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Cosmetics से Skin Allergy - Patch Test Negative पर भी क्यों?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by

आजकल के इस दौर में बाज़ार से अपनी त्वचा के लिए कोई भी महँगा सा या डॉक्टरों द्वारा टेस्टेड कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट खरीद लाना बहुत आम बात हो गई है। और फिर उसे घर लाकर अपनी स्किन पर उसका पैच टेस्ट करना, एक तरह से बहुत ही ज़रूरी सावधानी बन चुका है। हम सब अक्सर ऐसा ही करते हैं।

अब होता क्या है कि जब पूरे 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उस पैच टेस्ट में त्वचा पर किसी भी तरह की कोई जलन या लाली दिखाई नहीं देती है। तो हम बिल्कुल निश्चिंत और बेफिक्र हो जाते हैं। हमारा सारा डर खत्म हो जाता है। और फिर हम बड़े आराम से उस क्रीम, सीरम या मेकअप का इस्तेमाल अपनी रोज़ की ज़िंदगी में शुरू कर देते हैं।

लेकिन असली निराशा तब होती है जब कुछ दिनों या हफ्तों के लगातार इस्तेमाल के बाद अचानक चेहरे पर दाने, खुजली या भयंकर एलर्जी उभर आती है। यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि जब टेस्ट पास हो गया था, तो फिर त्वचा ने बगावत क्यों कर दी? इसका जवाब केवल उस क्रीम के केमिकल्स में नहीं, बल्कि हमारी त्वचा के आंतरिक सिस्टम और उसमें जमा हो रहे टॉक्सिन्स में छिपा है।

पैच टेस्ट नेगेटिव होने के बावजूद स्किन एलर्जी क्यों उभर आती है?

त्वचा केवल शरीर का बाहरी आवरण नहीं है, बल्कि यह हमारे अंदरूनी स्वास्थ्य और बाहरी वातावरण के बीच का एक सेंसर है। पैच टेस्ट के सफल होने के बाद भी एलर्जी उभरने के पीछे शरीर के ये तंत्र काम करते हैं:

  • डिलेड हाइपरसेंसिटिविटी (Delayed Hypersensitivity): पैच टेस्ट केवल 24-48 घंटे का रिएक्शन देखता है। लेकिन कई कॉस्मेटिक्स के केमिकल्स जब हफ्तों तक लगातार त्वचा पर जमा होते हैं, तब शरीर का इम्यून सिस्टम अचानक उन्हें दुश्मन मानकर प्रतिक्रिया देता है।
  • केमिकल और पसीने का रिएक्शन: आपने एसी (AC) कमरे में पैच टेस्ट किया होगा, लेकिन जब आप वही मेकअप लगाकर तेज़ धूप में जाते हैं, तो वह पसीने के साथ मिलकर भयंकर एसिडिक रिएक्शन कर सकता है।
  • स्किन बैरियर का कमज़ोर होना: खराब खानपान और कमज़ोर पाचन (Agni Decline) के कारण जब आपकी त्वचा की प्राकृतिक ढाल (Skin Barrier) कमज़ोर हो जाती है, तो पहले से सुरक्षित लगने वाले प्रोडक्ट्स भी अचानक नुकसान पहुँचाने लगते हैं।
  • हॉर्मोनल बदलाव और ब्लड टॉक्सिन्स: कई बार आपके एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) में गड़बड़ी और ब्लड में गर्मी (पित्त) बढ़ी होती है। ऐसे में कॉस्मेटिक का कोई मामूली सा प्रिजर्वेटिव (Preservative) भी ट्रिगर का काम कर देता है और चेहरा लाल हो जाता है।

कॉस्मेटिक्स से होने वाली यह एलर्जी किन प्रकारों की हो सकती है?

मेकअप या स्किनकेयर से होने वाली हर एलर्जी एक जैसी नहीं होती। इसके रिएक्शन के समय और तरीके के आधार पर इसे इन मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

  • इरिटेंट कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Irritant Contact Dermatitis): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें कॉस्मेटिक में मौजूद कोई हार्ड केमिकल आपकी त्वचा की ऊपरी परत को धीरे-धीरे डैमेज करता है, जिससे वह रूखी, लाल और खुरदरी हो जाती है।
  • एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Allergic Contact Dermatitis): यह इम्यून सिस्टम का एक ओवररिएक्शन है। यह ज़रूरी नहीं कि उसी दिन हो; यह सालों से इस्तेमाल किए जा रहे किसी पुराने प्रोडक्ट से भी अचानक विकसित हो सकता है।
  • फोटो-कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Photo-contact Dermatitis): यह एलर्जी तब उभरती है जब आपके चेहरे पर लगा कोई खास केमिकल (जैसे सनस्क्रीन या परफ्यूम का कोई घटक) सूरज की यूवी (UV) किरणों के संपर्क में आता है और ज़हरीला बन जाता है।

स्किन पर एलर्जी उभरने पर क्या लक्षण (Symptoms) महसूस होते हैं?

जब आपकी त्वचा कॉस्मेटिक के किसी ज़हरीले तत्व (Toxin) को अस्वीकार करती है, तो वह कई तरह के अलार्म बजाती है, जिन्हें समय रहते पहचानना ज़रूरी है:

  • चेहरे पर अचानक गर्माहट और लालिमा: क्रीम या लोशन लगाने के कुछ ही घंटों बाद चेहरे पर भयंकर रेडनेस आ जाती है और ऐसा लगता है जैसे त्वचा से आग निकल रही हो।
  • छोटे-छोटे पानी वाले दाने (Blisters): त्वचा पर अचानक छोटे, खुजलीदार दाने उभर आते हैं जिनमें कई बार हल्का तरल पदार्थ भी भरा होता है।
  • चेहरे और आँखों के आसपास सूजन: कई बार रात में लगाया गया नाइट सीरम सुबह तक चेहरे पर अचानक सूजन या आँखों के नीचे भारीपन ला देता है।
  • त्वचा का फटना और छिलना: होठों पर या गालों पर त्वचा इतनी रूखी हो जाती है कि वह पपड़ी बनकर झड़ने लगती है और मुस्कुराते समय उसमें खिंचाव और दर्द होता है।

स्किन एलर्जी में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और इनसे क्या जटिलताएँ होती हैं?

एलर्जी उभरने पर अक्सर लोग घबराहट में ऐसे कदम उठा लेते हैं जो त्वचा की इस अस्थायी समस्या को एक स्थायी बीमारी में बदल देते हैं:

  • स्टेरॉयड क्रीम्स का अंधाधुंध इस्तेमाल: एलर्जी को तुरंत शांत करने के लिए मेडिकल स्टोर से स्टेरॉयड क्रीम (Steroid Creams) लेकर लगाना त्वचा को हमेशा के लिए पतला और कमज़ोर कर देता है।
  • एलर्जी को मेकअप से छुपाना: दाने या लालिमा दिखने पर उसे कंसीलर (Concealer) या फाउंडेशन की मोटी परत से ढकना त्वचा के छिद्रों (Pores) को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है।
  • अंदरूनी कारणों की अनदेखी: लोग सिर्फ बाहरी क्रीम्स बदलते रहते हैं, और खुजली और इन्फेक्शन के लिए आयुर्वेदिक उपाय अपनाने की बजाय पेट में जमा गंदगी और पाचन संबंधी बीमारियों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
  • भयंकर चर्म रोग का जन्म: एलर्जी को गलत तरीके से दबाने पर रक्त की अशुद्धि इतनी बढ़ जाती है कि भविष्य में सोरायसिस या एक्ज़िमा जैसी गंभीर जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं।

कॉस्मेटिक एलर्जी को लेकर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आधुनिक विज्ञान जिसे केवल एक बाहरी कॉन्टैक्ट एलर्जी (Contact Allergy) मानता है, आयुर्वेद उसे रक्त धातु और भ्राजक पित्त के गहरे असंतुलन के रूप में देखता है:

  • भ्राजक पित्त की विकृति: हमारी त्वचा के रंग और चमक को संभालने वाला भ्राजक पित्त जब केमिकल्स और अशुद्ध खानपान के कारण भड़क जाता है, तो चेहरे पर अचानक लालिमा और जलन पैदा होती है।
  • रक्त धातु का अशुद्ध होना: जब हमारी जठराग्नि सुस्त होती है, तो शरीर में बनने वाला विषैला आम (Toxins) सीधे हमारे ब्लड (रक्त धातु) में मिल जाता है। फिर कॉस्मेटिक का कोई मामूली केमिकल भी ट्रिगर बनकर इस ज़हर को त्वचा के बाहर फेंकने लगता है।
  • कफ और वात का असंतुलन: कॉस्मेटिक्स के भारी मॉइस्चराइजर्स जब रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देते हैं, तो त्वचा के अंदर की हवा (व्यान वात) का संचार रुक जाता है, जो त्वचा में खुजली और कड़ापन लाता है।

एलर्जी शांत करने और ब्लड प्यूरीफाई करने वाला आयुर्वेदिक डाइट चार्ट

त्वचा पर कुछ भी लगाने से पहले यह ज़रूरी है कि आप अपने पेट में क्या डाल रहे हैं। यह आयुर्वेदिक डाइट चार्ट पित्त को शांत करने में आपकी मदद करेगा:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - स्किन को शांत और हाइड्रेट करने वाले) क्या न खाएं (नुकसानदायक - पित्त और एलर्जी बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, जौ (Barley), ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी। मैदा, किण्वित (Fermented) अनाज, पैकेटबंद सफेद ब्रेड।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, खीरा, गाजर (भाप में पके हुए)। टमाटर, शिमला मिर्च, भारी बैंगन, तीखी हरी मिर्च, कच्चा लहसुन।
फल (Fruits) पपीता, मीठे सेब, नारियल पानी, तरबूज, अनार, नाशपाती। खट्टे फल (संतरा, नींबू), कच्चा आम, पैकेटबंद डिब्बाबंद जूस।
पेय पदार्थ (Beverages) सौंफ और धनिए का पानी, पुदीने की चाय, ताज़ा नारियल पानी। कड़क कॉफी, शराब, खट्टी छाछ, कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा।
मसाले और वसा जीरा, धनिया, थोड़ी मात्रा में हल्दी और शुद्ध देसी गाय का घी। गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर, रिफाइंड तेल, डीप फ्राई चीज़ें।

स्किन एलर्जी में राहत करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई अमृत समान रसायन दिए हैं, जो बिना किसी बाहरी कॉस्मेटिक के त्वचा को अंदर से साफ और बेदाग बनाते हैं:

  • नीम (Neem): यह रक्त को शुद्ध करने वाली सबसे शक्तिशाली औषधि है। नीम (Neem) का सेवन त्वचा की गहराई में बैठे हुए इन्फेक्शन को खत्म करता है और दाने सुखाता है।
  • मंजीठ (Manjistha): स्किन टोन को निखारने और ब्लड से टॉक्सिन्स निकालने के लिए मंजीठ (Manjistha) एक जादुई जड़ी-बूटी है। यह पित्त की गर्मी को शांत कर एलर्जी को प्राकृतिक रूप से दबाती है।
  • गिलोय (Giloy): यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाकर ऑटोइम्यून स्किन रिएक्शन्स को रोकती है। गिलोय (Giloy) हर तरह की एलर्जी का अचूक इलाज है।
  • एलोवेरा (Kumari): इसके ताज़े गूदे का सेवन करने या चेहरे पर प्राकृतिक रूप से लगाने से भयंकर रेडनेस और जलन में तुरंत आराम मिलता है।

स्किन को प्राकृतिक रूप से रिपेयर करने वाली आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब कॉस्मेटिक का ज़हर त्वचा की गहराई तक पहुँच जाता है, तो बाहरी और आंतरिक शुद्धिकरण के लिए पंचकर्म की ये थेरेपीज़ चमत्कारिक रूप से काम करती हैं:

  • विरेचन थेरेपी (Virechana): शरीर से पित्त और ब्लड टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए विरेचन थेरेपी (Virechana Treatment) सबसे उत्तम प्रक्रिया है। यह लिवर को डिटॉक्स करती है, जिससे एलर्जी का मूल कारण खत्म हो जाता है।
  • तक्रधारा (Takradhara): माथे पर औषधीय छाछ की लगातार धारा गिराने की यह तक्रधारा थेरेपी (Takradhara Therapy) नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करती है और स्ट्रेस-इंड्यूस्ड एलर्जी को रोकती है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): ठंडी तासीर वाले तेलों से की जाने वाली सौम्य अभ्यंग मालिश (Abhyanga Massage) त्वचा के ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाती है और डैमेज टिशूज़ को अंदर से पोषण देती है।
  • मुख लेपम (Mukha Lepam): कॉस्मेटिक्स से जली हुई त्वचा पर चंदन, मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल जैसे शीतल और प्राकृतिक तत्वों का औषधीय लेप लगाया जाता है, जो त्वचा को तुरंत ठंडक देता है।

प्राकृतिक रूप से स्किन रिपेयर होने और एलर्जी खत्म होने में कितना समय लगता है?

डैमेज हो चुकी स्किन बैरियर को दोबारा बनने और शरीर से केमिकल्स का असर खत्म होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 हफ्ते: सही आयुर्वेदिक डाइट जैसे पित्त शांत करने वाले आहार अपनाने से चेहरे की जलन और भयंकर लालिमा तुरंत कम होने लगेगी।
  • 1-2 महीने: रक्त-शोधक रसायनों (Blood Purifiers) के प्रभाव से शरीर के अंदर का टॉक्सिन खत्म होगा, और नए दाने या रैशेज़ निकलना पूरी तरह बंद हो जाएंगे।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और लगातार आयुर्वेदिक देखभाल से आपकी त्वचा का प्राकृतिक बैरियर पूरी तरह रिपेयर हो जाएगा। आपकी त्वचा पर वह खोई हुई चमक लौट आएगी, जो किसी बाहरी कॉस्मेटिक की मोहताज नहीं होगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

कॉस्मेटिक एलर्जी को लेकर आधुनिक डर्मेटोलॉजी और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है:

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य स्टेरॉयड क्रीम और एंटी-हिस्टामाइन (Anti-histamines) गोलियों से तुरंत एलर्जी और खुजली को दबाना। जठराग्नि को संतुलित करना, रक्त धातु को शुद्ध करना और भ्राजक पित्त को प्राकृतिक रूप से शांत करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक बाहरी एलर्जेन (Allergen) और इम्यून सिस्टम का स्थानीय (Local) रिएक्शन मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए रक्त धातु और अनुचित जीवनशैली का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर डाइट को लेकर कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं होते, केवल कॉस्मेटिक बदलने को कहा जाता है। खाने में 'पित्त शामक' आहार, डिटॉक्सिफिकेशन, और तनाव मुक्त जीवनशैली पर गहरा ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ और क्रीम छोड़ने पर दाने और एलर्जी दोगुनी तेज़ी से वापस आ जाती है (TSW)। रक्त अंदर से इतना शुद्ध हो जाता है कि त्वचा का प्राकृतिक रक्षा-कवच जीवन भर के लिए मज़बूत हो जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस एलर्जी और रक्त की अशुद्धि को पूरी तरह ठीक कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर रिएक्शन दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • सांस लेने में भयंकर रुकावट (Anaphylaxis): अगर कॉस्मेटिक लगाने के कुछ ही मिनटों बाद गले में सूजन आ जाए और सांस लेना भारी हो जाए (यह एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है)।
  • आँखों का पूरी तरह सूजकर बंद हो जाना: अगर आई-मेकअप या क्रीम लगाने के बाद आँखें इतनी सूज जाएँ कि उन्हें खोलना असंभव हो जाए और विज़न (Vision) पर असर पड़े।
  • त्वचा से पीला पानी या मवाद बहना: अगर दाने फूटने लगें और उनमें से बदबूदार पीला पानी बहने लगे, जो एक भयंकर बैक्टीरियल इन्फेक्शन का संकेत है।
  • अचानक तेज़ बुखार आना: अगर त्वचा की एलर्जी और सूजन के साथ-साथ शरीर का तापमान बहुत तेज़ी से बढ़ने लगे और भयंकर कमज़ोरी आ जाए।

निष्कर्ष

सुंदर दिखने की चाह में अपनी त्वचा को रसायनों (Chemicals) की प्रयोगशाला बनाना कोई समझदारी नहीं है। पैच टेस्ट का नेगेटिव आना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपके शरीर का आंतरिक सिस्टम उस बाहरी ज़हर को आसानी से पचा लेगा। अगर आपका पाचन तंत्र कमज़ोर है और रक्त में अशुद्धियाँ जमा हैं, तो दुनिया की सबसे महंगी क्रीम भी आपकी त्वचा पर दाने और लालिमा ही पैदा करेगी। स्टेरॉयड क्रीम के पीछे छुपना बंद करें। नीम, मंजीठ और गिलोय जैसी आयुर्वेदिक औषधियों की शक्ति को पहचानें। अपने शरीर को अंदर से शुद्ध करके एक स्थायी, बेदाग और प्राकृतिक निखार पाने, और इस एलर्जी की समस्या से राहत पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

इसे मेडिकल भाषा में डिलेड हाइपरसेंसिटिविटी (Delayed Hypersensitivity) कहते हैं। 24 घंटे में त्वचा पर क्रीम की बहुत कम मात्रा जमा होती है, लेकिन जब आप उसे रोज़ाना लगाते हैं, तो केमिकल स्किन बैरियर को पार कर इम्यून सिस्टम तक पहुँच जाता है, जो हफ्तों बाद रिएक्शन ट्रिगर करता है।

जैसे ही एलर्जी दिखे, उस कॉस्मेटिक का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें। चेहरे को किसी भी हार्श केमिकल वाले साबुन से न धोएं। केवल सादे पानी से चेहरा साफ करें और जलन शांत करने के लिए ताज़ा एलोवेरा जेल या गुलाब जल लगाएं।

नारियल का तेल तासीर में ठंडा होता है और यह जलन को कम कर सकता है। लेकिन अगर आपको छोटे-छोटे पानी वाले दाने (Blisters) या बहुत अधिक पस वाले दाने हैं, तो तेल लगाने से रोमछिद्र ब्लॉक हो सकते हैं। ऐसे में चंदन का लेप या मुलेठी का पानी ज़्यादा बेहतर है।

हाँ, बिल्कुल हो सकती है। इसे सेंसिटाइजेशन (Sensitization) कहते हैं। जब आपका इम्यून सिस्टम लगातार किसी केमिकल के संपर्क में रहता है और साथ ही आपका पाचन (अग्नि) कमज़ोर हो जाता है, तो शरीर अचानक उस पुराने प्रोडक्ट के खिलाफ भी एंटीबॉडीज़ बनाकर एलर्जी पैदा कर सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार 100% जुड़ी है। जब पेट में कब्ज़ होती है और जठराग्नि सुस्त होती है, तो शरीर के टॉक्सिन्स (आम) मल-मूत्र से बाहर निकलने के बजाय रक्त में मिल जाते हैं। ऐसे में बाहरी कॉस्मेटिक सिर्फ एक ट्रिगर का काम करता है, असली खराबी पेट में होती है।

बिल्कुल नहीं। स्टेरॉयड क्रीम केवल आपके इम्यून रिस्पॉन्स को कुछ समय के लिए सुन्न (Suppress) कर देती हैं। जैसे ही आप क्रीम छोड़ते हैं, एलर्जी दोगुनी तेज़ी से वापस आती है। लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से त्वचा कागज़ जैसी पतली और कमज़ोर हो जाती है।

हालांकि पैराबेंस और सल्फेट्स सबसे आम इरिटेंट्स हैं, लेकिन नेचुरल या ऑर्गेनिक कहलाने वाले प्रोडक्ट्स में मौजूद एसेंशियल ऑयल्स (Essential Oils) या प्राकृतिक परफ्यूम भी संवेदनशील त्वचा में भयंकर एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकते हैं।

नीम एक प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और रक्त-शोधक है जो खून की गर्मी (पित्त) को शांत करता है, जबकि मंजीठ शरीर के अंदर जमे हुए टॉक्सिन्स (आम) को बाहर निकालकर त्वचा के प्राकृतिक बैरियर को रिपेयर करता है, जिससे दाने और लालिमा जड़ से खत्म होते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार स्किन एलर्जी में पित्त और रक्त धातु दूषित होते हैं। कच्चा टमाटर, नींबू और अन्य खट्टी चीज़ें पित्त को और भड़काती हैं, जिससे खुजली और जलन बढ़ सकती है। ऐसे में आपको लौकी और खीरे जैसे ठंडे आहार का सेवन करना चाहिए।

दाग हटाने के लिए केमिकल पील्स के बजाय आप नियमित रूप से आयुर्वेद का कुमकुमादि तेल या मंजिष्ठादि क्वाथ इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने रक्त को अंदर से साफ रखने पर त्वचा अपना प्राकृतिक रंग खुद वापस पा लेती है।

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