Դ

Դ Search
Close Button
 
 

Squatting (उकड़ूं बैठना) बंद करना सही है या जॉइंट के लिए और बुरा?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 09 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 09 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5009

बचपन में हम घंटों तक उकड़ूँ बैठकर खेला करते थे। हमारे दादा-दादी और नाना-नानी भी बिना किसी सहारे के जमीन पर बैठकर लंबे समय तक काम कर लेते थे लेकिन आज अगर किसी सामान्य व्यक्ति से कहा जाए कि वह केवल 2 मिनट के लिए उकड़ूँ बैठ जाए, तो उसके घुटनों से कट-कट की आवाज़ आने लगती है, पैरों में दर्द होने लगता है और कई बार उसका संतुलन भी बिगड़ जाता है।

आधुनिक जीवनशैली ने हमारी कई प्राकृतिक आदतों को हमसे दूर कर दिया है। इनमें से एक आदत है उकड़ूँ बैठना, यानी वह स्थिति जिसमें हम भारतीय शौचालय का उपयोग करते समय बैठते हैं। आज कई लोग घुटनों के दर्द, जोड़ों की जकड़न और कमज़ोर मांसपेशियों के कारण इस मुद्रा में आराम से बैठने में असमर्थ हैं।

वेस्टर्न टॉयलेट, डाइनिंग टेबल और ऑफिस की कुर्सियों ने हमारी इस आदत को लगभग समाप्त कर दिया है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उकड़ूँ बैठना छोड़ देना वास्तव में हमारे जोड़ों के लिए फायदेमंद है, या फिर यह आदत छोड़ने से हमारे घुटने और जोड़ धीरे-धीरे अंदर ही अंदर और अधिक कमज़ोर होते जा रहे हैं?

उकड़ूं बैठने से जोड़ों के अंदर क्या होता है?

साइनोवियल फ्लूइड Synovial Fluid का स्राव: हमारे जोड़ों के बीच एक खास तरह का तरल पदार्थ होता है जिसे साइनोवियल फ्लूइड कहते हैं। यह जोड़ों के लिए ग्रीस का काम करता है। जब हम उकड़ूं बैठते हैं, तो जोड़ों पर एक सकारात्मक दबाव पड़ता है, जिससे शरीर में नया साइनोवियल फ्लूइड पैदा होता है और जोड़ अंदर से चिकने  रहते हैं।

कार्टिलेज (Cartilage) का पोषण: जोड़ों के बीच की गद्दी (कार्टिलेज) में सीधा रक्त संचार (Blood flow) नहीं होता। इसे पोषण तभी मिलता है जब जोड़ों पर दबाव पड़ता है और रिलीज होता है (जैसे स्पंज को पानी में निचोड़ना)। उकड़ूं न बैठने से कार्टिलेज सूखने लगता है और ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) का खतरा बढ़ जाता है। 

उकड़ूं बैठना छोड़ने के गंभीर नुकसान

अगर आपने उकड़ूं बैठना बिल्कुल छोड़ दिया है, तो आपके शरीर में ये नकारात्मक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं

  1. कूल्हों (Hips) का जाम होना: कुर्सी पर 90-डिग्री के कोण पर बैठे रहने से कूल्हे की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं। इससे कूल्हे जाम हो जाते हैं, जिसका सीधा असर हमारी कमर पर पड़ता है और लोअर बैक पेन (Lower back pain) शुरू हो जाता है।
  2. टखनों (Ankles) का कमजोर होना: उकड़ूं बैठने से एड़ियों और टखनों में लचीलापन आता है। जो लोग उकड़ूं नहीं बैठते, उनके टखने इतने कठोर हो जाते हैं कि चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते समय सारा दबाव घुटनों पर आ जाता है।
  3. घुटनों की कमजोरी: घुटनों को सहारा देने वाली मांसपेशियां और लिगामेंट्स उकड़ूं बैठने से मजबूत होते हैं। इसे छोड़ने से ये सिकुड़ जाते हैं और हल्का सा झटका लगने पर भी घुटने में चोट आ जाती है।

आयुर्वेद और उकड़ूं बैठना एक गहरा संबंध

आयुर्वेद में मानव शरीर को वात, पित्त और कफ के संतुलन के रूप में देखा जाता है। जब बात हड्डियों, जोड़ों और शरीर की हरकतों की आती है, तो इसका सीधा संबंध 'वात दोष' (Vata Dosha) से होता है।

वात दोष और जोड़ों का स्वास्थ्य

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के निचले हिस्से (पेल्विक रीजन, जांघों, घुटनों और पैरों) में वात का वास होता है। बढ़ती उम्र या गलत लाइफस्टाइल के कारण जब शरीर में वात बढ़ता है, तो यह जोड़ों में रुखापन (Dryness) पैदा करता है। इस स्थिति को 'संधिगत वात' या आधुनिक भाषा में अर्थराइटिस (Arthritis) कहते हैं।

जब हम उकड़ूं बैठते हैं (आयुर्वेद और योग में इसे 'मलासन' कहा जाता है), तो शरीर में वात का प्रवाह संतुलित होता है। यह जोड़ों में जमे हुए वात को बाहर निकालता है और रुखेपन को दूर करके गर्माहट और लचीलापन लाता है।

उकड़ूं बैठने के अन्य चमत्कारी फायदे

सिर्फ जोड़ों के लिए ही नहीं, उकड़ूं बैठने की आदत आपके पूरे शरीर के लिए एक वरदान है:

फायदा वैज्ञानिक/शारीरिक कारण
बेहतर पाचन तंत्र पेट और आंतों पर प्राकृतिक दबाव पड़ता है, जिससे मलत्याग (Bowel movement) आसान होता है।
पेल्विक फ्लोर की मजबूती पेल्विक मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं और मजबूत बनती हैं, जो उम्र बढ़ने पर यूरिन लीकेज की समस्या से बचाती हैं।
कमर दर्द से राहत रीढ़ की हड्डी (Spine) प्राकृतिक रूप से खिंचती है (Decompression), जिससे लोअर बैक का तनाव कम होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए यह कूल्हों को चौड़ा करता है और पेल्विस को खोलने में मदद करता है, जिससे नॉर्मल डिलीवरी में आसानी होती है (डॉक्टर की सलाह पर)।

क्या सबको उकड़ूं बैठना चाहिए? (सावधानियां)

यह सच है कि उकड़ूं बैठना एक प्राकृतिक और बेहतरीन अवस्था है, लेकिन सभी के लिए इसे तुरंत शुरू करना सही नहीं है।

अगर आपने सालों से यह पोजीशन नहीं ली है और आप अचानक से पूरा उकड़ूं बैठने की कोशिश करेंगे, तो आपके लिगामेंट्स खिंच सकते हैं

इन्हें उकड़ूं बैठने से बचना चाहिए या डॉक्टर से पूछना चाहिए

  1. जिन्हें गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस (Severe Osteoarthritis) है और जोड़ों की गद्दी पूरी तरह घिस चुकी है।
  2. जिनकी हाल ही में घुटने या कूल्हे की सर्जरी (Knee/Hip Replacement) हुई हो।
  3. जिन्हें मेनिस्कस टियर (Meniscus tear) या ACL लिगामेंट में चोट लगी हो।
  4. जिन्हें बैठते समय घुटनों में तेज और चुभने वाला दर्द (Sharp shooting pain) होता हो। (हल्की जकड़न या मांसपेशियों का खिंचाव सामान्य है, लेकिन तीखा दर्द नहीं)।

उकड़ूं बैठने की आदत दोबारा कैसे डालें? (Step-by-Step Guide)

अगर आपके घुटने स्वस्थ हैं लेकिन सिर्फ जकड़न (Stiffness) के कारण आप उकड़ूं नहीं बैठ पाते, तो इसे अचानक करने के बजाय धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

चरण 1: सपोर्ट का इस्तेमाल करें (Assisted Squat)

दरवाजे की चौखट (Door frame) या किसी मजबूत पोल को पकड़ लें। अपने पैरों को कंधों से थोड़ा चौड़ा रखें। अब सहारे के साथ धीरे-धीरे नीचे जाएं। जितना नीचे जा सकें, वहीं रुकें और फिर ऊपर आ जाएं। शुरुआत में पूरा नीचे जाने की जिद न करें।

चरण 2: एड़ियों के नीचे सपोर्ट (Heel Elevation)

कई लोगों की एड़ियां जमीन पर नहीं टिक पातीं, जिसका कारण टखनों (Ankles) का जाम होना है। ऐसे में अपनी एड़ियों के नीचे एक तौलिया रोल करके रख लें या कोई किताब रख लें। इससे आपके घुटनों पर एक्स्ट्रा दबाव नहीं पड़ेगा और आप आसानी से बैठ पाएंगे।

चरण 3: मलासन (Malasana Pose)

जब आप बिना सहारे के बैठने लगें, तो योग के मलासन का अभ्यास करें। उकड़ूं बैठें, अपने हाथों को नमस्ते की मुद्रा में छाती के पास लाएं और अपनी कोहनियों (Elbows) से अपने घुटनों को बाहर की तरफ हल्का सा धकेलें। यह आपके कूल्हों (Hips) को खोलने में अद्भुत काम करेगा।

नियम: हर दिन सिर्फ 1 मिनट से शुरुआत करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। इसे ब्रश करते समय, टीवी देखते समय या फोन चलाते समय किया जा सकता है।

निष्कर्ष

उकड़ूं बैठना खराब नहीं है, बल्कि उकड़ूं बैठने की क्षमता खो देना खराब है आधुनिक सुख-सुविधाओं ने हमें शारीरिक रूप से पंगु बनाना शुरू कर दिया है। जोड़ों को बचाने के नाम पर उन्हें बिल्कुल न मोड़ना उन्हें समय से पहले बूढ़ा बना रहा है आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात पर सहमत हैं कि शरीर के जोड़ इस्तेमाल करने के लिए बने हैं। अपनी क्षमता और शरीर की वर्तमान स्थिति का सम्मान करते हुए, धीरे-धीरे उकड़ूं बैठने की आदत को वापस अपनी जिंदगी में लाएं। यह सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक मानवीय आदत है जो आपको जीवन भर अपने पैरों पर खड़ा रखेगी।यदि लंबे समय से उकड़ूं न बैठने के कारण आपके जोड़ों में गंभीर जकड़न, सूजन या तेज दर्द है और शुरुआती अभ्यासों से आराम नहीं मिल रहा है, तो जीवा आयुर्वेद (Դ) +91 9266714040 आपकी सटीक मदद कर सकता है। जीवा के अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर केवल दर्द को नहीं दबाते, बल्कि आपकी शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) का गहराई से विश्लेषण करके दर्द के मूल कारण को समझते हैं।

Reference

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

बिल्कुल! यह घुटनों को लचीला बनाता है और साइनोवियल फ्लूइड (प्राकृतिक ग्रीस) बढ़ाकर उन्हें अंदर से मजबूत और स्वस्थ रखता है।

लंबे समय तक ऐसा न करने से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और जोड़ों में वात बढ़ जाता है, जिससे शुरुआत में दर्द होता है।

गंभीर आर्थराइटिस में इससे बचें। अगर दर्द हल्का है, तो डॉक्टर या जीवा आयुर्वेद के विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही शुरुआत करें।

यह सेहत के लिए बेहतरीन है! इससे मलाशय पर सही दबाव पड़ता है, पाचन सुधरता है और कब्ज जैसी बीमारियां जड़ से खत्म होती हैं।

 ऐसा टखनों (ankles) और पिंडलियों की मांसपेशियों के जाम होने के कारण होता है। शुरुआत में एड़ी के नीचे तौलिया रखकर अभ्यास करें।

शुरुआत हमेशा केवल 1 से 2 मिनट से करें। धीरे-धीरे जब शरीर को आदत हो जाए, तो इसे 5-10 मिनट तक ले जाएं।

 हाँ, बिल्कुल! यह आपकी रीढ़ की हड्डी को प्राकृतिक रूप से खींचता है, जिससे पीठ के निचले हिस्से (lower back) का तनाव कम होता है।

 यह जोड़ों में रूखेपन का संकेत है। आयुर्वेद के अनुसार, तिल के तेल से मालिश (स्नेहन) करने के बाद ही उकड़ूं बैठने का अभ्यास करें।

 यह पेल्विक हिस्से को खोलता है और नॉर्मल डिलीवरी में मदद करता है। हालांकि, इसे हमेशा अपने डॉक्टर की कड़ी निगरानी में ही करें।

आप अपने पैरों के नीचे स्टूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे शरीर का पोस्चर सही रहता है और पेट आसानी से साफ होता है

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us