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रात को सोते वक्त उँगलियों में चुभन - क्या Uric Acid Crystals जमा हो रहे हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 18 May, 2026
  • category-iconUpdated on 12 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5071

दिन भर की भागदौड़ के बाद जब आप बिस्तर पर आराम करने जाते हैं, तो शरीर को सुकून मिलना चाहिए लेकिन कई बार रात को सोते समय अचानक उंगलियों में सुई जैसी चुभन, जलन या झनझनाहट होने लगती है, जो आपकी पूरी नींद खराब कर देती है

 शुरुआत में लोग इसे एक आम थकावट या गलत पोस्चर में सोने का नतीजा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं परंतु यह छोटी सी दिखने वाली समस्या असल में शरीर के भीतर यूरिक एसिड क्रिस्टल्स Uric acid crystals के जमा होने या गंभीर मेटाबॉलिक खराबी का एक बड़ा संकेत हो सकती है।

 रात को सोते समय उंगलियों में सुई जैसी तीखी चुभन क्यों महसूस होती है?

 जब शरीर के जोड़ों और बारीक नसों में कोई विकृति आती है, तो रात के समय इसके लक्षण अधिक स्पष्ट रूप से उभरते हैं उंगलियों में होने वाली इस असहज चुभन और दर्द के पीछे छिपे मुख्य वैज्ञानिक और शारीरिक कारणों को समझना बेहद जरूरी है:

 यूरिक एसिड की अधिकता: जब हमारा शरीर प्यूरीन नामक प्रोटीन को पूरी तरह नहीं पचा पाता, तो रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है यह बढ़ा हुआ एसिड रात में तापमान कम होने पर क्रिस्टल्स के रूप में उंगलियों और पैर के अंगूठे के जोड़ों में जमा होने लगता है, जिससे तीखा दर्द होता है।

नसों पर अत्यधिक दबाव: दिन भर कंप्यूटर पर काम करने या लगातार बैठे रहने के कारण रीढ़ की हड्डी और गर्दन की नसों पर दबाव बढ़ता है इसके कारण हाथों और उंगलियों तक जाने वाली रक्त वाहिनियाँ चोक हो जाती हैं और रात को सोते समय अचानक उंगलियों में चुभन शुरू हो जाती है।

धीमा रक्त संचार: रात को सोते समय हमारी शारीरिक गतिविधियाँ बिल्कुल बंद हो जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है यदि किसी व्यक्ति की जीवनशैली सुविधाजनक है, तो धीमे रक्त प्रवाह के कारण टॉक्सिन्स जोड़ों के आसपास जमा होकर सुन्नपन और चुभन पैदा करते हैं। 

मेटाबॉलिक टॉक्सिन्स का जमाव: जब हमारा पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो अधपचा भोजन शरीर में विषैले तत्व बनाता है यह कचरा नसों में जाकर रुकावट पैदा करता है, जो आगे चलकर नसों की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण बनता है। 

उंगलियों और जोड़ों में यूरिक एसिड क्रिस्टल्स जमा होने के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही इस समस्या को केवल एक सामान्य दर्द नहीं मानते, बल्कि इसे शरीर के विभिन्न दोषों और प्रणालियों में आई खराबी के रूप में वर्गीकृत करते हैं:

 वात-रक्त प्रधान क्रिस्टलाइजेशन: आयुर्वेद में यूरिक एसिड के बढ़ने और जोड़ों में जमा होने की स्थिति को वात-रक्त कहा जाता है। इसमें बढ़ा हुआ वात दोष रक्त को दूषित करता है, जिससे उंगलियों में अत्यधिक सूखापन, कठोरपन और सुई चुभने जैसे तीखे दर्द होते हैं।

 पेरीफेरल न्यूरोपैथी क्रिस्टल्स: इसमें यूरिक एसिड के बारीक कण नसों की बाहरी परत Myelin sheath को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके कारण हाों में सुन्नपन और झनझनाहट का ऐसा पैटर्न बनता है जो रात को सोते समय अचानक तीव्र हो जाता है।

 क्रोनिक गाउट विकृति : यह तब होता है जब लंबे समय तक ध्यान न देने से क्रिस्टल्स बड़े पत्थरों Tophi का रूप ले लेते हैं। यह स्थिति गंभीर जोड़ों का दर्द पैदा करती है और उंगलियों के आकार को भी हमेशा के लिए टेढ़ा कर सकती है।

 शरीर में यूरिक एसिड क्रिस्टल्स बढ़ने के मुख्य लक्षण क्या हो सकते हैं?

 जब रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा अनियंत्रित होती है, तो शरीर चुपचाप कई अलार्म बजाना शुरू कर देता है। इन लक्षणों को शुरुआती चरण में पहचानकर गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है: रात के समय तीव्र चुभन: सोने के कुछ घंटों बाद अचानक उंगलियों के पोरों और जोड़ों में ऐसा महसूस होना मानो कोई बारीक सुइयाँ चुभा रहा हो, जिससे नींद अचानक खुल जाती है। जोड़ों में लालिमा और सूजन: प्रभावित उंगलियों या हाथ के जोड़ों के आसपास की त्वचा का गर्म होना, लाल पड़ना और वहाँ हल्की या भारी सूजन दिखाई देना। 

सुबह के समय कठोरपन : सुबह सोकर उठने पर उंगलियों को मोड़ने या मुट्ठी बंद करने में अत्यधिक कठिनाई और दर्द का होना, जो धीरे-धीरे दिन बढ़ने पर कम हो जाता है। गंभीर थकान और मानसिक तनाव: शरीर में टॉक्सिन्स का स्तर बढ़ने से मरीज को लगातार क्रोनिक थकान महसूस होती है, जिससे नींद पूरी नहीं होती और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। अकारण बेचैनी और घबराहट: नसों पर लगातार पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव नर्वस सिस्टम को ट्रिगर करता है, जिससे इंसान को बैठे-बैठे चिंता होने लगती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर लोग क्या भयंकर गलतियाँ और लापरवाही करते हैं? उंगलियों की इस चुभन और दर्द से फौरन राहत पाने के चक्कर में लोग अक्सर कुछ ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो समस्या को ठीक करने के बजाय उसे हमेशा के लिए गंभीर बना देते हैं।

लोग इस समस्या में क्या गलतियाँ करते हैं?

  • पेनकिलर्स की लत लगाना: दर्द उठते ही डॉक्टर की सलाह के बिना तुरंत दर्दनिवारक दवाइयाँ Painkillers खा लेना। यह आंतों और किडनी को नुकसान पहुँचाता है, जिससे किडनी यूरिक एसिड को बाहर निकालना पूरी तरह बंद कर देती है।
  • गलत सिटिंग पोस्चर: ऑफिस में काम करते समय ऑफिस का पोस्चर सही न रखना और बिना किसी सपोर्ट के कलाई और उँगलियों पर लगातार दबाव डालते रहना।
  • बिना सोचे-समझे हाई-प्रोटीन डाइट लेना: बिना किसी डॉक्टरी सलाह के भारी मात्रा में दालें, पनीर या सप्लीमेंट्स खाते रहना, जिससे प्यूरीन की मात्रा और ज़्यादा बढ जाती है।

इससे शरीर में क्या जटिलताएँ होती हैं?

  • नसों को स्थायी नुकसान Permanent Nerve Damage: क्रिस्टल्स का लगातार जमाव नसों के सिग्नल्स को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता है, जिससे नसों को नुकसान पहुँचता है और हाथ हमेशा के लिए कमज़ोर हो सकते हैं।
  • किडनी स्टोन का खतरा: जब खून में यूरिक एसिड बहुत ज़्यादा बढ जाता है, तो किडनी उसे छान नहीं पाती और वे क्रिस्टल्स किडनी में जाकर पथरी Uratic calculi का रूप ले लेते हैं।

आयुर्वेद यूरिक एसिड क्रिस्टल्स और नसों की चुभन के विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे हाइपरयूरिसीमिया Hyperuricemia या गाउट कहता है, आयुर्वेद उसे एक व्यापक प्रणालीगत विकार मानता है। आयुर्वेद के अनुसार यह समस्या मुख्य रूप से रक्त धातु और वात दोष के दूषित होने से जुड़ी है:

  • अग्निमांद्य और आम का निर्माण: जब हमारी जठराग्नि पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो भोजन सही से नहीं पचता। यह अधपचा भोजन शरीर में आम विषैले टॉक्सिन्स बनाता है, जो रक्त में मिलकर यूरिक एसिड का रूप ले लेता है।
  • अपान वात और व्यान वात की विकृति: व्यान वात का काम पूरे शरीर में रक्त और सिग्नल्स को प्रसारित करना है। जब टॉक्सिन्स के कारण नसों के रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वात का मार्ग रुक जाता है और वह उँगलियों के बारीक जोडों में जाकर तीखी चुभन पैदा करता है।
  • रक्त और वात का संसर्ग Vatarakta: बढा हुआ वात जब दूषित रक्त के साथ मिलता है, तो यह पूरे शरीर के छोटे जोडों पर हमला करता है। रात के समय वात का प्रभाव प्राकृतिक रूप से बढता है, इसीलिए सोते वक्त उँगलियों में दर्द और चुभन की तीव्रता कई गुना अधिक महसूस होती है।

यूरिक एसिड को नियंत्रित करने और नसों को मज़बूत बनाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने शरीर से यूरिक एसिड के कचरे को साफ करने और नसों की शक्ति को वापस लाने के लिए आपको एक संतुलित और सुपाच्य आयुर्वेदिक डाइट को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - यूरिक एसिड घटाने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - क्रिस्टल्स बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, गेहूं, जौ Barley, ओट्स, दलिया। मैदा, खमीर उठी हुई ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स।
दालें Pulses मूंग की दाल, मसूर की दाल हल्की और अच्छी तरह पकी हुई। कुल्थी, उड़द की दाल, राजमा, छोले, भारी साबुत दालें।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, खीरा, करेला। अरबी, कटहल, बैंगन, बहुत ज़्यादा टमाटर और कच्ची पालक।
फल Fruits पपीता, सेब, चेरी, अमरुद, भीगी हुई मुनक्का। बहुत ज़्यादा खट्टे और बिना मौसम के ठंडे फल।
पेय पदार्थ Beverages गुनगुना पानी, धनिए का पानी, नारियल पानी। कोल्ड ड्रिंक्स, शराब, डिब्बाबंद जूस, अत्यधिक डार्क कॉफी।

आंतों और नसों से यूरिक एसिड बाहर निकालने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें कुछ ऐसी जादुई वनस्पतियाँ प्रदान की हैं जो बिना किसी दुष्प्रभाव के शरीर के भीतर जमे हुए एसिड क्रिस्टल्स को घोल सकती हैं और नसों की सूजन को शांत करती हैं:

  • गिलोय Giloy: आयुर्वेद में गिलोय को वातरक्त की सबसे उत्तम औषधि माना गया है। यह रक्त को शुद्ध करती है, बढ़े हुए यूरिक एसिड को कम करती है और उँगलियों के जोडों की सूजन को जड़ से मिटाती है।
  • मंजिष्ठा Manjistha: यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है। मंजिष्ठा रक्त में जमा टॉक्सिन्स और एसिड क्रिस्टल्स को पिघलाकर नसों के मार्ग को पूरी तरह साफ करती है।
  • त्रिफला Triphala: पाचन को दुरुस्त करने और शरीर से हानिकारक कचरे को बाहर निकालने के लिए त्रिफला का नियमित सेवन बेहद मददगार होता है, जिससे नया यूरिक एसिड नहीं बनता।
  • गोक्षुर Gokshura: यह जड़ी-बूटी एक प्राकृतिक डाइयुरेटिक मूत्रवर्धक है। यह किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाकर यूरिक एसिड को मूत्र के माध्यम से आसानी से शरीर से बाहर फ्लश कर देती है।
  • सोंठ Dry Ginger: यह बंद नसों को खोलती है, वात दोष को शांत करती है और रात के समय उँगलियों में होने वाली सुई जैसी तीखी चुभन को तुरंत कम करती है।

नसों की चुभन और जोडों के दर्द को दूर करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स सूक्ष्म नसों और जोडों में गहराई तक बैठ जाते हैं, तो पंचकर्म की बाहरी और आंतरिक थेरेपीज़ शरीर को तुरंत राहत पहुँचाती हैं:

  • अभ्यंग मालिश Abhyanga: विशेष वातशामक औषधीय तेलों से हाथों और उँगलियों की अभ्यंग मालिश करने से रक्त संचार बढ़ता है और क्रिस्टल्स पिघलने लगते हैं।
  • स्वेदन थेरेपी Swedana: मालिश के बाद दी जाने वाली हर्बल स्वेदन थेरेपी यानी औषधीय भाप से नसों की जकड़न खुलती है और त्वचा के रोमछिद्रों के माध्यम से टॉक्सिन्स बाहर आते हैं।
  • मात्रा बस्ती Matra Basti: बड़ी आंत और मलाशय के रास्ते दी जाने वाली मात्रा बस्ती सीधे वात के मूल स्थान पर काम करती है। यह शरीर के सूखेपन को दूर कर नसों को चिकनाई देती है।
  • विरेचन थेरेपी Virechana: शरीर के संपूर्ण शुद्धिकरण के लिए की जाने वाली विरेचन थेरेपी लिवर और रक्त से अत्यधिक पित्त और सड़े हुए चिपचिपे टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।

नसों और जोडों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

लंबे समय की खराब जीवनशैली और यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स से डैमेज हुई सूक्ष्म नसों को दोबारा अपनी प्राकृतिक स्वस्थ अवस्था में लौटने के लिए एक अनुशासित समय की आवश्यकता होती है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और सही खानपान के सेवन से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। रक्त में नए यूरिक एसिड का बनना बंद होगा और रात को सोते समय उँगलियों में होने वाली चुभन की तीव्रता कम होने लगेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म चिकित्सा और रसायनों के प्रभाव से जोडों में जमा पुराने क्रिस्टल्स धीरे-धीरे पिघलकर बाहर निकलने लगेंगे। नसों की सूजन और जकड़न खत्म होने लगेगी और हाथों की कार्यक्षमता सामान्य होने लगेगी।
  • 5-6 महीने: आपका नर्वस सिस्टम और संपूर्ण पाचन तंत्र पूरी तरह पोषित हो जाएगा। आप बिना किसी दर्द या सुन्नपन के सुबह उठेंगे और रात को एक आरामदायक, गहरी और प्राकृतिक नींद का अनुभव करेंगे।

आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

उँगलियों की चुभन और यूरिक एसिड के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है, जिसे नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड को तुरंत दबाने वाली दवाएं या नसों को सुन्न करने वाले सप्लीमेंट्स देना। अपान और व्यान वात को शांत करना, जठराग्नि को बढ़ाना और 'आम' को पिघलाकर रक्त शुद्ध करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल प्यूरिन मेटाबॉलिज्म की या किडनी की एक स्थानीय समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात-रक्त और असंतुलित जीवनशैली का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और lifestyle केवल प्रोटीन कम करने और खूब पानी पीने की आम सलाह दी जाती है। खाने में 'स्नेहन' सही घी/तेल, वातशामक आहार, और जठराग्नि के अनुसार व्यक्तिगत भोजन पर ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर और शरीर के दवाओं के आदी हो जाने पर यूरिक एसिड दोबारा तेजी से बढ़ने लगता है। शरीर का पाचन तंत्र और किडनी अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे प्राकृतिक रूप से एसिड को बाहर निकालना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस वात-रक्त और यूरिक एसिड की समस्या को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • जोडों का अत्यधिक सूज जाना और गर्म होना: अगर उँगलियों या पैर के अँगूठे का जोड़ अचानक बहुत ज़्यादा सूज जाए, गहरा लाल हो जाए और छूने पर भयंकर गर्म महसूस हो, जो कि तीव्र गाउट अटैक का संकेत है।
  • कपकपी के साथ तेज़ बुखार आना: उँगलियों में दर्द के साथ-साथ अगर तेज़ बुखार आने लगे, जो जोडों में किसी गंभीर इन्फेक्शन या सेप्टिक अर्थराइटिस का अलार्म हो सकता है।
  • हाथों की पकड़ पूरी तरह खत्म होना: अगर अचानक उँगलियों में इतनी कमज़ोरी आ जाए कि आप एक कप या पेन भी न पकड़ पाएं, जो गंभीर नर्व डैमेज को दर्शाता है।
  • पेशाब करने में भयंकर दर्द या खून आना: अगर पीठ के निचले हिस्से में तेज़ दर्द के साथ पेशाब में खून दिखाई दे, जो यूरिक एसिड स्टोन के किडनी में फँसने का संकेत हो सकता है।

निष्कर्ष

अपने शरीर और नसों को एक अमूल्य संपत्ति मानें। जब आप अपने फोन या कंप्यूटर की जंक फाइल्स साफ करते हैं तो वह तेजी से चलने लगता है, ठीक उसी तरह जब आपके रक्त और सूक्ष्म नसों से यूरिक एसिड क्रिस्टल्स साफ होंगे, तो आपका पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा। रात को सोते समय उँगलियों में होने वाली सुई जैसी चुभन को एक छोटी समस्या मानकर टालने की भूल बिल्कुल न करें; यह एक बड़ा अलार्म है कि आपकी जठराग्नि प्यूरीन को पचा नहीं पा रही है और नसें कमज़ोर पड़ रही हैं। दर्दनिवारक गोलियों के खतरनाक जाल से बाहर निकलें, शुद्ध सात्विक आहार अपनाएं, गिलोय और मंजिष्ठा जैसी जड़ी-बूटियों का सहारा लें और पंचकर्म की अभ्यंग व स्वेदन थेरेपी से अपनी नसों को नया जीवन दें। उँगलियों के इस दर्द और बेचैनी को अपनी नियति न बनने दें, और अपनी जठराग्नि व नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से फौलादी बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हाँ, नींबू पानी विटामिन सी से भरपूर होता है और शरीर में प्रकृति से अल्कलाइन प्रभाव पैदा करता है। यह किडनी को यूरिक एसिड को घोलकर बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे उँगलियों में क्रिस्टल्स का जमाव कम हो सकता है।

कई बार रक्त में यूरिक एसिड का स्तर सामान्य आता है, लेकिन क्रिस्टल्स पहले ही जोडों या सूक्ष्म नसों के आसपास जमा हो चुके होते हैं। इसके अलावा, यह सर्वाइकल या नर्व कंप्रेशन के कारण भी हो सकता है।

शत-प्रतिशत। ठंडा तापमान वात दोष को बढ़ाता है और रक्त संचार को धीमा करता है, जिससे यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स अधिक तेजी से जमते हैं। रात को हमेशा गुनगुने पानी का ही प्रयोग करें।

बिल्कुल नहीं। जब उँगलियों और जोडों में क्रिस्टल्स जमा हों, तो भारी वज़न उठाने से जोडों के टिश्यूज को नुकसान पहुँच सकता है और सूजन बढ़ सकती है। इस स्थिति में हल्के योग और वॉक करना बेहतर है।

हाँ, अत्यधिक चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन शरीर को डीहाइड्रेट करता है। पानी की कमी के कारण किडनी यूरिक एसिड को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे नसों में चुभन बढ़ जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार, दही और खट्टे टमाटर रक्त को दूषित करते हैं और वात-रक्त को बढ़ाते हैं। इसलिए जब तक उँगलियों में दर्द और चुभन की समस्या ठीक न हो जाए, इनका सेवन बंद रखना ही  बुद्धिमानी है।

बहुत गहरा संबंध है। सूरज ढलने के बाद पाचन अग्नि मंद हो जाती है। देर रात भारी भोजन करने से वह पचने के बजाय सड़ता है और आम टॉक्सिन्स बनाता है, जो यूरिक एसिड को बढ़ाते हैं।

यदि चुभन का कारण कार्पल टनल सिंड्रोम या नर्व कंप्रेशन है, तो ब्रेस कलाई को सीधा रखता है और राहत दे सकता है। लेकिन अगर समस्या यूरिक एसिड क्रिस्टल्स की है, तो यह केवल एक अस्थायी सहारा है, इलाज नहीं।

हाँ, विटामिन बी12 की कमी से नसों की बाहरी परत कमज़ोर हो जाती है, जिससे उँगलियों में सुन्नपन और चुभन होती है। डॉक्टर से जाँच करवाकर यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि मूल कारण यूरिक एसिड है या विटामिन की कमी।

एकदम तीव्र सूजन में कुछ पल के लिए बर्फ आराम दे सकती है, लेकिन लंबे समय में बर्फ की सिकाई वात को बढ़ाकर क्रिस्टल्स को और कड़ा कर देती है। आयुर्वेद में इसके लिए औषधीय तेलों के गुनगुने लेप की सलाह दी जाती है।

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