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AC और गर्मी से आँखें सूख रही — Dry Eye Crisis का मई

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मई की झुलसाने वाली गर्मी और ऑफिस के ठंडे एसी AC के बीच, क्या आपकी आँखें लगातार एक अनकही चुभन सह रही हैं? सुबह उठते ही पलकों का भारी लगना, दिन भर लैपटॉप स्क्रीन घूरते हुए आँखों में रेत चुभने जैसा अहसास होना और शाम तक आँखों का लाल होकर जलने लगना यह सिर्फ नींद की कमी या साधारण थकावट नहीं है।

हम अक्सर इस जलन को ठंडे पानी के छींटे मारकर या बाज़ार से लाई गई कोई आई-ड्रॉप डालकर कुछ घंटों के लिए शांत कर देते हैं। लेकिन यह आपके शरीर का वह गंभीर अलार्म है जो बता रहा है कि आपकी आँखों की प्राकृतिक नमी Tear Film तेज़ी से सूख रही है। इस चिलचिलाती गर्मी और कृत्रिम ठंडी हवा के दोहरे प्रहार ने हमारी आँखों को ड्राई आई क्राइसिस Dry Eye Crisis की चपेट में ले लिया है। अगर समय रहते इस खुश्की को अंदर से खत्म नहीं किया गया, तो यह कॉर्निया Cornea को ऐसा स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है जो आपकी दृष्टि को हमेशा के लिए धुंधला कर सकता है।

आँखों का यह सूखापन और चुभन शरीर में क्या संकेत देती है?

गर्मी की गर्म हवाएँ लू और एसी AC का लगातार इस्तेमाल हमारी आँखों पर एक ऐसा विपरीत प्रभाव डालता है, जो आँखों की उस नाज़ुक परत को सोख लेता है जो उन्हें सुरक्षित रखती है।

  • एसी AC की रूखी हवा और नमी का वाष्पीकरण: एयर कंडीशनर कमरे से न सिर्फ गर्मी खींचता है, बल्कि हवा की पूरी नमी Humidity भी सोख लेता है। इस रूखी हवा में घंटों बैठने से आँखों के आँसू Tears बहुत तेज़ी से वाष्पीकृत Evaporate होने लगते हैं।
  • स्क्रीन टाइम और पलकों का कम झपकना: लैपटॉप और मोबाइल घूरते समय हमारी पलकें झपकने की दर Blink rate 66% तक गिर जाती है। पलकें झपकने से ही आँखों में नमी फैलती है; इसके रुकने से आँखें बंजर ज़मीन की तरह सूखने लगती हैं।
  • डिहाइड्रेशन Dehydration और गर्मी की लू: मई की झुलसाने वाली गर्मी शरीर के अंदर के पानी को तेज़ी से सुखाती है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो अश्रु ग्रंथियां Tear glands पर्याप्त आँसू नहीं बना पातीं।
  • मीबोमियन ग्लैंड डिस्फंक्शन MGD: आँखों की पलकों के किनारे छोटी ग्रंथियां होती हैं जो तेल बनाती हैं ताकि आँसू उड़ें नहीं। लगातार गलत लाइफस्टाइल और डिजिटल स्ट्रेस से ये ग्रंथियां ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे आँखों में भारी चुभन होती है।

ड्राई आई Dry Eye और आँखों का डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

आयुर्वेद के अनुसार, हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है। वातावरण की खुश्की आँखों पर जो असर डालती है, उसे शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान ड्राई आई: इस स्थिति में आँखों में भयंकर रूखापन आ जाता है। ऐसा लगता है जैसे आँखों में धूल या रेत Gritty feeling पड़ गई हो। ठंडे एसी AC वाले कमरों में घंटों बैठने से यह वात दोष और अधिक भड़क जाता है, जिससे बार-बार पलकें झपकाने की मजबूरी महसूस होती है।
  • पित्त-प्रधान ड्राई आई: चिलचिलाती गर्मी और धूप के कारण यह स्थिति पैदा होती है। इसमें आँखों में आग लगने जैसी जलन Burning sensation होती है। आँखें हमेशा लाल Bloodshot रहती हैं और तेज़ रोशनी या स्क्रीन देखने पर आँखों में तेज़ दर्द होता है Photophobia।
  • कफ-प्रधान ड्राई आई: इस स्थिति में आँखों से चिपचिपा कीचड़ Stringy discharge ज़्यादा निकलता है। पलकें भारी महसूस होती हैं, और सुबह सोकर उठने पर अक्सर पलकें आपस में चिपक जाती हैं। आँखों के आसपास भारीपन और हल्की सूजन रहती है।

क्या आपकी आँखों में भी ड्राई आई क्राइसिस के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

आँखों की नमी रातों-रात खत्म नहीं होती। यह समस्या बहुत पहले से अलार्म बजाती है, जिसे हम अक्सर सामान्य थकावट मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • स्क्रीन देखते ही आँखों से पानी आना: यह सबसे भ्रामक लक्षण है। आँखें जब बहुत ज़्यादा सूख जाती हैं, तो हमारा नर्वस सिस्टम खतरे का सिग्नल भेजता है, जिससे बचाव के लिए अचानक ढेर सारे पर बिना तेल वाले आँसू बहने लगते हैं।
  • रोशनी से चुभन Light Sensitivity: घर से बाहर निकलते ही सूरज की रोशनी या ऑफिस की तेज़ लाइट का आँखों में तीखे तीर की तरह चुभना।
  • धुंधलापन जो पलक झपकाने पर ठीक हो जाए: स्क्रीन पढ़ते-पढ़ते अचानक अक्षर धुंधले हो जाना, और ज़ोर से पलक झपकाने या आँखें मलने के बाद ही वापस साफ दिखाई देना।
  • कॉन्टेक्ट लेंस पहनने में असहनीय दर्द: जो लेंस पहले आप आसानी से पहन लेते थे, अब उन्हें लगाते ही आँखों में भयंकर जलन और चुभन महसूस होना।

इस खुश्की में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

आँखों की इस चुभन से तुरंत राहत पाने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो आँखों को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • केमिकल वाली आई-ड्रॉप्स Eye Drops का ओवरडोज़: बाज़ार में मिलने वाली ज़्यादातर रेडनेस-रिलीवर या ल्यूब्रिकेटिंग ड्रॉप्स में प्रिजर्वेटिव्स Preservatives होते हैं। इनका रोज़ाना कई बार इस्तेमाल आँखों की ऊपरी परत Corneal epithelium को ज़हरीला कर देता है।
  • आँखों को ज़ोर-ज़ोर से मलना Rubbing Eyes: सूखी आँखों को मलने से कॉर्निया पर स्क्रैच Corneal Abrasions पड़ जाते हैं, जो आगे चलकर अल्सर या गंभीर इन्फेक्शन का रूप ले सकते हैं।
  • एसी के वेंट के ठीक सामने बैठना: ठंडी हवा खाने के लिए एसी या कूलर के पंखे के ठीक सामने चेहरा करके बैठना, जो बचे-खुचे आँसुओं को भी सेकंडों में सुखा देता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर आँखों की इस क्रोनिक खुश्की Chronic Dry Eye को ठीक न किया जाए, तो यह कॉर्नियल अल्सर, दृष्टि में स्थायी धुंधलापन और शुष्काक्षिपाक जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले लेती है।

आयुर्वेद ड्राई आई क्राइसिस और आँखों के सूखने को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे ड्राई आई सिंड्रोम Dry Eye Syndrome कहता है, आयुर्वेद उसे शुष्काक्षिपाक और वात-पित्त दोष के गंभीर प्रकोप के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • आलोचक पित्त और तर्पक कफ का असंतुलन: हमारी आँखों की दृष्टि आलोचक पित्त द्वारा नियंत्रित होती है, और उन्हें नमी देने का काम तर्पक कफ करता है। एसी की खुश्की और स्क्रीन की रेडिएशन से आलोचक पित्त भड़क जाता है और तर्पक कफ सूख जाता है, जिससे आँखें जलने लगती हैं।
  • वात दोष का प्रकोप रूखापन: आयुर्वेद में आँखें मज्जा धातु और रक्त से गहराई से जुड़ी हैं। गलत लाइफस्टाइल और रुक्ष Dry वातावरण से वहां वात बढ़ जाता है, जो आँसुओं के प्रवाह के चैनल Srotas को ब्लॉक कर देता है।
  • जठराग्नि और आम का प्रभाव: जब कमज़ोर पाचन के कारण शरीर में आम Toxins बनता है, तो यह खून के ज़रिए आँखों की नाज़ुक नसों तक पहुँचकर ब्लॉकेज पैदा करता है, जिससे अश्रु ग्रंथियों Tear glands तक उचित पोषण नहीं पहुँच पाता।

आँखों की खुश्की मिटाने और पित्त शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपकी आँखों के आँसू सुखा भी सकता है और उन्हें दोबारा हरा-भरा भी कर सकता है। ड्राई आई क्राइसिस से बचने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - आँखों को तरावट देने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - गर्मी और रूखापन बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, जौ। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नमकीन, पिज़्ज़ा, अत्यधिक मसालेदार स्नैक्स।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी आँखों के लिए अमृत, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक जंक फूड का तेल।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, गाजर विटामिन A से भरपूर। बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाले, कच्चा लहसुन, अत्यधिक कच्चा प्याज, भारी कटहल।
फल और मेवे Fruits & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, आंवला, अंगूर, पपीता, मीठे सेब, नारियल पानी। बिना मौसम के फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स, बहुत खट्टे या कच्चे फल।
पेय पदार्थ Beverages ताज़ा मट्ठा, धनिया-सौंफ का पानी, आंवला जूस, नारियल पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन कॉफी आँखों की नमी सुखाती है, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब।

आँखों को ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के आँखों की जलन को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी अश्रु ग्रंथियों को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • त्रिफला Triphala: आयुर्वेद में आँखों के लिए त्रिफला को अमृत माना गया है। त्रिफला के पानी से आँखें धोना Triphala Netra Prakshalana और इसका सेवन करना, आँखों की रोशनी बढ़ाता है और गहराई से सफाई करता है।
  • आंवला Amla: विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आंवला आलोचक पित्त को शांत करता है और आँखों की नसों को फौलादी ताक़त व ठंडक देता है।
  • शतावरी Shatavari: यह एक बेहतरीन शीत-वीर्य Cooling जड़ी-बूटी है। यह आँखों में सूखे हुए तर्पक कफ को दोबारा पोषित करती है और नमी वापस लाती है।
  • जीवन्ती Jeevanti: आयुर्वेद में इसे चक्षुष्य आँखों के लिए सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। यह दृष्टि दोषों को दूर करने और आँखों के तनाव को खत्म करने में जादुई असर दिखाती है।
  • गुलाब Rose/Gulab Jal: शुद्ध और प्राकृतिक गुलाब जल बिना केमिकल वाला आँखों की बाहरी गर्मी और रेडनेस को तुरंत शांत करके एक बेहतरीन रिफ्रेशिंग अहसास देता है।

आँखों को खोलने और खुश्की मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब खुश्की बहुत गहराई तक आँखों में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ आँखों को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • नेत्र तर्पण Netra Tarpana: यह ड्राई आई के लिए सबसे अचूक आयुर्वेदिक थेरेपी है। इसमें आँखों के चारों ओर उड़द की दाल का एक घेरा Dam बनाकर उसमें हल्का गर्म औषधीय गाय का घी Jivantyadi Ghrita भरा जाता है। यह घी सीधे आँखों की गहराई तक जाकर रूखेपन को जड़ से खत्म कर देता है।
  • पादाभ्यंग Padabhyanga: आयुर्वेद के अनुसार पैरों के तलवों की नसें सीधे आँखों से जुड़ी होती हैं। सोने से पहले पैरों के तलवों पर गाय के घी या कांसी की कटोरी से मालिश करने से आँखों की गर्मी तुरंत शांत होती है।
  • नस्य Nasya: नाक के ज़रिए औषधीय तेल जैसे अणु तेल डालने की यह नस्य थेरेपी सीधे दिमाग और आँखों की ब्लॉक हुई नसों को खोलती है और सिर का भारीपन खींच लेती है।
  • शिरोधारा Shirodhara: डिजिटल स्ट्रेस और मानसिक तनाव जो कॉर्टिसोल बढ़ाकर आँखों को नुकसान पहुंचाता है को पूरी तरह शांत करने के लिए माथे पर औषधीय तेल की यह धारा एक जादुई ठंडक देती है।

आँखों के पूरी तरह रिपेयर होने और खुश्की खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से स्क्रीन और एसी के कारण सूखी हुई ग्रंथियों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। आँखों की चुभन, लालिमा Redness और रेत जैसा चुभना काफी कम हो जाएगा।
  • 3-4 महीने: रसायन और तर्पण थेरेपी के प्रभाव से आपकी अश्रु ग्रंथियां Tear glands खुद से तेल और पानी नमी बनाने लगेंगी। आँखों का धुंधलापन और रोशनी से होने वाली चुभन लगभग खत्म हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: आलोचक पित्त और तर्पक कफ पूरी तरह संतुलित हो जाएंगे। आप बिना किसी केमिकल आई-ड्रॉप के एक सामान्य, ऊर्जावान और फोकस से भरा जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

ड्राई आई क्राइसिस के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को दबाने के लिए बाहर से कृत्रिम आँसू Artificial Tears या स्टेरॉयड ड्रॉप्स देना। शरीर की अपनी अश्रु ग्रंथियों Tear glands को सक्रिय करना और वात-पित्त को शांत करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल आँखों की एक स्थानीय Local खुश्की की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, शरीर में अत्यधिक गर्मी पित्त और मानसिक तनाव का सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल ड्रॉप्स के साथ-साथ केवल पानी पीने की सलाह दी जाती है, जठराग्नि पर कोई ज़ोर नहीं। पित्त-शामक डाइट, डिजिटल डिटॉक्स, नाभि व तलवों पर घी की मालिश को इलाज का आधार माना जाता है।
लंबा असर ड्रॉप्स छोड़ते ही 2 घंटे में आँखें फिर सूख जाती हैं और व्यक्ति ड्रॉप्स का आदी हो जाता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और आँखों की परत खुद हील होती है, जिससे स्थायी नमी बनी रहती है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद आँखों की इस खुश्की को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपनी आँखों में ये गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • अचानक दृष्टि कम होना Sudden Vision Loss: अगर आपको अचानक से दिखना बिल्कुल कम या धुंधला हो जाए जो पलक झपकाने से भी ठीक न हो।
  • आँखों में असहनीय दर्द: अगर आँखों के भीतर या पीछे एक ऐसा भयंकर दर्द उठे जो बर्दाश्त से बाहर हो।
  • गाढ़ा पीला या हरा कीचड़ आना: यह गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन या कॉर्नियल अल्सर का संकेत हो सकता है।
  • आँखों का लगातार बहुत लाल रहना: सामान्य खुश्की से हटकर अगर आँखें खून की तरह लाल हो जाएं और तेज़ रोशनी बिल्कुल भी बर्दाश्त न हो।

निष्कर्ष

लैपटॉप पर काम करना और एसी AC में रहना आज की गर्मियों में हमारी ज़रूरत बन चुका है, लेकिन आँखों में चुभने वाली वह रेत जैसी खुश्की आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं होनी चाहिए। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका पित्त और वात भड़क चुका है और आपकी नाज़ुक अश्रु ग्रंथियां भारी दबाव में दम तोड़ रही हैं। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना केमिकल वाली आई-ड्रॉप्स से दबाते हैं, तो आप अपनी आँखों को हील करने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से आदी और कमज़ोर कर रहे होते हैं। इस डिजिटल थकावट और ड्राई आई क्राइसिस के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। हर 20 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लें, खूब पानी पिएं और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी और त्रिफला शामिल करें। जीवन्ती और शतावरी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और नेत्र तर्पण थेरेपी से अपनी सूखी हुई आँखों को प्राकृतिक नमी देकर नया जीवन दें। एसी और गैजेट्स के कारण अपनी आँखों की रोशनी को कमज़ोर न पड़ने दें, और जड़ से इलाज के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Դ doctor.

FAQs

साधारण थकावट अच्छी नींद लेने या कुछ देर आँखें बंद रखने से ठीक हो जाती है। लेकिन ड्राई आई सिंड्रोम में आँखों की नमी बनाने वाली परत डैमेज हो जाती है, जिससे सोने के बाद भी सुबह उठते ही आँखों में चुभन, रेत सा महसूस होना और लालिमा बनी रहती है।

बिल्कुल। एसी कमरे की हवा को ठंडा करने के साथ-साथ उसकी सारी नमी सोख लेता है। इस रूखी हवा के लगातार संपर्क में रहने से आँखों के आँसू बहुत तेज़ी से उड़ (Evaporate) जाते हैं, जिससे गंभीर खुश्की पैदा होती है।

नहीं, यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। बार-बार पानी मारने से आँखों में मौजूद प्राकृतिक तेल (Lipid layer) धुल जाता है, जो आँसुओं को उड़ने से रोकता है। इससे आँखें शुरुआत में अच्छी लगती हैं, लेकिन बाद में और ज़्यादा सूख जाती हैं। त्रिफला जल (आई-वॉश कप से) इस्तेमाल करना बेहतर है।

हाँ। सामान्य अवस्था में हम एक मिनट में 15-20 बार पलकें झपकाते हैं, लेकिन स्क्रीन देखते समय यह दर गिरकर 5-7 बार रह जाती है। पलक झपकने से ही आँखों में नमी फैलती है, इसलिए कम झपकने से आँखें सूखने लगती हैं।

ज़्यादातर ओवर-द-काउंटर आई-ड्रॉप्स में प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। अगर आप इन्हें दिन में 4-5 बार लगातार महीनों तक डालते हैं, तो यह केमिकल्स कॉर्निया की परत को ज़हरीला कर सकते हैं और ड्राई आई को स्थायी बना सकते हैं।

नेत्र तर्पण में आँखों के ऊपर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें औषधीय गाय का घी भरा जाता है। यह घी आँखों की गहराई तक जाता है, पलकों की ब्लॉक हुई ग्रंथियों (Meibomian glands) को खोलता है और सूखी नसों को प्राकृतिक रूप से चिकनाई देकर स्थायी आराम देता है।

शुद्ध और प्राकृतिक गुलाब जल आँखों की गर्मी और वात-पित्त को शांत करता है। लेकिन बाज़ार में मिलने वाले केमिकल-युक्त या परफ्यूम वाले गुलाब जल को आँखों में कभी नहीं डालना चाहिए, इससे जलन बढ़ सकती है।

हाँ। आयुर्वेद के अनुसार, पैरों के तलवों में दो विशेष नसें होती हैं जो सीधे आँखों से जुड़ती हैं। रात को सोते समय गाय के घी से तलवों की मालिश करने से शरीर की बढ़ी हुई गर्मी (पित्त) शांत होती है और आँखों को गहरी ठंडक व नमी मिलती है।

मई-जून की गर्म हवा (लू) और सूरज की तेज़ यूवी (UV) किरणें आँखों की नमी को तुरंत सोख लेती हैं। इसलिए बाहर निकलते समय हमेशा 100% यूवी प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस (Sunglasses) पहनना बहुत ज़रूरी है।

ड्राई आई के मरीजों को ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन-A से भरपूर चीज़ें खानी चाहिए। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, अपने भोजन में शुद्ध गाय का घी, रात भर भीगे हुए बादाम, आंवला, लौकी और पर्याप्त मात्रा में पानी या नारियल पानी ज़रूर शामिल करें।

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