आज के समय में महिलाओं का स्वास्थ्य कई तरह की जटिलताओं से घिरा हुआ है, जहाँ एक तरफ हार्मोनल असंतुलन की समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पाचन से जुड़ी परेशानियाँ भी आम हो चुकी हैं अक्सर महिलाएँ इन दोनों समस्याओं को अलग-अलग मानकर इनका इलाज कराने की कोशिश करती हैं, लेकिन असल में शरीर के भीतर ये दोनों एक गहरे धागे से जुड़ी होती हैं
जब शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ता है, तो उसका असर केवल किसी एक अंग या सिस्टम पर नहीं होता, बल्कि पूरा शरीर उसकी ज़द में आ जाता है पेट में लगातार रहने वाली गड़बड़ी और पीरियड्स की अनियंत्रित स्थिति का एक साथ होना किसी बड़े आंतरिक विकार का संकेत हो सकता है, जिसे गहराई से समझना बेहद ज़रूरी है।
आंत और हार्मोन का यह अनोखा संबंध क्या है?
शरीर के भीतर होने वाली हर क्रिया एक-दूसरे पर निर्भर करती है, विशेषकर महिलाओं में पाचन क्रिया और प्रजनन तंत्र का संबंध बहुत गहरा होता है जब किसी महिला को एक साथ पेट और यूट्रस दोनों से जुड़ी परेशानियाँ होने लगती हैं, तो इसके पीछे छिपे जैविक कारणों को समझना आवश्यक हो जाता है
- पेट, दिमाग और ओवरी का सीधा कनेक्शन (गट-ब्रेन-ओवरी एक्सिस) क्या आप जानती हैं कि हमारे पेट और दिमाग के बीच एक डायरेक्ट 'हॉटलाइन' या कनेक्शन होता है? मेडिकल भाषा में इसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। महिलाओं के मामले में, यह कनेक्शन थोड़ा और आगे बढ़कर सीधा हमारी ओवरीज़ (अंडाशय) तक जाता है। इसलिए, जब पेट में कोई गड़बड़ी होती है, तो उसका सीधा असर हमारे हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है। यही कारण है कि अक्सर IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) जैसी पेट की दिक्कतों के साथ-साथ PCOD की समस्या भी शुरू हो जाती है।
- अंदरूनी सूजन (क्रोनिक इन्फ्लेमेशन) और इंसुलिन रेजिस्टेंस जब हमारा खाया हुआ खाना ठीक से पच नहीं पाता, तो आंतों के अंदर धीरे-धीरे सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ने लगती है। यह सूजन खून के रास्ते हमारी ओवरीज़ तक पहुँच जाती है। इसके कारण शरीर में मौजूद इंसुलिन अपना काम ठीक से नहीं कर पाता और 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' की स्थिति बन जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यही इंसुलिन रेजिस्टेंस PCOD के पनपने की सबसे बड़ी वजह है।
- एस्ट्रोजन हार्मोन का असंतुलन हमारी आंतों में रहने वाले करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया (माइक्रोबायोम) हमारे 'एस्ट्रोजन' हार्मोन को कंट्रोल करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब हमारे पेट का स्वास्थ्य बिगड़ता है, तो शरीर में एस्ट्रोजन को पचाने (मेटाबॉलाइज़ करने) की प्रक्रिया बहुत धीमी पड़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर में यह हार्मोन ज़रूरत से ज़्यादा जमा होने लगता है, और यहीं से पीरियड्स के अनियमित होने की शुरुआत हो जाती है।
- हमारी आज की लाइफस्टाइल का सीधा असर आजकल की हमारी जीवनशैली काफी आरामदायक हो गई है, लेकिन यही आराम हमें भारी पड़ रहा है। दफ्तरों में के कारण हमारे पेल्विक एरिया (पेट के निचले हिस्से) में खून का दौरा (ब्लड सर्कुलेशन) काफी कम हो जाता है। ज़ाहिर सी बात है, जब इस हिस्से में ब्लड फ्लो ठीक से नहीं होगा, तो हमारे पाचन तंत्र और ओवरीज़ (प्रजनन अंगों) दोनों को सही पोषण नहीं मिल पाता और वे एक साथ कमज़ोर पड़ने लगते हैं।
महिलाओं में एक साथ होने वाले इन दोनों विकारों के प्रकार
IBS और PCOD का यह दोहरा हमला हर महिला में एक जैसा नहीं दिखता, बल्कि इसके पीछे शरीर के दोषों की अलग-अलग भूमिका होती है आयुर्वेद के अनुसार इन दोनों के मिले-जुले रूपों को समझने से सटीक और व्यक्तिगत चिकित्सा करने में बहुत मदद मिलती है।
- वात-प्रधान रुकावट और गंभीर कब्ज़: इस प्रकार में महिलाओं को भयंकर कब्ज़ की समस्या होती है, मल बहुत कड़ा और सूखा आता है, और इसके साथ ही पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द और फ्लो की कमी महसूस होती है यह स्थिति शरीर में बढ़े हुए वात दोष के कारण पैदा होती है, जो आंतों और ओवरी दोनों को सुखा देती है
- पित्त-प्रधान सूजन और दस्त: इसमें महिलाओं को पेट में अत्यधिक जलन, कब्ज़ और दस्त का बारी-बारी से होना, और चेहरे पर भयंकर मुंहासे Acne व गुस्सा आने की समस्या होती है। पीसीओडॶ का यह रूप आंतों की अत्यधिक संवेदनशीलता से जुड़ा होता है।
- कफ-प्रधान भारीपन और वज़न बढ़ना: इस स्थिति में महिलाओं का वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ता है, मल बहुत चिपचिपा और भारी आता है, और पीरियड्स महीनों तक रुक जाते हैं। शरीर में हर वक्त सुस्ती और क्रोनिक फटीग की भावना बनी रहती है, क्योंकि आंतों में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं।
दोनों समस्याओं के मिले-जुले लक्षणों को कैसे पहचानें?
जब शरीर में ये दोनों बीमारियाँ एक साथ पनपती हैं, तो वे कई ऐसे लक्षण पैदा करती हैं जिन्हें सामान्य तौर पर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। इन शारीरिक और मानसिक बदलावों को समय रहते पहचानना ही स्थायी उपचार की पहली सीढ़ी होती है।
- पेट का फूलना और गैस बनना- नाभि के निचले हिस्से में हमेशा भारीपन रहना और भोजन के तुरंत बाद पेट का फूल जाना इसका सबसे आम लक्षण है, जो लोअर एब्डोमिनल पेन व गैस का कारण बनता है।
- पीरियड्स का समय पर न आना-अंडाशय में सिस्ट बनने के कारण पीरियड्स का कई-कई दिनों या महीनों तक देरी से आना और इसके साथ ही पेट में ऐंठन व मरोड़ की समस्या होना।
- मानसिक स्वास्थ्य पर असर- आंतों की गड़बड़ी और हार्मोनल उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर नर्वस सिस्टम को ट्रिगर करते हैं, जिससे महिला को हर वक्त एंग्जायटी Anxiety और अकारण उदासी महसूस होने लगती है।
- फोकस की कमी और सुस्ती-पाचन तंत्र से निकलने वाले हानिकारक टॉक्सिन्स जब रक्त प्रवाह में मिलते हैं, तो दिमाग पर हर वक्त धुंध जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे किसी भी काम में मन नहीं लगता और मानसिक तनाव बढ़ जाता है।
- त्वचा और बालों में बदलाव- चेहरे पर अनचाहे बाल आना, अत्यधिक मुंहासे होना और इसके साथ ही सुबह उठते ही पेट साफ न होने की झुंझलाहट बने रहना।
इस दोहरी परेशानी में महिलाएं अक्सर क्या गलतियाँ करती हैं?
- अक्सर देखा गया है कि जब पेट साफ नहीं होता और पीरियड्स भी ऊपर-नीचे होने लगते हैं, तो बहुत सी महिलाएँ घबराहट में कुछ ऐसे शॉर्टकट अपना लेती हैं जो फायदे की जगह नुकसान कर देते हैं। बिना सोचे-समझे उठाए गए ये कदम शरीर को अंदर से इतना कमज़ोर कर देते हैं कि बाद में उन्हें ठीक करना मुश्किल हो जाता है। अगर आप भी इन समस्याओं से जूझ रही हैं, तो इन 4 बड़ी गलतियों से तुरंत तौबा कर लें:
- रोज़-रोज़ पेट साफ करने वाले तेज़ चूर्ण या लैक्सेटिव्स लेना कब्ज से तुरंत राहत पाने के लिए बहुत सी महिलाएँ हर रात सनाय पत्ती, कायम चूर्ण या बाज़ार में मिलने वाले तेज़ लैक्सेटिव्स खाना शुरू कर देती हैं। शुरुआत में तो पेट साफ हो जाता है, लेकिन धीरे-धीरे आंतों को इसकी आदत पड़ जाती है। ये तेज़ चूर्ण आंतों की अंदरूनी नाजुक परत (म्यूकोसा) को छील देते हैं, जिससे आंतें हमेशा के लिए कमज़ोर और सुस्त हो जाती हैं।
- वजन घटाने के चक्कर में क्रैश डाइटिंग और कच्चा सलाद खाना PCOS/PCOD ठीक करने और वजन कम करने के नाम पर अचानक से खाना-पीना छोड़ देना या दिन भर सिर्फ कच्चा सलाद और उबली सब्जियां खाना एक और बड़ी गलती है। आयुर्वेद के हिसाब से कच्चा खाना पचाना बहुत भारी होता है। यह शरीर में 'वात दोष' को इतना बढ़ा देता है कि आंतें अंदर से पूरी तरह सूख जाती हैं, जिससे कब्ज और पीरियड्स की समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
- सिर्फ लक्षणों को दबाना (जड़ पर काम न करना) सबसे आम गलती यह है कि हम बीमारी की जड़ को समझे बिना सिर्फ उसके लक्षणों का इलाज करने लगते हैं। पीरियड्स ठीक करने के लिए हार्मोनल पिल्स (गर्भनिरोधक गोलियां) खा लेना और पेट की गैस के लिए एंटासिड या एंटासिड कैप्सूल निगल लेना। जब तक आप यह नहीं समझेंगी कि इन दोनों दिक्कतों की जड़ एक ही है (खराब पाचन), तब तक सिर्फ दवाइयां बदलने से कोई स्थायी आराम नहीं मिलने वाला।
- मानसिक तनाव को मामूली समझना हम दिन भर के काम के प्रेशर, एंग्जायटी और मानसिक तनाव को बहुत नॉर्मल मान लेते हैं। लेकिन सच तो यह है कि जब आप बहुत ज़्यादा स्ट्रेस में होती हैं, तो शरीर में 'कोर्टिसोल' (स्ट्रेस हार्मोन) का लेवल बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ कोर्टिसोल आपकी आंतों की नेचुरल मूवमेंट (पेरिस्टालसिस) को पूरी तरह जाम कर देता है, जिससे न तो पेट साफ होता है और न ही हार्मोन्स सही से काम कर पाते हैं।
आयुर्वेद के नज़रिए से IBS और PCOD का अंतर्संबंध
आधुनिक मेडिकल साइंस भले ही पेट की खराबी और महिलाओं की हार्मोनल दिक्कतों को दो अलग-अलग बीमारियां मानता हो, लेकिन आयुर्वेद में इन्हें एक-दूसरे से जुड़ा हुआ देखा जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक, सारा खेल हमारी 'मंदाग्नि' (कमज़ोर पाचन) और 'अपान वात' (पेट के निचले हिस्से की वायु) के बिगड़ने का है। सीधे शब्दों में कहें तो जब तक आपका पेट ठीक नहीं होगा, तब तक हार्मोन्स का संतुलन लौट ही नहीं सकता।
कमज़ोर पाचन और 'आम का बनना जब हमारे पेट की पाचन अग्नि ठंडी पड़ जाती है, तो जो खाना हम खाते हैं वह ठीक से पचने के बजाय अंदर ही अंदर सड़ने लगता है। इससे एक गाढ़ा और चिपचिपा कचरा बनता है, जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। यह टॉक्सिन आंतों की दीवारों पर चिपक जाता है। आयुर्वेद के नियम बताते हैं कि यही गंदगी धीरे-धीरे आगे बढ़कर गर्भाशय (uterus) की नलियों और रास्तों को भी ब्लॉक कर देती है।
अपान वात का रास्ता रुकना हमारे शरीर के निचले हिस्से की हर मूवमेंट—जैसे खुलकर पेट साफ होना या पीरियड्स का सही फ्लो—सब कुछ 'अपान वात' ही संभालता है। अब सोचिए, जब आंतों में पहले से ही कचरा और कब्ज जमा होगी, तो इस वायु का रास्ता रुक जाएगा। नतीजा यह होता है कि एक तरफ तो मोशन साफ नहीं आता, और दूसरी तरफ ओवरीज़ से अंडे भी सही समय पर बाहर नहीं निकल पाते।
धातुओं की कमी और ओवरी को पोषण न मिलना जब डाइजेशन ही खराब है, तो खाने से जो सबसे पहला 'रस' बनता है, वही दूषित और न्यूट्रिशन-लेस होता है। जब पहला रस ही खराब होगा, तो शरीर के बाकी हिस्सों और अंगों को पूरा पोषण कैसे मिलेगा? इसी पोषण की कमी (धातु क्षय) के चलते अंडाशय कमज़ोर होने लगते हैं और धीरे-धीरे उनमें छोटी-छोटी गांठें या सिस्ट बनने लगती हैं, जिसे आज हम पीसीओडॶ या पीसीओएस कह देते हैं।
आंतों और हार्मोन को संतुलित करने वाली आयुर्वेदिक डाइट
अपने पाचन तंत्र के प्रोसेसर को दोबारा ठीक करने और हार्मोन्स की गड़बड़ी को रोकने के लिए रोज़मर्रा के खानपान में बदलाव करना अत्यंत आवश्यक है। नीचे दी गई डाइट चार्ट का पालन करके आप अपनी आंतों को प्राकृतिक चिकनाई और शक्ति दे सकती हैं।
| आहार की श्रेणी | क्या खाएं फायदेमंद - आंतों को चिकनाई देने वाले | क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - मल को सुखाने और चिपकाने वाले |
| अनाज Grains | पुराना चावल, ओट्स दूध/घी के साथ, दलिया, मूंग दाल की खिचड़ी। | मैदा, वाइट ब्रेड, सूखे बिस्कुट, पैकेटबंद नूडल्स। |
| वसा Fats | देसी गाय का शुद्ध घी आंतों के लिए सबसे बड़ा अमृत, तिल का तेल। | रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा रूखा और बिना तेल-घी का खाना Zero-fat diet। |
| सब्ज़ियाँ Vegetables | लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, पालक सभी अच्छी तरह पकी और घी में छौंकी हुई। | कच्चा सलाद विशेषकर रात में, भारी कटहल, अरबी। |
| फल Fruits | पपीता, उबला हुआ सेब Stewed Apple, रात भर भीगी हुई मुनक्का। | कच्चे या बिना मौसम के ठंडे फल, केले कफ बढ़ाते हैं। |
| पेय पदार्थ Beverages | गुनगुना पानी, धनिए और जीरे का पानी, रात को गुनगुना दूध घी के साथ। | बर्फ का पानी पाचन के लिए ज़हर है, बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी। |
इस हार्मोनल और पाचन असंतुलन को दूर करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ
प्रकृति ने हमें ऐसी अद्भुत औषधियाँ प्रदान की हैं जो बिना किसी लत या दुष्प्रभाव के आंतों की प्राकृतिक गति को बहाल करती हैं और महिलाओं के प्रजनन तंत्र को अंदर से मज़बूत बनाती हैं। इन जड़ी-बूटियों का सही संयोजन इस दोहरी समस्या का काल है।
- शतावरी Shatavari:यह महिलाओं के लिए एक परम रसायन है। शतावरी Shatavari हार्मोनल संतुलन को दुरुस्त करती है, ओवरीज़ के काम को सुधारती है और आंतों के सूखेपन को दूर कर उन्हें प्राकृतिक नमी प्रदान करती है।
- अश्वगंधा Ashwagandha:अत्यधिक मानसिक तनाव और कोर्टिसोल के बढ़े हुए स्तर को नियंत्रित करने के लिए अश्वगंधा Ashwagandha बेहद चमत्कारी है, यह गट-ब्रेनै एक्सिस को शांत करके आईबीएस के लक्षणों को कम करती है।
- त्रिफला Triphala:यह केवल पेट साफ करने वाली दवा नहीं है, बल्कि त्रिफला Triphala आंतों की दीवारों को टोन करता है, जठराग्नि को प्रदीप्त करता है और बिना किसी आदत के शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकालता है।
- बिल्व Bilva: जब आईबीएस के कारण कभी कब्ज़ और कभी दस्त की स्थिति बनी हो, तो बिल्व Bilva आंतों की सूजन को शांत करता है, ऐंठन को रोकता है और मल को सही आकार देकर पाचन को स्थिर करता है।
शरीर और मन को पुनर्जीवित करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़
जब दोष और विषाक्त पदार्थ शरीर की गहराई में जम जाते हैं, तो बाहरी खानपान के साथ-साथ पंचकर्म की विशेष थेरेपीज़ की आवश्यकता होती है। ये चिकित्सा प्रक्रियाएँ शरीर के पूरे नर्वस और हार्मोनल सिस्टम को रीबूट करने की क्षमता रखती हैं।
- मात्रा बस्ती Matra Basti: बड़ी आंत और पेल्विक क्षेत्र से बढ़े हुए रूखे वात दोष को समूल नष्ट करने के लिए मेडिकेटेड ऑयल की मात्रा बस्ती दी जाती है, जो गर्भाशय और आंतों दोनों को अंदर से चिकनाई देती है।
- विरेचन थेरेपी Virechana therapy: लिवर, आंतों और रक्त की गहरी सफाई के लिए की जाने वाली यह विरेचन थेरेपी शरीर से संचित पित्त और सड़े हुए चिपचिपे टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर इंसुलिन के स्तर को सामान्य करती है।
- अभ्यंग मालिश Abhyanga massage: औषधीय तेलों के उपयोग से पूरे शरीर और विशेष रूप से लोअर एब्डोमेन पर अभ्यंग मालिश करने से नसों की जकड़न खुलती है, तनाव दूर होता है और अपान वात की गति सुधरती है।
आंतों और हार्मोनल संतुलन को ठीक होने में कितना समय लगता है?
लंबे समय की खराब जीवनशैली और गलत लैक्सेटिव्स के कारण आंतों व ओवरीज़ को जो नुकसान पहुँचता है, उसे दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने के लिए थोड़े धैर्य और अनुशासित समय की आवश्यकता होती है। यह क्रमिक सुधार का एक सुंदर सफर है।
- शुरुआती 1-2 महीने: कस्टमाइज्ड औषधियों और शुद्ध घी के नियमित सेवन से आपकी मंद पड़ चुकी जठराग्नि में सुधार होने लगता है, मल का चिपचिपापन कम होता है और पेट की ऐंठन व भारीपन में राहत मिलती है।
- 3-4 महीने: पंचकर्म चिकित्सा, विशेष रूप से बस्ती के प्रभाव से आंतों का रूखापन पूरी तरह खत्म होने लगता है, हार्मोनल असंतुलन नियंत्रित होता है और पीरियड्स प्राकृतिक रूप से सही समय पर आने शुरू हो जाते हैं।
- 5-6 महीने: इस अवधि तक आपका पूरा पाचन और एंडोक्राइन तंत्र पूरी तरह पोषित हो जाता है, जिससे आप बिना किसी बाहरी चूर्ण या कृत्रिम दवा के सहारे सुबह उठते ही एक प्राकृतिक, संतोषजनक इवैक्युएशन और स्वस्थ शरीर का अनुभव करती हैं।
आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर
आईबीएस और पीसीओडॶ जैसी जटिल समस्याओं के उपचार को लेकर आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा और सनातन आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है, जिसे समझना हर महिला के लिए ज़रूरी है।
| श्रेणी | आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care | आयुर्वेद Holistic care |
| इलाज का मुख्य लक्ष्य | मल को मुलायम करने के लिए स्टूल सॉफ्टनर्स और हार्मोनल पिल्स देना। | अपान वात को शांत करना, जठराग्नि को बढ़ाना और 'आम' को प्राकृतिक रूप से पिघलाकर आंतों को चिकनाई देना। |
| बीमारी को देखने का नज़रिया | इसे दो अलग-अलग अंगों की स्वतंत्र समस्या मानना। | इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और रूखे आहार का एक संपूर्ण सिंड्रोम अग्निमांद्य मानना। |
| डाइट और लाइफस्टाइल | केवल भारी मात्रा में फाइबर खाने और सिंथेटिक सप्लीमेंट्स की सलाह। | खाने में 'स्नेहन' घी/तेल, सही पोश्चर, और जठराग्नि के अनुसार सुपाच्य आहार पर ज़ोर दिया जाता है। |
| लंबा असर | गोलियाँ छोड़ने पर समस्या दोबारा वैसी ही या उससे बदतर हो जाती है। | शरीर की जठराग्नि और आंतें अंदर से इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि वे प्राकृतिक रूप से काम करना सीख जाती हैं। |
डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?
यद्यपि आयुर्वेद के माध्यम से वात और आंतों के इस गंभीर असंतुलन को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, लेकिन यदि आपको अपने शरीर में कुछ अचानक और अत्यधिक तीव्र बदलाव दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य हो जाता है।
- मल में ताज़ा खून आना: यदि मल त्याग करते समय ताज़ा लाल खून दिखाई दे या मल का रंग पूरी तरह से डामर की तरह काला हो जाए, जो आंतरिक ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है।
- असहनीय पेल्विक पेन: पेट के निचले हिस्से या गर्भाशय के आस-पास ऐसा भयंकर मरोड़ या दर्द उठना जो किसी भी पोज़िशन में लेटने पर शांत न हो और पेट छूने पर पत्थर जैसा कड़ा लगे।
- अचानक अत्यधिक वज़न कम होना: बिना किसी डाइटिंग या वर्कआउट के शरीर का वज़न बहुत तेज़ी से और अचानक से गिरना शुरू हो जाना।
- लगातार उल्टियाँ होना: पेट फूलने और गैस के साथ-साथ यदि कुछ भी खाने-पीने पर तुरंत गंभीर उल्टियाँ होने लगें और शरीर में पानी की कमी होने लगे।
निष्कर्ष
महिलाओं के शरीर में आईबीएस और पीसीओडॶ का एक साथ होना इस बात का साफ़ संकेत है कि उनके पाचन तंत्र का प्रोसेसर यानी जठराग्नि पूरी तरह से मंद हो चुकी है और अपान वात का प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध हो गया है। इस दोहरी परेशानी को केवल सतही दवाइयों या तेज़ चूर्ण के शॉर्टकट से ठीक नहीं किया जा सकता, इसके लिए शरीर की गहराई में जाकर दोषों को संतुलित करना और आंतों को शुद्ध गाय के घी व सही पोषण से चिकनाई देना आवश्यक है। अपने शरीर के इन अलार्मों को नज़रअंदाज़ न करें और इस असहनीय ब्लोटिंग, दर्द और अनियमितता के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर अपने जीवन को दोबारा स्वस्थ और ऊर्जावान बनाएं, इससे राहत पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।























































































































