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बच्चों की Immunity बढ़ाने का आयुर्वेदिक तरीका - Chyawanprash से आगे

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 29 May, 2026
  • category-iconUpdated on 08 Jun, 2026
  • category-iconImmunity
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हर माँ-बाप की एक ही चिंता होती है, "मेरा बच्चा बार-बार बीमार क्यों पड़ता है?" कभी सर्दी, कभी खांसी, कभी बुखार। स्कूल गया नहीं कि अगले हफ्ते फिर छुट्टी और हम हर बार वही करते हैं, च्यवनप्राश की एक चम्मच सुबह खिला दो, बस हो गया।

लेकिन क्या सच में च्यवनप्राश काफ़ी है? या बच्चे की रोग से लड़ने की ताकत बढ़ाने के लिए इससे भी आगे सोचना ज़रूरी है?

Immunity आखिर होती क्या है? 

हम अक्सर सोचते हैं कि बच्चों कीमतलब बस सर्दी-खांसी से बचाव। लेकिन असल में इम्यूनिटॶ शरीर की वह ताकत होती है, जो बच्चे को बार-बार बीमार पड़ने से बचाने में मदद करती है। अगर बच्चे की इम्यूनिटॶ अच्छी हो, तो उसका शरीर मौसम बदलने, संक्रमण और कमजोरी जैसी परेशानियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।

इम्यूनिटॶ सिर्फ़ दवाओं या किसी एक चीज़ से नहीं बनती। बच्चे का खाना, नींद, खेलना-कूदना, पाचन और रोज़ की आदतें ये सब मिलकर शरीर की अंदरूनी ताकत तैयार करते हैं। इसलिए जब बच्चा जल्दी थकने लगे, बार-बार बीमार पड़े या हमेशा सुस्त रहे, तो इसे केवल छोटी परेशानी समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

आजकल बच्चों की Immunity इतनी जल्दी कमजोर क्यों हो रही है?

आजकल बच्चों की सेहत पर कई छोटी-छोटी आदतों का असर पड़ रहा है। इसी वज़ह से उनकी रोगों से लड़ने की ताकत पहले जैसी मज़बूत नहीं रह पाती।

  • बाहर का खाना ज़्यादा खाना: रोज़ाना पैकेट वाले स्नैक्स, ठंडी चीज़ें और जंक फूड खाने से शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता।
  • मोबाइल और टीवी में ज़्यादा समय बिताना: घंटों स्क्रीन देखने से बच्चों की नींद और दिनचर्या बिगड़ने लगती है, जिसका असर शरीर की ताकत पर पड़ता है।
  • पूरी नींद न लेना: देर रात तक जागने से शरीर को आराम नहीं मिलता और बच्चे जल्दी थकने लगते हैं।
  • खेलकूद कम होना: आजकल बच्चे बाहर कम खेलते हैं, जिससे शरीर की प्राकृतिक ताकत धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है।
  • बार-बार ठंडी चीज़ें खाना: आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और फ्रिज का खाना शरीर पर बुरा असर डाल सकता है।
  • मौसम के हिसाब से खान-पान न होना: हर मौसम में शरीर की ज़रूरत बदलती है, लेकिन खाने में ध्यान न देने से बच्चे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।
  • घर का ताज़ा खाना कम खाना: दाल, घी, फल और हरी सब्जियों की कमी भी शरीर को अंदर से कमजोर बना सकती है।

बच्चों की immunity बढ़ाने के लिए सबसे  ज़रूरी चीज क्या है? 

बच्चों की immunity सिर्फ़ एक चीज़ से नहीं बढ़ती, बल्कि उनकी रोज़ की छोटी-छोटी आदतों से मज़बूत बनती है। अगर बचपन से शरीर को सही देखभाल मिले, तो बच्चे बार-बार बीमार कम पड़ते हैं।

  • पूरा और सही खाना: बच्चे की थाली में घर का ताज़ा खाना, दाल, हरी सब्ज़ियाँ, फल और घी जैसी चीज़ें होना बहुत ज़रूरी है। इससे शरीर को अंदर से ताकत मिलती है।
  • अच्छी नींद: कम सोने से बच्चों का शरीर जल्दी थक जाता है और बीमारी से लड़ने की ताकत भी कम होने लगती है। इसलिए समय पर और पूरी नींद बहुत ज़रूरी है।
  • पेट का ठीक रहना: अगर बच्चे का पेट बार-बार खराब रहता है या खाना ठीक से नहीं पचता, तो शरीर कमजोर पड़ने लगता है। मज़बूत पाचन ही अच्छी रोगों से लड़ने की ताकत की नींव है।
  • बाहर खेलना और दौड़ना: पूरे दिन मोबाइल या टीवी के सामने बैठने से शरीर सुस्त हो जाता है। रोज़ थोड़ा खेलना-कूदना बच्चों को अंदर से मज़बूत बनाता है।
  • बार-बार ठंडी और पैकेट वाली चीज़ें कम करना: बहुत ज़्यादा चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और बाहर का खाना शरीर की ताकत धीरे-धीरे कम कर सकता है।
  • प्यार और तनाव से दूर माहौल: खुश रहने वाले बच्चे अक्सर ज़्यादा स्वस्थ रहते हैं। डांट, डर या ज़्यादा दबाव का असर भी बच्चों की सेहत पर पड़ता है।

बच्चों में कौन-से संकेत बताते हैं कि शरीर अंदर से कमजोर हो रहा है? 

कई बार बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं, जल्दी थक जाते हैं या उनका शरीर अंदर से कमजोर लगने लगता है। शरीर कुछ छोटे-छोटे संकेत देता है, जिन्हें समय रहते समझना ज़रूरी है।

  • बार-बार सर्दी, खांसी या बुखार होना
  • खेलते-खेलते जल्दी थक जाना
  • भूख कम लगना या खाना देखकर मना करना
  • वजन और लंबाई उम्र के हिसाब से न बढ़ना
  • हर समय सुस्ती या आलस रहना
  • छोटी-छोटी बातों में चिड़चिड़ापन आना
  • पेट से जुड़ी परेशानी बार-बार होना

आयुर्वेद बच्चों की Immunity को कैसे देखता है? 

आयुर्वेद में बच्चों की बार-बार बीमार पड़ने की समस्या को सिर्फ़ कमजोर शरीर से जोड़कर नहीं देखा जाता। आयुर्वेद मानता है कि जब बच्चे का पाचन ठीक नहीं रहता, नींद पूरी नहीं होती, या खान-पान संतुलित नहीं होता, तब शरीर की अंदरूनी रक्षा शक्ति कमजोर होने लगती है।

आयुर्वेद के अनुसार बच्चे की सेहत उसकी पाचन शक्ति, रोज़ की दिनचर्या और शरीर के संतुलन पर निर्भर करती है। अगर बच्चा बार-बार सर्दी, खांसी, थकान या संक्रमण से परेशान रहता है, तो इसे शरीर के कमजोर संतुलन का संकेत माना जाता है।

इसी वज़ह से आयुर्वेद सिर्फ़ एक चीज़ खिलाने पर ध्यान नहीं देता, बल्कि बच्चे की पूरी दिनचर्या, खाना, नींद और शरीर को अंदर से मज़बूत बनाने पर ज़ोर देता है, ताकि बच्चा हर मौसम में स्वस्थ और एक्टिव रह सके।

बच्चों की इम्यूनिटॶ बढ़ाने वाली कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

अक्सर हमें लगता है कि बच्चों को सर्दियों में बस चम्मच भरकर च्यवनप्राश खिला दिया, तो हमारा फ़र्ज़ पूरा हो गया। पर सच बताऊँ तो आयुर्वेद का खजाना सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। हमारे पास ऐसी कई कमाल की जड़ी-बूटियाँ हैं जो बच्चों को बार-बार बीमार पड़ने और डॉक्टर के चक्कर लगाने से बचा सकती हैं।

  • गिलोय: इसे बच्चों के शरीर का 'कवच' समझ लीजिए। अगर आपके बच्चे को भी हर दूसरे दिन सर्दी-जुकाम घेर लेता है, तो गिलोय उसकी रोगों से लड़ने की ताकत को एकदम टाइट कर देगा।
  • अश्वगंधा: कुछ बच्चे बड़े दुबले-पतले होते हैं और जरा सा दौड़-भाग करते ही हांफने लगते हैं। यह बूटी उनकी थकी हुई नसों में जान फूंकती है और अंदरूनी ताकत बढ़ाती है।
  • तुलसॶ: मौसम बदला नहीं कि घर में छींकें शुरू! ऐसे में आंगन में लगी तुलसी की पत्तियाँ किसी रामबाण से कम नहीं हैं। यह खांसी-जुकाम को पास भी नहीं फटकने देती।
  • आंवला: विटामिन-सी का पावरहाउस! यह न सिर्फ बच्चों को अंदर से फौलाद बनाता है, बल्कि उनके पूरे शरीर को सही पोषण भी देता है।
  • मुलेठी: बदलते मौसम में जब बच्चों का गला बैठने लगता है या सूखी खांसी परेशान करती है, तब मुलेठी का हल्का सा रस गले की खराश को तुरंत शांत कर देता है।
  • शतावरी: अगर बच्चा खाने-पीने में नखरे करता है और उसका शरीर नहीं लग रहा, तो शतावरी उसकी कमजोरी को दूर कर बॉडी को सही शेप में लाने में मदद करती है।

पर हाँ, एक ज़रूरी बात! बच्चे नाजुक होते हैं। उनकी उम्र और शरीर की जरूरत को देखकर ही ये चीजें दी जाती हैं। इसलिए खुद से कोई भी नुस्खा आजमाने से पहले किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से हाथ मिलाकर सलाह ज़रूर ले लें।

आसान और असरदार आयुर्वेदिक थेरेपीज़

बच्चों की इम्यूनिटॶ बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि उन्हें सिर्फ कड़वी दवाइयाँ ही पिलाई जाएं। आयुर्वेद में कुछ ऐसे रिलैक्सिंग और नेचुरल तरीके भी हैं, जो बच्चों को खेल-खेल में तंदुरुस्त बना देते हैं।

  • अभ्यंग: हल्के गुनगुने तेल से जब बच्चे के बदन की मालिश की जाती है, तो उसकी हड्डियाँ मजबूत होती हैं। मालिश के बाद बच्चा ऐसी गहरी और सुकून की नींद सोता है कि देखकर दिल खुश हो जाए।
  • (हल्की भाप): अगर बच्चे की छाती में बलगम जमा हो गया हो या शरीर भारी लग रहा हो, तो जड़ी-बूटियों की हल्की सी भाप देने से उसका पूरा सिस्टम एकदम हल्का हो जाता है।
  • नस्य: कुछ खास मामलों में डॉक्टर नाक में आयुर्वेदिक तेल की एक-दो बूंदें डालते हैं। इससे बच्चों का श्वास मार्ग साफ रहता है और सिर का भारीपन गायब हो जाता है।
  • योग और प्राणायाम: बच्चों को सुबह-सुबह खेल-खेल में लंबी सांसें लेना और हल्के-फुल्के आसन सिखाएं। इससे उनकी बॉडी एक्टिव रहती है और दिमाग भी एकदम शार्प होता है।
  • रसायन चिकित्सा: यह कोई केमिकल नहीं है, बल्कि आयुर्वेद की वो स्पेशल नेचुरल टॉनिक्स हैं जो बच्चों की भूख, पाचन और बीमारी से लड़ने की क्षमता को सीधा बूस्ट करती हैं।

सहायक आहार: क्या खाएँ और क्या न खाएँ

सीधी सी बात है आप बच्चे को कितनी भी महंगी दवाइयाँ दे दें, अगर उसकी रोज़ की डाइट खराब है, तो सब बेकार है। घर का खाना ही बच्चे की असली ढाल है।

क्या दबाकर खिलाएँ?

  • घर का ताज़ा खाना: माँ के हाथ का गरमा-गरम और हल्का खाना, जिसका कोई मुकाबला ही नहीं है।
  • सीजनल फल: सेब, केला, पपीता और अमरूद जो भी फल उस मौसम में बाजार में मिल रहे हों, उन्हें बच्चे की आदत में शुमार करें।
  • हरी सब्जियाँ और दालें: भले ही वे नाक-भौंह सिकोड़ें, पर दाल का पानी और हरी सब्जियाँ शरीर के विकास के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
  • घी और सूखे मेवे: दूध में थोड़ा सा घी या सुबह भीगे हुए बादाम-अखरोट चबाना उनकी नसों को मजबूती देता है।
  • घर के मसाले: खाने में हल्दी, अदरक और तुलसी जैसी जादुई चीज़ों का इस्तेमाल ज़रूर करें।

किन चीजों से दूरी भली?

  • पैकेट बंद कचरा: चिप्स, कुरकुरे और जंक फूड सिर्फ पेट भरते हैं, पोषण के नाम पर इनमें रत्ती भर भी कुछ नहीं होता।
  • बर्फ जैसी ठंडी चीजें: फ्रिज का चिल्ड पानी और कोल्ड ड्रिंक्स बच्चों के गले और पेट के दुश्मन हैं।
  • चॉकलेट और टॉफी की अति: जरूरत से ज़्यादा मीठा खाने से बच्चे सुस्त होने लगते हैं और उनका नेचुरल डिफेंस सिस्टम कमजोर हो जाता है।
  • मोबाइल देखते हुए खाना: आजकल की सबसे गंदी आदत! स्क्रीन देखते हुए खाने से बच्चे को पता ही नहीं चलता कि उसने कितना खाया और पेट को उसे पचाने का सही सिग्नल नहीं मिल पाता।

खतरे की घंटी: डॉक्टर के पास कब भागें?

कभी-कभी हम सोचते हैं कि 'चलो, बच्चा है, थोड़ा-बहुत बीमार तो पड़ता ही रहता है।' लेकिन कुछ इशारों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर नीचे लिखी बातें दिखें, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें:

  • बच्चा हर दूसरे हफ्ते बीमार पड़ जाता हो।
  • वह हमेशा सुस्त और थका-थका रहता हो, खेलने में उसका मन न लगे।
  • उम्र के हिसाब से उसका वजन या लंबाई न बढ़ रही हो।
  • उसे बिल्कुल भी भूख न लगती हो और खाना देखकर वह भागता हो।
  • मौसम बदलते ही सबसे पहले उसी की तबीयत खराब होती हो।
  • बात-बात पर चिड़चिड़ा होना या रोने लगना।

निष्कर्ष

आज के दौर में बच्चों को सिर्फ बीमारियों से बचाना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें अंदर से मजबूत बनाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। सिर्फ च्यवनप्राश के भरोसे बैठकर हम अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते।

आयुर्वेद का मूल मंत्र यही है कि जब बच्चे का रूटीन सही होगा उसे टाइम पर नींद मिलेगी, घर का शुद्ध खाना मिलेगा, और वह मोबाइल छोड़कर मैदान में खुलकर खेलेगा तभी उसकी इम्यूनिटॶ सच में मजबूत होगी। घर का खुशनुमा माहौल और ये छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही बच्चों को ताउम्र सेहतमंद बनाए रखेंगी।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

 अगर बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है, जल्दी थक जाता है, बार-बार सर्दी-खांसी होती है या भूख कम लगती है, तो यह कमजोर इम्युनिटी का संकेत हो सकता है।

 नहीं। च्यवनप्राश मदद कर सकता है, लेकिन अच्छी नींद, सही खाना, खेल-कूद और रोज़ की आदतें भी उतनी ही  ज़रूरी हैं।

 घर का ताजा खाना, मौसमी फल, हरी सब्जियां, घी, दाल और सूखे मेवे बच्चों की ताकत बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

 हाँ, ज्यादा पैकेट वाला खाना, ठंडी चीजें और जंक फूड शरीर की ताकत को कमजोर कर सकते हैं।

गिलोय, तुलसी, आंवला और शहद जैसी चीजें बच्चों की रोगों से लड़ने की क्षमता मजबूत करने में सहायक मानी जाती हैं।

 बिल्कुल। पूरी नींद लेने से शरीर खुद को बेहतर तरीके से मजबूत रख पाता है।

हाँ, धूप और शारीरिक गतिविधि बच्चों की सेहत और इम्युनिटी दोनों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

 मौसम बदलने पर बच्चों का शरीर थोड़ा संवेदनशील हो सकता है, इसलिए इस समय खान-पान और देखभाल पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

 आयुर्वेद के अनुसार अच्छी पाचन शक्ति, सही नींद और संतुलित दिनचर्या बच्चों की अंदरूनी ताकत को मजबूत बनाती है।

 अगर बच्चा बहुत जल्दी-जल्दी बीमार पड़ रहा हो, कमजोरी ज्यादा हो या वजन सही से न बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना  ज़रूरी है।

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