, ने मुझे नजदीकी जीवा क्लिनिक जाने की सलाह दी। मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री समझकर इलाज शुरू किया। चूँकि PCOD मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्या है, इसलिए मुझे आयुर्वेदिक उपचार दिया गया। धीरे-धीरे मेरी पीरियड्स नियमित होने लगे, तनाव कम हुआ और मुझे काफी राहत महसूस हुई।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

PCOD और fertility से जुड़ी समस्या को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। कुछ संकेतों पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी होता है:

  • गर्भधारण में कठिनाई: लंबे समय तक कोशिश के बाद भी कंसीव न हो पाना।
  • अनियमित पीरियड्स: मासिक धर्म बहुत अनियमित होना या कई महीनों तक न आना।
  • हार्मोनल बदलाव के लक्षण: वज़न तेज़ी से बढ़ना, चेहरे पर पिंपल्स, बाल झड़ना या अनचाहे बाल बढ़ना।
  • ओव्यूलेशन न होना: शरीर में अंडा बनने या निकलने के संकेत न मिलना।
  • फैमिली प्लानिंग में देरी: उम्र बढ़ रही हो और pregnancy की योजना हो।

निष्कर्ष

PCOD सिर्फ एक रिपोर्ट या पीरियड्स की समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदरूनी हार्मोन और पाचन असंतुलन का संकेत है। आधुनिक चिकित्सा इसे हार्मोनल डिसऑर्डर मानती है, जबकि आयुर्वेद इसे दोष और जीवनशैली असंतुलन से जोड़कर देखता है।

असल समाधान सिर्फ दवाओं से नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली को संतुलित करके ही मिलता है। जब शरीर अंदर से ठीक होता है, तो fertility भी प्राकृतिक रूप से बेहतर होने लगती है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हाँ, PCOD में भी गर्भधारण संभव है। जब शरीर में हार्मोन और ovulation सही तरीके से काम करने लगते हैं, तो प्राकृतिक रूप से pregnancy हो सकती है। सही जीवनशैली और संतुलन इसमें बहुत मदद करते हैं।

नहीं, यह सिर्फ पीरियड्स की समस्या नहीं है। यह पूरे हार्मोन सिस्टम और ओवरी फंक्शन से जुड़ी स्थिति है, जो fertility और शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है।

वजन बढ़ना PCOD का कारण नहीं बल्कि उसका असर भी हो सकता है। हार्मोन असंतुलन और मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी से वजन बढ़ सकता है, जो स्थिति को और प्रभावित करती हैं।

PCOD को पूरी तरह एक बार में खत्म करना मुश्किल होता है, लेकिन इसे अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। सही आहार, जीवनशैली और उपचार से लक्षण काफी हद तक कम हो सकते हैं।

नहीं, हर केस में ऐसा नहीं होता। कई महिलाओं में ovulation कभी-कभी होता है, लेकिन अनियमित होता है। यही वजह है कि गर्भधारण में देरी हो सकती है।

 हाँ, लंबे समय का तनाव हार्मोन को प्रभावित करता है। इससे ovulation और पीरियड्स दोनों पर असर पड़ सकता है, जिससे PCOD के लक्षण बढ़ सकते हैं।

 हाँ, सही और संतुलित आहार PCOD में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हार्मोन संतुलन और पाचन को सुधारकर शरीर को बेहतर बनाता है।

 हाँ, हार्मोन असंतुलन के कारण बाल झड़ना या thinning होना एक आम लक्षण हो सकता है।

नहीं, कई मामलों में बिना देखभाल के यह बना रह सकता है या बढ़ सकता है। इसलिए समय पर ध्यान देना जरूरी है।

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