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Diabetic Patient में Uric Acid क्यों ज़्यादा बढ़ता है? Metabolic Connection

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

सुबह उठकर जब एक डायबिटिक मरीज़ बिस्तर से पैर नीचे रखता है और अचानक पैर के अंगूठे या एड़ी में सुई चुभने जैसा भयंकर दर्द होता है, तो वह इसे महज़ एक सामान्य थकान या मोच समझ लेता है डायबिटीज के साथ जीवन बिताना अपने आप में एक चुनौती है, जहाँ हर दिन ब्लड शुगर को नापना और कंट्रोल करना पड़ता है लेकिन इस भागदौड़ के बीच, जब अचानक जोड़ों में सूजन आने लगती है या कलाई और टखने सुन्न पड़ने लगते हैं, तो हम अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं

लेकिन यह साधारण दर्द नहीं है; यह आपके शरीर की चेतावनी है कि आपका मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह से असंतुलित हो चुका है जब ब्लड शुगर के साथ-साथ आपके शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगे, तो समझ लीजिए कि आप 'मेटाबोलिक सिंड्रोम' Metabolic Syndrome की चपेट में आ चुके हैं इसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर आपकी किडनी की ताक़त और जोड़ों की कार्यक्षमता हमेशा के लिए छीन सकता है।

डायबिटीज में यूरिक एसिड बढ़ने के पीछे क्या संकेत छिपे हैं?

डायबिटीज और हाई यूरिक एसिड Hyperuricemia का आपस में बहुत गहरा संबंध है यह शरीर में चल रही एक ऐसी अंदरूनी लड़ाई का संकेत देता है, जिसके लिए हमारे अंग प्राकृतिक रूप से नहीं बने हैं।

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस Insulin Resistance: जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, तो पैंक्रियास अधिक इंसुलिन बनाता है खून में इंसुलिन का यह उच्च स्तर Hyperinsulinemia किडनी को यूरिक एसिड बाहर निकालने से रोकता है। नतीजतन, यूरिक एसिड खून में ही जमा होने लगता है।
  • किडनी पर भारी दबाव: डायबिटीज के कारण लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर किडनी के फिल्टर करने वाले नेफ्रॉन्स Nephrons को डैमेज करता है जब किडनी कमज़ोर होती है, तो शरीर से प्यूरीन Purine का कचरा बाहर नहीं निकल पाता, जो यूरिक एसिड के रूप में जोड़ों में क्रिस्टल्स बनकर जमने लगता है।
  • मेटाबोलिज्म का धीमा होना और मोटापा: टाइप-2 डायबिटीज अक्सर बढ़ते वज़न और धीमे मेटाबॉलिज़्म के साथ आती है फैट सेल्स Adipose tissue शरीर में इन्फ्लेमेशन सूजन बढ़ाते हैं, जिससे यूरिक एसिड का उत्पादन बढ़ जाता है और नसों व जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है।

डायबिटीज में यूरिक एसिड किन प्रकारों में सामने आता है?

हर डायबिटिक व्यक्ति का शरीर और उसकी प्रकृति अलग होती है ब्लड शुगर और यूरिक एसिड के बढ़ने से जोड़ों और नसों पर पड़ने वाला यह प्रभाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान वातरक्त Vata-dominant Gout: इस स्थिति में जोड़ों में भयंकर रूखापन और सुन्नपन आ जाता है दर्द ऐसा होता है मानो कोई हड्डियों को काट रहा हो। ठंडे मौसम में या ठंडी हवा लगने से यह वात दोष और अधिक भड़क जाता है और पैरों के जोड़ों में अकड़न असहनीय हो जाती है।
  • पित्त-प्रधान वातरक्त Pitta-dominant Gout: इसमें यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स जब जोड़ों में चुभते हैं, तो वहां आग लगने जैसी जलन होती है। पैर का अंगूठा या टखना लाल हो जाता है और छूने पर वहां से भारी गर्मी Heat निकलने का अहसास होता है। यह गाउट का सबसे दर्दनाक रूप है।
  • कफ-प्रधान वातरक्त Kapha-dominant Gout: जब डायबिटीज के कारण मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा हो जाता है, तो जोड़ों में भारी सूजन Swelling आ जाती है। पैरों में भारीपन महसूस होता है, चलने-फिरने में सुस्ती आती है और इंसान हमेशा क्रोनिक फटीग Chronic fatigue से घिरा रहता है।

क्या आपके शरीर में भी यूरिक एसिड बढ़ने के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

यूरिक एसिड रातों-रात खतरनाक स्तर तक नहीं पहुँचता। यह डायबिटीज के साथ मिलकर शरीर में बहुत पहले से अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर बढ़ती उम्र का दर्द मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • पैर के अंगूठे में अचानक दर्द Podagra: आधी रात या सुबह उठते ही पैर के बड़े अंगूठे में इतना भयंकर दर्द और सूजन होना कि चादर का स्पर्श भी बर्दाश्त न हो।
  • जोड़ों का लाल और गर्म होना: बिना किसी चोट के टखनों, घुटनों या कलाई का अचानक सूज जाना, लाल हो जाना और छूने पर गर्म महसूस होना।
  • किडनी के हिस्से में दर्द: कमर के निचले हिस्से में या पीठ की तरफ हल्का लेकिन लगातार बना रहने वाला दर्द, जो यूरिक एसिड की पथरी Urate Stones का शुरुआती संकेत हो सकता है।
  • हाथ-पैरों में अजीब सी जकड़न: सीढ़ियां चढ़ते समय या लंबे समय तक बैठे रहने के बाद उठने पर जोड़ों का पूरी तरह से अकड़ जाना।

यूरिक एसिड को नज़रअंदाज़ करने में डायबिटिक मरीज़ क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस दर्द से तुरंत राहत पाने और अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी चालू रखने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो उनकी किडनी और जोड़ों को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • पेनकिलर्स का रोज़ाना सेवन: दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना दर्द निवारक NSAIDs गोलियाँ खाना एक डायबिटिक मरीज़ की किडनी के लिए ज़हर के समान है। यह किडनी के फिल्टर को डैमेज कर देता है, लेकिन जिस जगह यूरिक एसिड जमा है, वहां कोई आराम नहीं मिलता।
  • डाइट में प्यूरीन को नज़रअंदाज़ करना: शुगर फ्री होने के भ्रम में अत्यधिक प्रोटीन, दालें, और पैकेटबंद जूस का सेवन करना, जो शरीर में प्यूरीन Purine का स्तर बढ़ाकर यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स बनाते हैं।
  • गलत मालिश का इस्तेमाल: सूजे हुए और लाल जोड़ों की ज़ोर-ज़ोर से मालिश करना, जिससे यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स टूटकर आस-पास की नसों और ऊतकों को और ज़्यादा फाड़ देते हैं।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर डायबिटिक मरीज़ इस समस्या को ठीक न करे, तो यह 'टोफाई' Tophaceous Gout का रूप ले लेती है, जहाँ जोड़ों के आसपास यूरिक एसिड की सख्त गांठें बन जाती हैं और जोड़ हमेशा के लिए टेढ़े हो जाते हैं। साथ ही, किडनी फेलियर Diabetic Nephropathy का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

आयुर्वेद डायबिटीज ,यूरिक एसिड के कनेक्शन को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे डायबिटिक हाइपरयूरिसीमिया Diabetic Hyperuricemia या गाउट कहता है, आयुर्वेद उसे 'प्रमेह' डायबिटीज के कारण पैदा हुए 'वातरक्त' Vatarakta के गंभीर प्रकोप के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • अग्निमांद्य और 'आम' का निर्माण: आयुर्वेद के अनुसार, डायबिटीज के मरीज़ों में जठराग्नि पाचन अग्नि बहुत कमज़ोर हो जाती है। जब भोजन ठीक से नहीं पचता, तो शरीर में ज़हरीला 'आम' Toxins बनने लगता है।
  • रक्त और वात का दूषित होना: यह 'आम' जब दूषित रक्त Blood और बिगड़े हुए वात दोष के साथ मिल जाता है, तो यह खून के साथ पूरे शरीर में घूमता है।
  • स्रोतस Channels में रुकावट: गुरुत्वाकर्षण के कारण यह दूषित मिश्रण सबसे पहले शरीर के निचले हिस्सों जैसे पैर के अंगूठे के जोड़ों में जाकर फंस जाता है। वहां यह नसों और रक्त वाहिकाओं Srotas को ब्लॉक कर देता है, जिससे भयंकर दर्द, सूजन और लालिमा उत्पन्न होती है, जिसे वातरक्त कहा जाता है।
  • यूरिक एसिड और ब्लड शुगर को एक साथ कंट्रोल करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके जोड़ों में ज़हर घोल सकता है और उन्हें दोबारा हरा-भरा भी कर सकता है। डायबिटीज और यूरिक एसिड से एक साथ बचने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - यूरिक एसिड पिघलाने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - शुगर और प्यूरीन बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, जई Oats, ज्वार, मूंग दाल की खिचड़ी। वाइट ब्रेड, मैदा, रिफाइंड कार्ब्स, बहुत अधिक चना या राजमा।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी सीमित मात्रा में, सरसों का तेल। रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक फ्राइड खाना।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, पेठा Ash gourd, परवल, करेला, खीरा। पालक, मशरूम, कटहल, बैंगन, फूलगोभी इनमें प्यूरीन अधिक होता है।
फल Fruits जामुन, आंवला, सेब, पपीता सीमित मात्रा में। मीठे पैकेटबंद जूस, हाई-फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप वाले ड्रिंक्स, चीकू।
पेय पदार्थ Beverages धनिया-जीरा पानी, गिलोय का काढ़ा, ताज़ा छाछ दोपहर में। शराब Alcohol यूरिक एसिड तेज़ी से बढ़ाती है, कैफीन, कोल्ड ड्रिंक्स।

यूरिक एसिड को पिघलाने और शुगर कंट्रोल करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के जोड़ों के दर्द को खींच लेते हैं और किडनी की कार्यक्षमता को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • गिलोय Giloy/Guduchi: आयुर्वेद में वातरक्त गाउट और प्रमेह डायबिटीज दोनों के लिए गिलोय को सबसे श्रेष्ठ औषधि माना गया है। यह शरीर के अंदरूनी 'आम' को जड़ से खत्म करती है और यूरिक एसिड को खून से फिल्टर करने में मदद करती है।
  • पुनर्नवा Punarnava: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह शरीर के अंगों को 'पुनः नया' करती है। यह एक बेहतरीन प्राकृतिक मूत्रवर्धक Diuretic है, जो किडनी के ज़रिए अतिरिक्त यूरिक एसिड को फ्लश आउट कर देती है।
  • गोक्षुर Gokshura: यह जड़ी-बूटी किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट की सूजन को तेज़ी से घटाने और यूरिक एसिड की पथरी को बनने से रोकने के लिए अचूक मानी जाती है।
  • गुग्गुल Guggulu: जोड़ों की सख्त सूजन को पिघलाने और दर्द को खींचने के लिए कैशोर गुग्गुल जैसी औषधियां डायबिटिक मरीज़ों के लिए वरदान हैं।
  • नीम Neem: यह दूषित रक्त को साफ करता है Blood Purifier और स्किन व जोड़ों की लालिमा व जलन को तुरंत शांत करता है।

यूरिक एसिड वातरक्त को जड़ से मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स बहुत गहराई तक जोड़ों में जम चुके हों, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • विरेचन Virechana: औषधीय घी पिलाकर और फिर जड़ी-बूटियों के माध्यम से आंतों की गहरी सफाई की जाती है। यह शरीर से दूषित पित्त और रक्त को बाहर निकालकर यूरिक एसिड का स्तर तुरंत गिरा देता है।
  • बस्तॶ Basti: यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली थेरेपी है। औषधीय तेलों और काढ़े का एनीमा देकर आंतों में बैठे वात दोष को जड़ से उखाड़ फेंका जाता है, जिससे जोड़ों का दर्द हमेशा के लिए शांत हो जाता है।
  • अभ्यंग और स्वेदन Abhyanga & Swedana: गाउट के ठंडे या वात-प्रधान प्रकार में, खास औषधीय तेलों जैसे पिंड तैल से हल्के हाथों से मालिश कर भाप दी जाती है, जिससे जकड़न तुरंत खुल जाती है। नोट: अत्यधिक लाल और गर्म जोड़ों पर मालिश नहीं की जाती।
  • रक्तमोक्षण Raktamokshana: बहुत गंभीर और एक्यूट वातरक्त में, लीच थेरेपी जोंक के ज़रिए प्रभावित जोड़ से दूषित खून निकाला जाता है। यह दर्द और सूजन को किसी भी पेनकिलर से भी तेज़ गति से खत्म करता है।

यूरिक एसिड के नॉर्मल होने और जोड़ों के दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

लंबे समय से डायबिटीज और खराब डाइट के कारण कमज़ोर हुई किडनी और दूषित रक्त को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। अंगूठे और एड़ी की भारी जकड़न व सूजन में कमी आएगी। आपका शुगर लेवल भी स्थिर होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स पिघलने लगेंगे। ब्लड रिपोर्ट में यूरिक एसिड का स्तर नीचे आएगा और जोड़ों का लाल होना व गर्माहट लगभग खत्म हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: आपका मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह रीबूट हो जाएगा। वात और रक्त दोष संतुलित हो जाएंगे, और आप बिना किसी पेनकिलर के एक सामान्य, ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

डायबिटीज में यूरिक एसिड बढ़ने के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य ब्लड टेस्ट में यूरिक एसिड का नंबर गिराने वाली दवाइयाँ जैसे Allopurinol और पेनकिलर्स देना। वात-रक्त को शांत करना, 'आम' को पचाना, और मेटाबॉलिज़्म को प्राकृतिक रूप से दुरुस्त करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल प्रोटीन/प्यूरीन के अधिक सेवन और जोड़ों के दर्द की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए शुगर प्रमेह और दूषित रक्त का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल प्रोटीन बंद करने की सलाह दी जाती है, लेकिन जठराग्नि या वात दोष पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही दिनचर्या, पेट साफ रखना और पंचकर्म को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर यूरिक एसिड तुरंत वापस बढ़ जाता है और पेनकिलर्स से किडनी डैमेज का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, किडनी खुद को हील कर लेती है, जिससे इंसान स्थायी रूप से गाउट-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • कमर के निचले हिस्से में तेज़ दर्द: अगर कमर से शुरू होकर पेट की तरफ असहनीय दर्द उठे और पेशाब में खून आए यह यूरिक एसिड की पथरी का संकेत हो सकता है।
  • जोड़ों का पूरी तरह जाम हो जाना: अगर दर्द और सूजन इतनी भयंकर हो जाए कि आप ज़मीन पर पैर रखने या चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ महसूस करने लगें।
  • गांठें Tophi बन जाना: अगर कोहनी, उँगलियों या कानों के आस-पास सफेद, सख्त गांठें दिखने लगें जो त्वचा फाड़कर बाहर आ रही हों।
  • अचानक तेज़ बुखार: जोड़ों के लाल होने के साथ-साथ अगर अचानक बहुत तेज़ बुखार Fever आ जाए, जो जोड़ों में गंभीर इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।

निष्कर्ष

डायबिटीज अपने आप में शरीर के लिए एक बड़ा संघर्ष है, लेकिन जब इसके साथ यूरिक एसिड बढ़ने लगता है, तो यह आपकी किडनी और जोड़ों के लिए एक साइलेंट किलर बन जाता है। पैर के अंगूठे में होने वाला वह दर्द और सूजन महज़ एक थकावट नहीं, बल्कि आपके शरीर का चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह बिगड़ चुका है और 'आम' Toxins आपके खून को दूषित कर रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स और कृत्रिम गोलियों से दबाते हैं, तो आप अपनी किडनी को हील करने के बजाय उसे स्थायी डैमेज की ओर धकेल रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने खानपान को सुधारें, प्यूरीन वाली डाइट से बचें और अपनी जठराग्नि को मज़बूत करें। गिलोय, पुनर्नवा और गोक्षुर जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और विरेचन व बस्तॶ जैसी पंचकर्म थेरेपी से अपनी शरीर को प्राकृतिक रूप से नया जीवन दें। डायबिटीज और यूरिक एसिड के कारण अपने शरीर को कमज़ोर न पड़ने दें, और अपने शरीर व मेटाबॉलिज़्म को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

डायबिटीज के कारण शरीर में इंसुलिन का स्तर असंतुलित हो जाता है (इंसुलिन रेजिस्टेंस), जिससे किडनी यूरिक एसिड को ठीक से फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर नहीं निकाल पाती। इसके अलावा, बढ़ा हुआ शुगर नसों और किडनी को डैमेज करता है, जिससे यूरिक एसिड खून में जमा होकर जोड़ों में जाने लगता है।

सामान्य गठिया (Osteoarthritis) हड्डियों के घिसने या बढ़ती उम्र के कारण होता है। लेकिन गाउट खून में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स बनने के कारण होता है, जो अचानक एक ही रात में भयंकर दर्द के साथ शुरू होता है, खासकर पैर के बड़े अंगूठे में।

मूंग की दाल यूरिक एसिड के मरीज़ों के लिए सबसे सुरक्षित और सुपाच्य (आसानी से पचने वाली) मानी जाती है। लेकिन राजमा, उड़द, चना और छोले जैसी भारी दालें प्यूरीन से भरपूर होती हैं और वात दोष बढ़ाती हैं, इसलिए इनसे पूरी तरह बचना चाहिए।

बिल्कुल। शराब (खासकर बीयर) में प्यूरीन बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह न सिर्फ ब्लड शुगर को असंतुलित करता है, बल्कि किडनी को यूरिक एसिड बाहर निकालने से सीधे तौर पर रोकता है, जिससे गाउट का अटैक तुरंत आ सकता है।

हाँ, भरपूर मात्रा में हल्का गुनगुना पानी पीने से किडनी को यूरिक एसिड फ्लश आउट (पेशाब के ज़रिए बाहर निकालना) करने में मदद मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार, धनिया या जीरे का पानी पीने से किडनी की सफाई और बेहतर तरीके से होती है।

हाँ। गिलोय एक त्रिदोषशामक और अद्भुत रसायन है। यह न केवल ब्लड शुगर को कंट्रोल करती है (प्रमेह में लाभदायक), बल्कि यह रक्त में जमे हुए यूरिक एसिड को घोलकर बाहर निकालने के लिए आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन औषधि (वातरक्त में श्रेष्ठ) है।

अटैक के दौरान कभी भी लाल और सूजे हुए जोड़ की ज़ोर से मालिश न करें और न ही उस पर गर्म पानी की सिकाई करें। इससे सूजन और दर्द भड़क सकता है। इसके अलावा प्रोटीन युक्त भोजन तुरंत बंद कर दें।

हाँ। क्रोनिक स्ट्रेस शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो ब्लड शुगर को अनियंत्रित करता है और शरीर के मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर का प्यूरीन पचाने का सिस्टम बिगड़ जाता है और यूरिक एसिड बढ़ने लगता है।

आयुर्वेद के दृष्टिकोण से, बहुत अधिक खट्टी चीज़ें रक्त और पित्त दोष को दूषित कर सकती हैं। हालांकि कुछ लोग इसे फायदेमंद मानते हैं, लेकिन डायबिटिक मरीज़ों को कोई भी नुस्खा बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के नहीं आजमाना चाहिए; आंवला या ताज़ी छाछ इसके बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं।

हाँ। पंचकर्म (विशेषकर विरेचन और बस्तॶ) शरीर से उस जड़ (आम और दूषित दोषों) को ही बाहर निकाल देता है जो यूरिक एसिड बना रही है। साथ ही, यह किडनी और जठराग्नि को रीसेट कर देता है, जिससे यूरिक एसिड का बार-बार बढ़ना स्थायी रूप से रुक जाता है।

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