Դ

Դ Search
Close Button
 
 

Diabetic को Heat Stroke का खतरा क्यों ज़्यादा है? May में सावधानी

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मई का महीना आ चुका है और सूरज ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। आसमान से जैसे आग बरस रही है और गर्म हवाओं के थपेड़े शरीर को झुलसा रहे हैं। इस मौसम में हम सभी को गर्मी से बचने की हिदायत दी जाती है, लेकिन अगर आपको डायबिटीज (शुगर की बीमारी) है, तो यह मौसम आपके लिए थोड़ा और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कई बार लोग गर्मी के असर को सिर्फ़ थकान या सामान्य परेशानी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन जब तापमान लगातार बढ़ता है, तो इसका असर शरीर के पानी के स्तर, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे में अपनी सेहत को लेकर थोड़ा अधिक सतर्क रहना ज़रूरी हो जाता है, ख़ासकर उन लोगों के लिए जो पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। 

हीट स्ट्रोक या 'लू लगना' असल में क्या है? 

हमारा शरीर बहुत स्मार्ट है। जब हमें गर्मी लगती है, तो शरीर पसीना निकालता है। पसीना जब सूखता है, तो हमारे शरीर का तापमान अपने आप कम हो जाता है। यह शरीर का अपना 'एसी' (कूलिंग सिस्टम) है।

लेकिन जब बाहर की गर्मी बहुत ज़्यादा हो जाती है, या शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है, तो शरीर पसीना बनाना बंद कर देता है। ऐसे में शरीर के अंदर का तापमान बहुत तेज़ी से बढ़ने लगता है। यह स्थिति इतनी ख़तरनाक हो सकती है कि इससे चक्कर आना, बेहोशी और कभी-कभी तो जान का ख़तरा भी बन सकता है। इसी हालत को हम आम भाषा में 'लू लगना' और मेडिकल भाषा में हीट स्ट्रोक कहते हैं।

डायबिटीज के मरीजों को हीट स्ट्रोक का ख़तरा ज़्यादा क्यों होता है? 

डायबिटॶज़ केवल ब्लड शुगर तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह शरीर की कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि गर्मियों में कुछ ऐसी स्थितियाँ बन जाती हैं, जो हीट स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। 

  1. शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का तेज़ी से होना: अगर आपका ब्लड शुगर लेवल ज़्यादा रहता है, तो आपके गुर्दे (किडनी) उस फालतू शुगर को शरीर से बाहर निकालने के लिए ज़्यादा काम करते हैं। यह शुगर पेशाब के रास्ते बाहर निकलती है। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों को बार-बार पेशाब आता है।
  2. नसों का कमज़ोर होना: अगर किसी को लंबे समय से डायबिटीज है और उनका शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं रहता, तो धीरे-धीरे शरीर की नसें कमज़ोर होने लगती हैं। हमारे शरीर में कुछ खास नसें होती हैं जो पसीने वाली ग्रंथियों (ग्लैंड्स) को बताती हैं कि "भाई, बाहर बहुत गर्मी है, जल्दी से पसीना निकालो।"
  3. खून की नसों पर असर: गर्मी के मौसम में जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तो त्वचा की खून की नसें थोड़ी फैल जाती हैं ताकि शरीर की गर्मी बाहर निकल सके। लेकिन, डायबिटीज की वजह से खून की नसें अक्सर सख्त हो जाती हैं या उन पर बुरा असर पड़ता है। इस वजह से वे ठीक से फैल नहीं पातीं और शरीर अपनी गर्मी को बाहर नहीं फेंक पाता।
  4. शुगर लेवल का ऊपर-नीचे होना: गर्मी के मौसम में शरीर का सिस्टम थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। कभी-कभी बहुत ज़्यादा गर्मी की वजह से शरीर में इंसुलिन तेज़ी से काम करने लगता है, जिससे शुगर अचानक बहुत कम हो जाती है (जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं)। वहीं दूसरी तरफ, अगर गर्मी की वजह से शरीर में तनाव (स्ट्रेस) बढ़ता है, तो शुगर लेवल अचानक बहुत ज़्यादा भी हो सकता है। यह ऊपर-नीचे होता शुगर लेवल शरीर को कमज़ोर बना देता है, जिससे लू बहुत जल्दी असर करती है।

हीट स्ट्रोक और शुगर कम होने के लक्षणों में अंतर कैसे पहचानें? 

गर्मी के मौसम में अगर किसी डायबिटीज के मरीज को चक्कर आ रहा है या घबराहट हो रही है, तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि यह लू लगने की वजह से है या शुगर कम होने की वजह से। दोनों के संकेत काफी मिलते-जुलते हैं।  

शुगर कम होने के संकेत:

  • बहुत ज़्यादा पसीना आना (खासकर गर्दन और माथे पर)
  • अचानक से बहुत तेज़ भूख लगना
  • हाथ-पैर कांपना
  • चिड़चिड़ापन होना

हीट स्ट्रोक (लू लगने) के संकेत:

  • शरीर का बहुत ज़्यादा गर्म हो जाना लेकिन पसीना ना आना (त्वचा सूखी और लाल हो जाती है)
  • सिर में बहुत तेज़ दर्द होना
  • दिल की धड़कन का अचानक बहुत तेज़ हो जाना
  • उल्टी आना या जी मिचलाना
  • या बेहोशी छाना

मई की गर्मी में डायबिटीज के मरीज कैसे अपना ख्याल रखें? (जीवा आयुर्वेद के खास उपाय) 

जीवा आयुर्वेद के अनुसार कुछ आसान सावधानियाँ अपनाकर गर्मियों में हीट स्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है: 

  • पानी पीने का सही नियम बनाएँ: प्यास लगने का इंतज़ार न करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएँ और छाछ, सत्तू, नारियल पानी या बिना चीनी का नींबू पानी जैसे पेय शामिल करें, जबकि चाय, कॉफी और मीठे ड्रिंक्स से बचें।
  • इंसुलिन और दवाइयों को गर्मी से बचाएँ: इंसुलिन, ग्लूकोमीटर और स्ट्रिप्स को ठंडी व सूखी जगह पर रखें। बाहर जाते समय इंसुलिन को कूल पैक में साथ ले जाएँ।
  • सही समय पर व्यायाम करें: एक्सरसाइज़ या सैर सुबह या शाम के समय करें और गतिविधि के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • पैरों की नियमित देखभाल करें: नंगे पैर चलने से बचें, आरामदायक जूते पहनें और रोज़ पैरों में किसी चोट, छाले या लालिमा की जाँच करें।
  • हल्के और सूती कपड़े पहनें: गर्मियों में ढीले-ढाले, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें, क्योंकि ये शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

अगर किसी को लू लग जाए, तो तुरंत क्या करें? 

लाख सावधानियों के बाद भी अगर घर में या आस-पास किसी को लू लग जाए, तो घबराना नहीं चाहिए। सही समय पर उठाया गया कदम जान बचा सकता है:

  1. ठंडी जगह पर ले जाएं: मरीज को तुरंत धूप से हटाकर किसी छांव वाली या एसी/पंखे वाली ठंडी जगह पर लिटा दें।
  2. कपड़े ढीले करें: उनके कपड़े ढीले कर दें ताकि शरीर को हवा लग सके।
  3. ठंडे पानी की पट्टियां: ठंडे पानी (बर्फ का पानी नहीं, सादा ठंडा पानी) में कपड़ा भिगोकर उनके सिर, गर्दन, और अंडरआर्म्स (बगल) पर रखें। इससे शरीर का तापमान तेज़ी से कम होता है।
  4. पीने को दें: अगर मरीज होश में है और निगल सकता है, तो उसे धीरे-धीरे ओआरएस (ORS) का घोल, नींबू पानी या छाछ पिलाएं।
  5. डॉक्टर को बुलाएं: यह सब करने के साथ-साथ बिना देरी किए तुरंत किसी नज़दीकी डॉक्टर या एम्बुलेंस को बुलाएं। डायबिटीज के मरीजों के मामले में बिल्कुल भी रिस्क नहीं लेना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में स्वास्थ्य का ध्यान क्यों ज़रूरी है?

आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में शरीर पर गर्मी का प्रभाव बढ़ जाता है। इस मौसम में शरीर को ठंडक, पर्याप्त आराम और उचित खानपान की अधिक आवश्यकता होती है। यदि इन बातों का ध्यान न रखा जाए, तो थकान, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।

इसी कारण आयुर्वेद गर्मियों में नियमित दिनचर्या, पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन पर विशेष ज़ोर देता है, ताकि शरीर मौसम के अनुसार स्वयं को बेहतर ढंग से संतुलित रख सके।

गर्मियों में स्वस्थ दिनचर्या कैसे बनाए रखें? 

गर्मियों में कुछ आसान आदतें अपनाकर आप खुद को अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान रख सकते हैं।

  • सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत पानी पीकर करें।
  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें।
  • हल्का, ताज़ा और संतुलित भोजन करें।
  • दोपहर की तेज़ धूप में बाहर निकलने से बचें।
  • सैर, योग या व्यायाम सुबह या शाम के समय करें।
  • पर्याप्त नींद लें और शरीर को पूरा आराम दें।
  • लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें।
  • ढीले-ढाले और सूती कपड़े पहनें।

इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर गर्मियों में स्वास्थ्य का बेहतर ख्याल रखा जा सकता है।

गर्मियों में खानपान से जुड़ी कौन-सी आदतें मदद कर सकती हैं?

  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें: इससे शरीर हाइड्रेट रहता है और डिहाइड्रेशन का जोखिम कम हो सकता है।
  • ताज़ा और घर का बना भोजन प्राथमिकता दें: यह पचने में अपेक्षाकृत आसान होता है और संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।
  • मौसमी फल और सब्ज़ियाँ भोजन में शामिल करें: ये शरीर को आवश्यक पोषक तत्व और पानी प्रदान करने में मदद करते हैं।
  • बहुत ज़्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन सीमित रखें: ऐसे खाद्य पदार्थ गर्मी में पाचन संबंधी परेशानी बढ़ा सकते हैं।
  • लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें: इससे ऊर्जा का स्तर बनाए रखने और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • भोजन समय पर करने की कोशिश करें: नियमित समय पर भोजन करने से शरीर की दिनचर्या संतुलित बनी रहती है।
  • बाहर का खुला या बासी भोजन खाने से बचें: गर्मियों में ऐसे भोजन से फूड पॉइज़निंग और पेट की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

जीवा आयुर्वेद की रामबाण जड़ी-बूटियां

आयुर्वेद में कुछ ऐसी जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें डायबिटॶज़ के दौरान स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इनमें शामिल हैं:

  • गुड़मार: आयुर्वेद में इसे ब्लड शुगर के संतुलन के लिए उपयोगी माना जाता है।
  • जामुन: जामुन और उसके बीजों का उपयोग लंबे समय से डायबिटॶज़ से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है।
  • मेथी: मेथी के दाने पाचन और ब्लड शुगर के बेहतर प्रबंधन में सहायक माने जाते हैं।
  • करेला: करेला डायबिटॶज़ के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली आयुर्वेदिक सब्जियों में से एक है।
  • आँवला: यह शरीर को पोषण देने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? 

गर्मी के कारण होने वाली हर परेशानी गंभीर नहीं होती, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हो सकते हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर से सलाह लेने पर विचार करें यदि:

  • बार-बार चक्कर आ रहे हों।
  • अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही हो।
  • ब्लड शुगर लगातार असामान्य बनी हुई हो।
  • शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दे रहे हों।
  • तेज़ सिरदर्द, उलझन या बेहोशी जैसी स्थिति महसूस हो।
  • गर्मी के बावजूद पसीना बहुत कम आ रहा हो।

समय पर सलाह लेने से समस्या को समझना और उचित देखभाल करना आसान हो सकता है।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

निष्कर्ष

मई की तेज़ गर्मी हर किसी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन डायबिटॶज़ के मरीजों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। शरीर में पानी की कमी, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और हीट स्ट्रोक का खतरा गर्मियों में बढ़ सकता है।

पर्याप्त पानी पीना, संतुलित खानपान अपनाना, धूप से बचाव करना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना ऐसी सरल आदतें हैं, जो गर्मियों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि किसी भी असामान्य लक्षण को नज़रअंदाज़ न किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते डॉक्टर की सलाह ली जाए।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

हां, डायबिटॶज़ से पीड़ित लोगों में गर्मी का असर अधिक देखा जा सकता है। शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होने के कारण तेज गर्मी और लू का असर जल्दी महसूस हो सकता है।

हीट स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर उसे सामान्य स्तर पर वापस नहीं ला पाता। यह स्थिति तुरंत चिकित्सकीय सहायता की मांग कर सकती है।

डायबिटॶज़ के कारण शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है। गर्म मौसम में यह समस्या और बढ़ सकती है, जिससे थकान, कमजोरी और गर्मी से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।

अत्यधिक प्यास लगना, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी, बहुत ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद हो जाना जैसे लक्षण गर्मी से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर संकेत कर सकते हैं।

हां, पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी माना जाता है।

दोपहर की तेज धूप से बचना, पर्याप्त पानी पीना, हल्का भोजन करना और लंबे समय तक बाहर रहने से बचना उपयोगी हो सकता है। साथ ही शरीर में पानी की कमी के संकेतों पर भी ध्यान देना चाहिए।

कुछ लोगों में अत्यधिक गर्मी, पानी की कमी और खानपान में बदलाव के कारण ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए नियमित निगरानी करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

मौसमी फल, पर्याप्त पानी, हल्का और संतुलित भोजन तथा पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकते हैं। भोजन का चुनाव व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होना चाहिए।

नहीं, बहुत गर्म और बंद वातावरण में रहने वाले लोगों को भी गर्मी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए घर के अंदर भी पर्याप्त ठंडक और पानी का ध्यान रखना जरूरी है।

यदि तेज बुखार, भ्रम की स्थिति, बेहोशी, लगातार चक्कर, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ये हीट स्ट्रोक के गंभीर संकेत हो सकते हैं।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us