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PCOD में Birth Control Pill (OCP) ले रहे हैं - असली इलाज है क्या?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 22 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5027

आज के समय में PCOD में अनियमित मासिक धर्म, हार्मोनल असंतुलन और अंडोत्सर्जन की समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई बार गर्भनिरोधक गोलियों (OCP) का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं कुछ समय के लिए चक्र को नियमित कर सकती हैं, लेकिन कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या यह वास्तव में समस्या का समाधान है या केवल अस्थायी नियंत्रण।

आयुर्वेद के दृष्टिकोण से PCOD को केवल हार्मोन की समस्या नहीं माना जाता, बल्कि इसे शरीर के अंदरूनी असंतुलन, पाचन शक्ति की कमज़ोरी, और दोषों के गहरे प्रभाव से जुड़ी स्थिति के रूप में देखा जाता है। इसलिए इसमें केवल बाहरी हार्मोनल नियंत्रण से आगे बढ़कर मूल कारण को समझने की आवश्यकता मानी जाती है।

PCOD क्या है और यह इतना आम क्यों हो गया है?

PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) महिलाओं के शरीर में होने वाली एक ऐसी गड़बड़ी है, जिसमें हार्मोन्स बिगड़ जाते है। इसका असर सिर्फ आपके हर महीने के चक्र (मासिक धर्म) तक नहीं रुकता, बल्कि यह धीरे-धीरे आपके पूरे शरीर को प्रभावित करने लगता है।

इस परेशानी में सबसे ज़्यादा प्रभाव आपके पीरियड्स के टाइम-टेबल पर होता है, जो पूरी तरह बिगड़ जाता है। इसके बाद, आप कम भी खाएं तो भी वज़न तेज़ी से बढ़ने लगता है और शरीर में ऐसे अजीब बदलाव दिखने लगते हैं जो आपने पहले कभी महसूस नहीं किए होंगे। कई लड़कियों के चेहरे और ठोड़ी (चिन) पर अनचाहे बाल उगने लगते हैं, स्किन पर ऐसे जिद्दी दाने (Pimples) निकल आते हैं जो जाने का नाम नहीं लेते, और सिर के बाल गुच्छों में टूटकर गिरने लगते हैं।

PCOD में बर्थ कंट्रोल पिल्स (OCP) क्यों दी जाती हैं? 

डॉक्टर अक्सर ये गोलियां इसलिए देते हैं ताकि शरीर के हार्मोन्स को बाहर से कंट्रोल किया जा सके। इससे कुछ समय के लिए आपके पीरियड्स वापस पटरी पर आ जाते हैं और अनियमितता खत्म हो जाती है। इसके साथ ही, चेहरे पर निकलने वाले दाने (मुंहासे) और अनचाहे बालों की दिक्कत में भी काफी राहत मिल जाती है।

लेकिन सच बात तो ये है कि ये गोलियां बीमारी को जड़ से नहीं मिटातीं, बस कुछ वक्त के लिए मामला संभाल लेती हैं। जैसे ही आप इन्हें खाना बंद करते हैं और अपनी दिनचर्या (लाइफस्टाइल) नहीं सुधारते, तो परेशानी फिर से लौट आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर के अंदर की गड़बड़ी तो वैसी की वैसी ही बनी रहती है।

OCP शरीर में काम कैसे करती है? 

ये गोलियां हमारे हार्मोन वाले सिस्टम पर असर डालकर पीरियड्स की साइकिल को कुछ समय के लिए सेट कर देती हैं। ये शरीर के कुदरती सिस्टम को दबाकर एक बनावटी (नकली) बैलेंस तैयार करती हैं।

  • अंडे बनने से रोकना: ये गोलियां शरीर को ऐसा मैसेज देती हैं कि अभी अंडे बनाने की कोई ज़रूरत नहीं है, जिससे अंडे बनने और बाहर आने की कुदरती प्रक्रिया रुक जाती है।
  • हार्मोन्स का नकली बैलेंस: ये शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स का ऐसा बनावटी बैलेंस बनाती हैं जिससे सब कुछ एकदम नॉर्मल दिखने लगता है।
  • ओवरी को शांत करना: ये कुछ समय के लिए ओवरी (अंडाशय) का कामकाज एकदम धीमा कर देती हैं, जिससे नई गांठें (सिस्ट) बनने की गुंजाइश कम हो जाती है।
  • पीरियड्स सही होने का भ्रम: इन दवाओं के असर से ऐसा लगता है कि पीरियड्स बिल्कुल टाइम पर आ रहे हैं, जबकि असल में ये शरीर का कुदरती चक्र नहीं, बल्कि सिर्फ गोलियों का कमाल होता है।

OCP (Birth Control Pills) का शरीर पर संभावित नुकसान

OCP शरीर के हार्मोनल सिस्टम को कृत्रिम रूप से नियंत्रित करती हैं, इसलिए लंबे समय तक या बिना सही मार्गदर्शन के उपयोग से कुछ दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं। हर व्यक्ति में प्रभाव अलग हो सकता है और यह पूरी तरह निर्भर करता है शरीर की स्थिति और उपयोग की अवधि पर।

  • हार्मोनल असंतुलन: लंबे समय तक उपयोग के बाद प्राकृतिक हार्मोन उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर को अपना संतुलन वापस पाने में समय लग सकता है।
  • वज़न में बदलाव: कुछ महिलाओं में वज़न बढ़ना या शरीर में पानी रुकने जैसी समस्या देखी जा सकती है।
  • मूड और मानसिक प्रभाव: चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग या मानसिक थकान जैसी स्थिति महसूस हो सकती है।
  • पाचन और मतली: शुरुआत में जी मिचलाना, पेट में भारीपन या पाचन में असहजता हो सकती है।
  • पीरियड्स में बदलाव: दवा बंद करने के बाद मासिक चक्र कुछ समय के लिए अनियमित हो सकता है।
  • लंबे समय का असर: लगातार उपयोग से शरीर की प्राकृतिक ओव्यूलेशन प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है और रिकवरी में समय लग सकता है।

आजकल PCOD के मामले तेज़ी से क्यों बढ़ रहे हैं?

आजकल हमारी जिंदगी जिस रफ्तार से भाग रही है, उसका सीधा और सबसे बड़ा नुकसान महिलाओं की सेहत को उठाना पड़ रहा है। सोने-जागने का कोई फिक्स टाइम न होना, हर वक्त की टेंशन और बाहर का उल्टा-सीधा खाना ये सब मिलकर शरीर के अंदर हार्मोन्स का पूरा सिस्टम बिगाड़ रहे हैं। यही वजह है कि आज बहुत छोटी-छोटी बच्चियों और कम उम्र की लड़कियों में भी PCOD की परेशानी घर-घर की कहानी बन गई है।

इसके पीछे हमारी रोज़़मर्रा की ये गलतियां सबसे ज़्यादा जिम्मेदार हैं:

  • रातों को देर तक जागना और नींद से समझौता करना।
  • हर वक्त किसी न किसी बात की दिमागी टेंशन पाले रखना।
  • घर के खाने की जगह बाहर का जंक फूड और पैकेट बंद ज़्यादा खाना।
  • दिनभर एक जगह बैठे रहना और शरीर से कोई मेहनत (कसरत) न करना।
  • देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन में घुसे रहना।
  • खाने का कोई टाइम-टेबल न होना (जब मर्जी कुछ भी खा लेना)।
  • ध्यान न देने की वजह से शरीर का वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ना।

कौन से संकेत बताते हैं कि शरीर अंदर से संघर्ष कर रहा है?

हमारा शरीर कई बार छोटी-छोटी दिक्कतों के जरिए बताता है कि अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। शुरुआत में ये आम लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक बने रहने पर इन्हें हल्के में न लें। ये इशारे मिलें तो तुरंत अलर्ट हो जाएं:

  • हर वक्त थकान: पूरी नींद और आराम के बाद भी शरीर में जान न लगना।
  • चेहरे पर बार-बार दाने: स्किन का बार-बार खराब होना बिगड़ते हार्मोन्स का सबसे बड़ा इशारा है।
  • बालों का झड़ना: बालों का अचानक पतला होना या गुच्छों में टूटना अंदरूनी कमज़ोरी को दिखाता है।
  • स्किन पर काले धब्बे: गर्दन के पीछे या अंडरआर्म्स में मोटा कालापन आना अंदरूनी गड़बड़ी की निशानी है।
  • बिगड़ते पीरियड्स: टाइम पर पीरियड्स न आना या महीनों तक गायब रहना।
  • मीठे की तलब: एनर्जी डाउन होने और हार्मोन्स बिगड़ने पर शरीर बार-बार मीठा मांगता है।
  • पाचन सुस्त होने और अंदरूनी सिस्टम स्लो पड़ने का यह सीधा संकेत है।
  • मूड स्विंग्स: बात-बात पर चिड़चिड़ापन या उदासी भी हार्मोन्स के हिलने का नतीजा है।

आयुर्वेद PCOD को किस नज़र से देखता है?

आयुर्वेद PCOD को सिर्फ बच्चेदानी (ओवरी) की कोई अकेली बीमारी नहीं मानता। हम इसे शरीर के अंदर बढ़ते हुए एक बहुत बड़े असंतुलन (इम्बैलेंस) की तरह देखते हैं। आयुर्वेद के नजरिए से यह कफ और वात दोष के भड़कने, पेट की आग (पाचन शक्ति) के बुझने और शरीर में जमे हुए आधे-अधूरे पचे कचरे (टॉक्सिन्स) का नतीजा है।

जब शरीर में 'कफ' बढ़ता है, तो आपको बहुत ज़्यादा भारीपन लगता है, तेज़ी से वज़न बढ़ता है और शरीर की मशीनरी सुस्त पड़ जाती है। वहीं जब 'वात' बिगड़ता है, तो पीरियड्स आगे-पीछे होने लगते हैं, दिमाग में बेचैनी रहती है और शरीर की कुदरती घड़ी खराब हो जाती है।

आयुर्वेद साफ कहता है कि जब आपका पाचन सुस्त पड़ने लगता है, तब शरीर में एक ऐसा जहरीला कचरा जमा होने लगता है जो धीरे-धीरे हार्मोन्स का बैलेंस और शरीर के बाकी कामों को ठप्प कर देता है। इसलिए आयुर्वेद में इसका इलाज सिर्फ किसी एक अंग को ठीक करना नहीं है, बल्कि आपके पूरे शरीर को अंदर से साफ करके वापस अपनी असली ताकत में लाना है।

आयुर्वेद में PCOD के इलाज का असली तरीका

देखिए, आयुर्वेद में PCOD का मतलब सिर्फ 'माहवारी की दिक्कत' नहीं है। असल में यह आपके हार्मोन्स, सुस्त पड़े पाचन और गलत लाइफस्टाइल का मिला-जुला नतीजा है। इसीलिए यहाँ सिर्फ गोलियां देकर दर्द नहीं दबाया जाता, बल्कि पूरी बॉडी की अंदर से सर्विसिंग होती है:

  • दोषों को शांत करना: आपकी तासीर समझकर शरीर में भड़के हुए वात और कफ को बैलेंस किया जाता है।
  • पाचन सेट करना: पेट की आग तेज़ की जाती है ताकि अंदर जमा सारा कचरा (गंदगी) बाहर निकल सके।
  • पीरियड्स की साइकिल: शरीर की उस कुदरती घड़ी को फिर से सेट करते हैं जो पूरी तरह बिगड़ चुकी है।
  • मोटापा और थकान: बेवजह बढ़ रहे वज़न और दिनभर छाई रहने वाली सुस्ती को खत्म करने पर पूरा फोकस रहता है।
  • टेंशन फ्री लाइफ: स्ट्रेस को कम किए बिना ये बीमारी नहीं जाती, इसलिए दिमागी सुकून बहुत जरूरी है।

PCOD के लिए असरदार आयुर्वेदिक औषधियाँ

इस परेशानी को ठीक करने के लिए कुछ कुदरती औषधियां अचूक काम करती हैं (लेकिन इन्हें हमेशा वैद्य जी से पूछकर ही लें):

  • औरतों के शरीर के लिए यह एक वरदान है, जो अंदर से खोखले हो रहे शरीर में वापस जान फूंक देती है।
  • अशोक: अगर पीरियड्स रुक गए हैं या टाइम पर नहीं आ रहे, तो उन्हें वापस पटरी पर लाने में इसका कोई सानी नहीं।
  • लोध्र: यह शरीर में बढ़े हुए भारीपन और कफ को बड़ी तेज़ी से काटता है।
  • अश्वगंधा: बात-बात पर होने वाली दिमागी टेंशन और शरीर की टूटन को सोखने में यह माहिर है।
  • त्रिफला और गिलोय: त्रिफला जहाँ आपके पेट की गंदगी साफ करता है, वहीं गिलोय इम्युनिटी को फौलादी बना देती है।

असरदार आयुर्वेदिक थेरेपी

सिर्फ दवा खाने से बात नहीं बनती। शरीर को रिलैक्स करने के लिए कुछ खास तरीके अपनाए जाते हैं:

  • तेल मालिश और भाप: गर्म औषधीय तेलों की मालिश और हर्बल भाप (स्वेदन) से बंद नसें खुलती हैं और पसीने के रास्ते सारी गंदगी बाहर आ जाती है।
  • जड़ी-बूटियों के सूखे चूर्ण से रगड़कर मालिश होती है, जो एक्स्ट्रा चर्बी और सुस्ती को पिघला देती है।
  • शिरोधारा: जब माथे पर लगातार तेल की धार गिरती है, तो महीनों का स्ट्रेस और बेचैनी एकदम शांत हो जाती है।
  • पंचकर्म: अगर बीमारी बहुत ज़्यादा पुरानी हो, तो शरीर की डीप क्लीनिंग के लिए इसे अपनाया जाता है।

डाइट में क्या बदलाव करें?

PCOD में भूखे रहकर वज़न कम नहीं करना है, बल्कि सही खाना खाकर अपना पाचन ठीक करना है:

  • बासी खाने से बचें: हमेशा सीधा रसोई से निकला गर्म खाना ही खाएं। फ्रिज का ठंडा खाना पेट का सिस्टम बिगाड़ देता है।
  • वक्त पर खाएं: जब मर्जी तब खाने की आदत छोड़ें। एक पक्का रूटीन बनाएं वरना शरीर की मशीनरी कन्फ्यूज हो जाती है।
  • मैदे को कहें 'ना': चोकर वाला आटा, दलिया या ओट्स खाएं। ये धीरे-धीरे पचते हैं और दिनभर एनर्जी देते हैं।
  • ताजे फल-सब्जियां: जो फल और सब्जियां मौसम के हिसाब से आ रही हैं, उन्हें अपनी थाली में जरूर रखें।
  • मीठा और बाहर का खाना बंद: जंक फूड और ज़्यादा चीनी आपकी चर्बी को और बढ़ाएंगे, इनसे सख्त परहेज करें।
  • हल्का डिनर: रात को जितना हल्का खाएंगी, सोते वक्त शरीर खुद की मरम्मत (रिपेयरिंग) उतनी ही अच्छी तरह कर पाएगा।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम वैजयंती है और मैं फरीदाबाद की रहने वाली हूँ। मुझे PCOD की समस्या थी, जिसके कारण कभी मेरे पीरियड्स अनियमित हो जाते थे और कभी बहुत अधिक ब्लीडिंग होती थी। इस वजह से मैं काफी दर्द और तनाव में रहता था। एलोपैथिक परामर्श में मुझे सर्जरी की सलाह दी गई, जिससे मैं बहुत चिंतित हो गई। तभी मेरी एक सहेली, जो जीवा आयुर्वेद की पूर्व मरीज़ थी, ने मुझे नज़दीकी जीवा क्लिनिक जाने की सलाह दी। मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री समझकर इलाज शुरू किया। चूँकि PCOD मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्या है, इसलिए मुझे आयुर्वेदिक उपचार दिया गया। धीरे-धीरे मेरी पीरियड्स नियमित होने लगे, तनाव कम हुआ और मुझे काफी राहत महसूस हुई।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

PCOD के संकेतों को केवल जीवनशैली की समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए। निम्नलिखित स्थितियाँ होने पर विशेषज्ञ से मिलना अनिवार्य है:

  • गंभीर अनियमितता: यदि साल में 8 से कम पीरियड्स आ रहे हों या पीरियड्स के बीच का अंतर बहुत ज्यादा हो।
  • अचानक वज़न बढ़ना: यदि डाइट कंट्रोल के बावजूद पेट के निचले हिस्से का वज़न तेज़ी से बढ़ रहा हो।
  • फर्टिलिटी की समस्या: यदि आप गर्भधारण (Conception) की कोशिश कर रही हैं और सफलता नहीं मिल रही है।
  • मेटाबॉलिक लक्षण: यदि अत्यधिक थकान, मुँहासे या चेहरे पर अनचाहे बालों की समस्या बढ़ती जा रही हो।
  • मानसिक स्वास्थ्य: यदि हार्मोनल असंतुलन के कारण गंभीर तनाव, चिंता या डिप्रेशन महसूस हो।

निष्कर्ष

PCOD केवल एक हार्मोनल समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के मेटाबॉलिक, जीवनशैली और मानसिक संतुलन से जुड़ी एक जटिल स्थिति है। आधुनिक चिकित्सा में इसे मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन और लक्षणों के आधार पर देखा जाता है, जबकि आयुर्वेद इसे शरीर के भीतर दोषों के असंतुलन, कमज़ोर पाचन और संपूर्ण प्रणाली की गड़बड़ी से जोड़कर समझता है।

बार-बार अनियमित पीरियड्स, वज़न बढ़ना, त्वचा और बालों में बदलाव जैसे संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय रहते जीवनशैली में सुधार, सही आहार और शरीर के मूल कारणों को समझना इस स्थिति को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

PCOD को कई मामलों में पूरी तरह खत्म करने की बजाय नियंत्रित करने वाली स्थिति माना जाता है। सही जीवनशैली और संतुलित आदतों से इसके लक्षणों में काफी सुधार देखा जा सकता है। शरीर की अंदरूनी स्थिति को संतुलित रखने पर लंबे समय तक बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

केवल दवाओं पर निर्भर रहना हमेशा पर्याप्त नहीं माना जाता। दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं लेकिन जीवनशैली की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। खानपान और दिनचर्या में सुधार से परिणाम अधिक स्थिर हो सकते हैं।

हर महिला में इसका प्रभाव अलग होता है। कुछ मामलों में गर्भधारण संभव होता है जबकि कुछ में समय लग सकता है। शरीर के हार्मोनल संतुलन पर इसका सीधा प्रभाव निर्भर करता है।

नहीं, यह समस्या दुबली महिलाओं में भी देखी जा सकती है। हार्मोनल असंतुलन इसका मुख्य कारण होता है, न कि केवल शरीर का वज़न। इसलिए हर प्रकार की शारीरिक बनावट में यह संभव है।

लंबे समय तक मानसिक तनाव शरीर के हार्मोन संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इससे मासिक चक्र और मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। इसलिए तनाव नियंत्रण को महत्वपूर्ण माना जाता है।

नियमित हल्का व्यायाम शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने में मदद कर सकता है। यह वज़न नियंत्रण और हार्मोन संतुलन में सहायक माना जाता है। बहुत अधिक या बहुत कम गतिविधि दोनों ही असंतुलन बढ़ा सकती हैं।

हां, आहार का सीधा प्रभाव हार्मोन और इंसुलिन स्तर पर पड़ता है। असंतुलित भोजन समस्या को बढ़ा सकता है जबकि संतुलित आहार सुधार में मदद कर सकता है।

कई मामलों में बिना जीवनशैली सुधार के यह अपने आप ठीक नहीं होता। समय के साथ लक्षण कम या ज्यादा हो सकते हैं। सही आदतें अपनाने से स्थिति बेहतर हो सकती है।

नींद की कमी शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इससे थकान और अनियमितता बढ़ सकती हैं। पर्याप्त नींद शरीर की रिकवरी में मदद करती है।

PCOD को काफी हद तक जीवनशैली से जुड़ी स्थिति माना जाता है। खानपान, तनाव, नींद और शारीरिक गतिविधि इसका प्रभाव बढ़ा या कम कर सकते हैं। इसलिए संतुलित जीवनशैली बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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