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बार-बार बढ़ता uric acid आगे किन समस्याओं का कारण बन सकता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 16 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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आज के दौर में यूरिक एसिड का बढ़ना एक सामान्य बात मानी जाने लगी है। अक्सर लोग इसे पैरों के अंगूठे में होने वाला मामूली दर्द समझकर पेनकिलर खाकर दबा देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खून में बढ़ा हुआ यूरिक एसिड का स्तर आपके शरीर के भीतर एक 'टाइम बम' की तरह काम कर रहा है? जब शरीर में प्यूरीन Purine नामक तत्व का ब्रेकडाउन सही से नहीं होता या किडनी इसे बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह क्रिस्टल्स के रूप में जोड़ों और अंगों में जमा होने लगता है। अगर इसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो यह केवल जोड़ों का दर्द नहीं रह जाता, बल्कि शरीर के मुख्य अंगों को स्थायी रूप से डैमेज कर सकता है।

यूरिक एसिड असल में क्या है?

इसे सीधे शब्दों में कहें तो, यूरिक एसिड आपके शरीर का वह 'मेटाबॉलिक कचरा' है जो प्रोटीन के टूटने प्यूरीन मेटाबॉलिज्म के बाद पीछे छूट जाता है। सामान्य स्थिति में, आपकी किडनी इस कचरे को पहचानती है और पेशाब के ज़रिए शरीर से बाहर कर देती है।

लेकिन, जब आपकी जीवनशैली में गड़बड़ होती है, तो यह कचरा बाहर निकलने के बजाय आपके खून में घुलने लगता है। आयुर्वेद की गहराई में समझें तो, यह केवल एक केमिकल नहीं है, बल्कि यह शरीर में बढ़ा हुआ वह 'आम' टॉक्सिन है जो खून के साथ मिलकर तेजाब की तरह काम करने लगता है। जब यह तेजाब आपके जोड़ों में जाकर कांच के बारीक और नुकीले टुकड़ों की तरह जम जाता है, तब शुरू होता है सूजन और वह असहनीय दर्द, जिसे हम यूरिक एसिड की समस्या कहते हैं।

यूरिक एसिड जोड़ों का असहनीय दुश्मन

यूरिक एसिड बढ़ने का सबसे पहला और सीधा असर 'गाउट' के रूप में दिखता है। इसमें यूरिक एसिड के नुकीले क्रिस्टल्स जोड़ों खासकर पैर के अंगूठे, टखनों और घुटनों में जमा हो जाते हैं। यह दर्द इतना भयंकर होता है कि मरीज़ को लगता है जैसे उसके जोड़ में कांच के टुकड़े चुभ रहे हों। अगर इलाज न मिले, तो यह जोड़ों को स्थायी रूप से टेढ़ा कर सकता है।

किडनी स्टोन और किडनी फेलियर का खतरा

हमारी किडनी का काम खून को साफ करना है, लेकिन जब यूरिक एसिड लगातार बढ़ा रहता है, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही एसिड धीरे-धीरे किडनी में पथरी का रूप ले लेता है। बार-बार होने वाली ये पत्थरियाँ किडनी के टिश्यूज़ को नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे आगे चलकर 'क्रोनिक किडनी डिजीज' या किडनी फेलियर की नौबत आ सकती है।

यूरिक एसिड का दिल की बीमारियों से सीधा संबंध

धमनियों में सूजन Inflammation
हाई यूरिक एसिड शरीर में सूजन को बढ़ाता है, जो धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है और उन्हें सख्त बना देता है।

एंडोथेलियल डिसफंक्शन Endothelial Dysfunction
यह धमनियों की अंदरूनी परत Endothelium के काम को बिगाड़ देता है, जिससे ब्लड फ्लो सही तरीके से नहीं  हो पाता है और दिल पर दबाव बढ़ता है।

ब्लड प्रेशर का बढ़ना Hypertension Risk
बढ़ा हुआ यूरिक एसिड किडनी और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करके हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है, जो हार्ट डिजीज का मुख्य रिस्क फैक्टर है।

प्लाक जमने की प्रक्रिया तेज होना Atherosclerosis
यह धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल के जमाव Plaque formation को बढ़ावा देता है, जिससे ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा
लगातार हाई यूरिक एसिड लेवल रहने से दिल का दौरा Heart Attack, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर स्थितियों का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है।

यूरिक एसिड का टाइप-2 डायबिटीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से सीधा संबंध

यूरिक एसिड का स्तर सीधा आपके इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्रभावित करता है। जब शरीर में एसिड बढ़ता है, तो इंसुलिन अपना काम सही से नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। ज़्यादातर लोग जिन्हें हाई यूरिक एसिड है, वे भविष्य में डायबिटीज़ के शिकार हो जाते हैं। इसे 'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' की पहली सीढ़ी माना जाता है।

आयुर्वेद का दृष्टिकोण इसे 'वात-रक्त' क्यों कहते हैं?

आयुर्वेद में यूरिक एसिड की समस्या को 'वात-रक्त' कहा जाता है। यह तब होता है जब शरीर में 'वात' दोष बिगड़कर 'रक्त' खून को दूषित कर देता है। दूषित रक्त जब जोड़ों में ठहरता है, तो वह यूरिक एसिड के लक्षणों को जन्म देता है। आयुर्वेद इसे केवल एक केमिकल इम्बैलेंस नहीं, बल्कि खून की अशुद्धि और बिगड़े हुए पाचन का परिणाम मानता है।

यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें खून को साफ करने और जोड़ों में जमे क्रिस्टल्स को पिघलाने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं, जो आपकी किडनी को नुकसान पहुँचाए बिना काम करती हैं।

  • गिलोय Guduchi आयुर्वेद में गिलोय को वातरक्त Gout की सबसे सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। यह शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड को चूसकर बाहर निकालती है और इम्युनिटी को शांत करती है।
  • पुनर्नवा Punarnava यह किडनी की कार्यक्षमता को बहुत ज़्यादा बढ़ा देती है, जिससे किडनी तेज़ी से यूरिक एसिड को पेशाब के ज़रिए बाहर फेंकने लगती है।
  • मंजिष्ठा Manjistha यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरिफायर है। यह खून की एसिडिटी को कम करती है और जोड़ों में जमे लालिमा और सूजन वाले दर्द को खींच लेती है।
  • गोक्षुर Gokshura यह किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट को साफ रखता है और यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को पथरी बनने से रोकता है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी वातरक्त Gout में कैसे काम करती है?

जब खून में यूरिक एसिड बहुत ज़्यादा भर चुका हो और जोड़ों में भयंकर सूजन व आग जैसी जलन हो, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर को तुरंत डिटॉक्स करके आराम देती है।

  • विरेचन Virechana यह यूरिक एसिड और वातरक्त का सबसे अचूक इलाज है। इसमें औषधीय जड़ी-बूटियों से दस्त लगाकर लिवर और आंतों में जमा हुए भयंकर एसिड को शरीर से बाहर निकाल फेंक दिया जाता है।
  • रक्तमोक्षण जलौका/Leech Therapy जब पैर का अंगूठा गाउट के अटैक से लाल और सूजकर गुब्बारा बन जाए, तो वहां मेडिकल जोंक Leech लगाई जाती है। यह जोंक सिर्फ जमे हुए गंदे खून को चूसकर निकाल देती है, जिससे दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
  • बस्ती Basti वात को जड़ से खत्म करने के लिए औषधीय काढ़े का एनिमा दिया जाता है, जो जोड़ों की जकड़न को खोलकर उन्हें प्राकृतिक नमी देता है।

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने वाला वात-पित्त शामक डाइट प्ला

आप जो खाते हैं, वही आपके खून में यूरिक एसिड बनाता है या उसे बाहर निकालता है। इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सही डाइट का पालन करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

श्रेणी क्या अपनाएँ अनुशंसित किनसे परहेज़ करें वर्जित
आहार का सिद्धांत हल्का, क्षारीय Alkaline और सुपाच्य भोजन जो गैस न बनाए और एसिडिटी कम करे अत्यधिक अम्लीय, भारी और गैस बनाने वाला भोजन
क्या खाएं लौकी, पेठा, ककड़ी, खीरा; सेब, चेरी शरीर को अल्कलाइन बनाकर यूरिक एसिड घटाते हैं असंतुलित और अम्लीय भोजन
क्या बिल्कुल न खाएं संतुलित, हल्का और ताज़ा भोजन रेड मीट, भारी दालें रात में, पालक, टमाटर, खट्टा, तीखा और फर्मेंटेड भोजन
दैनिक पेय 3–4 लीटर सादा/गुनगुना पानी, धनिया पानी, नारियल पानी किडनी को फ्लश करते हैं शराब खासकर बीयर और कोल्ड ड्रिंक
जीवनशैली सहयोग रोज़ 30–40 मिनट वॉक; अटैक के समय प्रभावित जोड़ को आराम अटैक के दौरान ज़्यादा दबाव या वजन डालना

ठीक होने में लगने वाला समय 

जीवा आयुर्वेद में यूरिक एसिड का उपचार चरणबद्ध तरीके से किया जाता है

15 दिन से 1 महीना शरीर से टॉक्सिन्स आम बाहर निकलने शुरू होते हैं। जोड़ों की सूजन और लालिमा में स्पष्ट कमी आती है। खान-पान में बदलाव से यूरिक एसिड का नया बनना कम हो जाता है।

1 से 3 महीने तक किडनी की कार्यक्षमता में सुधार आता है। खून में यूरिक एसिड का स्तर धीरे-धीरे सामान्य रेंज में आने लगता है। बार-बार होने वाले गाउट के अटैक बंद हो जाते हैं।

3 से 6 महीने तक खून पूरी तरह शुद्ध हो जाता है और 'वात-रक्त' का संतुलन वापस आ जाता है। जोड़ों का लचीलापन बढ़ता है और शरीर भविष्य की बीमारियों जैसे किडनी स्टोन या हार्ट रिस्क से सुरक्षित हो जाता है।

मरीज़ों के अनुभव

मुझे 6 साल से घुटने में बहुत दर्द था और मैंने कई डॉक्टरों को दिखाया। एलोपैथिक में तो मेरा काम का लोड बढ़ने के साथ पैर में सूजन बहुत ज़्यादा हो जाती थी। चलने में मुझे प्रॉब्लम होता था। कभी-कभी लगता था जैसे मैं चल रही हूँ तो गिर जाऊँगी, तो काफी अंदर से मुझे भय रहता था।

बहुत ज़्यादा मेरे पैर में प्रॉब्लम आ गई। लेफ्ट और राइट पैर में, जैसे मुझे लेफ्ट पैर में प्रॉब्लम है, दोनों में बहुत फर्क आने लगा। फिर मैंने उन्हें सब बात अपने घुटने के बारे में और कमर के बारे में बताई।

जीवा Jiva की दवा से मुझे कमर दर्द में बहुत आराम है और घुटना तो 70% मेरा सूजन और दर्द बहुत कम हो गया है। यदि आप लोगों को जोड़ों में दर्द, घुटनों में दर्द, कमर दर्द काफी सालों से है, तो आप लोग जीवा आयुर्वेदा Դ में संपर्क जरूर करें। थैंक यू।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

यूरिक एसिड जैसी क्रोनिक बीमारी के इलाज के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड कम करने वाली दवाओं जैसे Allopurinol से रिपोर्ट के नंबर नियंत्रित करना रक्त शुद्धि, पाचन अग्नि सुधार और किडनी को मज़बूत कर जड़ से समाधान
शरीर को देखने का नज़रिया इसे केमिकल असंतुलन मानकर जीवनभर दवाइयों पर निर्भरता ‘वातरक्त’ मानकर पंचकर्म विरेचन/रक्तमोक्षण से प्राकृतिक शुद्धि
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट पर ध्यान, लेकिन दवाइयों पर अधिक निर्भरता वात-पित्त शामक डाइट, पर्याप्त पानी और ‘विरुद्ध आहार’ से परहेज़ को मुख्य आधार
लंबा असर दवा बंद करते ही यूरिक एसिड फिर बढ़ने Rebound का खतरा जड़ी-बूटियों से मेटाबॉलिज़्म मजबूत कर शरीर को स्वयं संतुलन सिखाना

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए? 

अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से मिलें

  • जोड़ों में अचानक असहनीय दर्द, जो रात में बढ़ जाता हो।
  • जोड़ का हिस्सा लाल पड़ जाना और छूने पर बहुत गर्म महसूस होना।
  • पेशाब करने में दिक्कत या पीठ के निचले हिस्से में तेज़ दर्द किडनी स्टोन का संकेत।
  • जोड़ों के आसपास सख्त गांठें दिखाई दें।

निष्कर्ष

शरीर में बार-बार बढ़ते यूरिक एसिड को केवल जोड़ों के दर्द की एक मामूली समस्या मानकर नज़रअंदाज़ करना अपने भविष्य के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। आयुर्वेद में इसे 'वातरक्त' की श्रेणी में रखा जाता है, जो यह साफ संकेत देता है कि आपकी जठराग्नि मंद पड़ चुकी है और दूषित रक्त में टॉक्सिन्स आम का स्तर लगातार बढ़ रहा है। जैसे किसी मशीन के फिल्टर में कचरा जमा होने से उसका पूरा इंजन धीरे-धीरे डैमेज होने लगता है, ठीक वैसे ही रक्त में घूम रहे ये क्रिस्टल्स आपके जोड़ों, किडनी और दिल पर चुपके से प्रहार करते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

नहीं, हालांकि रेड मीट में प्यूरीन ज़्यादा होता है, लेकिन अत्यधिक दालें, पनीर, मीठे ड्रिंक्स (Fructose) और शराब भी यूरिक एसिड को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं।

पानी किडनी को एसिड फ्लश करने में मदद करता है, लेकिन यह केवल एक सहायक उपाय है। अगर मेटाबॉलिज्म खराब है, तो केवल पानी पीना काफी नहीं होगा।

एलोपैथी में अक्सर इसे दबाने की दवा दी जाती है, लेकिन आयुर्वेद में अगर आप 3-6 महीने का कोर्स पूरा करते हैं और लाइफस्टाइल सुधारते हैं, तो दवाइयाँ बंद की जा सकती हैं।

तेज़ दर्द (Acute Attack) के दौरान आराम करना चाहिए। दर्द कम होने पर हल्का व्यायाम और योग ज़रूरी है ताकि ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहे।

नींबू एसिडिक होता है लेकिन शरीर के अंदर जाकर यह एल्कलाइन प्रभाव छोड़ता है, जो यूरिक एसिड क्रिस्टल्स को घोलने में मदद कर सकता है।

हाँ, अगर आपके परिवार में किडनी की समस्या या गाउट का इतिहास है, तो आपको 30 की उम्र के बाद नियमित जांच करानी चाहिए।

गिलोय, नीम और कैशोर गुग्गुलु को वात-रक्त के लिए सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि ये खून को साफ करने और दर्द कम करने में माहिर हैं।

हाँ, जब क्रिस्टल्स जोड़ों के बीच जमा होते हैं, तो वे कार्टिलेज को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे जोड़ों के हिलने पर आवाज़ या रगड़ महसूस हो सकती है।

हाँ, शरीर का बढ़ा हुआ वजन (खासकर पेट की चर्बी) किडनी की कार्यक्षमता को कम करता है। वजन कम करने से यूरिक एसिड का स्तर खुद-ब-खुद गिरने लगता है।

आयुर्वेद के अनुसार, वात-रक्त की स्थिति में दही का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह अभिष्यंदी होता है, जो चैनल्स को ब्लॉक कर सूजन बढ़ा सकता है।

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