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Cervical में दबी नस से हाथ कमज़ोर हो रहा है — Surgery कब टाली जा सकती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by
  • category-iconPublished on 09 May, 2026
  • category-iconUpdated on 09 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5048

गर्दन में हल्की सी जकड़न से शुरू हुआ दर्द जब धीरे-धीरे आपके कंधों से होता हुआ बाँह और उँगलियों तक पहुँचने लगे, तो यह एक गंभीर चेतावनी है। शुरुआत में आप इसे गलत तकिए पर सोने या लगातार लैपटॉप पर काम करने की थकावट मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन एक दिन अचानक जब आपके हाथ से चाय का कप छूटकर गिर जाता है, या उँगलियों में लगातार सुई चुभने जैसा करंट Tingling दौड़ने लगता है, तब एमआरआई MRI की रिपोर्ट एक डरावना सच सामने लाती है  "सर्वाइकल में नस दब गई है Cervical Radiculopathy और शायद सर्जरी करनी पड़े।"

सर्जरी का नाम सुनते ही घबराहट होना स्वाभाविक है। लेकिन क्या सच में गर्दन को चीरकर डिस्क को हटाना या उसमें प्लेट्स डालना ही एकमात्र विकल्प है? बिल्कुल नहीं। यह दबी हुई नस अचानक नहीं कुचली गई है; यह आपके शरीर की उन नाज़ुक नसों की चीख है जो लगातार गलत पोश्चर, रूखेपन और वात दोष के बढ़ने से कुचली जा रही हैं। जब उँगलियों की यह सुन्नता और हाथ की कमज़ोरी रोज़ की आदत बन जाए, तो समझ लीजिए कि सर्वाइकल का दर्द अब आपकी नसों को स्थायी रूप से डैमेज करने की कगार पर है। आइए समझते हैं कि कब सर्जरी को सुरक्षित रूप से टाला जा सकता है और कैसे आयुर्वेद आपकी इन दबी हुई नसों को दोबारा नया जीवन दे सकता है।

सर्वाइकल में दबी नस Cervical Radiculopathy शरीर में क्या संकेत देती है?

हमारी गर्दन Cervical Spine में सात छोटी हड्डियाँ C1 से C7 होती हैं, जिनके बीच में कुशन Disc होते हैं। गलत पोश्चर और अत्यधिक दबाव से ये कुशन अपनी जगह से खिसक जाते हैं Bulging Disc या घिस जाते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी से हाथों की तरफ जाने वाली नसें बुरी तरह दब जाती हैं।

  • C5-C6 नर्व रूट का दबना: जब इस हिस्से की नस दबती है, तो आपके बाइसेप्स और कलाई में कमज़ोरी आ जाती है। अंगूठे और तर्जनी Index finger में भयंकर सुन्नपन रहता है।
  • C6-C7 नर्व रूट का दबना: यह सर्वाइकल कंप्रेशन का सबसे आम प्रकार है। इसमें दर्द गर्दन से शुरू होकर ट्राइसेप्स Triceps से होता हुआ आपकी बीच की उँगली Middle finger तक एक तेज़ करंट की तरह जाता है।
  • नसों का रूखापन और कमज़ोरी: लगातार दबाव के कारण नसों में ब्लड सर्कुलेशन लगभग रुक जाता है। खून न पहुँचने से नसें अंदर से सूखने लगती हैं, और आपके हाथ की ताक़त Grip strength खत्म होने लगती है।

सर्वाइकल नसों का डैमेज और दर्द किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का काम करने का तरीका और उसके शरीर की प्रकृति अलग होती हैं। गर्दन की नसों पर पड़ने वाला यह दबाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान सर्वाइकल डैमेज: इस स्थिति में कंधों और हाथों में भयंकर रूखापन और सुन्नपन आ जाता है। उँगलियों में ऐसा लगता है जैसे हज़ारों चींटियाँ चल रही हों। ठंडे एसी AC वाले कमरों में काम करने से यह वात दोष Vata dosha और अधिक भड़क जाता है और गर्दन मोड़ने पर कड़कने की आवाज़ Crepitus आती है।
  • पित्त-प्रधान सर्वाइकल डैमेज: इसमें नसों के दबने के साथ-साथ कंधों और बाहों में आग लगने जैसी जलन Burning sensation होती है। ऐसा लगता है जैसे नसों में एसिड बह रहा हो।
  • कफ-प्रधान सर्वाइकल डैमेज: लगातार बैठे रहने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है। इसमें गर्दन और कंधों के हिस्से में भारी सूजन और जकड़न Stiffness आ जाती है। हाथों में भारीपन महसूस होता है और ऐसा लगता है जैसे किसी ने हाथों पर भारी वज़न बाँध दिया हो।

क्या आपके हाथों में भी सर्वाइकल नर्व डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

नर्व डैमेज रातों-रात नहीं होता। यह बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाती है, जिसे हम अक्सर काम की थकावट मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • हाथ से अचानक चीज़ों का गिरना: चाय का कप पकड़ते समय, लिखते समय या फोन हाथ में लेते समय अचानक उँगलियों की ग्रिप Grip कमज़ोर हो जाना और चीज़ों का हाथ से छूट जाना।
  • आधी रात को सुन्न हाथों के साथ उठना: रात को सोते समय अचानक कंधे या उँगलियों में भयंकर सुन्नपन महसूस होना, जिसके कारण नींद टूट जाए और हाथों को झटकना पड़े।
  • गर्दन से उँगलियों तक करंट जैसा दर्द Shooting Pain: गर्दन को थोड़ा सा भी पीछे की तरफ मोड़ने पर, गर्दन के पिछले हिस्से से शुरू होकर कंधों और कोहनी से गुज़रता हुआ उँगलियों तक बिजली Current की तरह एक तेज़ दर्द का दौड़ना।
  • मांसपेशियों का फड़कना Fasciculations: बाँह या उँगलियों की मांसपेशियों का अपने आप फड़कना, जो नसों की कमज़ोरी का एक बहुत बड़ा संकेत है।

सर्वाइकल के दर्द को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

सर्जरी के डर और तुरंत राहत पाने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो नसों को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • पेनकिलर्स और स्टेरॉयड्स का रोज़ाना सेवन: दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना दर्द निवारक गोलियाँ Pregabalin, Gabapentin खाना आपकी किडनी और पेट की परत को डैमेज कर देता है। ये गोलियाँ नसों को सुला देती हैं, लेकिन जिस जगह नस दबी है Compression, वहां कोई आराम नहीं मिलता।
  • लगातार सर्वाइकल कॉलर Neck Collar पहने रहना: दर्द से बचने के लिए दिन-भर कॉलर पहने रहने से गर्दन की मांसपेशियाँ पूरी तरह कमज़ोर Muscle atrophy हो जाती हैं और रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक कर्व बिगड़ जाता है।
  • गलत फिजियोथेरेपी या झटके से मालिश: बिना सही डायग्नोसिस के गर्दन को झटके से चटकाने Chiropractic manipulation या किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति से मालिश कराने पर दबी हुई नस पूरी तरह फट या डैमेज हो सकती है।
  • सर्जरी की जल्दबाज़ी: जब तक नस पूरी तरह डैमेज होकर हाथ लकवाग्रस्त न हो जाए, तब तक सर्वाइकल की 90% समस्याओं को बिना सर्जरी Non-surgical methods के ठीक किया जा सकता है।

आयुर्वेद सर्वाइकल नसों के दबने Nerve Compression को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस Cervical Spondylosis या नर्व कंप्रेशन कहता है, आयुर्वेद उसे मन्यास्तंभ, विश्वाची और मज्जा धातु क्षय के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • मज्जा धातु Nervous Tissue का सूखना: गलत पोश्चर और वात बढ़ाने वाले आहार से मज्जा धातु सूख जाती है। मज्जा के सूखने से नसों के ऊपर की प्राकृतिक कोटिंग Myelin sheath नष्ट हो जाती है।
  • संधिगत वात और स्रोतस में रुकावट: आयुर्वेद में गर्दन ग्रीवा वात का एक मुख्य स्थान है। जब डिस्क घिसती है, तो वहां वात रूखापन बढ़ जाता है और नसों के चैनल Srotas ब्लॉक हो जाते हैं, जिससे हाथों में सुन्नपन आता है।
  • जठराग्नि की अनदेखी: जब घंटों बैठकर काम करने से पाचन बिगड़ता है, तो बना हुआ आम Toxins रक्त के साथ मिलकर नसों के जोड़ों में चिपक जाता है और सूजन Inflammation पैदा करता है।

नसों की खुश्की मिटाने और वात शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपकी नसों को सुखा भी सकता है और उन्हें दोबारा हरा-भरा भी कर सकता है। सर्वाइकल नर्व डैमेज से बचने और नसों को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - नसों को चिकनाई देने वाले और वात शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन और गैस बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, रागी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, रूखे बिस्कुट।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी नसों के लिए अमृत, तिल का तेल, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, बहुत अधिक मक्खन, डालडा।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद सभी अच्छी तरह पकी हुई। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, भारी कटहल, बैंगन।
फल और मेवे Fruits & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, पपीता, सेब। डिब्बाबंद और बिना मौसम के फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ Beverages हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध रात में, ताज़ा मट्ठा, जीरा पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन कॉफी नसों को सुखाती है, कोल्ड ड्रिंक्स।

सर्वाइकल की नसों को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के नसों के दर्द को खींच लेते हैं और सर्वाइकल की सूखी हुई डिस्क को दोबारा हील कर देते हैं:

  • अश्वगंधा Ashwagandha: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने के लिए अश्वगंधा एक अद्भुत रसायन है। यह सूखी हुई सर्वाइकल नसों में भारी ताकत भर देता है और हाथों की ग्रिप वापस लाता है।
  • गुग्गुल Guggulu: यह आयुर्वेद में हड्डियों और नसों की सूजन को जड़ से खत्म करने की सबसे बेहतरीन औषधि मानी जाती है। यह दबी हुई नस के आस-पास की सूजन को पिघला देती है।
  • रास्ना Rasna: यह वात दोष को खत्म करने वाली सर्वोच्च जड़ी-बूटी है। रास्ना का उपयोग वात रोगों, विशेषकर सर्वाइकल और नर्व दर्द में जादुई असर दिखाता है।
  • शल्लकी Shallaki: यह जड़ी-बूटी आयुर्वेद में जोड़ों की समस्याओं, डिस्क के घिसने और गर्दन की जकड़न को तेज़ी से घटाने के लिए अचूक मानी जाती है।
  • गिलोय Giloy: शरीर के अंदरूनी आम और सर्वाइकल सूजन Inflammation को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर का काम करती है।

सर्वाइकल की नसों को खोलने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और जकड़न बहुत गहराई तक सर्वाइकल की नसों में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ सर्वाइकल को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • ग्रीवा बस्ती Greeva Basti: गर्दन के पीछे गर्म औषधीय तेल जैसे क्षीरबला तेल रोककर की जाने वाली यह ग्रीवा बस्ती सूखी हुई सर्वाइकल डिस्क को भारी चिकनाई देती है, जिससे उँगलियों में जाने वाला करंट जैसा दर्द तुरंत रुक जाता है।
  • पत्र पिंड स्वेद Patra Pinda Sweda: ताज़ा औषधीय पत्तों को तेल में भूनकर एक पोटली बनाई जाती है, जिससे गर्दन और कंधों की सिकाई की जाती है। यह दबी हुई नसों को खोलता है और भारी सूजन खींच लेता है।
  • अभ्यंग Abhyanga: गुनगुने वात-शामक तेलों जैसे महानारायण तेल से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है और हाथों का ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • नस्य Nasya: नाक के ज़रिए औषधीय तेल जैसे अणु तेल डालने की यह नस्य थेरेपी सीधे दिमाग और गर्दन की ब्लॉक हुई नसों को खोलती है और सिर व कंधों का भारीपन खींच लेती है।

सर्वाइकल की दबी नस के पूरी तरह रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

बरसों से स्क्रीन और गलत पोश्चर के कारण सूखी हुई नसों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। गर्दन की भारी जकड़न व दर्द में भारी कमी आएगी। करंट की तरह हाथों में जाने वाला दर्द कम हो जाएगा और रात की नींद बेहतर होगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से सर्वाइकल डिस्क का रूखापन खत्म होने लगेगा। उँगलियों की झुनझुनी Tingling और सुन्नपन लगभग खत्म हो जाएगा और हाथों की ग्रिप Grip वापस मज़बूत होने लगेगी।
  • 5-6 महीने: मज्जा धातु और अस्थि धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी और आपका नर्वस सिस्टम रीबूट हो जाएगा। आप बिना किसी पेनकिलर और सर्जरी के एक सामान्य, ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

सर्वाइकल नसों के डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic/Surgical care) आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करना (Pregabalin) या स्टेरॉयड इंजेक्शन। अंततः सर्जरी (Discectomy)। वात को शांत करना, डिस्क को चिकनाई देना और दिमाग व नसों को प्राकृतिक रूप से पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल गर्दन की हड्डियों (Mechanical issue) का खराब होना मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात, मज्जा और अस्थि धातु के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल पेनकिलर के साथ फिजियोथेरेपी की सलाह, लेकिन जठराग्नि या मन की शांति पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, कब्ज़ दूर करना और औषधीय तेलों की मालिश को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर दर्द वापस आ जाता है और सर्जरी के बाद भी आस-पास की डिस्क खराब होने का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और नर्वस सिस्टम खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान बिना सर्जरी के स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद नसों की इस खुश्की और सर्वाइकल कंप्रेशन को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर Red Flags और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • हाथों की ग्रिप का पूरी तरह खत्म हो जाना: अगर आप अपने हाथों से एक हल्का सा गिलास या पेन पकड़ने में भी पूरी तरह असमर्थ महसूस करने लगें और हाथ लकवाग्रस्त Paralyzed लगे।
  • मांसपेशियों का सूखना Muscle Atrophy: अगर आपको ऐसा लगे कि आपके अंगूठे के नीचे की गद्देदार मांसपेशी या कंधे/बाँह की मांसपेशियाँ सूखकर बिल्कुल पतली Wasting होने लगी हैं।
  • यूरिन या मल पर नियंत्रण खोना Bowel/Bladder Incontinence: यह रीढ़ की हड्डी में गंभीर नर्व कंप्रेशन Myelopathy का संकेत है जिसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की तरह ट्रीट करना चाहिए।
  • असंतुलन Loss of Balance: चलते समय पैरों में लड़खड़ाहट होना और शरीर का संतुलन न बन पाना।

निष्कर्ष

लैपटॉप और मोबाइल पर लगातार उँगलियाँ चलाना और गर्दन झुकाए रखना आज हमारी मजबूरी बन चुका है, लेकिन सर्वाइकल में होने वाला वह भयंकर दर्द और हाथों की कमज़ोरी आपकी नियति नहीं है। जब आपकी सर्वाइकल की नसें भारी दबाव में दम तोड़ रही होती हैं, तो सर्जरी का खौफनाक विचार दिमाग में आना स्वाभाविक है। लेकिन याद रखिए, सर्जरी पहला विकल्प नहीं है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स और नसों को सुन्न करने वाली कृत्रिम गोलियों से दबाते हैं, तो आप अपनी नसों को हील करने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से अपाहिज कर रहे होते हैं।

इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने पोश्चर को सुधारें, अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी और अखरोट शामिल करें। अश्वगंधा, रास्ना और शल्लकी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और ग्रीवा बस्ती व पत्र पिंड स्वेद से अपनी सूखी हुई डिस्क को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। दबी हुई नस के कारण अपने हाथों को कमज़ोर न पड़ने दें, और सर्जरी को टालकर अपने शरीर को प्राकृतिक रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

गर्दन की सामान्य जकड़न कुछ दिन आराम करने या बाम लगाने से ठीक हो जाती है। लेकिन सर्वाइकल में नस दबने पर दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता; यह बिजली के झटके की तरह कंधे से होता हुआ आपकी बाँह और उँगलियों तक जाता है, साथ ही सुन्नपन और कमज़ोरी भी लाता है।

बिल्कुल नहीं। 90% से ज़्यादा मामलों में सर्वाइकल नर्व कंप्रेशन को आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, ग्रीवा बस्ती जैसी पंचकर्म थेरेपी और सही पोश्चर (Non-surgical methods) के माध्यम से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। सर्जरी केवल तब ज़रूरी होती है जब हाथ पूरी तरह लकवाग्रस्त हो जाए।

सर्वाइकल के मरीज़ों को बहुत ऊँचा या कड़क तकिया नहीं लगाना चाहिए। गर्दन के प्राकृतिक कर्व (Curve) को सपोर्ट करने वाला एक पतला या खास सर्वाइकल पिलो (Cervical contour pillow) इस्तेमाल करें, जो सोते समय आपकी गर्दन को सीधा रखे।

नहीं! यह बहुत ही खतरनाक आदत है। अगर आपकी नस पहले से ही दबी हुई है, तो गर्दन को झटके से चटकाने से नस पूरी तरह डैमेज हो सकती है और दर्द कई गुना भड़क सकता है।

बिल्कुल। कैफीन (Caffeine) शरीर में वात दोष (रूखापन) बढ़ाता है। यह पहले से सूख चुकी सर्वाइकल डिस्क को और ज़्यादा रूखा कर देता है, जिससे सुन्नपन और दर्द की समस्या तेज़ी से बढ़ जाती है।

लैपटॉप की स्क्रीन बिल्कुल आपकी आँखों के सामने (Eye level) होनी चाहिए ताकि आपको गर्दन न झुकानी पड़े। कुर्सियों में पीठ को सीधा रखें और हाथों को सपोर्ट देने के लिए आर्मरेस्ट का इस्तेमाल करें।

हाँ। एसी की ठंडी हवा शरीर के वात दोष को तुरंत भड़का देती है। यह रक्त संचार को धीमा कर देती है और गर्दन की मांसपेशियों को सिकोड़ देती है, जिससे सर्वाइकल का दर्द बहुत तेज़ी से ट्रिगर हो जाता है।

ग्रीवा बस्ती में गर्दन पर आटे का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल रखा जाता है। यह तेल वात को शांत करता है, सूखी हुई डिस्क को चिकनाई देकर मुलायम बनाता है, जिससे डिस्क अपनी जगह पर वापस आती है और दबी हुई नस खुल जाती है।

नहीं। सुन्नपन और झुनझुनी वात (रूखेपन) के कारण होती है। गर्दन या हाथों पर बर्फ लगाने से नसें और ज़्यादा सिकुड़ जाएंगी और दर्द बढ़ जाएगा। हमेशा वात-शामक गर्म औषधीय तेल से मालिश करने के बाद हल्की गर्म सिकाई (Steam/Heat) ही करनी चाहिए।

अश्वगंधा पेनकिलर की तरह दर्द को सुन्न नहीं करता। यह एक बल्य और रसायन है, जो नर्वस सिस्टम को गहराई से पोषण देता है, नसों की कमज़ोरी दूर करता है और प्राकृतिक रूप से नसों को मज़बूत बनाकर हाथों की ग्रिप वापस लाता है।

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