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Hashimoto's Thyroiditis — Autoimmune Disease, क्या ठीक होता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

आजकल थायराइड की दिक्कतें काफी आम हो चुकी हैं। लेकिन इनमें 'हाशिमोटो' एक ऐसी समस्या है, जिसे ज़्यादातर लोग नॉर्मल थायराइड मानकर अनदेखा कर देते हैं। असल में यह सिर्फ हार्मोन की कमी नहीं है, बल्कि एक ऑटोइम्यून बीमारी (Autoimmune Disease) है। इसमें हमारे शरीर का अपना ही रक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) कन्फ्यूज होकर हमारी थायराइड ग्रंथि पर हमला करने लगता है। इससे धीरे-धीरे ग्रंथि काम करना कम कर देती है। अक्सर लोग सालों तक बस गोलियां खाते रह जाते हैं, और इस असली जड़ यानी 'इम्यून सिस्टम' की तरफ उनका ध्यान ही नहीं जाता।

Hashimoto’s Thyroiditis क्या है? 

यह एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जहाँ हमारी ही इम्युनिटी गलती से अपनी थायराइड ग्रंथि को दुश्मन मानकर उस पर अटैक कर देती है। क्योंकि यह डैमेज बहुत धीमा होता है, इसलिए शुरुआत में आपको कोई खास लक्षण फील नहीं होते। समय बीतने के साथ थायराइड ग्रंथि इतनी कमज़ोर हो जाती है कि शरीर के लिए ज़रूरी हार्मोन नहीं बना पाती। इसका सीधा असर आपके मेटाबॉलिज्म (चयापचय) और ऊर्जा पर पड़ता है, जिसकी वजह से इंसान हमेशा थकान, सुस्ती और कमज़ोरी से जूझता रहता है।

यह Autoimmune Disease कैसे बनती है? 

ऑटोइम्यून बीमारी का मतलब है शरीर के सुरक्षा चक्र का भटक जाना। वैसे तो हमारा इम्यून सिस्टम हमें वायरस और बैक्टीरिया से बचाता है, लेकिन हाशिमोटो के केस में यह थायराइड ग्रंथि को ही नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है। यह सब अंदर ही अंदर बहुत धीमी गति से होता है। कई बार तो लोगों को सालों तक भनक भी नहीं लगती कि उनके शरीर में क्या चल रहा है। जब तक पता चलता है, तब तक थायराइड काफी हद तक कमज़ोर हो चुका होता है और इसका असर दिखने लगता है।

थायरॉयड ग्रंथि शरीर में क्या काम करती है? 

हमारी थायराइड ग्रंथि शरीर की ऊर्जा और स्पीड को कंट्रोल करती है। आप इसे शरीर का 'मेटाबॉलिक इंजन' भी कह सकते हैं, क्योंकि यह कई ज़रूरी काम संभालती है:

  • ऊर्जा स्तर नियंत्रित करना: आप दिनभर में कितना एक्टिव फील करेंगे, यह काफी हद तक इसी पर निर्भर है।
  • वज़न को प्रभावित करना: अगर थायराइड अपना काम ठीक से न करे, तो बिना वजह वज़न बढ़ने लगता है।
  • शरीर का तापमान संतुलित रखना: मौसम चाहे जो हो, शरीर के अंदर का नॉर्मल तापमान यही मेंटेन रखती है।
  • दिल और दिमाग को सहारा देना: हमारी हार्ट बीट और दिमाग की फुर्ती भी इसी से जुड़ी है। ज़ाहिर है, जब यह इंजन ही कमज़ोर पड़ने लगेगा, तो आपके पूरे शरीर की स्पीड और एनर्जी अपने आप डाउन हो जाएगी।

Hashimoto’s Thyroiditis के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं? 

इस बीमारी के पीछे कोई एक कारण नहीं होता। हमारी लाइफस्टाइल और शरीर से जुड़ी कई चीजें मिलकर इसे ट्रिगर करती हैं:

  • परिवार में पहले से समस्या होना: अगर आपके परिवार में किसी को यह बीमारी रही है, तो जेनेटिक्स के कारण इसके होने के चांस ज़्यादा रहते हैं।
  • लंबे समय तक तनाव: लगातार मानसिक तनाव (Stress) हमारे हार्मोंस और इम्युनिटी का बैलेंस बिगाड़ देता है।
  • पोषण की कमी: शरीर को अगर सही विटामिन्स और मिनरल्स न मिलें, तो उसका नॉर्मल फंक्शन बिगड़ने लगता है।
  • हार्मोन असंतुलन: शरीर में बाकी हार्मोंस का ऊपर-नीचे होना भी इस परेशानी को बढ़ा सकता है।
  • बाहरी हानिकारक तत्व: प्रदूषण और कुछ खतरनाक केमिकल्स के संपर्क में ज़्यादा रहने से भी शरीर पर बुरा असर पड़ता है।
  • बहुत ज़्यादा processed food: रोज़-रोज़ बाहर का पैक्ड और अनहेल्दी खाना खाने से शरीर के अंदर सूजन (Inflammation) बढ़ जाती है। ये सारे फैक्टर जब आपस में मिलते हैं, तो धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेने लगती है।

शरीर में Autoimmune प्रतिक्रिया कैसे शुरू होती है? 

जब हमारे शरीर में लंबे समय तक अंदरूनी सूजन और इम्बैलेंस बना रहता है, तो इम्युनिटी कन्फ्यूज होने लगती है। एक समय बाद वह खुद की ही सेल्स (कोशिकाओं) को बाहरी खतरा मान बैठती है। हाशिमोटो में भी ठीक ऐसा ही होता है, जहाँ थायराइड ग्रंथि निशाना बन जाती है। यह कोई रातों-रात होने वाली प्रक्रिया नहीं है। महीनों या सालों तक चलने वाले इस अटैक की वजह से थायराइड की काम करने की ताकत घटती चली जाती है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है 

क्योंकि हाशिमोटो दबे पाँव आता है, इसलिए इसके शुरुआती लक्षण रोज़़मर्रा की आम थकान जैसे ही लगते हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें सीरियसली नहीं लेते:

  • लगातार थकान महसूस होना: रातभर सोने और आराम करने के बावजूद सुबह उठते ही शरीर में जान न लगना।
  • हल्का वज़न बढ़ना: बिना अपनी डाइट बदले, धीरे-धीरे वज़न का बढ़ना शुरू हो जाना।
  • ध्यान लगाने में परेशानी: किसी काम में मन न लगना, फोकस टूट जाना या मानसिक सुस्ती (ब्रेन फॉग) छाए रहना।
  • मूड में बदलाव: छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होना या बेवजह इमोशनल फील करना।
  • ठंड ज़्यादा लगना: जहाँ बाकी लोगों को नॉर्मल लग रहा हो, वहाँ भी आपको ज़्यादा सर्दी महसूस होना। आमतौर पर लोग इन बातों को 'शायद काम ज़्यादा कर लिया' सोचकर टाल देते हैं।

रोग बढ़ने पर कौन से गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं? 

जैसे-जैसे बीमारी अपनी जड़ें जमाती है, शरीर में आने वाले बदलाव साफ दिखने लगते हैं। फिर ये लक्षण रोज़मर्रा की जिंदगी को डिस्टर्ब करने लगते हैं:

  • बहुत ज़्यादा थकान: थोड़ी सी मेहनत में ही शरीर टूट जाना और काम करने की हिम्मत न होना।
  • बाल झड़ना: बालों का बहुत तेज़ी से पतला होना और गिरना।
  • त्वचा का सूखना: स्किन एकदम रूखी, बेजान और ड्राई लगने लगती है।
  • मेटाबॉलिज्म स्लो होने की वजह से पेट ठीक से साफ नहीं होता।
  • चेहरे पर सूजन: चेहरे, खासकर आँखों के आस-पास पफीनेस या हल्की सूजन आ जाना।
  • दिल की धड़कन धीमी होना: शरीर का सिस्टम धीमा पड़ने से हार्ट रेट भी कम हो जाता है। ये सभी बातें इशारा करती हैं कि आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी बुरी तरह गिर चुका है।

Diagnosis कैसे किया जाता है?

यह पता लगाने के लिए कि आपको हाशिमोटो है या नहीं, डॉक्टर कुछ खास ब्लड टेस्ट और जांच करवाते हैं:

  • TSH टेस्ट: यह बताता है कि थायराइड ग्रंथि पर कितना प्रेशर आ रहा है।
  • T3 और T4 जांच: इससे खून में मौजूद थायराइड हार्मोन के असली लेवल का पता चलता है।
  • Anti-TPO antibodies टेस्ट: इस बीमारी को पकड़ने के लिए यह सबसे अहम टेस्ट है। इससे साफ हो जाता है कि बीमारी ऑटोइम्यून है या नहीं।
  • थायरॉयड अल्ट्रासाउंड: इससे ग्रंथि के साइज और उसमें हो रहे अंदरूनी बदलावों को देखा जाता है।

आयुर्वेद में Hashimoto’s Thyroiditis को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद में हाशिमोटो को सिर्फ गले या थायराइड की कोई मामूली गड़बड़ी नहीं माना जाता, बल्कि इसे पूरे शरीर के अंदरूनी सिस्टम के बिगड़ने से जोड़कर देखा जाता है। इसके मुताबिक, जब हमारे पेट की पाचन शक्ति (डाइजेशन) सुस्त पड़ जाती है, तो शरीर में गंदगी यानी टॉक्सिन्स (जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं) जमा होने लगते हैं। यही टॉक्सिन्स धीरे-धीरे पूरे शरीर के बैलेंस को हिला देते हैं।

आयुर्वेद में &ܴ;अग्नि&ܴ; (पाचन की ताकत) और &ܴ;ओजस&ܴ; (शरीर की नेचुरल इम्यूनिटी) का बहुत बड़ा रोल है। जब ये दोनों कमज़ोर पड़ने लगते हैं, तो शरीर का पूरा कामकाज पटरी से उतर जाता है।

इस बीमारी में हमारे तीन दोष भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं:

  • वात का बिगड़ना: इससे शरीर में रूखापन आता है, हर वक्त थकान रहती है, बेचैनी और कमज़ोरी महसूस होती है।
  • कफ का बिगड़ना: बिना वजह वज़न बढ़ने लगता है, शरीर भारी-भारी रहता है और दिनभर सुस्ती छाई रहती है।
  • पित्त का बिगड़ना: इसकी वजह से शरीर के अंदर सूजन (इन्फ्लेमेशन) और अंदरूनी गर्मी बढ़ने लगती है।

हाशिमोटो के मामलों में अक्सर वात और कफ दोष का संतुलन सबसे ज़्यादा बिगड़ता है, जिससे इंसान की फुर्ती और एनर्जी दोनों खत्म होने लगती हैं।

Hashimoto’s Thyroiditis के लिए आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

आयुर्वेद का मकसद सिर्फ आपकी ब्लड रिपोर्ट के नंबर्स को नॉर्मल करना नहीं है, बल्कि इम्यून सिस्टम को अंदर से मज़बूत और शांत बनाना है। इसका इलाज किसी एक घिसे-पिटे तरीके से नहीं बल्कि पूरी बॉडी को समझकर किया जाता है:

  • हर व्यक्ति का अलग आंकलन: चूंकि हर इंसान की बॉडी टाइप और लाइफस्टाइल अलग होती है, इसलिए हर मरीज के लिए इलाज का प्लान भी अलग तैयार होता है।
  • पेट की अग्नि को जगाना: सबसे पहले डाइजेशन को दुरुस्त किया जाता है ताकि शरीर में नया कचरा या टॉक्सिन्स जमा न हो सकें।
  • इम्यूनिटी को सही राह दिखाना: भटके हुए इम्यून सिस्टम को वापस ट्रैक पर लाने की कोशिश की जाती है ताकि वह खुद के शरीर पर हमला करना बंद करे।
  • : बिगड़े हुए वात और कफ को बैलेंस करके शरीर का भारीपन, सुस्ती और थकान दूर की जाती है।
  • लाइफस्टाइल में सुधार: सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि सही समय पर सोने-जागने, स्ट्रेस मैनेज करने और सही खानपान पर सबसे ज़्यादा जोर दिया जाता है।

इस पूरे अप्रोच का यही लक्ष्य है कि शरीर को धीरे-धीरे नेचुरल तरीके से हील किया जाए ताकि लंबे समय तक सेहत बनी रहे।

Hashimoto’s Thyroiditis में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

आयुर्वेद में ऐसी जड़ी-बूटियों की मदद ली जाती है जो एक साथ आपके डाइजेशन, एनर्जी और इम्यून सिस्टम तीनों को संभाल सकें। डॉक्टर मरीज की हालत देखकर इनका सही तालमेल तय करते हैं:

  • अश्वगंधा: यह शरीर की खोई हुई ताकत वापस लाती है, पुरानी थकान मिटाती है और स्ट्रेस हार्मोन को कंट्रोल करती है।
  • कांचनार गुग्गुलु: थायराइड ग्रंथि की सूजन को कम करने और हार्मोंस को बैलेंस करने में इसे बेहद असरदार माना जाता।
  • यह हमारी बिगड़ी हुई इम्यूनिटी को सही दिशा देती है और शरीर को अंदर से बीमारियों से लड़ने की ताकत देती है।
  • त्रिफला: यह पेट को साफ रखता है, डाइजेशन सुधारता है और शरीर से सारे हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकाल फेंकता है।
  • ब्राह्मी: मानसिक थकावट दूर करने, फोकस बढ़ाने और मूड स्विंग्स को काबू करने में बहुत मददगार है।

Hashimoto’s Thyroiditis में आयुर्वेदिक उपचार विधियाँ (Therapies)

सिर्फ खाने की दवाएं ही नहीं, आयुर्वेद में कुछ खास थेरेपीज भी हैं जो शरीर का तनाव कम करने और ब्लॉक हुई एनर्जी को खोलने का काम करती हैं:

  • गुनगुने आयुर्वेदिक तेलों से की जाने वाली यह मालिश शरीर के दर्द और जकड़न को दूर कर गहरा आराम देती है।
  • शिरोधारा: माथे पर लगातार गुनगुने तेल की धार गिराई जाती है। यह दिमाग को शांत करने और मानसिक तनाव को जड़ से मिटाने का बेस्ट तरीका है।
  • हल्की स्टीम लेने से शरीर के रोमछिद्र खुलते हैं, जिससे भारीपन कम होता है और सुस्ती भागती है।
  • : बढ़े हुए वात दोष को काबू में करने और आंतों की अंदरूनी सफाई के लिए यह थेरेपी रामबाण मानी जाती है।
  • पंचकर्म डीटॉक्स: शरीर को अंदर से पूरी तरह शुद्ध और साफ करने के लिए डॉक्टर की देखरेख में पंचकर्म कराया जाता है।

Hashimoto’s Thyroiditis में आहार (खानपान) की भूमिका

हाशिमोटो जैसी बीमारी में आपका खाना ही आपकी सबसे बड़ी दवा बन सकता है। सही और हल्का भोजन आपके मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है:

  • ताजा और घर का खाना: डिब्बा बंद चीजों को छोड़कर फ्रेश और घर का बना गरम खाना खाएं, यह पेट पर एक्स्ट्रा लोड नहीं डालता।
  • हल्का और सुपाच्य भोजन: ऐसा खाना चुनें जो आसानी से पच जाए, ताकि खाना खाने के बाद आपको सुस्ती या भारीपन महसूस न हो।
  • पोषक तत्वों का बैलेंस: डाइट में प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स की सही मात्रा रखें ताकि मांसपेशियां और एनर्जी बनी रहे।
  • प्रोसेस्ड फूड से सख्त तौबा: पैक्ड, फ्रोज़न, बहुत ज़्यादा मैदे या चीनी वाली चीजों से दूर रहें, क्योंकि ये शरीर के अंदर सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ाती हैं।
  • पानी और खाने का फिक्स टाइम: भरपूर पानी पीते रहें और रोज़ एक ही तय समय पर खाना खाएं ताकि डाइजेशन का रिदम न बिगड़े।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम सुनील सिंह है और मैं फरीदाबाद का रहने वाला हूँ। कुछ समय पहले मेरा वजन अचानक बढ़ने लगा, जिसके बाद जांच कराने पर पता चला कि मुझे थायरॉइड की समस्या है। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन मेरे वजन में कोई खास सुधार नहीं हुआ। बाद में दोबारा जांच कराने पर पता चला कि मुझे फैटी लिवर (ग्रेड 3) और किडनी से जुड़ी कुछ समस्याएँ भी हैं। इस दौरान मैं बहुत परेशान रहने लगा और कई रातें नींद नहीं आती थी। फिर मैंने आयुर्वेद का सहारा लेने का फैसला किया और जीवा क्लिनिक से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी जांच करके मेरी समस्या के मूल कारण को समझा और उसी के अनुसार उपचार शुरू किया। मुझे थायरॉइड के लिए पर्सनलाइज्ड डाइट के साथ आयुर्वेदिक दवाइयाँ दी गईं। धीरे-धीरे मेरी सेहत में सुधार हुआ और मेरा फैटी लिवर ग्रेड 3 से घटकर ग्रेड 1 हो गया। आज मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ और आयुर्वेदिक जीवनशैली की सभी को सलाह देता हूँ।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

हाशिमोटो के शुरुआती इशारों को मामूली कमज़ोरी समझकर टालने की गलती न करें। अगर ये लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो तुरंत एक्सपर्ट से मिलें:

  • रातभर सोने के बाद भी सुबह उठते ही शरीर में बेतहाशा थकान और कमज़ोरी लगना।
  • बिना डाइट या रूटीन बदले अचानक से तेज़ी से वज़न बढ़ने लगना।
  • बाल बहुत ज़्यादा पतले होकर झड़ने लगें और स्किन सूखी व बेजान दिखने लगे।
  • नॉर्मल मौसम में या गर्मियों में भी दूसरों के मुकाबले बहुत ज़्यादा ठंड लगना।
  • दिमाग में हमेशा धुंधलापन रहना, काम में फोकस न होना और बात-बात पर मूड उखड़ना।

निष्कर्ष

हाशिमोटो केवल थायराइड की कोई छोटी-मोटी समस्या नहीं है। यह आपकी लाइफस्टाइल, गड़बड़ पाचन और भटके हुए इम्यून सिस्टम से जुड़ा एक गहरा अलार्म है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह बहुत दबे पाँव और धीरे-धीरे बढ़ती है, जिससे लोग इसे रोज़मर्रा की आम थकान मानकर सालों-साल नज़रअंदाज़ करते रहते हैं।

जहाँ आधुनिक चिकित्सा मुख्य रूप से ऊपर से हार्मोन देकर कमी को पूरा करने पर फोकस करती है, वहीं आयुर्वेद इस बीमारी की असली जड़ यानी कमज़ोर पाचन, असंतुलित दोषों और बिगड़े हुए रक्षा तंत्र को ठीक करने पर जोर देता है। असली सुधार का मतलब सिर्फ लैब रिपोर्ट में नंबर्स का ठीक आना नहीं है, बल्कि आपकी एनर्जी, मेंटल हेल्थ और जीने की क्वालिटी का बेहतर होना है। सही समय पर पहचान, आयुर्वेदिक जीवनशैली और अनुशासित खानपान से आप इस बीमारी पर पूरी तरह काबू पा सकते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हर व्यक्ति में वजन बढ़ना जरूरी नहीं होता, लेकिन यह एक common बदलाव माना जाता है। जब थायरॉयड की कार्यक्षमता धीमी होती है, तो शरीर की calorie burning process भी धीमी पड़ सकती है। इससे शरीर में heaviness और swelling महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में केवल body composition बदलता है, जबकि कुछ में स्पष्ट weight gain दिखाई देता है। यह व्यक्ति की lifestyle और शरीर की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

हाँ, यह समस्या महिलाओं में अधिक देखी जाती है, खासकर hormonal बदलाव के समय। कई बार pregnancy, delivery या menopause के आसपास इसके लक्षण ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं। महिलाओं में hormone balance और immune response के बीच गहरा संबंध होता है। इसी कारण थायरॉयड से जुड़ी स्थितियाँ उनमें अधिक दिखाई देती हैं। हालांकि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

लगातार तनाव शरीर के hormone balance और immune system दोनों को प्रभावित कर सकता है। जब शरीर लंबे समय तक stress में रहता है, तो energy balance बिगड़ने लगता है। इससे शरीर की recovery क्षमता भी कमजोर हो सकती है। कई लोगों में stress के बाद symptoms ज्यादा स्पष्ट होने लगते हैं। इसलिए मानसिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाँ, कई लोगों में नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों को बहुत ज्यादा नींद महसूस होती है, जबकि कुछ को आराम के बाद भी freshness महसूस नहीं होती। शरीर की धीमी कार्यप्रणाली और लगातार थकान इसका कारण बन सकती है। खराब नींद से दिनभर की ऊर्जा और concentration भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए sleep routine पर ध्यान देना जरूरी होता है।

हाँ, शरीर और मन दोनों एक दूसरे से जुड़े होते हैं। लंबे समय तक थकान, कमजोरी और hormonal imbalance रहने पर mood changes महसूस हो सकते हैं। कुछ लोगों में irritability, low motivation और emotional imbalance भी देखा जा सकता है। मानसिक स्पष्टता कम महसूस होना भी एक सामान्य अनुभव हो सकता है। सही देखभाल से इन बदलावों में सुधार संभव है।

संतुलित physical activity शरीर के लिए लाभदायक मानी जाती है। हल्की walking, stretching और yoga जैसी गतिविधियां शरीर की stiffness और low energy को कम करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि बहुत ज्यादा intense exercise कुछ लोगों में थकान बढ़ा सकती है। इसलिए शरीर की क्षमता के अनुसार activity चुनना बेहतर माना जाता है। नियमित movement शरीर को active बनाए रखने में मदद करता है।

कुछ लोगों में ठंड के मौसम में symptoms ज्यादा महसूस हो सकते हैं। शरीर पहले से धीमी अवस्था में होने के कारण ठंड सहन करना कठिन लग सकता है। इससे fatigue, stiffness और heaviness बढ़ सकती है। मौसम बदलने पर शरीर की energy pattern भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए शरीर को गर्म और संतुलित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाँ, कई लोगों में digestion slow महसूस हो सकता है। शरीर की metabolic activity कम होने पर पेट भारी लगना, bloating या constipation जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। पाचन कमजोर होने से शरीर की energy भी प्रभावित होती है। इसलिए हल्का और संतुलित भोजन लेने की सलाह दी जाती है। digestion का बेहतर होना overall wellness को भी support करता है।

हाँ, अधिकतर मामलों में यह स्थिति धीरे धीरे विकसित होती है। शुरुआत में symptoms बहुत हल्के हो सकते हैं, इसलिए लोग उन्हें सामान्य थकान समझ लेते हैं। समय के साथ शरीर की कार्यक्षमता पर इसका असर ज्यादा स्पष्ट होने लगता है। यही कारण है कि कई लोगों को diagnosis देर से पता चलता है। शुरुआती संकेतों को समझना इसलिए महत्वपूर्ण होता है।

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