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Cervical Spondylosis में Massage सही है या नुकसानदेह?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 20 May, 2026
  • category-iconUpdated on 11 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5036

आज के डिजिटल युग में लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने और गलत पॉश्चर के कारण गर्दन का दर्द हर घर की कहानी बन चुका है। दर्द से बेहाल होकर ज़्यादातर लोग तुरंत राहत पाने के लिए किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति से गर्दन की मालिश करवाने लगते हैं या नाई (Barber) से गर्दन को ज़ोर-ज़ोर से चटकाने की कोशिश करते हैं।

कुछ पलों के लिए यह रगड़न और दबाव बहुत सुकून देता है, लेकिन कई बार इसके अगले ही दिन गर्दन इतनी बुरी तरह जाम हो जाती है कि इंसान अपना सिर भी नहीं घुमा पाता। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि सर्वाइकल के दर्द में जिस मालिश को आप एक जादुई इलाज मान रहे हैं, वह बिना सही जानकारी और तकनीक के आपकी रीढ़ की हड्डी और नसों को हमेशा के लिए अपाहिज कर सकती है।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में मालिश करने पर शरीर में क्या होता है?

जब आप गर्दन के दर्द में बिना किसी डॉक्टरी जाँच के ज़ोरदार मालिश (Massage) करवाते हैं, तो शरीर के अंदर हड्डियों और कमज़ोर नसों के बीच भारी घर्षण पैदा होता है। सही एनाटॉमी (Anatomy) को समझे बिना की गई यह रगड़न आपकी स्थिति को भयंकर रूप से बिगाड़ सकती है:

  • नसों पर भयंकर दबाव पड़ना: सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (Cervical Spondylosis) में रीढ़ की हड्डियों के बीच का गैप (Gap) पहले ही कम हो चुका होता है। ऐसे में ज़ोर से मालिश करने पर नसें हड्डियों के बीच और बुरी तरह दब जाती हैं।
  • लिगामेंट्स का ढीला पड़ना: गर्दन की मांसपेशियों को ज़बरदस्ती खींचने और चटकाने से वहां मौजूद लिगामेंट्स (Ligaments) अपनी प्राकृतिक पकड़ खो देते हैं, जिससे हड्डियाँ अपनी जगह से खिसक सकती हैं।
  • सूजन (Inflammation) का बढ़ना: अगर दर्द किसी अंदरूनी चोट या तीव्र सूजन के कारण है, तो वहां रगड़न पैदा करने से शरीर का तापमान और ब्लड फ्लो अचानक बढ़ता है, जो सूजन को कई गुना भड़का देता है।
  • मांसपेशियों में ऐंठन (Spasm): दर्द में शरीर की मांसपेशियाँ खुद को सुरक्षित करने के लिए सिकुड़ जाती हैं। अनाड़ी हाथों से मालिश करने पर यह सिकुड़न टूटती नहीं, बल्कि मांसपेशियाँ और कड़ेपन (Spasm) का शिकार हो जाती हैं।

गर्दन के दर्द और सर्वाइकल की समस्या किन प्रकारों की हो सकती है?

गर्दन का दर्द हर इंसान में एक ही कारण से नहीं होता और न ही हर दर्द में मालिश की जा सकती है। गर्दन के हिस्से में होने वाले डैमेज के आधार पर इसे इन श्रेणियों में समझा जा सकता है:

  • मस्कुलर स्पाज़्म (Muscular Spasm): यह केवल गलत तरीके से सोने या भारी वज़न उठाने के कारण गर्दन की मांसपेशियों में आया खिंचाव है। इसमें हल्की मालिश से आराम मिल सकता है।
  • सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (Degenerative Disc): इसमें उम्र या गलत पॉश्चर के कारण गर्दन की हड्डियाँ (Vertebrae) और कार्टिलेज घिसने लगते हैं, और गर्दन और कंधे की जकड़न एक स्थायी रूप ले लेती है।
  • हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc): जब दो हड्डियों के बीच की गद्दी (Disc) फटकर बाहर आ जाती है और नसों को दबाने लगती है। इस स्थिति में ज़ोरदार मसाज पूरी तरह से नुकसानदेह है।
  • सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी (Cervical Radiculopathy): यह वह भयंकर स्थिति है जब दबी हुई नस का दर्द गर्दन से निकलकर पूरे हाथ और उंगलियों तक करंट की तरह दौड़ता है।

नसों के दबने और सर्वाइकल बिगड़ने के क्या लक्षण महसूस होते हैं?

जब गर्दन की नसें गलत मसाज या खराब पॉश्चर के कारण बुरी तरह डैमेज होने लगती हैं, तो शरीर केवल गर्दन में दर्द नहीं देता, बल्कि वह कई गंभीर अलार्म बजाता है:

  • हाथों की उंगलियों में सुन्नपन: गर्दन की नसें सीधे हाथों तक जाती हैं। नस दबने पर उंगलियों और हाथों में सुन्नपन और सर्वाइकल दर्द या भारीपन महसूस होने लगता है।
  • हाथ-पैरों में चींटियाँ चलना: ऐसा लगता है मानो नसों में सुइयाँ चुभ रही हों। यह हाथ-पैरों में झुनझुनी नर्व डैमेज का सबसे स्पष्ट संकेत है।
  • सिर में भयंकर दर्द और चक्कर आना: गर्दन के ऊपरी हिस्से की नसें दबने से दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है, जिससे माइग्रेन जैसा सिर दर्द और भयंकर चक्कर (Vertigo) आते हैं।
  • मांसपेशियों की पकड़ कमज़ोर होना: चाय का कप या कोई हल्का सामान पकड़ने में भी हाथ कांपने लगते हैं। यह नसों की कमज़ोरी का एक बड़ा लक्षण है जो सर्वाइकल के कारण और बिगड़ जाता है।

सर्वाइकल में मसाज को लेकर लोग क्या गलतियाँ करते हैं और क्या जटिलताएँ होती हैं?

दर्द से तुरंत छुटकारा पाने की जल्दबाज़ी में लोग अपनी गर्दन के साथ ऐसी भयंकर गलतियाँ कर बैठते हैं, जो एक साधारण खिंचाव को स्थायी बीमारी में बदल देती हैं:

  • गर्दन को बार-बार चटकाना (Neck Cracking): नाई की दुकान पर या खुद से ज़ोर लगाकर गर्दन को चटकाने से कुछ सेकंड का आराम मिलता है, लेकिन यह जोड़ों को ढीला कर सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के खतरे को बहुत ज़्यादा बढ़ा देता है।
  • अनाड़ी हाथों से ज़ोरदार मालिश: दर्द वाली जगह पर अंगूठे से ज़ोर-ज़ोर से दबाने से अंदर की सूजी हुई नसें फट सकती हैं, जिससे दर्द कंधे से होता हुआ पूरे शरीर में फैल सकता है।
  • बर्फ की गलत सिकाई: सर्वाइकल में जकड़न (कड़ापन) होता है। वहां बर्फ रगड़ने से नसें और मांसपेशियाँ सिकुड़ जाती हैं और समस्या और गंभीर हो जाती है।
  • नसों का स्थायी डैमेज होना: लगातार गलत मसाज करवाने से स्पाइनल कॉर्ड (Spinal Cord) पर दबाव पड़ सकता है, जो भविष्य में पैरालिसिस या गंभीर नसों से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस और नसों की जकड़न पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आधुनिक विज्ञान जिसे केवल हड्डियों का घिसना (Degeneration) या मेकैनिकल पेन (Mechanical Pain) मानता है, आयुर्वेद उसे 'मन्यास्तंभ' (Manyastambha) और वात दोष की गंभीर विकृति के रूप में समझता है:

  • वात दोष का भयंकर प्रकोप: शरीर में वात (हवा/सूखापन) का मुख्य स्थान हड्डियाँ और जोड़ हैं। जब हम रूखा भोजन करते हैं और सही वात दोष को कम करने के उपाय नहीं करते, तो यह बढ़ा हुआ वात गर्दन की नसों और जोड़ों की चिकनाई को सुखा देता है।
  • कफ का आवरण और जकड़न: आयुर्वेद के अनुसार, जब सूखे हुए वात के साथ कफ दोष (भारीपन) मिल जाता है, तो वह गर्दन की मांसपेशियों को पूरी तरह से ब्लॉक (आवरण) कर देता है, जिससे गर्दन हिलाना असंभव हो जाता है।
  • अस्थि और मज्जा धातु का क्षय: जठराग्नि के सुस्त होने और लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से नसों का डैमेज होने से हड्डियों (अस्थि) और नसों (मज्जा) को पोषण नहीं मिल पाता, जिससे वे अंदर से खोखली हो जाती हैं।
  • 'आम' (Toxins) का जमाव: जब शरीर में कमज़ोर पाचन के कारण ज़हरीला 'आम' बनता है, तो वह जोड़ों में जाकर बैठता है और भयंकर सूजन (Inflammation) व दर्द पैदा करता है।

सर्वाइकल के दर्द को कम करने वाला वात-शामक डाइट चार्ट

आपकी गर्दन की नसों और हड्डियों को फौलादी बनाने के लिए आपको ऐसा आहार चाहिए जो शरीर में रूखापन (वात) कम करे और जोड़ों को चिकनाई दे। इस आयुर्वेदिक डाइट का सख़्ती से पालन करें:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - वात शांत करने वाले आहार) क्या न खाएं (नुकसानदायक - वात और रूखापन बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, ओट्स, दलिया, अच्छी तरह पका हुआ गेहूं। रूखे बिस्कुट, पैकेटबंद नूडल्स, अत्यधिक मैदा और वाइट ब्रेड।
वसा (Fats) शुद्ध देसी गाय का घी (हड्डियों की ग्रीस बढ़ाने के लिए), तिल का तेल। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा रूखा और बिना तेल-घी का खाना।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, सहजन (Moringa - हड्डियों के लिए अमृत), परवल। कच्चा सलाद, पत्ता गोभी, कटहल, मटर, राजमा (गैस बढ़ाने वाले)।
मेवे और बीज (Nuts) रात भर पानी में भीगे हुए बादाम, अखरोट, और अलसी के बीज (Flax seeds)। सूखे मेवे बिना भिगोए खाना, मूंगफली (यह शरीर में रूखापन बढ़ाते हैं)।
पेय पदार्थ (Beverages) गुनगुना पानी, अश्वगंधा या हल्दी वाला दूध (रात में), हर्बल चाय। कोल्ड ड्रिंक्स, बर्फ का पानी, बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी या कड़क चाय।

गर्दन की नसों को ताक़त देने वाली सुरक्षित आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई बेहतरीन 'बल्य' रसायन दिए हैं जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के नसों की सूजन को खत्म करते हैं और गर्दन को प्राकृतिक रूप से लचीला बनाते हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह नसों और मांसपेशियों के लिए सबसे बेहतरीन टॉनिक है। अश्वगंधा (Ashwagandha) शरीर में ऊर्जा का संचार करता है, स्ट्रेस कम करता है और सर्वाइकल के दर्द को प्राकृतिक रूप से खींच लेता है।
  • शल्लकी (Boswellia): यह जादुई जड़ी-बूटी रीढ़ की हड्डियों के बीच घिस चुकी कार्टिलेज (Cartilage) को सुरक्षित रखने और गर्दन के भारी दर्द व सूजन को खत्म करने में अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है।
  • गिलोय (Giloy): किसी भी तरह के ऑटोइम्यून अटैक या जोड़ों की अंदरूनी सूजन (Inflammation) को कम करने के लिए गिलोय एक शक्तिशाली औषधि है जो वात को भी शांत करती है।
  • रास्ना (Rasna): आयुर्वेद में रास्ना को जोड़ों के दर्द और नसों की भयंकर जकड़न के लिए सबसे श्रेष्ठ वात-शामक औषधि बताया गया है।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

सर्वाइकल में हर तरह की मालिश नुकसानदेह नहीं होती। जब प्रशिक्षित पंचकर्म विशेषज्ञों द्वारा सही औषधीय तेलों का प्रयोग किया जाता है, तो ये बाहरी थेरेपीज़ गर्दन को जादुई आराम देती हैं:

  • ग्रीवा बस्ती (Greeva Basti): यह सर्वाइकल का सबसे अचूक इलाज है। गर्दन के पिछले हिस्से पर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल भरा जाता है। ग्रीवा बस्ती (Greeva Basti) सूखी हुई नसों को गहराई से पोषण देती है और हड्डियों की जकड़न को तोड़ती है।
  • अभ्यंग मालिश (Abhyanga): महानारायण या क्षीरबला जैसे गर्म औषधीय तेलों से बहुत ही हल्के हाथों से की जाने वाली यह अभ्यंग मालिश (Abhyanga Massage) गर्दन की रुकी हुई रक्त आपूर्ति को सुचारू करती है। (नोट: यह ज़ोरदार रगड़न नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक स्नेहन प्रक्रिया है)।
  • पत्र पोटली स्वेदन (Patra Pinda Sweda): ताज़े औषधीय पत्तों की पोटली बनाकर दर्द वाली जगह पर सिकाई की जाती है। यह मांसपेशियों की भयंकर ऐंठन (Spasm) को तुरंत शांत करती है।
  • नस्य (Nasya): नाक के माध्यम से औषधीय तेल या घी की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यह थेरेपी सिर और गर्दन के पूरे नर्वस सिस्टम को लुब्रिकेट (Lubricate) करती है और चक्कर आने की समस्या को दूर करती है।

नसों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

लंबे समय से गलत पॉश्चर और झटके वाली अनाड़ी मालिश से डैमेज हुई नसों व हड्डियों को दोबारा ताक़तवर बनाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: सही वात-शामक औषधियों और तेलों के प्रयोग से गर्दन की जकड़न कम होगी। हाथों में आने वाला सुन्नपन और अत्यधिक थकान और कमज़ोरी घटने लगेगी।
  • 3-4 महीने: ग्रीवा बस्ती और आयुर्वेदिक रसायनों के प्रभाव से आपकी गर्दन की मांसपेशियाँ अपनी ताक़त वापस पाने लगेंगी, और दर्द के कारण आने वाले चक्कर काफी हद तक कम हो जाएंगे।
  • 5-6 महीने और आगे: आपकी नसें और अस्थिधातु पूरी तरह पोषित हो जाएंगी। आप बिना किसी सर्वाइकल कॉलर (Collar) या दर्द की गोली के सामान्य और लचीली गर्दन का अनुभव करेंगे।

मरीज़ों के अनुभव

मेरा नाम रेखा है और मैं ग्वालियर से हूँ। पिछले लगभग 5 सालों से मैं सर्वाइकल और थायरॉइड की समस्या से बहुत परेशान थी। मैं एलोपैथिक इलाज ले रही थी, दवाइयाँ लेने तक थोड़ी राहत मिलती थी, लेकिन जैसे ही दवा बंद होती, समस्या फिर से शुरू हो जाती थी। मेरे गर्दन, पीठ और कंधे में लगातार दर्द रहता था और हाथों में सुन्नपन भी महसूस होता था। इस वजह से मेरी दिनचर्या काफी प्रभावित हो गई थी और मैं बहुत परेशान रहने लगी थी। इसी दौरान मुझे एक जैन डॉक्टर के माध्यम से जीवा आयुर्वेद के बारे में पता चला और उनकी सलाह पर मैं वहाँ गई। डॉक्टरों ने मेरी पूरी स्थिति को समझकर उपचार शुरू किया। मुझे दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी सही सलाह दी गई। धीरे-धीरे मुझे आराम मिलने लगा और मेरी तकलीफों में काफी सुधार आया। अब मैं पहले से बेहतर महसूस करती हूँ।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

सर्वाइकल दर्द और मसाज के नज़रिए को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है:

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द कम करने के लिए पेनकिलर्स (NSAIDs), कॉलर का सहारा और ज़बरदस्ती फिजियोथेरेपी करवाना। बढ़ा हुआ वात शांत करना, 'आम' को निकालना और नसों को औषधीय स्नेहन (Lubrication) देकर प्राकृतिक रूप से मज़बूत करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल हड्डियों के घिसने या मेकैनिकल डैमेज की एक स्थानीय (Local) समस्या मानना। इसे कमज़ोर जठराग्नि, बिगड़े हुए वात और रूखे आहार व गलत लाइफस्टाइल का एक संपूर्ण सिंड्रोम (मन्यास्तंभ) मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर डाइट को लेकर कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं होते, केवल कॉलर पहनने पर ज़ोर रहता है। खाने में 'स्नेहन' (घी/तेल), सही पोश्चर, और वात-शामक आहार पर बहुत गहरा ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर दर्द वापस आ जाता है और लगातार कॉलर पहनने से नसें स्थायी रूप से कमज़ोर हो जाती हैं। नर्वस सिस्टम और मांसपेशियाँ अंदर से इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि बाहरी सपोर्ट (कॉलर) और खतरनाक मालिश की ज़रूरत खत्म हो जाती है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस वात और नसों की कमज़ोरी को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी या अस्पताल में जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • हाथों में पूरी तरह सुन्नपन और लकवा जैसी स्थिति: अगर आपका कोई एक हाथ अचानक पूरी तरह काम करना बंद कर दे या उसमें कोई भी सेंसेशन (Sensation) महसूस न हो।
  • अचानक मल-मूत्र पर नियंत्रण खो देना: अगर नसों के दबने का असर इतना गहरा हो जाए कि आपको यूरिन या बाउल मूवमेंट (Bowel Movement) का पता ही न चले (यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी है)।
  • चलने में लड़खड़ाहट (Loss of Balance): अगर सर्वाइकल के दर्द के साथ-साथ आपको चलते समय भयंकर चक्कर आएं और आप अपना संतुलन खोकर गिरने लगें।
  • असहनीय बिजली के झटके जैसा दर्द: अगर गर्दन से लेकर हाथों की उंगलियों तक अचानक करंट दौड़ने जैसा ऐसा दर्द उठे जो किसी भी पोज़िशन में लेटने पर शांत न हो।

निष्कर्ष

अपनी गर्दन को एक मशीन का पुर्जा समझने की भूल न करें जिसे कोई भी अनाड़ी व्यक्ति ज़ोर से दबाकर या चटकाकर ठीक कर देगा। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में सूखी हुई नसों और घिस चुकी हड्डियों के बीच पहले ही बहुत कम जगह बची होती है। ऐसे में बिना वैज्ञानिक समझ के की गई मसाज आपकी रीढ़ की हड्डी को भयंकर नुकसान पहुँचा सकती है। दर्द निवारक गोलियों और खतरनाक मालिश के इस भ्रामक चक्रव्यूह से बाहर निकलें।

अपनी दिनचर्या और बैठने के तरीके (पॉश्चर) को सुधारें। अपने आहार में वात को शांत करने वाले शुद्ध घी और गर्म तासीर वाली चीज़ों को शामिल करें। अश्वगंधा और शल्लकी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की शक्ति को पहचानें। ग्रीवा बस्ती और विशेषज्ञ द्वारा की गई औषधीय अभ्यंग मालिश से अपनी सूखी हुई नसों को नया जीवन दें। इस दर्द और सुन्नपन को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें, और अपनी मांसपेशियों व नसों को स्थायी रूप से फौलादी बनाने तथा इससे राहत पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में मसाज चेयर का इस्तेमाल बहुत खतरनाक हो सकता है। मशीन आपकी नसों की नाज़ुक स्थिति और सूजन को नहीं समझ सकती। इसका वाइब्रेशन (Vibration) और दबाव हड्डियों के बीच दबी हुई नसों को और ज़्यादा डैमेज कर सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, सर्वाइकल वात (रूखेपन और ठंडक) का रोग है। इसलिए इसमें हमेशा गर्म सिकाई (हॉट वॉटर बैग या गर्म तौलिये) का ही इस्तेमाल करना चाहिए। बर्फ लगाने से नसें और मांसपेशियाँ और अधिक सिकुड़ जाती हैं, जिससे जकड़न भयंकर रूप ले लेती है।

सरसों का तेल वात कम करने वाला होता है, लेकिन सर्वाइकल में केवल तेल लगाना काफी नहीं है। इसे बहुत हल्के हाथों से (बिना ज़ोर लगाए) गर्दन पर लगाना चाहिए। सबसे उत्तम परिणाम के लिए महानारायण तेल या तिल के तेल का प्रयोग करना चाहिए।

बिल्कुल नहीं। सर्वाइकल में भारी वज़न उठाने से कंधों और गर्दन की मांसपेशियों पर अचानक अत्यधिक खिंचाव आता है, जो कमज़ोर नसों और रीढ़ की हड्डी की गद्दी (Disc) को फाड़ सकता है। दर्द पूरी तरह ठीक होने तक भारी वज़न से दूर रहें।

यह एक आम मिथक है। सर्वाइकल में बिना तकिए के सोने से गर्दन का प्राकृतिक कर्व (Curve) बिगड़ सकता है। आपको ऐसा पतला और सही सर्वाइकल पिलो (Cervical Pillow) इस्तेमाल करना चाहिए जो आपकी गर्दन के खाली हिस्से को सपोर्ट दे और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखे।

ये वो सुरक्षित व्यायाम हैं जिनमें गर्दन को हिलाए बिना केवल मांसपेशियों को ताक़त दी जाती है। इसमें आप अपने हाथों से सिर को एक दिशा में धकेलते हैं और सिर से हाथों को विपरीत दिशा में रोकते हैं। इससे बिना नसों को नुकसान पहुँचाए गर्दन मज़बूत होती है।

हाँ, हल्का टहलना (Brisk Walking) पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है। जब ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, तो गर्दन की सूखी हुई नसों तक भी ताज़ा खून और ऑक्सीजन पहुँचती है, जिससे जकड़न और दर्द में प्राकृतिक रूप से आराम मिलता है।

इसे मेडिकल भाषा में क्रेपिटस (Crepitus) कहते हैं। यह इस बात का संकेत है कि आपके जोड़ों के बीच का प्राकृतिक तरल (Synovial fluid) सूख रहा है और वात बढ़ गया है, जिससे हड्डियाँ और लिगामेंट्स आपस में रगड़ खा रहे हैं। इसे खुद से ज़बरदस्ती चटकाना नहीं चाहिए।

सर्वाइकल कॉलर केवल सफर करते समय या तीव्र दर्द के दौरान गर्दन को झटके से बचाने के लिए पहना जाता है। इसे 24 घंटे लगातार पहनने से गर्दन की मांसपेशियाँ काम करना बंद कर देती हैं और हमेशा के लिए कमज़ोर (Muscle atrophy) हो जाती हैं।

हाँ, कई मामलों में ऐसा देखा गया है। जब सर्वाइकल के कारण गर्दन के ऊपरी हिस्से की नसें (जो दिमाग और आँखों की तरफ जाती हैं) बुरी तरह दब जाती हैं, तो आँखों तक ब्लड सप्लाई बाधित होती है। इससे आँखों में धुंधलापन, भारीपन और दर्द महसूस हो सकता है।

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