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Mouth Ulcers और Bad Breath बार-बार क्यों होते हैं – Digestion Link Ayurveda से

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठते ही आईने के सामने खड़े होकर अपनी जीभ को देखना और मसूड़ों या गाल के अंदरूनी हिस्से पर एक और नए छाले Mouth Ulcer को पाकर उदास हो जाना। इसके साथ ही, किसी से बात करते समय मुँह से आने वाली दुर्गंध Bad Breath के डर से अपना मुँह चुराना या बार-बार च्यूइंग गम चबाना। इस रोज़मर्रा की परेशानी के बीच, जब लोग आपको ओरल हाइजीन Oral Hygiene ठीक रखने की नसीहत देते हैं, तो हम इसे केवल दांतों या मुँह की सफाई से जोड़कर देखने लगते हैं और महंगे माउथवॉश का सहारा लेते हैं।

लेकिन यह साधारण मुँह की गंदगी नहीं है; यह आपके पेट और आंतों की वह चीख है जो खराब पाचन Poor Digestion और शरीर में बढ़ती हुई खतरनाक गर्मी Pitta के कारण बाहर आ रही है। जब मुँह के छाले और साँसों की बदबू रोज़ की आदत बन जाए, तो समझ लीजिए कि आपका डाइजेस्टिव सिस्टम Digestive System टॉक्सिन्स Toxins से भर चुका है, जिसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर गंभीर आंतों की बीमारियों Gut Issues का रूप ले सकता है।

मुँह के छाले और साँसों की बदबू शरीर में क्या संकेत देते हैं?

मुँह केवल एक अंग नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे पाचन तंत्र Digestive Tract का प्रवेश द्वार है। पेट और आंतों में होने वाली कोई भी उथल-पुथल सबसे पहले मुँह के छालों और बदबू के रूप में सामने आती है। यह लगातार बिगड़ा हुआ पाचन शरीर में कई तरह के हानिकारक बदलाव करता है:

  • जठराग्नि का कमज़ोर होना Weak Digestive Fire: जब आपका खाया हुआ भोजन ठीक से नहीं पचता, तो वह पेट में सड़ने लगता है। इस सड़न से निकलने वाली गैस और एसिड ऊपर की ओर मुँह की तरफ उठते हैं, जो साँसों की भयंकर बदबू Halitosis का कारण बनते हैं।
  • अत्यधिक एसिड और पित्त का बढ़ना Acidic Overload: मसालेदार, तला-भुना और बासी खाना खाने से पेट में एसिड का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है। यह एसिड जब रिफ्लक्स Acid Reflux होकर मुँह तक पहुँचता है, तो गालों के अंदरूनी हिस्से और जीभ की नाज़ुक त्वचा को जला देता है, जिससे छाले Ulcers बन जाते हैं।
  • गट फ्लोरा का असंतुलन Gut Flora Imbalance: आंतों में गुड बैक्टीरिया की कमी और बैड बैक्टीरिया के बढ़ने से शरीर में टॉक्सिन्स Toxins का निर्माण होता है। ये टॉक्सिन्स खून में मिलकर लार Saliva के ज़रिए मुँह तक पहुँचते हैं और छालों व बदबू का कारण बनते हैं।
  • लार का सूखना Dry Mouth/Xerostomia: तनाव और कम पानी पीने से लार ग्रंथि Salivary glands सूखने लगती है। लार मुँह को प्राकृतिक रूप से साफ रखती है; इसके सूखने से मुँह में बैक्टीरिया तेज़ी से पनपते हैं जो दुर्गंध पैदा करते हैं।

माउथ अल्सर Mouth Ulcers और मुँह की बदबू किन प्रकारों में सामने आती हैं?

हर व्यक्ति का खान-पान और उसके शरीर की प्रकृति अलग होती है। पेट की खराबी से मुँह पर पड़ने वाला यह प्रभाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • पित्त-प्रधान छाले और बदबू: इस स्थिति में छाले लाल, गहरे और भयंकर जलन Burning sensation वाले होते हैं। कुछ भी तीखा या गर्म खाने पर मुँह में आग लग जाती है। साँसों से खट्टी और सड़ी हुई गंध आती है। मुँह का स्वाद हमेशा कड़वा रहता है और इंसान हमेशा एसिडिटी से परेशान रहता है।
  • वात-प्रधान छाले और बदबू: इसमें छाले सूखे, खुरदुरे और बहुत दर्दनाक होते हैं। होंठ फटने लगते हैं और मुँह में हमेशा भारी रूखापन Dryness महसूस होता है। साँसों से एक अजीब सी सूखी और कसैली Astringent गंध आती है। ऐसे लोगों को अक्सर भारी कब्ज़ Constipation की शिकायत रहती है।
  • कफ-प्रधान छाले और बदबू: लगातार धीमे पाचन के कारण शरीर में आम टॉक्सिन्स भर जाता है। छाले हल्के सफेद या पीले रंग के होते हैं, जिनमें दर्द कम होता है लेकिन मुँह में हमेशा एक चिपचिपापन Stickiness रहता है। साँसों से मीठी लेकिन बहुत भारी और सड़ी हुई दुर्गंध Foul smell आती है और जीभ पर एक मोटी सफेद परत जमी रहती है।

क्या आपको भी पेट की खराबी और छालों के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

पाचन का खराब होना रातों-रात छालों में नहीं बदलता। शरीर बहुत पहले से अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर मौसम का बदलाव या मामूली पेट दर्द मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • खाना खाते ही खट्टी डकारें आना: भोजन करने के तुरंत बाद गले और छाती में जलन Heartburn महसूस होना और मुँह में खट्टा या कड़वा पानी आना।
  • जीभ पर मोटी सफेद या पीली परत Coated Tongue: सुबह ब्रश करने के बाद भी जीभ का साफ न होना और उस पर एक मोटी परत का जमा रहना, जो पेट में जमे आम Toxins का सीधा संकेत है।
  • ब्रश करने के 1 घंटे बाद ही बदबू लौटना: महंगे टूथपेस्ट और माउथवॉश के इस्तेमाल के बावजूद बहुत जल्दी साँसों का भारी हो जाना और खुद को भी वह दुर्गंध महसूस होना।
  • तीखा खाने पर मुँह और पेट में भयंकर जलन: ज़रा सा भी मसाला या मिर्च खाने पर गालों के अंदरूनी हिस्से का छिल जाना और पेट में भारी गर्मी महसूस होना।

इस समस्या को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ क्या हैं?

साँसों की बदबू और छालों से तुरंत राहत पाने के लिए मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो समस्या को जड़ से ठीक करने के बजाय पाचन तंत्र को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • अत्यधिक माउथवॉश का इस्तेमाल: अल्कोहल युक्त माउथवॉश मुँह के केवल लक्षणों Smell को दबाते हैं। ज़्यादा इस्तेमाल से ये मुँह के गुड बैक्टीरिया को मार देते हैं, जिससे मुँह का रूखापन बढ़ता है और छाले और भयानक हो जाते हैं।
  • केमिकल वाले ऑइंटमेंट Ointments लगाना: छालों को सुन्न करने वाले जेल Gels केवल कुछ घंटों का आराम देते हैं, लेकिन जिस जगह से पेट से गर्मी उठ रही है, वहां कोई सुधार नहीं होता, इसलिए छाले बार-बार लौटते हैं।
  • लगातार एंटासिड Antacids खाना: एसिडिटी और डकार को दबाने के लिए रोज़ एंटासिड खाने से पेट का प्राकृतिक एसिड जो खाना पचाने के लिए ज़रूरी है खत्म हो जाता है, जिससे खाना और ज़्यादा सड़ने लगता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर पेट की इस गर्मी और सड़न को ठीक न किया जाए, तो यह समस्या क्रोनिक गैस्ट्राइटिस Chronic Gastritis, पेप्टिक अल्सर Peptic Ulcers और आईबीएस Irritable Bowel Syndrome - IBS का भयंकर रूप ले लेती है।

आयुर्वेद माउथ अल्सर, बैड ब्रेथ और पाचन Digestion के कनेक्शन को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे माउथ अल्सर या हैलिटोसिस Halitosis कहता है, आयुर्वेद उसे मुखपाक Mukhapaka, उर्ध्वग अम्लपित्त Urdhwaga Amlapitta और आम Toxins के संचय के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • अग्निमांद्य और आम का निर्माण: आयुर्वेद के अनुसार, सभी रोगों की जड़ मंद जठराग्नि कमज़ोर पाचन है। जब खाना नहीं पचता तो वह आम एक विषैला, चिपचिपा पदार्थ बन जाता है। यह आम पेट में सड़कर दुर्गंध पैदा करता है जो श्वास नली के ज़रिए बाहर आती है।
  • पित्त का ऊर्ध्व गति Upward movement of Pitta: पेट की गर्मी उष्ण गुण जब अपने स्थान से बढ़कर ऊपर की ओर Urdhwaga सिर और मुँह की तरफ बढ़ती है, तो वह मुँह की श्लेष्मिक कला Mucous membrane को पका देती है, जिसे आयुर्वेद में मुखपाक छाले कहा जाता है।
  • रक्त और रस धातु की दुष्टि: गलत खानपान जैसे बहुत ज़्यादा चाय, मिर्च, जंक फूड से शरीर का रस Plasma और रक्त Blood दूषित हो जाता है। दूषित रक्त त्वचा और मुँह में फफोले और छाले पैदा करता है।

पेट की गर्मी मिटाने और छालों को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके पेट में आग लगा सकता है और उसे बुझा भी सकता है। बार-बार होने वाले छालों और मुँह की बदबू से बचने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - पेट को ठंडक देने वाले और पित्त शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - गर्मी और बदबू बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, जौ। मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, खमीर उठा हुआ आटा (Breads), पिज़्ज़ा।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (छालों और आंतों के लिए अमृत), नारियल तेल। बहुत अधिक मक्खन, मेयोनीज़, रिफाइंड तेल, डालडा।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, पेठा (Ash gourd), तरोई, कद्दू, परवल, खीरा। ज़्यादा कच्चा प्याज और लहसुन (बदबू बढ़ाते हैं), बैंगन, तीखी हरी मिर्च।
फल (Fruits) तरबूज, खरबूजा, पका हुआ पपीता, मीठा सेब, मुनक्का, नारियल पानी। बहुत खट्टे फल (संतरा, नींबू), अनानास, कच्चा आम (कच्चे और खट्टे फल पित्त बढ़ाते हैं)।
पेय पदार्थ (Beverages) सौंफ और मिश्री का पानी, धनिये का पानी, ताज़ा मट्ठा (बिना खट्टा किए)। बहुत ज़्यादा चाय और कॉफी (पेट में भयंकर एसिड बनाती हैं), कोल्ड ड्रिंक्स, शराब।

पाचन सुधारने और छालों को जड़ से खत्म करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के पेट की गर्मी को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी आंतों को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • मुलेठी Licorice / Yashtimadhu: मुलेठी पेट के एसिड को बेअसर करने और मुँह के छालों को प्राकृतिक रूप से हील करने के लिए एक जादुई औषधि है। इसका पानी पीने या इसे चबाने से मुँह और आंतों को भारी ठंडक मिलती है।
  • आंवला Amla: विटामिन सी से भरपूर आंवला शरीर से अतिरिक्त पित्त Pitta को बाहर निकालता है और रक्त को शुद्ध करता है, जिससे छालों का बार-बार आना रुक जाता है।
  • सौंफ और इलायची Fennel & Cardamom: यह दोनों जठराग्नि को बिना बढ़ाए भोजन को पचाते हैं। यह मुँह की लार ग्रंथि को उत्तेजित करते हैं और साँसों की बदबू को तुरंत खत्म करने वाले प्राकृतिक माउथ-फ्रेशनर हैं।
  • गिलोय Giloy: शरीर के अंदरूनी आम और सूजन को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय बेहतरीन इम्यूनिटी बूस्टर और पित्त-शामक का काम करती है।
  • त्रिफला Triphala: पेट में सड़े हुए मल और कब्ज़ को शरीर से बाहर निकालने के लिए रोज़ रात को त्रिफला का सेवन करना पाचन और छालों के मरीज़ों के लिए बहुत ज़रूरी है।

पेट की गर्मी निकालने और छालों को शांत करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब आंतों में पित्त और टॉक्सिन्स बहुत गहराई तक जम चुके हों, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। ये बाहरी और पंचकर्म थेरेपीज़ शरीर को अंदर से साफ कर देती हैं:

  • गंडूष और कवल Gandusha and Kavala: यह आयुर्वेद का ओरल डिटॉक्स है। इसमें औषधीय तेल जैसे तिल का तेल या इरिमेदादी तेल या काढ़े को मुँह में भरकर रखा जाता है Oil Pulling। यह मुँह के हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है, मसूड़ों को फौलादी बनाता है और छालों व बदबू को तुरंत रोकता है।
  • विरेचन Virechana: यह पंचकर्म की एक प्रमुख थेरेपी है जिसमें औषधियों के माध्यम से पेट और आंतों से अतिरिक्त पित्त और अम्लता Acid को मल के रास्ते बाहर निकाला जाता है। इससे शरीर की पूरी गर्मी शांत हो जाती है।
  • शिरोधारा Shirodhara: कई बार अत्यधिक मानसिक तनाव और स्ट्रेस से भी जठराग्नि बिगड़ती है और छाले होते हैं। शिरोधारा दिमाग को जादुई शांति देती है और तनाव के कारण होने वाले एसिड सिक्रीशन को रोकती है।

पाचन पूरी तरह रिपेयर होने और छाले खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से गलत खानपान के कारण डैमेज हुई आंतों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1 महीने: औषधियों और प्राकृतिक माउथ-केयर से आपके मुँह के छाले तेज़ी से हील होंगे। साँसों की बदबू में भारी कमी आएगी और पेट का भारीपन व एसिडिटी कम होगी।
  • 2-3 महीने: पेट की जठराग्नि सुधरेगी। आम Toxins पच जाएगा। आप जो खाएंगे वह सही से पचेगा और नया एसिड या पित्त बनना बंद हो जाएगा। मुँह का रूखापन खत्म हो जाएगा।
  • 4-5 महीने: आंतों का गट फ्लोरा पूरी तरह रिस्टोर हो जाएगा। आपका शरीर अंदर से ठंडा और मज़बूत हो जाएगा, जिससे छाले और बदबू की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी और आप आत्मविश्वास के साथ लोगों से बात कर सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

माउथ अल्सर और मुँह की बदबू के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द कम करने के लिए स्टेरॉयड जेल, एंटीसेप्टिक माउथवॉश और एसिडिटी के लिए एंटासिड देना। पित्त को शांत करना, 'आम' को पचाना, जठराग्नि बढ़ाना और गंडूष जैसी थेरेपी से जड़ से इलाज।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल मुँह की एक स्थानीय (Local) समस्या और हाइजीन की कमी मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए पित्त और टॉक्सिन्स से भरा एक संपूर्ण गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल माउथवॉश और विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स की सलाह, लेकिन जठराग्नि या पेट की शुद्धि पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। पित्त-शामक डाइट, सही समय पर भोजन, कब्ज़ दूर करना और पेट की शुद्धि को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर छाले और बदबू तुरंत वापस आ जाते हैं। आंतें अंदर से मज़बूत होती हैं और पाचन खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से रोग-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद पाचन और छालों की इस समस्या को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने मुँह या शरीर में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • छालों का 3 हफ्ते से ज़्यादा न भरना: अगर कोई छाला बहुत बड़ा हो गया है, उसमें दर्द नहीं है, और वह हफ्तों तक भरने का नाम नहीं ले रहा है, तो यह गंभीर बीमारी Oral Cancer जैसी स्थिति का संकेत हो सकता है।
  • छालों से लगातार खून आना: अगर मसूड़ों या छालों से बिना ब्रश किए भी अपने आप खून Bleeding रिसने लगे।
  • भोजन निगलने में भयंकर दर्द: अगर अल्सर गले के बहुत अंदर तक फैल गए हैं और आपको पानी या थूक निगलने में भी तेज़ दर्द और रुकावट महसूस हो रही हो।
  • लगातार वजन गिरना और काला मल आना: अगर साँसों की भारी बदबू के साथ आपका वजन तेज़ी से घट रहा है और मल का रंग बिल्कुल काला Tar-like आ रहा है, जो पेट में गंभीर अल्सर या ब्लीडिंग का संकेत है।

निष्कर्ष

साँसों की ताज़गी और मुँह का स्वास्थ्य केवल दिखावे या कॉस्मेटिक Cosmetic की चीज़ नहीं है; यह सीधे तौर पर आपके पेट और आंतों का दर्पण है। बार-बार होने वाले छाले और मुँह की वह जिद्दी दुर्गंध आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपकी जठराग्नि कमज़ोर हो चुकी है, पेट में टॉक्सिन्स आम सड़ रहे हैं और पित्त दोष भड़क चुका है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना माउथवॉश और एंटासिड्स से दबाते हैं, तो आप अपनी आंतों को हील करने के बजाय उन्हें और ज़्यादा बीमार कर रहे होते हैं। इस कॉस्मेटिक मास्किंग Masking के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने खानपान को सुधारें, अत्यधिक चाय-कॉफी और मिर्च-मसालों से ब्रेक लें और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी, मुनक्का और लौकी शामिल करें। मुलेठी, त्रिफला और सौंफ जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और गंडूष Oil Pulling व विरेचन से अपने शरीर की गर्मी को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालें। बार-बार छालों के दर्द और बदबू की शर्मिंदगी से अपने आत्मविश्वास को कमज़ोर न पड़ने दें, और अपने पाचन तंत्र को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

साधारण कट (जैसे दांतों से गाल कट जाना) 2-3 दिन में खुद हील हो जाता है। लेकिन खराब पाचन से होने वाले माउथ अल्सर बार-बार उसी जगह या अलग-अलग जगह उभरते हैं, बहुत तेज़ जलन पैदा करते हैं और अक्सर पेट की खराबी या एसिडिटी के साथ ही आते हैं।

नहीं। अगर बदबू का कारण दाँतों के बीच फंसा खाना है, तो ब्रश करने से लाभ होगा। लेकिन अगर दुर्गंध पेट की सड़न, एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) या कब्ज़ के कारण फेफड़ों की सांस के ज़रिए आ रही है, तो ब्रश करने या माउथवॉश से वह कुछ ही मिनटों में लौट आएगी। इसके लिए आंतों की सफाई ज़रूरी है।

बिल्कुल। कैफीन (Caffeine) शरीर में भारी पित्त (गर्मी) और एसिड बढ़ाता है। यह लार ग्रंथि (Salivary glands) को सुखा देता है। लार मुँह को साफ रखती है, इसके सूखने (Dry Mouth) से बैक्टीरिया पनपते हैं जो छालों और बदबू की समस्या को बहुत तेज़ी से बढ़ाते हैं।

खट्टे फल (नींबू, संतरा), बहुत मसालेदार खाना, अचार, कच्चा प्याज, लहसुन, टमाटर और गरमा-गरम चाय-कॉफी बिल्कुल न पिएं। ये चीज़ें छालों पर एसिड की तरह काम करती हैं और जलन को कई गुना बढ़ा देती हैं।

हाँ, विटामिन B12 मुँह की श्लेष्मिक कला (Mucosa) को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है। लेकिन आयुर्वेद मानता है कि अगर आपकी जठराग्नि (पाचन) कमज़ोर है और आंतों में गर्मी है, तो आप कितने भी विटामिन सप्लीमेंट्स खा लें, शरीर उसे सोख (Absorb) नहीं पाएगा। इसलिए पहले पाचन सुधारना ज़रूरी है।

हाँ, क्योंकि छाले पित्त (गर्मी) का प्रतीक हैं। छालों पर ठंडी चीज़ें जैसे बर्फ का टुकड़ा रखना या नारियल पानी पीना पित्त को तुरंत शांत करता है और जलन (Burning Sensation) में आराम देता है।

गंडूष में औषधीय तेल (जैसे तिल का तेल) को मुँह में 10-15 मिनट घुमाया जाता है। यह तेल मुँह के कोने-कोने से टॉक्सिन्स और हानिकारक बैक्टीरिया को खींच लेता है, मसूड़ों की सूजन कम करता है और छालों पर एक सुरक्षा कवच (Coating) बना देता है, जिससे वे जल्दी भरते हैं।

हाँ, आयुर्वेद में इसे अपान वात का रुकना कहते हैं। जब मल आंतों में कई दिनों तक रुककर सड़ता है, तो उसकी सड़ी हुई गैस खून में मिलकर फेफड़ों तक पहुँचती है, जिससे साँस छोड़ते समय मल जैसी भारी दुर्गंध (Halitosis) आती है। त्रिफला से पेट साफ करने पर यह अपने आप ठीक हो जाती है।

हाँ, मुलेठी पित्त को शांत करने के लिए बेहतरीन है। आप मुलेठी का एक छोटा टुकड़ा मुँह में रखकर चूस सकते हैं या मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर छालों पर लगा सकते हैं। इससे जलन तुरंत कम होती है।

अगर दही मीठा और ताज़ा है, तो वह आंतों में गुड बैक्टीरिया (Probiotics) बढ़ाता है और पेट को ठंडक देता है। लेकिन अगर दही पुराना या बहुत खट्टा (Sour curd) है, तो वह शरीर में पित्त और एसिडिटी को भड़का देगा, जिससे छाले और ज़्यादा खराब हो सकते हैं। खट्टे दही से हमेशा बचें।

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